भंडारित खाद्यान्नों को कीटों से बचाकर रखने हेतु किसान प्रायः उनके साथ क्या मिला देते हैं?
- (a)नीम के पत्ते
- (b)आम के पत्ते
- (c)पीपल के पत्ते
- (d)संतरा के पत्ते
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) नीम के पत्ते। भंडारण के समय अनाज का सबसे बड़ा शत्रु कीट है — घुन, सुरसुरी और शलभ, जो दाने में छेद करके उसे भीतर से खा जाते हैं। किसान परंपरागत रूप से अनाज की परतों के बीच सूखी नीम की पत्तियाँ बिछा देते हैं, और यह विधि केवल रीति नहीं, रसायन पर टिकी है।
नीम (वानस्पतिक नाम Azadirachta indica) के पत्तों, बीजों तथा तेल में लिमोनॉइड वर्ग के कड़वे यौगिक होते हैं, जिनमें सबसे प्रभावी एज़ाडिरैक्टिन है। यह यौगिक कीट को सीधे तुरंत मारने वाला विष नहीं है; वह तीन तरह से काम करता है। पहला, प्रतिकर्षी — इसकी तीव्र गंध कीट को अनाज के ढेर से दूर रखती है। दूसरा, अरुचिकर (antifeedant) — कीट यदि पहुँच भी जाए तो कड़वाहट के कारण खाना बंद कर देता है। तीसरा, वृद्धि-नियामक — यह कीट के निर्मोचन (moulting) की हार्मोनी प्रक्रिया में बाधा डालता है, जिससे लार्वा वयस्क नहीं बन पाता और जनसंख्या आगे नहीं बढ़ती।
भंडारण के संदर्भ में नीम के दो व्यावहारिक गुण और महत्त्वपूर्ण हैं — पत्तियाँ सूखी रहती हैं, इसलिए अनाज में नमी नहीं बढ़ातीं, और मनुष्य के खाने योग्य अनाज के साथ रखे जाने पर वे संश्लेषित कीटनाशकों जैसा अवशेष नहीं छोड़तीं। इसी कारण नीम को जैव-कीटनाशक (biopesticide) का सबसे जाना-पहचाना उदाहरण माना जाता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)आम के पत्ते — आम के पत्तों का उपयोग भारत में व्यापक है — तोरण बाँधने और मांगलिक अवसरों पर — पर वह सांस्कृतिक प्रयोग है, कीट-नियंत्रण का नहीं। आम के पत्तों में नीम के एज़ाडिरैक्टिन जैसा कोई ऐसा कड़वा लिमोनॉइड नहीं होता जो कीट को खाने से रोके या उसकी वृद्धि रोक दे, और भंडारित अनाज में उन्हें मिलाने की कोई प्रचलित कृषि-परंपरा नहीं है।
- (c)पीपल के पत्ते — पीपल धार्मिक और पारिस्थितिक दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण वृक्ष है, पर उसके पत्तों का अनाज-भंडारण से कोई संबंध नहीं। इस विकल्प में वही जाल है जो (b) में है — प्रश्न जिस वृक्ष को खोज रहा है वह सांस्कृतिक महत्त्व के कारण नहीं, अपने कीट-प्रतिकर्षी रसायन के कारण चुना जाता है, और वह गुण पीपल में नहीं मिलता।
- (d)संतरा के पत्ते — संतरा नीम से भिन्न कुल का, रुटेसी कुल का पौधा है, और भंडारित अनाज में उसके पत्ते मिलाने की कोई प्रचलित विधि नहीं है। संतरे का जो भाग सुगंधित तेल के लिए जाना जाता है वह छिलका है, पत्ता नहीं; और वह तेल अनाज में महीनों तक टिकने वाला सूखा प्रतिकर्षी नहीं देता, जैसा नीम की सूखी पत्तियाँ देती हैं।
अवधारणा
जैव-कीटनाशक वे कीटनाशी पदार्थ हैं जो जीवों अथवा उनसे प्राप्त प्राकृतिक यौगिकों से बनते हैं। नीम इनका सबसे प्रसिद्ध पादप-स्रोत है। इसका मुख्य सक्रिय यौगिक एज़ाडिरैक्टिन है, जो कीट के लिए प्रतिकर्षी, अरुचिकर तथा वृद्धि-नियामक — तीनों का काम करता है। संश्लेषित कीटनाशकों की तुलना में इसके तीन लाभ हैं: यह अपेक्षाकृत शीघ्र अपघटित होता है, स्तनधारियों के लिए बहुत कम विषैला है, और कीटों में इसके प्रति प्रतिरोध धीरे विकसित होता है, क्योंकि यह एक ही चयापचयी बिंदु पर प्रहार नहीं करता। नीम का उपयोग खेत में छिड़काव, बीज-उपचार, भंडारण-सुरक्षा तथा खाद — चारों रूपों में होता है।
प्रश्न कृषि तथा पारंपरिक ज्ञान के उस क्षेत्र से आता है जिसे परीक्षाएँ पर्यावरण-अनुकूल तकनीक के रूप में पूछती हैं। भारत में कटाई के बाद अनाज की हानि का बड़ा भाग भंडारण के दौरान कीटों तथा नमी से होता है, इसलिए भंडारण-सुरक्षा नीति और परीक्षा दोनों का विषय है। नीम इसी संदर्भ में बार-बार आता है — जैव-कीटनाशक के रूप में, नीम खली के रूप में, और यूरिया के नीम-लेपन के रूप में, जिससे उर्वरक के अन्यत्र उपयोग पर अंकुश लगता है और नाइट्रोजन धीरे-धीरे मुक्त होती है।
मुख्य तथ्य
- नीम का वानस्पतिक नाम Azadirachta indica है और यह मेलिएसी कुल का वृक्ष है।
- इसका प्रमुख कीटनाशी यौगिक एज़ाडिरैक्टिन है, जो लिमोनॉइड वर्ग का है।
- एज़ाडिरैक्टिन कीट के लिए प्रतिकर्षी, अरुचिकर तथा वृद्धि-नियामक — तीनों का कार्य करता है।
- यह कीट के निर्मोचन की हार्मोनी प्रक्रिया में बाधा डालकर लार्वा को वयस्क बनने से रोकता है।
- सूखी नीम की पत्तियाँ अनाज में नमी नहीं बढ़ातीं, इसलिए भंडारण के लिए उपयुक्त हैं।
- नीम खली उर्वरक के साथ-साथ मृदा में सूत्रकृमि-नियंत्रण के लिए भी प्रयुक्त होती है।
- नीम जैव-कीटनाशक का सबसे जाना-पहचाना पादप-स्रोत है और स्तनधारियों के लिए इसकी विषाक्तता बहुत कम है।
- यूरिया पर नीम का लेपन इसी वृक्ष का एक बड़े पैमाने का औद्योगिक उपयोग है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नीम को तुरंत मारने वाला विष मान लेना; एज़ाडिरैक्टिन मुख्यतः कीट को खाने से रोकता और उसकी वृद्धि बाधित करता है।
- किसी वृक्ष के धार्मिक महत्त्व को उसका कृषि-उपयोग मान लेना — आम और पीपल के विकल्प इसी भ्रम पर टिके हैं।
- नीम की पत्ती, बीज, तेल और खली के उपयोगों को आपस में मिला देना।
- जैव-कीटनाशक को 'बिल्कुल निष्प्रभावी' या 'बिल्कुल हानिरहित' — दोनों में से किसी एक अति पर ले जाना।
- अनाज में नमी वाली हरी पत्तियाँ मिलाना, जिससे कवक की समस्या बढ़ सकती है; परंपरा सूखी पत्तियों की है।
इस विषय पर प्रश्न प्रायः तीन रूप लेते हैं। पहला, इसी प्रश्न जैसा व्यावहारिक — किसान अनाज में क्या मिलाते हैं। दूसरा, रासायनिक — नीम का सक्रिय यौगिक कौन-सा है, जिसका उत्तर एज़ाडिरैक्टिन है। तीसरा, नीति की ओर से — नीम-लेपित यूरिया का उद्देश्य क्या है। कभी-कभी जैव-कीटनाशकों की सूची देकर पूछा जाता है कि कौन-सा जीवाणु-आधारित है और कौन-सा पादप-आधारित। एक ही तैयारी तीनों को सँभाल लेती है: स्रोत, सक्रिय यौगिक और क्रिया-विधि — ये तीन बिंदु नीम के लिए स्पष्ट कर लीजिए।
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- (a) 1, 2 and 3 only
- (b) 3 and 4 only
- (c) 1, 2 and 4 only
- (d) 1, 2, 3 and 4
उत्तर(c) 1, 2 and 4 only
EPFO APFC 2016 — कीट-प्रतिरोध के अतिरिक्त पादपों को आनुवंशिक रूप से किन उद्देश्यों के लिए रूपांतरित किया गया है; कीट-प्रबंधन का दूसरा, आधुनिक छोर।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
नीम का वह प्रमुख सक्रिय यौगिक कौन-सा है, जो कीटों के लिए अरुचिकर तथा वृद्धि-नियामक का कार्य करता है?
- (a)एज़ाडिरैक्टिन
- (b)निकोटीन
- (c)पाइरेथ्रिन
- (d)रोटेनोन
उत्तर(a) एज़ाडिरैक्टिन
- practice — not a real PYQ
नीम किस कुल का वृक्ष है?
- (a)रुटेसी
- (b)मेलिएसी
- (c)फैबेसी
- (d)सोलेनेसी
उत्तर(b) मेलिएसी