विरंजक चूर्ण में क्या होता है?
- (a)नाइट्रोजन
- (b)आयोडीन
- (c)क्लोरीन
- (d)ब्रोमीन
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) क्लोरीन। विरंजक चूर्ण क्लोरीन का ही यौगिक है, और उसका नाम, उसका बनना तथा उसका काम — तीनों इसी तथ्य पर टिके हैं। बनने की विधि देखिए: शुष्क बुझे हुए चूने पर, अर्थात् कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड पर, क्लोरीन गैस प्रवाहित की जाती है और विरंजक चूर्ण बनता है, साथ में जल निकलता है। रसायन में इसे कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड अथवा कैल्सियम हाइपोक्लोराइट के रूप में लिखा जाता है, और उसमें क्लोरीन दो भिन्न रूपों में उपस्थित रहती है — एक क्लोराइड के रूप में और दूसरी हाइपोक्लोराइट के रूप में। इसी कारण विरंजक चूर्ण की गुणवत्ता उसकी 'उपलब्ध क्लोरीन' से मापी जाती है, अर्थात् उस क्लोरीन की मात्रा से जो तनु अम्ल के साथ क्रिया कराने पर गैस के रूप में मुक्त हो जाती है।
अब काम पर आइए। विरंजक चूर्ण जल तथा वायु की कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में आकर धीरे-धीरे हाइपोक्लोरस अम्ल देता है, और यही अम्ल आगे विघटित होकर नवजात ऑक्सीजन देता है। नवजात ऑक्सीजन रंगीन पदार्थ के अणु का ऑक्सीकरण कर देती है और उसका रंग नष्ट हो जाता है — यही विरंजन है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि क्लोरीन द्वारा किया गया विरंजन ऑक्सीकरण से होता है और इसीलिए स्थायी होता है, जबकि सल्फ़र डाइऑक्साइड का विरंजन अपचयन से होता है और अस्थायी रहता है — वायु में खुला छोड़ देने पर रंग लौट आता है। इसी अंतर पर परीक्षा प्रायः अलग प्रश्न बनाती है।
विरंजक चूर्ण के प्रमुख उपयोग भी इसी क्लोरीन-रसायन से निकलते हैं: सूती तथा सन के वस्त्रों और काग़ज़ की लुगदी का विरंजन, पेयजल का कीटाणुशोधन, ऑक्सीकारक के रूप में उपयोग, और क्लोरोफ़ॉर्म बनाने में उपयोग। इनमें कीटाणुशोधन का उपयोग सबसे व्यापक है और वही सामान्य जीवन में सबसे अधिक दिखता है। चूँकि चारों विकल्पों में तीन हैलोजन हैं — आयोडीन, क्लोरीन तथा ब्रोमीन — इस प्रश्न में असली काम यह पहचानना है कि विरंजक चूर्ण किस हैलोजन का यौगिक है, और उत्तर क्लोरीन है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)नाइट्रोजन — नाइट्रोजन का विरंजक चूर्ण से कोई संबंध नहीं, इसलिए यह विकल्प सबसे कमज़ोर है और उसे सबसे पहले काट देना चाहिए। नाइट्रोजन आवर्त सारणी के पंद्रहवें समूह का तत्त्व है, हैलोजन नहीं, और विरंजन उसका कोई विशिष्ट गुण नहीं। वायुमंडल में नाइट्रोजन की मात्रा सबसे अधिक है और वह अपने त्रिआबंध के कारण सामान्य ताप पर अत्यंत अक्रिय रहती है — यही अक्रियता उसे विरंजन जैसे प्रबल ऑक्सीकारक काम के लिए अनुपयुक्त बनाती है। रसायन में उसका महत्त्व दूसरी दिशाओं में है: अमोनिया तथा नाइट्रिक अम्ल का निर्माण, उनसे बनने वाले नाइट्रोजनी उर्वरक, तथा विस्फोटकों का उद्योग। भंडारण में उसका उपयोग भी उसकी अक्रियता के ही कारण होता है, जहाँ खाद्य-पैकेटों में निष्क्रिय वातावरण बनाने के लिए उसे भरा जाता है। संक्षेप में, नाइट्रोजन का सारा उपयोग-क्षेत्र विरंजन से अलग दिशा में जाता है।
- (b)आयोडीन — आयोडीन एक हैलोजन अवश्य है और इसी नाते यह विकल्प क्लोरीन के पास खड़ा दिखता है, पर विरंजक चूर्ण में आयोडीन नहीं होती। कारण समूह की प्रवृत्ति में है: हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता समूह में ऊपर से नीचे जाते हुए घटती जाती है, इसलिए फ़्लुओरीन और क्लोरीन प्रबल ऑक्सीकारक हैं जबकि आयोडीन सबसे दुर्बल। विरंजन का काम ऑक्सीकरण से होता है, इसलिए वह आयोडीन के बस का नहीं। आयोडीन का अपना उपयोग-क्षेत्र बिलकुल अलग है और उसे याद रखना ही इस विकल्प को काटने का सबसे सरल तरीक़ा है: आयोडीन का टिंक्चर पूतिरोधी के रूप में, आयोडीनयुक्त नमक घेंघा रोग की रोकथाम के लिए, तथा आयोडीन का उपयोग स्टार्च की पहचान के परीक्षण में। मानव शरीर में आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के हॉर्मोनों के लिए आवश्यक है। इनमें से किसी में भी विरंजन नहीं आता।
- (d)ब्रोमीन — ब्रोमीन भी हैलोजन है और क्लोरीन के ठीक नीचे आती है, इसलिए यह विकल्प देखने में निकट लगता है; पर विरंजक चूर्ण में ब्रोमीन नहीं होती। समूह की उसी प्रवृत्ति के अनुसार ब्रोमीन क्लोरीन से दुर्बल ऑक्सीकारक है, इसलिए विरंजन के औद्योगिक काम में उसका उपयोग नहीं होता। इसके अतिरिक्त व्यावहारिक कारण भी हैं: ब्रोमीन सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में रहने वाला एकमात्र अधातु है, अत्यंत संक्षारक तथा वाष्पशील है, और चूने पर उसे प्रवाहित करके कोई ऐसा स्थायी शुष्क चूर्ण नहीं बनाया जाता जो विरंजक चूर्ण की तरह भंडारित और परिवहनीय हो। ब्रोमीन के अपने उपयोग अलग हैं — सिल्वर ब्रोमाइड के रूप में पारंपरिक फ़ोटोग्राफ़ी में, तथा ज्वालारोधी यौगिकों के निर्माण में। यहाँ भी वही पद्धति काम आती है: प्रश्न में तीन हैलोजन एक साथ रखे गए हैं, और निर्णय ऑक्सीकारक क्षमता तथा वास्तविक औद्योगिक उपयोग देखकर करना है।
अवधारणा
विरंजक चूर्ण क्लोरीन का वह यौगिक है जो शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करने से बनता है। रसायन में उसे कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड अथवा कैल्सियम हाइपोक्लोराइट के रूप में लिखा जाता है, और उसमें क्लोरीन दो रूपों में रहती है — क्लोराइड तथा हाइपोक्लोराइट। उसकी गुणवत्ता 'उपलब्ध क्लोरीन' से मापी जाती है, अर्थात् उस क्लोरीन से जो तनु अम्ल के साथ क्रिया कराने पर मुक्त हो जाए। विरंजन की क्रियाविधि इस प्रकार है: जल तथा वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में विरंजक चूर्ण धीरे-धीरे हाइपोक्लोरस अम्ल देता है, और वह अम्ल विघटित होकर नवजात ऑक्सीजन देता है, जो रंगीन पदार्थ का ऑक्सीकरण करके उसका रंग नष्ट कर देती है। यहीं दो प्रकार के विरंजन का भेद बनता है, जो इस विषय का सबसे अधिक पूछा जाने वाला बिंदु है — क्लोरीन का विरंजन ऑक्सीकरण से होता है और स्थायी होता है, जबकि सल्फ़र डाइऑक्साइड का विरंजन अपचयन से होता है और अस्थायी रहता है, क्योंकि वायु के संपर्क में पदार्थ पुनः ऑक्सीकृत होकर अपना रंग लौटा लेता है। इसी कारण सूती वस्त्र क्लोरीन से विरंजित होते हैं जबकि ऊन तथा रेशम जैसे कोमल तंतुओं पर सल्फ़र डाइऑक्साइड का उपयोग किया जाता है, क्योंकि क्लोरीन उन्हें क्षति पहुँचा सकती है। हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता समूह में ऊपर से नीचे घटती जाती है, इसलिए विरंजन का व्यावहारिक काम क्लोरीन के हिस्से आता है, ब्रोमीन या आयोडीन के नहीं।
यह प्रश्न इस प्रश्नपत्र के रसायन विज्ञान वाले क्रम में आता है और उसकी सामान्य शैली में है — एक परिचित पदार्थ, और उसमें उपस्थित तत्त्व का नाम पूछ लेना। ध्यान देने योग्य बात यह है कि हिन्दी स्तंभ में यह पूरा प्रश्न-वाक्य है और प्रश्नचिह्न पर समाप्त होता है। विकल्पों की बनावट भी बताने लायक़ है: चार में से तीन हैलोजन हैं — आयोडीन, क्लोरीन तथा ब्रोमीन — और चौथा नाइट्रोजन है, जो किसी भी दृष्टि से इस प्रसंग में नहीं आता। यह बनावट सोच-समझकर बनाई गई है: नाइट्रोजन को हटाना सरल है, पर उसके बाद तीन हैलोजनों में से सही चुनना उसी से बनता है जो हैलोजनों की प्रवृत्ति तथा उनके वास्तविक औद्योगिक उपयोग जानता हो। विरंजक चूर्ण इस परीक्षा तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं का स्थायी विषय है, क्योंकि उसका उपयोग बहुत व्यापक है — वस्त्र तथा काग़ज़-लुगदी का विरंजन, पेयजल का कीटाणुशोधन, तथा ऑक्सीकारक के रूप में। इन्हीं उपयोगों के आसपास से अगला प्रश्न बनता है, इसलिए केवल संघटन नहीं, उपयोग भी याद रखने चाहिए।
मुख्य तथ्य
- विरंजक चूर्ण शुष्क बुझे हुए चूने अर्थात् कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करने से बनता है, और उसे कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड अथवा कैल्सियम हाइपोक्लोराइट कहा जाता है।
- विरंजक चूर्ण की गुणवत्ता 'उपलब्ध क्लोरीन' से मापी जाती है, अर्थात् उस क्लोरीन की मात्रा से जो तनु अम्ल के साथ क्रिया कराने पर गैस के रूप में मुक्त हो जाए।
- जल तथा वायु की कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में विरंजक चूर्ण हाइपोक्लोरस अम्ल देता है, जो विघटित होकर नवजात ऑक्सीजन देता है और वही रंग नष्ट करती है।
- क्लोरीन द्वारा किया गया विरंजन ऑक्सीकरण से होता है और स्थायी होता है, जबकि सल्फ़र डाइऑक्साइड का विरंजन अपचयन से होता है और वायु के संपर्क में रंग लौट आने के कारण अस्थायी रहता है।
- विरंजक चूर्ण के प्रमुख उपयोग हैं — सूती तथा सन के वस्त्रों और काग़ज़ की लुगदी का विरंजन, पेयजल का कीटाणुशोधन, ऑक्सीकारक के रूप में उपयोग, तथा क्लोरोफ़ॉर्म का निर्माण।
- हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता समूह में ऊपर से नीचे जाते हुए घटती है, इसलिए विरंजन का व्यावहारिक काम क्लोरीन करती है, ब्रोमीन या आयोडीन नहीं।
- आयोडीन का उपयोग पूतिरोधी टिंक्चर, आयोडीनयुक्त नमक तथा स्टार्च के परीक्षण में होता है, और वह शरीर में थायरॉइड हॉर्मोनों के लिए आवश्यक है — विरंजन उसका काम नहीं।
- ब्रोमीन सामान्य ताप पर द्रव अवस्था में रहने वाला एकमात्र अधातु है और उसका उपयोग सिल्वर ब्रोमाइड के रूप में फ़ोटोग्राफ़ी तथा ज्वालारोधी यौगिकों में होता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- तीन हैलोजनों में से किसी दूसरे को चुन लेना; विरंजक चूर्ण विशेष रूप से क्लोरीन का यौगिक है और ब्रोमीन या आयोडीन से वैसा चूर्ण नहीं बनाया जाता।
- यह मान लेना कि हर हैलोजन विरंजन कर सकता है; ऑक्सीकारक क्षमता समूह में नीचे जाते हुए घटती है, इसलिए आयोडीन का विरंजन-सामर्थ्य नगण्य है।
- क्लोरीन तथा सल्फ़र डाइऑक्साइड के विरंजन को एक जैसा मान लेना; पहला ऑक्सीकरण से होता है और स्थायी है, दूसरा अपचयन से होता है और अस्थायी।
- विरंजक चूर्ण को साधारण चूना समझ लेना; बुझा हुआ चूना उसका कच्चा माल है, उत्पाद नहीं, और दोनों के गुण भिन्न हैं।
- यह भूल जाना कि कोमल तंतुओं पर क्लोरीन का उपयोग नहीं किया जाता, क्योंकि वह उन्हें क्षति पहुँचा सकती है; वहाँ सल्फ़र डाइऑक्साइड काम में लाया जाता है।
इस परीक्षा में रसायन विज्ञान के प्रश्न प्रायः रोज़मर्रा के पदार्थों के इर्द-गिर्द बनते हैं, और विरंजक चूर्ण उनमें एक स्थायी नाम है। एक ही पदार्थ पर प्रश्न कई कोणों से पूछा जा सकता है: उसमें कौन-सा तत्त्व है, वह किन दो पदार्थों से बनता है, उसका रासायनिक नाम क्या है, उसका प्रमुख उपयोग क्या है, और उसकी विरंजन-क्रिया किस प्रकार होती है। इसलिए तैयारी करते समय किसी भी ऐसे पदार्थ को पाँच खानों में लिखने की आदत डालिए — नाम, संघटन, निर्माण, गुण और उपयोग; इससे पाँचों प्रकार के प्रश्नों का उत्तर एक ही तैयारी से निकल आता है। विकल्पों की बनावट पर भी ध्यान दीजिए। यहाँ चार में से तीन एक ही समूह के तत्त्व हैं, और ऐसे प्रश्न में केवल पदार्थ का नाम याद होना पर्याप्त नहीं होता; समूह की प्रवृत्ति जाननी पड़ती है, क्योंकि प्रश्नकर्ता जान-बूझकर पड़ोसी तत्त्वों को विकल्प बनाता है। एक अंतिम सुझाव: विरंजक चूर्ण और उससे जुड़े दो अन्य प्रचलित प्रश्न — विरंजन के दो प्रकार, और पेयजल के क्लोरीनीकरण — को एक साथ पढ़िए, क्योंकि परीक्षा इन तीनों में से किसी एक को उठाती है।
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EPFO_EOAO_2017_Q94खोलें व हल करें →Which one of the following gases has the highest solubility in water?
- (a) Chlorine
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उत्तर(b) Ammonia
इसी प्रश्नपत्र का पिछला प्रश्न, जल में सर्वाधिक विलेय गैस पर — वहाँ भी क्लोरीन एक विकल्प है और उसका जल-रसायन काम आता है।
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EPFO EO/AO 2023 में कॉपर सल्फ़ेट पेंटाहाइड्रेट को गर्म करने पर बनने वाले पदार्थ पर प्रश्न — किसी नामित यौगिक के गुण पूछने की वही शैली।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
विरंजक चूर्ण किन दो पदार्थों की परस्पर क्रिया से बनाया जाता है?
- (a)शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके
- (b)चूने के पत्थर पर सल्फ़र डाइऑक्साइड प्रवाहित करके
- (c)सोडियम हाइड्रॉक्साइड पर ब्रोमीन वाष्प प्रवाहित करके
- (d)कैल्सियम कार्बोनेट को तनु नाइट्रिक अम्ल में घोलकर
उत्तर(a) शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके
- practice — not a real PYQ
सल्फ़र डाइऑक्साइड द्वारा किया गया विरंजन अस्थायी क्यों होता है, जबकि क्लोरीन द्वारा किया गया विरंजन स्थायी रहता है?
- (a)क्योंकि सल्फ़र डाइऑक्साइड अपचयन से विरंजन करती है और वायु के संपर्क में पदार्थ पुनः ऑक्सीकृत होकर रंग लौटा लेता है
- (b)क्योंकि सल्फ़र डाइऑक्साइड जल में अविलेय है
- (c)क्योंकि सल्फ़र डाइऑक्साइड केवल धातुओं पर क्रिया करती है
- (d)क्योंकि सल्फ़र डाइऑक्साइड नवजात ऑक्सीजन की अधिक मात्रा देती है
उत्तर(a) क्योंकि सल्फ़र डाइऑक्साइड अपचयन से विरंजन करती है और वायु के संपर्क में पदार्थ पुनः ऑक्सीकृत होकर रंग लौटा लेता है