निम्नलिखित में से किसमें एक जंतु के साथ-साथ एक पादप की भी विशेषताएँ हैं?
- (a)फर्न
- (b)मॉस
- (c)केंचुआ
- (d)यूग्लीना
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) यूग्लीना। यूग्लीना एककोशिकीय, स्वच्छ जल में मिलने वाला सूक्ष्म जीव है, और वही अकेला विकल्प है जिसमें दोनों ओर के लक्षण एक साथ मिलते हैं।
पादप जैसा क्या है — इसकी कोशिका में हरितलवक होते हैं, उनमें क्लोरोफिल 'a' तथा 'b' उपस्थित रहते हैं, और प्रकाश मिलने पर यह प्रकाश-संश्लेषण करके अपना भोजन स्वयं बना लेता है, यानी स्वपोषी है।
जंतु जैसा क्या है — इसमें कोशिका भित्ति नहीं होती; उसके स्थान पर प्रोटीन की लचीली परत होती है जिसे पेलिकल कहते हैं, और इसी लचीलेपन के कारण यूग्लीना अपना आकार बदल सकता है। यह कशाभ (flagellum) की सहायता से तैरकर सक्रिय गति करता है, प्रकाश की दिशा पहचानने के लिए इसमें एक नेत्रबिंदु (स्टिग्मा) होता है, और अँधेरे में, जहाँ प्रकाश-संश्लेषण संभव नहीं, यह बाहर से बना-बनाया कार्बनिक भोजन ग्रहण करके परपोषी की तरह जीवित रह लेता है। पोषण की इस दोहरी क्षमता को मिक्सोट्रॉफी कहते हैं।
यही दोहरापन कारण है कि वर्गीकरण में यूग्लीना को न पादप जगत में रखा जा सका, न जंतु जगत में; व्हिटेकर के पाँच जगत वर्गीकरण में इसे प्रोटिस्टा जगत में रखा गया है, जो ठीक ऐसे ही एककोशिकीय यूकैरियोटी जीवों के लिए बनाया गया था।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)फर्न — फर्न टेरिडोफाइट है — पूर्णतः पादप, और पादप जगत का ऐसा सदस्य जिसमें जल तथा भोजन के संवहन के लिए जाइलम और फ्लोएम, यानी विकसित संवहन ऊतक होते हैं। इसकी कोशिकाओं में सेलुलोज़ की दृढ़ कोशिका भित्ति होती है, यह स्थिर रहता है और बीजाणुओं से प्रजनन करता है। इसमें जंतुओं वाला कोई लक्षण — न गमन-अंग, न कोशिका भित्ति का अभाव, न परपोषी पोषण — नहीं मिलता।
- (b)मॉस — मॉस ब्रायोफाइट है, और उसे प्रायः 'पादप जगत का उभयचर' कहा जाता है — पर ध्यान दीजिए, वह उभयचरपन जल और स्थल के बीच का है, जंतु और पादप के बीच का नहीं। मॉस को निषेचन के लिए जल चाहिए, इसलिए वह नम स्थानों तक सीमित रहता है, किन्तु है वह पूरी तरह पादप ही: कोशिका भित्ति युक्त, स्थिर और स्वपोषी। परीक्षा में यही विकल्प सबसे भ्रामक होता है, क्योंकि 'दोनों के लक्षण' सुनते ही उभयचर शब्द याद आ जाता है।
- (c)केंचुआ — केंचुआ ऐनेलिडा संघ का जंतु है — बहुकोशिकीय, खंडित शरीर वाला, पेशियों से गति करने वाला और पूर्णतः परपोषी। इसमें हरितलवक अथवा क्लोरोफिल नहीं होता, इसलिए यह प्रकाश-संश्लेषण नहीं कर सकता और अपना भोजन स्वयं बनाने का प्रश्न ही नहीं उठता। मिट्टी में रहकर उसे उपजाऊ बनाने की इसकी भूमिका महत्त्वपूर्ण है, पर वह इसे पादप-सदृश नहीं बनाती।
अवधारणा
कुछ जीव वर्गीकरण की सीमा-रेखा पर खड़े होते हैं, और यूग्लीना उनका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। पादप की पहचान सामान्यतः तीन बातों से होती है — कोशिका भित्ति, हरितलवक और स्थिरता; जंतु की पहचान — कोशिका भित्ति का अभाव, गमन और परपोषी पोषण। यूग्लीना में हरितलवक तो हैं, पर कोशिका भित्ति नहीं; वह प्रकाश में स्वपोषी है, पर अँधेरे में परपोषी; और वह कशाभ से तैरता है। इसी कारण आर. एच. व्हिटेकर के पाँच जगत वर्गीकरण (1969) में एककोशिकीय यूकैरियोटी जीवों के लिए एक अलग जगत — प्रोटिस्टा — रखा गया, जिसमें यूग्लीना, अमीबा, पैरामीशियम और डायटम आते हैं।
यह प्रश्न जीव विज्ञान के उस भाग से है जो हर सामान्य अध्ययन परीक्षा में दोहराया जाता है — जीवों का वर्गीकरण और उसके अपवाद। पूछने का ढंग यही रहता है: चार नाम दिए जाते हैं, तीन स्पष्ट रूप से एक ओर के होते हैं और एक सीमा-रेखा पर। यहाँ फर्न और मॉस पादप हैं, केंचुआ जंतु है, और यूग्लीना दोनों के बीच। ऐसे प्रश्न में नाम रटने से नहीं, हर समूह के दो-तीन निर्णायक लक्षण याद रखने से उत्तर निकलता है।
मुख्य तथ्य
- यूग्लीना एककोशिकीय यूकैरियोटी जीव है, जो सामान्यतः स्वच्छ जल में मिलता है।
- इसमें हरितलवक होते हैं और यह प्रकाश-संश्लेषण कर सकता है — यह इसका पादप-सदृश लक्षण है।
- इसमें कोशिका भित्ति नहीं होती; उसके स्थान पर प्रोटीन की लचीली पेलिकल होती है।
- यह कशाभ की सहायता से गति करता है और इसमें प्रकाश पहचानने वाला नेत्रबिंदु (स्टिग्मा) होता है।
- अँधेरे में यह बाहर से कार्बनिक भोजन लेकर परपोषी की तरह जीवित रहता है; इस दोहरे पोषण को मिक्सोट्रॉफी कहते हैं।
- व्हिटेकर के पाँच जगत वर्गीकरण में यूग्लीना प्रोटिस्टा जगत में रखा जाता है।
- फर्न टेरिडोफाइट है और मॉस ब्रायोफाइट — दोनों पूर्णतः पादप जगत के सदस्य हैं।
- मॉस को 'पादप जगत का उभयचर' कहा जाता है, पर वह जल-स्थल के अर्थ में है, जंतु-पादप के अर्थ में नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'दोनों के लक्षण' पढ़कर मॉस चुन लेना, क्योंकि उसे उभयचर कहा जाता है — वह उभयचरपन जल और स्थल के बीच का है।
- यह मान लेना कि हरितलवक होने का अर्थ पादप होना ही है; यूग्लीना इसका अपवाद है।
- यूग्लीना को शैवाल मान लेना; वह प्रोटिस्टा जगत में रखा जाता है।
- पेलिकल को कोशिका भित्ति समझ लेना; पेलिकल प्रोटीन की लचीली परत है, सेलुलोज़ की दृढ़ भित्ति नहीं।
- केंचुए की मृदा-उपजाऊपन वाली भूमिका को पादप-सदृश लक्षण मान लेना।
इस विषय के प्रश्न दो दिशाओं से आते हैं। एक, वर्गीकरण की ओर से — 'यूग्लीना किस जगत में आता है', 'प्रोटिस्टा जगत में निम्नलिखित में से कौन है'। दूसरा, इसी प्रश्न की तरह लक्षणों की ओर से — 'किसमें पादप और जंतु दोनों के लक्षण हैं'। कभी-कभी उलटकर यह भी पूछा जाता है कि यूग्लीना का कौन-सा लक्षण उसे जंतु-सदृश बनाता है, जिसका उत्तर कोशिका भित्ति का अभाव तथा कशाभ से गति है। तैयारी का सबसे सुरक्षित तरीक़ा यह है कि पादप और जंतु के तीन-तीन निर्णायक लक्षण याद रखे जाएँ और फिर देखा जाए कि दिया गया जीव किन-किन पर खरा उतरता है।
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EPFO EO/AO 2020 — किसे 'पादप जगत का उभयचर' नहीं कहा जा सकता; उसी 'उभयचर' शब्द की सही सीमा समझाने वाला प्रश्न।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
व्हिटेकर के पाँच जगत वर्गीकरण में यूग्लीना को किस जगत में रखा जाता है?
- (a)मोनेरा
- (b)प्रोटिस्टा
- (c)प्लांटी
- (d)एनिमेलिया
उत्तर(b) प्रोटिस्टा
- practice — not a real PYQ
यूग्लीना का निम्नलिखित में से कौन-सा लक्षण उसे जंतु-सदृश बनाता है?
- (a)हरितलवक की उपस्थिति
- (b)प्रकाश-संश्लेषण की क्षमता
- (c)कोशिका भित्ति का अभाव तथा कशाभ से गति
- (d)सेलुलोज़ की दृढ़ कोशिका भित्ति
उत्तर(c) कोशिका भित्ति का अभाव तथा कशाभ से गति