मानक ताप और दाब (STP) पर निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रतिचुंबकीय पदार्थ नहीं है?
- (a)नाइट्रोजन
- (b)सोडियम क्लोराइड
- (c)पानी
- (d)लोहा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) लोहा। यह प्रश्न निषेधात्मक है और इस पुस्तिका ने उसका 'नहीं' मोटे टाइप में छापकर सचेत भी किया है — पूछा यह गया है कि कौन-सा पदार्थ प्रतिचुंबकीय नहीं है। चारों में से तीन प्रतिचुंबकीय हैं और केवल लोहा नहीं, इसलिए उत्तर लोहा है। कारण इस प्रकार है। किसी पदार्थ का चुंबकीय व्यवहार उसके परमाणुओं तथा अणुओं के इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था से तय होता है। जिन पदार्थों में सारे इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं, उनका कोई स्थायी चुंबकीय आघूर्ण नहीं होता; बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखे जाने पर उनमें एक ऐसा क्षीण आघूर्ण प्रेरित होता है जो क्षेत्र के विपरीत दिशा में होता है, और इसीलिए वे क्षेत्र से हल्के से प्रतिकर्षित होते हैं। ऐसे पदार्थ प्रतिचुंबकीय कहलाते हैं; उनकी चुंबकीय प्रवृत्ति ऋणात्मक और परिमाण में बहुत छोटी होती है और सापेक्ष पारगम्यता एक से थोड़ी कम। नाइट्रोजन, सोडियम क्लोराइड और पानी — तीनों इसी श्रेणी में आते हैं।
लोहा इनमें से किसी भी अर्थ में प्रतिचुंबकीय नहीं है। लोहा लौहचुंबकीय पदार्थ है, और लौहचुंबकत्व चुंबकत्व का सबसे प्रबल रूप है। उसमें परमाणुओं के चुंबकीय आघूर्ण छोटे-छोटे क्षेत्रों में, जिन्हें डोमेन कहते हैं, स्वतः एक ही दिशा में पंक्तिबद्ध हो जाते हैं। बाहरी क्षेत्र लगते ही ये डोमेन क्षेत्र की दिशा में मुड़ जाते हैं और पदार्थ प्रबलता से आकर्षित होता है; क्षेत्र हटा लेने पर भी उसमें कुछ चुंबकत्व शेष रह सकता है। इसीलिए स्थायी चुंबक तथा विद्युत-चुंबकों की क्रोड लोहे और उसके मिश्रातुओं से बनती है। लोहे के अतिरिक्त कोबाल्ट और निकल भी लौहचुंबकीय हैं।
प्रश्न में 'मानक ताप और दाब' का उल्लेख निरर्थक नहीं है, और यही इस प्रश्न की सूक्ष्मता है। लौहचुंबकत्व तापमान पर निर्भर करता है: प्रत्येक लौहचुंबकीय पदार्थ का एक क्यूरी ताप होता है, जिससे ऊपर उसके डोमेन बिखर जाते हैं और वह मात्र अनुचुंबकीय रह जाता है। लोहे का क्यूरी ताप लगभग 770 डिग्री सेल्सियस है, जो मानक ताप से बहुत ऊपर है; इसलिए मानक ताप और दाब पर लोहा निश्चित रूप से लौहचुंबकीय ही रहता है। ध्यान दीजिए कि क्यूरी ताप से ऊपर भी वह अनुचुंबकीय होता है, प्रतिचुंबकीय तब भी नहीं — अर्थात् किसी भी तापमान पर वह इस प्रश्न का ग़लत उत्तर नहीं बनता।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)नाइट्रोजन — नाइट्रोजन प्रतिचुंबकीय है, इसलिए यह उस प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता जो प्रतिचुंबकीय न होने वाला पदार्थ माँगता है। कारण उसके अणु की बनावट में है: नाइट्रोजन का अणु दो परमाणुओं का बना है और उनके बीच त्रिआबंध है, जिससे अणु के सारे इलेक्ट्रॉन युग्मित हो जाते हैं और कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन शेष नहीं बचता। जहाँ कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं, वहाँ स्थायी चुंबकीय आघूर्ण भी नहीं, और पदार्थ प्रतिचुंबकीय हो जाता है। यहीं पर वह भेद रखने योग्य है जिस पर परीक्षा प्रायः प्रश्न बनाती है: वायु का दूसरा प्रमुख घटक ऑक्सीजन इसके ठीक विपरीत व्यवहार करता है। ऑक्सीजन के अणु में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह अनुचुंबकीय है और तरल ऑक्सीजन को प्रबल चुंबक के ध्रुवों के बीच टिका हुआ तक देखा जा सकता है। अतः नाइट्रोजन और ऑक्सीजन एक ही वायु में रहते हुए भी विपरीत श्रेणियों में आते हैं, और यहाँ पूछा गया पदार्थ नाइट्रोजन नहीं है।
- (b)सोडियम क्लोराइड — सोडियम क्लोराइड भी प्रतिचुंबकीय है, इसलिए यह भी इस निषेधात्मक प्रश्न का उत्तर नहीं बनता। सोडियम क्लोराइड एक आयनिक यौगिक है: सोडियम अपना बाहरी इलेक्ट्रॉन देकर धनायन बन जाता है और क्लोरीन उसे लेकर ऋणायन। इस लेन-देन के बाद दोनों आयनों के इलेक्ट्रॉन-कोश पूर्ण हो जाते हैं और उनमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं बचता; इसीलिए क्रिस्टल में किसी भी आयन का स्थायी चुंबकीय आघूर्ण नहीं होता और पूरा क्रिस्टल प्रतिचुंबकीय व्यवहार करता है। यहाँ एक सामान्य भ्रम की ओर ध्यान देना उपयोगी है: बहुत-से विद्यार्थी मान लेते हैं कि धातु का नाम आते ही पदार्थ चुंबक से आकर्षित होगा। यह सही नहीं। सोडियम इस यौगिक में धातु के रूप में नहीं, आयन के रूप में है; और स्वतंत्र धातुओं में भी ताँबा, चाँदी तथा सोना प्रतिचुंबकीय ही हैं। चुंबकीय व्यवहार का निर्णय नाम से नहीं, इलेक्ट्रॉन-व्यवस्था से होता है।
- (c)पानी — पानी प्रतिचुंबकीय पदार्थों का सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है, इसलिए यह भी इस प्रश्न का उत्तर नहीं। जल के अणु में ऑक्सीजन के दोनों अयुग्मित इलेक्ट्रॉन दो हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ आबंध बनाने में लग जाते हैं, और शेष इलेक्ट्रॉन एकाकी युग्मों के रूप में रहते हैं; इस प्रकार पूरे अणु में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं बचता और अणु का कोई स्थायी चुंबकीय आघूर्ण नहीं होता। इसका एक प्रसिद्ध प्रयोगात्मक प्रमाण भी है: अत्यंत प्रबल चुंबकीय क्षेत्र में पानी अपने प्रतिकर्षण के कारण उत्तोलित किया जा सकता है, और जीवित प्राणियों के शरीर में पानी की मात्रा अधिक होने से इसी सिद्धांत पर उन्हें भी उत्तोलित किया जा चुका है। यहाँ भ्रम की एक जगह है: नल के पानी में लोहे सहित अनेक घुले हुए पदार्थ हो सकते हैं, पर प्रश्न शुद्ध पदार्थ के व्यवहार का है, किसी मिश्रण की अशुद्धियों का नहीं।
अवधारणा
पदार्थों को उनके चुंबकीय व्यवहार के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है, और तीनों का भेद इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था से निकलता है। पहली श्रेणी प्रतिचुंबकीय पदार्थों की है। इनमें सारे इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, इसलिए स्थायी चुंबकीय आघूर्ण शून्य होता है; बाहरी क्षेत्र में इनमें क्षेत्र के विपरीत दिशा का क्षीण आघूर्ण प्रेरित होता है और ये हल्के से प्रतिकर्षित होते हैं। इनकी चुंबकीय प्रवृत्ति छोटी तथा ऋणात्मक होती है और सापेक्ष पारगम्यता एक से कुछ कम। नाइट्रोजन, जल, सोडियम क्लोराइड, ताँबा, चाँदी, सोना, बिस्मथ तथा काँच इसी श्रेणी में आते हैं। दूसरी श्रेणी अनुचुंबकीय पदार्थों की है। इनके परमाणुओं या अणुओं में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए स्थायी आघूर्ण रहता है; सामान्य अवस्था में ये आघूर्ण अव्यवस्थित दिशाओं में बिखरे रहते हैं, पर बाहरी क्षेत्र उन्हें आंशिक रूप से पंक्तिबद्ध कर देता है और पदार्थ दुर्बल रूप से आकर्षित होता है। ऑक्सीजन, ऐलुमिनियम तथा प्लैटिनम इसके उदाहरण हैं। तीसरी श्रेणी लौहचुंबकीय पदार्थों की है, जिनमें आघूर्ण डोमेनों में स्वतः पंक्तिबद्ध हो जाते हैं और आकर्षण बहुत प्रबल होता है; लोहा, कोबाल्ट तथा निकल इसके प्रमुख उदाहरण हैं। तापमान इस वर्गीकरण को बदल सकता है: क्यूरी ताप से ऊपर लौहचुंबकीय पदार्थ अनुचुंबकीय हो जाता है, और यही कारण है कि प्रश्न में मानक ताप और दाब की शर्त जोड़ी गई है।
यह प्रश्न इस प्रश्नपत्र के सामान्य विज्ञान खंड का हिस्सा है और उसकी विशिष्ट शैली दिखाता है — कोई गणना नहीं, बल्कि एक वर्गीकरण, जिसमें तीन उदाहरण एक श्रेणी के और एक उदाहरण दूसरी श्रेणी का रखकर विषम पद पूछ लिया जाता है। ऐसे प्रश्न में तैयारी का काम सूत्र याद करना नहीं, बल्कि श्रेणियों की सूची और उनके प्रतिनिधि उदाहरण स्मृति में रखना है। इस प्रश्न की दूसरी विशेषता उसका निषेधात्मक होना है। यह पुस्तिका अपने निषेधात्मक प्रश्नों में 'नहीं' को मोटे टाइप में छापती है, और यहाँ भी वही किया गया है — यह अभ्यर्थी के लिए एक वास्तविक सहायता है, क्योंकि निषेध चूक जाने पर तीन विकल्प एक साथ सही दिखने लगते हैं और उत्तर अनुमान पर आ जाता है। तीसरी बात 'मानक ताप और दाब' की शर्त है। ऐसी शर्त प्रश्न में तब जोड़ी जाती है जब उत्तर परिस्थिति पर निर्भर करता हो, और यहाँ वह वास्तव में निर्भर करता है, क्योंकि क्यूरी ताप से ऊपर लोहे का व्यवहार बदल जाता है। संक्षेपाक्षर कोष्ठक में रोमन लिपि में छपा है जबकि उसका विस्तार हिन्दी में अनूदित है, जो इस पूरी पुस्तिका की सामान्य शैली है।
मुख्य तथ्य
- प्रतिचुंबकीय पदार्थों में सारे इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, स्थायी चुंबकीय आघूर्ण शून्य होता है, और वे बाहरी चुंबकीय क्षेत्र से हल्के से प्रतिकर्षित होते हैं।
- प्रतिचुंबकीय पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति छोटी तथा ऋणात्मक होती है और उसकी सापेक्ष पारगम्यता एक से कुछ कम होती है।
- नाइट्रोजन, जल, सोडियम क्लोराइड, ताँबा, चाँदी, सोना, बिस्मथ तथा काँच — ये सब प्रतिचुंबकीय पदार्थों के प्रचलित उदाहरण हैं।
- अनुचुंबकीय पदार्थों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं और वे दुर्बल रूप से आकर्षित होते हैं; ऑक्सीजन, ऐलुमिनियम तथा प्लैटिनम इसके उदाहरण हैं।
- लोहा, कोबाल्ट तथा निकल लौहचुंबकीय हैं; इनमें परमाणुओं के आघूर्ण डोमेनों में स्वतः पंक्तिबद्ध हो जाते हैं और आकर्षण बहुत प्रबल होता है।
- नाइट्रोजन के अणु में त्रिआबंध के कारण कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं बचता, जबकि ऑक्सीजन के अणु में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं — इसीलिए एक प्रतिचुंबकीय और दूसरा अनुचुंबकीय है।
- प्रत्येक लौहचुंबकीय पदार्थ का एक क्यूरी ताप होता है, जिससे ऊपर उसके डोमेन बिखर जाते हैं और वह अनुचुंबकीय रह जाता है; लोहे का क्यूरी ताप लगभग 770 डिग्री सेल्सियस है।
- मानक ताप और दाब पर लोहा अपने क्यूरी ताप से बहुत नीचे होता है, इसलिए वहाँ वह निश्चित रूप से लौहचुंबकीय ही रहता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- निषेध चूक जाना; प्रश्न यह पूछता है कि कौन प्रतिचुंबकीय नहीं है, और इस पुस्तिका ने 'नहीं' को मोटे टाइप में छापकर सचेत भी किया है।
- नाइट्रोजन और ऑक्सीजन को एक जैसा मान लेना; नाइट्रोजन प्रतिचुंबकीय है जबकि ऑक्सीजन अनुचुंबकीय, और यही इस विषय का सबसे प्रचलित प्रश्न है।
- धातु का नाम देखकर आकर्षण मान लेना; ताँबा, चाँदी और सोना धातु होते हुए भी प्रतिचुंबकीय हैं।
- लौहचुंबकीय और अनुचुंबकीय को एक समझ लेना; दोनों में आकर्षण होता है, पर लौहचुंबकीय में वह कहीं अधिक प्रबल होता है और क्षेत्र हटने पर भी चुंबकत्व शेष रह सकता है।
- मानक ताप और दाब की शर्त को केवल औपचारिकता मान लेना; क्यूरी ताप से ऊपर लोहे का व्यवहार बदल जाता है, इसलिए शर्त सार्थक है।
- यह मान लेना कि क्यूरी ताप से ऊपर लोहा प्रतिचुंबकीय हो जाता है; वह अनुचुंबकीय होता है, प्रतिचुंबकीय नहीं।
इस परीक्षा का सामान्य विज्ञान खंड भौतिकी में प्रायः वर्गीकरण के प्रश्न पूछता है, और चुंबकीय पदार्थों का वर्गीकरण उनमें सबसे नियमित विषयों में है। प्रश्न तीन रूप ले सकता है: किसी पदार्थ की श्रेणी पूछना, किसी श्रेणी का उदाहरण पूछना, अथवा — जैसा यहाँ है — तीन एक श्रेणी के और एक दूसरी श्रेणी का रखकर विषम पद पूछ लेना। तीनों रूपों का उत्तर एक ही तैयारी से निकलता है: तीन श्रेणियों की परिभाषा, उनकी प्रवृत्ति का चिह्न, और प्रत्येक के तीन-चार पक्के उदाहरण। उदाहरण चुनते समय उन जोड़ों पर विशेष ध्यान दीजिए जो एक-दूसरे के पास दिखते हैं पर अलग श्रेणियों में हैं, क्योंकि परीक्षा वहीं से विकल्प उठाती है — नाइट्रोजन और ऑक्सीजन ऐसा ही जोड़ा है, और ताँबा तथा लोहा दूसरा। निषेधात्मक रूप में पूछे जाने पर पद्धति यह रखिए कि पहले चारों विकल्पों पर उनकी श्रेणी लिख डालिए और फिर विषम पद उठा लीजिए; सीधे उत्तर खोजने पर निषेध भूल जाने की संभावना बढ़ जाती है। जहाँ प्रश्न में तापमान या दाब की शर्त जुड़ी हो, वहाँ यह अवश्य पूछिए कि उस शर्त से उत्तर बदलता है या नहीं — प्रश्नकर्ता वह शर्त प्रायः किसी कारण से ही जोड़ता है।
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- (a)वह प्रतिचुंबकीय हो जाता है
- (b)वह अनुचुंबकीय हो जाता है
- (c)उसका लौहचुंबकत्व और प्रबल हो जाता है
- (d)उसका चुंबकीय व्यवहार पूर्णतः समाप्त हो जाता है और वह किसी क्षेत्र से प्रभावित नहीं होता
उत्तर(b) वह अनुचुंबकीय हो जाता है