पानी में उच्चतम विलेयता वाली गैस, निम्नलिखित में से कौन-सी है?
- (a)क्लोरीन
- (b)अमोनिया
- (c)कार्बन डाइऑक्साइड
- (d)नाइट्रोजन
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) अमोनिया। चारों में से अमोनिया ही वह गैस है जो पानी में सबसे अधिक घुलती है, और उसका अंतर बाक़ी तीनों से थोड़ा-सा नहीं, बहुत बड़ा है। कारण अणु की बनावट में है। जल का अणु ध्रुवीय है और वह हाइड्रोजन आबंध बनाता है; अतः वही गैसें उसमें अच्छी तरह घुलती हैं जो या तो स्वयं ध्रुवीय हों, या जल के साथ हाइड्रोजन आबंध बना सकें, या जल से रासायनिक क्रिया कर लें। अमोनिया तीनों कसौटियों पर खरी उतरती है। उसका अणु त्रिकोणीय पिरामिड आकार का है और उसमें नाइट्रोजन पर एक एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म रहता है, जिससे अणु प्रबल रूप से ध्रुवीय हो जाता है। नाइट्रोजन की विद्युत-ऋणात्मकता अधिक होने से उसके हाइड्रोजन जल के ऑक्सीजन के साथ और उसका एकाकी युग्म जल के हाइड्रोजन के साथ हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं। इसके ऊपर अमोनिया जल से क्रिया भी करती है और आंशिक रूप से अमोनियम आयन तथा हाइड्रॉक्साइड आयन देती है, जिससे विलयन दुर्बल क्षारीय हो जाता है — यह क्रिया घुली हुई अमोनिया को विलयन में खपाती जाती है और इसलिए और अधिक गैस घुलने का मार्ग खुलता रहता है।
अमोनिया की इस असाधारण विलेयता का प्रयोगशाला-प्रदर्शन प्रसिद्ध है और उसे प्रायः फ़व्वारा-प्रयोग कहा जाता है: अमोनिया से भरे फ़्लास्क में जल की कुछ बूँदें पहुँचते ही गैस इतनी तेज़ी से घुलती है कि भीतर का दाब गिर जाता है और बाहर का जल नली से फ़व्वारे की तरह फ़्लास्क में चढ़ आता है। यही प्रयोग हाइड्रोजन क्लोराइड के साथ भी किया जाता है, जो जल में इसी तरह अत्यधिक विलेय है।
तुलना का क्रम इस प्रकार रखिए। नाइट्रोजन अध्रुवीय है और जल से कोई क्रिया नहीं करता, इसलिए वह चारों में सबसे कम विलेय है। कार्बन डाइऑक्साइड और क्लोरीन बीच में आते हैं — ये जल से आंशिक क्रिया करते हैं, इसलिए नाइट्रोजन से कहीं अधिक घुलते हैं, पर अमोनिया के पास कहीं नहीं ठहरते। दो सामान्य नियम भी याद रखने योग्य हैं: हेनरी के नियम के अनुसार किसी गैस की विलेयता उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है, और तापमान बढ़ने पर गैसों की विलेयता घटती है — इसीलिए गर्म करने पर घुली हुई गैसें बुलबुलों के रूप में निकल आती हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)क्लोरीन — क्लोरीन जल में घुलती अवश्य है, पर अमोनिया की तुलना में बहुत कम, इसलिए 'उच्चतम विलेयता' का उत्तर वह नहीं है। क्लोरीन का अणु दो समान परमाणुओं का बना है, अतः वह स्वयं अध्रुवीय है और केवल इस आधार पर उसकी विलेयता नगण्य होनी चाहिए थी। जो थोड़ी-बहुत विलेयता उसमें है, वह मुख्यतः जल के साथ उसकी आंशिक रासायनिक क्रिया से आती है: क्लोरीन जल से क्रिया करके हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा हाइपोक्लोरस अम्ल बनाती है, और इसी विलयन को क्लोरीन-जल कहा जाता है। यही हाइपोक्लोरस अम्ल आगे चलकर नवजात ऑक्सीजन देता है, जिससे क्लोरीन-जल के विरंजक तथा कीटाणुनाशक गुण आते हैं और जल-शोधन में क्लोरीन का उपयोग होता है। पर यह सब क्रिया आंशिक है और साम्य पर जाकर रुक जाती है, इसलिए घुलने की मात्रा सीमित रहती है। अमोनिया में ध्रुवीयता, हाइड्रोजन आबंधन और क्षारीय क्रिया — तीनों एक साथ काम करते हैं, इसलिए वह इससे कहीं आगे निकल जाती है।
- (c)कार्बन डाइऑक्साइड — कार्बन डाइऑक्साइड जल में केवल थोड़ी मात्रा में घुलती है, इसलिए यह भी उत्तर नहीं। उसका अणु रैखिक है और यद्यपि प्रत्येक कार्बन-ऑक्सीजन आबंध ध्रुवीय है, दोनों की ध्रुवताएँ विपरीत दिशाओं में होने से आपस में कट जाती हैं और पूरा अणु अध्रुवीय रह जाता है। जल के साथ उसकी क्रिया भी बहुत सीमित है — घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड का एक छोटा अंश ही कार्बोनिक अम्ल बनाता है, जो स्वयं एक दुर्बल तथा अस्थायी अम्ल है। यहीं वह भ्रम है जिस पर परीक्षा प्रश्न बनाती है: सोडा-जल तथा शीतल पेय देखकर लगता है कि कार्बन डाइऑक्साइड जल में ख़ूब घुलती है। वास्तव में उन पेयों में गैस अधिक दाब पर घोली जाती है, और हेनरी के नियम के अनुसार दाब बढ़ने से विलेयता बढ़ती है; बोतल खोलते ही दाब गिरता है और गैस बुलबुलों के रूप में बाहर निकलने लगती है। साधारण दाब पर उसकी विलेयता अमोनिया के सामने बहुत कम है।
- (d)नाइट्रोजन — नाइट्रोजन चारों में सबसे कम विलेय गैस है, इसलिए वह इस प्रश्न का उत्तर किसी भी दृष्टि से नहीं हो सकता। उसका अणु दो समान परमाणुओं का बना है और उनके बीच त्रिआबंध है; अणु पूर्णतः अध्रुवीय है, उसमें कोई हाइड्रोजन आबंध बनाने की क्षमता नहीं, और सामान्य ताप पर वह जल से कोई रासायनिक क्रिया भी नहीं करता। त्रिआबंध की प्रबलता उसे इतना अक्रिय बना देती है कि नाइट्रोजन का उपयोग खाद्य-पैकेटों तथा भंडारण में निष्क्रिय वातावरण बनाने के लिए किया जाता है। जल में उसकी थोड़ी-सी उपस्थिति भौतिक रूप से घुलने भर की है और वह भी अत्यल्प। यहाँ एक व्यावहारिक तथ्य ध्यान देने योग्य है: गोताखोरों में होने वाला अपस्फीति रोग इसी अत्यल्प विलेयता से जुड़ा है — अधिक दाब पर रक्त में कुछ नाइट्रोजन घुल जाती है और तेज़ी से ऊपर आने पर दाब घटते ही वह बुलबुले बनाकर निकलती है। यह भी हेनरी के नियम का ही परिणाम है।
अवधारणा
गैसों की जल में विलेयता का निर्णय मुख्यतः तीन बातों से होता है। पहली बात अणु की ध्रुवीयता है। जल स्वयं एक प्रबल ध्रुवीय विलायक है, और सामान्य नियम यह है कि समान प्रकृति का विलायक समान प्रकृति के विलेय को घोलता है; अतः ध्रुवीय गैसें जल में अच्छी तरह घुलती हैं और अध्रुवीय गैसें बहुत कम। दूसरी बात हाइड्रोजन आबंध बनाने की क्षमता है। जिन अणुओं में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन या फ़्लुओरीन से जुड़ा हाइड्रोजन हो, अथवा जिनमें एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म हो, वे जल के अणुओं से हाइड्रोजन आबंध बना लेते हैं और उनकी विलेयता कई गुना बढ़ जाती है। तीसरी बात जल के साथ रासायनिक क्रिया है। यदि घुली हुई गैस जल से क्रिया करके कोई आयन या यौगिक बना लेती है, तो वह विलयन में खपती जाती है और घुलने की गुंजाइश बनी रहती है; यही कारण है कि अमोनिया और हाइड्रोजन क्लोराइड जैसी गैसें असाधारण मात्रा में घुलती हैं। इनके अतिरिक्त दो भौतिक नियम पूरे विषय पर लागू होते हैं। हेनरी का नियम कहता है कि किसी गैस की द्रव में विलेयता उस गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है, इसलिए दाब बढ़ाने पर अधिक गैस घुलती है। और तापमान बढ़ने पर गैसों की विलेयता घटती है, क्योंकि घुलने की प्रक्रिया प्रायः ऊष्माक्षेपी होती है — यही कारण है कि गर्म करने पर जल में घुली गैसें बुलबुलों के रूप में निकल आती हैं।
यह प्रश्न इस प्रश्नपत्र के रसायन विज्ञान वाले हिस्से से आता है और उसकी सामान्य शैली में है — कोई गणना नहीं, बल्कि चार परिचित पदार्थों में से किसी एक गुण की तुलना। ऐसे प्रश्न में अभ्यर्थी से यह अपेक्षा नहीं होती कि उसे चारों की विलेयता के आँकड़े याद हों; अपेक्षा यह होती है कि वह उस सिद्धांत को जानता हो जिससे क्रम निकलता है, अर्थात् ध्रुवीयता, हाइड्रोजन आबंधन और जल के साथ क्रिया। इन तीन कसौटियों को लगाते ही चारों विकल्प अपने आप क्रम में लग जाते हैं और अमोनिया सबसे ऊपर आ जाती है। परीक्षा में इस विषय के प्रश्न प्रायः तीन रूपों में आते हैं: सबसे अधिक अथवा सबसे कम विलेय गैस पूछना, दाब या ताप बदलने पर विलेयता की दिशा पूछना, और किसी विशेष गैस के जल में घुलने पर बनने वाले उत्पाद पूछना। तीनों की तैयारी एक ही सामग्री से होती है। इस प्रश्न के चारों विकल्पों के नाम देवनागरी में लिप्यंतरित हैं, अनूदित नहीं, जो इस पुस्तिका की विज्ञान-संबंधी शब्दावली की सामान्य शैली है।
मुख्य तथ्य
- अमोनिया जल में अत्यधिक विलेय है, और यह विलेयता उसकी प्रबल ध्रुवीयता, जल के साथ हाइड्रोजन आबंधन तथा जल के साथ उसकी क्षारीय क्रिया — तीनों के मिलने से आती है।
- अमोनिया जल से क्रिया करके आंशिक रूप से अमोनियम आयन तथा हाइड्रॉक्साइड आयन देती है, जिससे विलयन दुर्बल क्षारीय हो जाता है।
- अमोनिया की असाधारण विलेयता को फ़व्वारा-प्रयोग से दिखाया जाता है, जिसमें गैस के तेज़ी से घुलने पर फ़्लास्क का दाब गिरता है और बाहर का जल भीतर चढ़ आता है; यही प्रयोग हाइड्रोजन क्लोराइड के साथ भी होता है।
- क्लोरीन जल से आंशिक क्रिया करके हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा हाइपोक्लोरस अम्ल बनाती है और इसी विलयन को क्लोरीन-जल कहते हैं; इसी से उसके विरंजक तथा कीटाणुनाशक गुण आते हैं।
- कार्बन डाइऑक्साइड का अणु रैखिक तथा अध्रुवीय है और उसका केवल एक छोटा अंश जल में कार्बोनिक अम्ल बनाता है, इसलिए साधारण दाब पर उसकी विलेयता कम रहती है।
- नाइट्रोजन अध्रुवीय तथा त्रिआबंध के कारण अक्रिय है और सामान्य ताप पर जल से कोई क्रिया नहीं करता, इसलिए वह चारों में सबसे कम विलेय है।
- हेनरी के नियम के अनुसार किसी गैस की विलेयता उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है; इसीलिए शीतल पेयों में गैस अधिक दाब पर घोली जाती है और बोतल खुलते ही निकलने लगती है।
- तापमान बढ़ने पर गैसों की जल में विलेयता घटती है, इसीलिए गर्म करने पर घुली हुई गैसें बुलबुलों के रूप में बाहर आ जाती हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सोडा-जल देखकर यह मान लेना कि कार्बन डाइऑक्साइड जल में सबसे अधिक घुलती है; वहाँ गैस अधिक दाब पर घोली जाती है, साधारण दाब पर उसकी विलेयता कम है।
- क्लोरीन को केवल इसलिए सबसे विलेय मान लेना कि उसका उपयोग जल-शोधन में होता है; वहाँ काम उसकी विलेयता का नहीं, उसकी ऑक्सीकारक तथा कीटाणुनाशक क्रिया का है।
- अणु के आबंधों की ध्रुवीयता को पूरे अणु की ध्रुवीयता मान लेना; कार्बन डाइऑक्साइड के दोनों आबंध ध्रुवीय हैं, पर रैखिक आकार के कारण अणु अध्रुवीय है।
- यह भूल जाना कि तापमान बढ़ने पर गैसों की विलेयता घटती है, जबकि अधिकांश ठोसों की बढ़ती है; दोनों की दिशा उलटी है।
- नाइट्रोजन को जल में पूर्णतः अविलेय मान लेना; वह अत्यल्प मात्रा में घुलता अवश्य है, और अधिक दाब पर यही अल्प विलेयता गोताखोरों के लिए ख़तरा बनती है।
रसायन विज्ञान के इस भाग में परीक्षा प्रायः किसी गुण की तुलना पूछती है, आँकड़ा नहीं। इसलिए तैयारी का ढंग यह होना चाहिए कि आप गैसों की विलेयता के आँकड़े रटने के बजाय वह सिद्धांत पकड़ें जिससे क्रम बनता है, और फिर हर विकल्प पर उसे लगाकर देखें। तीन कसौटियाँ पर्याप्त हैं: क्या अणु ध्रुवीय है, क्या वह जल के साथ हाइड्रोजन आबंध बना सकता है, और क्या वह जल से रासायनिक क्रिया करता है। जिस गैस के पक्ष में तीनों उत्तर हाँ हों, वह सबसे विलेय होगी; जिसके पक्ष में तीनों उत्तर नहीं हों, वह सबसे कम। इस विषय में दो जोड़े विशेष रूप से याद रखने योग्य हैं क्योंकि विकल्प प्रायः उन्हीं से बनते हैं — अमोनिया तथा हाइड्रोजन क्लोराइड एक ओर, जो अत्यधिक विलेय हैं, और नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन दूसरी ओर, जो अत्यल्प विलेय हैं। साथ ही हेनरी के नियम और तापमान के प्रभाव को अलग से पक्का कीजिए, क्योंकि इसी विषय का दूसरा प्रचलित प्रश्न यह पूछता है कि दाब या ताप बदलने पर विलेयता किस दिशा में जाएगी। शीतल पेय की बोतल और गोताखोरों का उदाहरण इन दोनों नियमों को स्मृति में बैठाने के सबसे अच्छे सहारे हैं।
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उत्तर(b) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा हाइपोक्लोरस अम्ल