विलियम बेवेरिज द्वारा दी गयी उनकी व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत अभिज्ञान किए गए आकस्मिक व्ययों का सही समूह निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- (a)अभाव, रोग, अनभिज्ञता, गंदगी और निष्क्रियता
- (b)अभाव, बीमारी, अशक्तता, गंदगी और निष्क्रियता
- (c)अभाव, रोग, वृद्धावस्था, गंदगी और बेरोजगारी
- (d)रोग, असमर्थता, वृद्धावस्था, बेरोजगारी और अनभिज्ञता
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) अभाव, रोग, अनभिज्ञता, गंदगी और निष्क्रियता। सर विलियम बेवेरिज ने 1942 में प्रस्तुत अपने प्रतिवेदन में इन्हीं पाँच को गिनाया था और इन्हें 'पुनर्निर्माण के मार्ग पर खड़े पाँच दैत्य' कहा था। प्रतिवेदन का पूरा नाम 'सामाजिक बीमा और संबद्ध सेवाएँ' है, वह नवंबर 1942 में प्रकाशित हुआ और उसी पर युद्धोत्तर ब्रिटेन का कल्याणकारी राज्य खड़ा हुआ — राष्ट्रीय बीमा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा दोनों उसी की संतानें हैं।
पहले हिन्दी स्तंभ की एक बात साफ़ कर लीजिए, क्योंकि उसी से भ्रम पैदा होता है। यहाँ अंग्रेज़ी के 'contingencies' के लिए 'आकस्मिक व्यय' लिखा गया है, जिससे लगता है कि किन्हीं ख़र्चों की सूची पूछी जा रही है। पूछा वह नहीं जा रहा। बेवेरिज ने जिन पाँच को अभिज्ञान किया वे ख़र्च नहीं, समाज की पाँच बुराइयाँ हैं — वे परिस्थितियाँ जिनसे लड़ने के लिए उन्होंने पूरी योजना बनाई। विकल्प पढ़ते समय यही ढूँढ़िए कि कौन-सी सूची इन पाँच बुराइयों की है।
सूची को पहचानने का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा उसका दायरा देखना है, रटा हुआ क्रम नहीं। बेवेरिज की पाँचों बुराइयाँ अलग-अलग नीति-क्षेत्रों की हैं और उनमें से केवल एक का इलाज नक़द भुगतान है। अभाव, यानी निर्धनता, सामाजिक बीमा से लड़ी जाती है। रोग स्वास्थ्य सेवा से। अनभिज्ञता, यानी शिक्षा का अभाव, विद्यालयों से। गंदगी, यानी आवास और बस्तियों की दुर्दशा, आवास-नीति से। और निष्क्रियता, यानी काम का न होना, रोज़गार-नीति से। इसीलिए सही सूची में शिक्षा और आवास से जुड़ी बुराइयाँ अवश्य दिखेंगी — 'अनभिज्ञता' और 'गंदगी'। जिस विकल्प में ये दोनों न हों, वह सूची पाँच दैत्यों की नहीं है।
एक चेतावनी भी साथ रखिए। बेवेरिज ने अपने प्रतिवेदन में आवश्यकता के आठ प्रमुख कारण अलग से गिनाए थे — बेरोज़गारी, नि:शक्तता, जीविका की हानि, सेवानिवृत्ति, स्त्री की विवाह-संबंधी आवश्यकताएँ, अंत्येष्टि व्यय, बचपन तथा शारीरिक रोग या असमर्थता। शेष तीनों विकल्प इसी दूसरी सूची में से मदें उठाकर बनाए गए हैं, और यही उन्हें विश्वसनीय बनाता है। प्रश्न पाँच दैत्यों की सूची पूछ रहा है, आवश्यकता के कारणों की नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)अभाव, बीमारी, अशक्तता, गंदगी और निष्क्रियता — यह सूची सही उत्तर के सबसे निकट है और इसीलिए सबसे भ्रामक — पाँच में से तीन मदें, अभाव, गंदगी और निष्क्रियता, वही हैं। भेद बीच की दो मदों में है। यहाँ 'रोग' की जगह 'बीमारी' और 'अनभिज्ञता' की जगह 'अशक्तता' रख दी गई है। अशक्तता बेवेरिज की उस दूसरी सूची की मद है जिसमें उन्होंने आवश्यकता के आठ कारण गिनाए थे; वह पाँच दैत्यों में नहीं है। असली नुक़सान अनभिज्ञता के हट जाने से होता है, क्योंकि वही वह दैत्य है जिसका इलाज किसी बीमा या भुगतान से नहीं, शिक्षा से होता है — और उसी की उपस्थिति बेवेरिज की योजना को केवल एक बीमा-योजना से बड़ा बनाती है। जिस सूची में शिक्षा वाली बुराई न हो, वह पाँच दैत्यों की सूची नहीं हो सकती।
- (c)अभाव, रोग, वृद्धावस्था, गंदगी और बेरोजगारी — इस सूची में तीन मदें सही हैं — अभाव, रोग और गंदगी — पर शेष दो बदल दी गई हैं। 'वृद्धावस्था' और 'बेरोजगारी' दोनों बेवेरिज की उस दूसरी सूची की मदें हैं जिसमें आवश्यकता के आठ कारण गिनाए गए थे; वहाँ सेवानिवृत्ति और बेरोज़गारी दोनों आते हैं। पाँच दैत्यों में वे नहीं हैं। बेरोज़गारी को लेकर सावधानी विशेष रूप से आवश्यक है, क्योंकि वह 'निष्क्रियता' के बहुत निकट लगती है। दोनों एक नहीं हैं: निष्क्रियता वह व्यापक बुराई है जिससे लड़ने के लिए पूर्ण रोज़गार की नीति चाहिए, जबकि बेरोज़गारी वह विशिष्ट आकस्मिकता है जिसके लिए बीमा से भुगतान किया जाता है। इस सूची से अनभिज्ञता और निष्क्रियता दोनों ग़ायब हैं, इसलिए यह पाँच दैत्यों की सूची नहीं बनती।
- (d)रोग, असमर्थता, वृद्धावस्था, बेरोजगारी और अनभिज्ञता — यह सूची सबसे दूर की है, क्योंकि इसमें से 'अभाव' ही निकाल दिया गया है — वही दैत्य जिसे बेवेरिज ने सबसे पहले रखा था और जिस पर सीधा हमला करने के लिए पूरी सामाजिक बीमा योजना बनी थी। बची हुई पाँच मदों में से 'असमर्थता', 'वृद्धावस्था' और 'बेरोजगारी' तीनों आवश्यकता के आठ कारणों वाली दूसरी सूची से आई हैं, जहाँ ये नि:शक्तता, सेवानिवृत्ति और बेरोज़गारी के रूप में मिलती हैं। केवल 'रोग' और 'अनभिज्ञता' पाँच दैत्यों की सूची से हैं। इस प्रकार यह विकल्प दो अलग सूचियों को मिलाकर बना है, और यही इस प्रश्न की मुख्य चाल है — जो परीक्षार्थी दोनों सूचियों को एक मान लेता है, उसे चारों विकल्प सही लगने लगते हैं।
अवधारणा
बेवेरिज प्रतिवेदन को पढ़ते समय दो सूचियाँ अलग-अलग याद रखनी पड़ती हैं, और परीक्षा ठीक इसी अलगाव की जाँच करती है। पहली सूची पाँच दैत्यों की है — अभाव, रोग, अनभिज्ञता, गंदगी और निष्क्रियता — जिन्हें बेवेरिज ने पुनर्निर्माण के मार्ग पर खड़ी बाधाएँ कहा। ये पाँच किसी बीमा योजना की मदें नहीं हैं, बल्कि समाज की पाँच बड़ी बुराइयाँ हैं, और उनसे लड़ने के लिए पाँच अलग-अलग नीति-क्षेत्र चाहिए — सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और रोज़गार। दूसरी सूची आवश्यकता के प्रमुख कारणों की है — बेरोज़गारी, नि:शक्तता, जीविका की हानि, सेवानिवृत्ति, स्त्री की विवाह-संबंधी आवश्यकताएँ, अंत्येष्टि व्यय, बचपन तथा शारीरिक रोग या असमर्थता। यह दूसरी सूची तकनीकी है और सीधे बीमा की भाषा में है, क्योंकि हर मद वह अवसर है जिस पर योजना से भुगतान होगा। प्रतिवेदन का ढाँचा भी याद रखने योग्य है: श्रमिक, नियोजक और राज्य तीनों के अंशदान से एक निधि बने, सबके लिए एक समान दर पर, और उससे सबको न्यूनतम निर्वाह की गारंटी मिले।
बेवेरिज प्रतिवेदन आधुनिक सामाजिक सुरक्षा का वह दस्तावेज़ है जिससे लगभग हर देश की व्यवस्था ने कुछ न कुछ लिया, इसलिए वह श्रम-विधि और सामाजिक सुरक्षा के हर पाठ्यक्रम में आता है। इस प्रश्नपत्र में उसकी जगह भी सोच-समझकर रखी गई है — पिछले दो प्रश्नों में सामाजिक सुरक्षा का अंतर्राष्ट्रीय आधार-वाक्य और भारत का पहला सामाजिक बीमा कानून आया, यहाँ उस विचार का सैद्धांतिक ढाँचा आता है, और आगे के दो प्रश्नों में वर्तमान भारतीय योजनाएँ। तिथियों की एक शृंखला भी ध्यान में रखिए, क्योंकि परीक्षा उन्हें जोड़कर पूछती है: 1942 का बेवेरिज प्रतिवेदन, 1944 की फिलाडेल्फिया घोषणा, 1948 की सार्वभौम घोषणा और उसी वर्ष भारत का कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम। ये चारों एक ही दशक के हैं और एक ही विचार की अलग-अलग अभिव्यक्तियाँ हैं।
मुख्य तथ्य
- बेवेरिज के पाँच दैत्य हैं — अभाव, रोग, अनभिज्ञता, गंदगी और निष्क्रियता, जिन्हें उन्होंने पुनर्निर्माण के मार्ग की बाधाएँ कहा।
- प्रतिवेदन का नाम 'सामाजिक बीमा और संबद्ध सेवाएँ' है और वह नवंबर 1942 में प्रकाशित हुआ।
- प्रतिवेदन के लेखक सर विलियम बेवेरिज थे, जो उदारवादी परंपरा के अर्थशास्त्री थे।
- बेवेरिज ने श्रमिक, नियोजक और राज्य तीनों के अंशदान से बनने वाली एक सामाजिक बीमा निधि का प्रस्ताव रखा था।
- प्रतिवेदन युद्धोत्तर ब्रिटेन के कल्याणकारी राज्य का आधार बना — राष्ट्रीय बीमा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा उसी से निकले।
- पाँच दैत्यों से अलग, बेवेरिज ने आवश्यकता के आठ प्रमुख कारण भी गिनाए थे, और परीक्षा दोनों सूचियों को मिला देती है।
- आवश्यकता के आठ कारण हैं — बेरोज़गारी, नि:शक्तता, जीविका की हानि, सेवानिवृत्ति, स्त्री की विवाह-संबंधी आवश्यकताएँ, अंत्येष्टि व्यय, बचपन तथा शारीरिक रोग या असमर्थता।
- पाँच दैत्यों में से केवल अभाव का इलाज सीधे नक़द भुगतान है; शेष चार शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोज़गार की नीतियों से जुड़े हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पाँच दैत्यों की सूची और आवश्यकता के आठ कारणों की सूची को एक मान लेना — यही इस प्रश्न की मुख्य चाल है।
- 'निष्क्रियता' और 'बेरोजगारी' को पर्यायवाची मान लेना, जबकि पहला दैत्य है और दूसरा आकस्मिकता।
- 'अनभिज्ञता' को सूची से बाहर मान लेना, क्योंकि वह बीमा से नहीं जुड़ती — पर वही उसे दैत्य बनाती है।
- 'अभाव' के बिना बनी सूची को स्वीकार कर लेना, जबकि वही पहला और मुख्य दैत्य है।
- हिन्दी के 'आकस्मिक व्यय' को पढ़कर ख़र्चों की सूची ढूँढ़ने लगना, जबकि पूछी पाँच बुराइयाँ जा रही हैं।
बेवेरिज पर प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला रूप यही — पाँच दैत्यों की सही सूची चुनवाना, जिसमें विकल्प आवश्यकता के आठ कारणों में से मदें उठाकर बनाए जाते हैं, ताकि हर विकल्प आधा-सही लगे। दूसरा रूप एकल-मद का होता है, जिसमें पूछा जाता है कि दिए गए चार में से कौन-सा बेवेरिज का दैत्य नहीं है; ऐसे प्रश्न में केवल सूची याद रखना पर्याप्त है। तीसरा रूप संदर्भ का होता है — प्रतिवेदन का वर्ष, उसका नाम, उसका देश, अथवा यह कि वह किस व्यवस्था का आधार बना; यहाँ 1942, 'सामाजिक बीमा और संबद्ध सेवाएँ' और ब्रिटेन तीनों याद रखने पड़ते हैं। तीनों रूपों की तैयारी एक साथ हो सकती है, यदि पाँच दैत्यों को उनके नीति-क्षेत्रों के साथ याद किया जाए — निर्धनता, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और रोज़गार। इससे सूची भी याद रहती है और उसका अर्थ भी।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2017_Q87खोलें व हल करें →For the first time in India, medical benefit as a non-cash benefit was provided under
- (a) the Employees’ State Insurance Act, 1948
- (b) the Factories Act, 1948
- (c) the Maternity Benefit Act, 1961
- (d) the Mines Act, 1952
उत्तर(a) the Employees’ State Insurance Act, 1948
इसी प्रश्नपत्र का पिछला प्रश्न — भारत में पहली बार ग़ैर-नक़द चिकित्सा प्रसुविधा किस अधिनियम से मिली; बेवेरिज के 'रोग' वाले दैत्य का भारतीय उत्तर वहीं दिखता है।
EPFO_EOAO_2017_Q86खोलें व हल करें →“Everyone as a member of the society has the right to social security, and is entitled to realization through national efforts and international cooperation and in accordance with the organization and resources of each state of economic, social and cultural rights indispensable for his dignity and free development of his personality.” This statement which is emphasizing the importance of social security has been expressed in which of the following?
- (a) Universal Declaration of Human Rights
- (b) Philadelphia Declaration of the ILO
- (c) Report of the First National Commission on Labour
- (d) Directive Principles of State Policy of the Indian Constitution
उत्तर(a) Universal Declaration of Human Rights
इसी प्रश्नपत्र का प्रश्न — सामाजिक सुरक्षा के अधिकार वाला उद्धरण किस दस्तावेज़ का है; 1942 का यह प्रतिवेदन और 1948 की वह घोषणा एक ही दशक के दो पड़ाव हैं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
बेवेरिज प्रतिवेदन में गिनाए गए पाँच दैत्यों में से निम्नलिखित में से कौन-सा एक सम्मिलित नहीं है?
- (a)अभाव
- (b)अनभिज्ञता
- (c)बेरोजगारी
- (d)गंदगी
उत्तर(c) बेरोजगारी — पाँचवाँ दैत्य 'निष्क्रियता' है; बेरोज़गारी बेवेरिज की आवश्यकता के कारणों वाली अलग सूची की मद है।
- practice — not a real PYQ
विलियम बेवेरिज के 1942 के प्रतिवेदन का शीर्षक निम्नलिखित में से कौन-सा था?
- (a)सामाजिक बीमा और संबद्ध सेवाएँ
- (b)पूर्ण रोज़गार वाला स्वतंत्र समाज
- (c)श्रम और सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिवेदन
- (d)राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा प्रतिवेदन
उत्तर(a) सामाजिक बीमा और संबद्ध सेवाएँ — नवंबर 1942 में प्रकाशित यही वह प्रतिवेदन है जिसमें पाँच दैत्य गिनाए गए।