गैर-नगदी लाभ के रूप में चिकित्सा लाभ, भारत में पहली बार किसके अंतर्गत प्रदान किया गया?
- (a)कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948
- (b)फैक्टरी अधिनियम, 1948
- (c)प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961
- (d)खान अधिनियम, 1952
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948। निर्णायक शब्द प्रश्न में ही रखा है — 'गैर-नगदी'। चारों विकल्पों में चिकित्सा से जुड़ा कुछ न कुछ है, पर उनमें केवल एक ऐसा अधिनियम है जो चिकित्सा को नक़द भुगतान के रूप में नहीं, बल्कि सेवा के रूप में देता है।
अधिनियम की धारा 46 बीमाकृत व्यक्तियों को मिलने वाली प्रसुविधाओं की सूची देती है, और वह सूची छह की है — बीमारी प्रसुविधा, प्रसूति प्रसुविधा, नि:शक्तता प्रसुविधा, आश्रितजन प्रसुविधा, चिकित्सा प्रसुविधा और अंत्येष्टि व्यय। इनमें पाँच रुपयों में चुकाई जाती हैं। छठी, धारा 46(1)(ङ) की चिकित्सा प्रसुविधा, बीमाकृत व्यक्ति के लिए चिकित्सा उपचार और परिचर्या है — यानी वस्तु-रूप में दी जाने वाली प्रसुविधा, जो पैसे के रूप में नहीं, सेवा के रूप में पहुँचती है। यही इसे 'गैर-नगदी' बनाता है, और यही प्रश्न पूछ रहा है।
यह प्रसुविधा काग़ज़ पर नहीं रहती। कर्मचारी राज्य बीमा निगम अपनी औषधालयों, अस्पतालों और पैनल पर रखे चिकित्सकों के जाल के माध्यम से उपचार देता है, और वह बीमाकृत व्यक्ति तक ही सीमित नहीं रहता — उसके परिवार को भी मिलता है। इस ढाँचे को खड़ा करने के लिए योगदान लिया जाता है, इसलिए यह कल्याण की कोई एकतरफ़ा बाध्यता नहीं, बल्कि सामाजिक बीमा है।
भारत के सामाजिक सुरक्षा के इतिहास में इस अधिनियम की जगह भी यही उत्तर पक्का करती है। यह भारत का पहला बड़ा सामाजिक बीमा कानून है। इसकी पृष्ठभूमि मार्च 1943 में बी. पी. अदरकर को सौंपा गया वह काम है, जिसमें उन्हें औद्योगिक श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा की योजना बनानी थी; योजना का उद्घाटन 24 फरवरी 1952 को कानपुर और दिल्ली में हुआ। शेष तीनों विकल्प या तो 1948 के ही हैं पर बीमा नहीं देते, या 1948 के बाद के हैं — इसलिए 'पहली बार' वाली कसौटी पर भी वे टिक नहीं सकते।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)फैक्टरी अधिनियम, 1948 — फैक्टरी अधिनियम, 1948 इस प्रश्न का सबसे भ्रामक विकल्प है, और उसका एक कारण केवल तारीख़ है — दोनों अधिनियम 1948 के हैं, इसलिए 'पहली बार' वाली कसौटी उन्हें अलग नहीं कर पाती और निर्णय पूरी तरह प्रसुविधा की प्रकृति पर आ जाता है। इस अधिनियम में चिकित्सा से जुड़े उपबंध अवश्य हैं: कारख़ाने में प्राथमिक चिकित्सा की सामग्री रखनी होती है और बड़े कारख़ानों में ऐंबुलेंस कक्ष की व्यवस्था करनी होती है। पर ये अधिभोगी पर डाले गए सुरक्षा और कल्याण के कर्तव्य हैं, किसी बीमाकृत व्यक्ति का प्रवर्तनीय हक़ नहीं। इनमें न कोई अंशदान है, न कोई बीमा निधि, न उपचार का ऐसा अधिकार जो श्रमिक के परिवार तक पहुँचता हो। दुर्घटना के तुरंत बाद की सहायता और बीमारी में निरंतर चिकित्सा देखभाल दो अलग चीज़ें हैं, और प्रश्न दूसरी वाली पूछ रहा है।
- (c)प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 — प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 दो कारणों से नहीं बनता। पहला कारण प्रकृति का है — इस अधिनियम की मुख्य प्रसुविधा नक़द है। पात्र महिला को अनुपस्थिति की अवधि के लिए औसत दैनिक मज़दूरी की दर से भुगतान मिलता है, और उसके साथ नक़द चिकित्सा बोनस भी, जो तब देय होता है जब नियोजक स्वयं नि:शुल्क प्रसव-पूर्व तथा प्रसवोत्तर देखभाल उपलब्ध न कराए। यानी अधिनियम चिकित्सा देखभाल को प्रोत्साहित करता है, पर जो हक़ वह देता है वह रुपयों में है। दूसरा कारण कालक्रम का है — यह 1961 का अधिनियम है, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम से तेरह वर्ष बाद का, इसलिए 'पहली बार' वह किसी भी हाल में नहीं हो सकता। धारा 5(3) के अनुसार प्रसुविधा की अधिकतम अवधि छब्बीस सप्ताह है, और दो या दो से अधिक जीवित संतानों वाली महिला के लिए बारह सप्ताह।
- (d)खान अधिनियम, 1952 — खान अधिनियम, 1952 में स्वास्थ्य से जुड़े उपबंध हैं, पर वे उसी कोटि के हैं जिस कोटि के फैक्टरी अधिनियम के हैं — प्राथमिक चिकित्सा और चिकित्सा सामग्री रखने की सुरक्षा-बाध्यताएँ, जो खान के स्वामी, अभिकर्ता और प्रबंधक पर डाली गई हैं। ये किसी बीमा योजना की प्रसुविधाएँ नहीं हैं। इस अधिनियम में चिकित्सा परीक्षा तथा अनुपयुक्त पाए गए व्यक्ति के उपचार और नि:शक्तता प्रतिकर से जुड़ी विस्तृत व्यवस्था धारा 9क में है, पर वह 1983 के संशोधन से जोड़ी गई और उसका ढाँचा भी नियोजक के दायित्व का है, सामाजिक बीमा का नहीं। इसके अलावा तारीख़ स्वयं इस विकल्प को काट देती है — 1952, यानी 1948 के बाद, इसलिए यह 'पहली बार' वाला अधिनियम हो ही नहीं सकता। इसका दायरा भी केवल खानों तक सीमित है।
अवधारणा
सामाजिक सुरक्षा की प्रसुविधाएँ दो कोटियों में बँटती हैं, और यही विभाजन इस प्रश्न का पूरा आधार है। नक़द प्रसुविधा में लाभार्थी को रुपये मिलते हैं — बीमारी, प्रसूति, नि:शक्तता, आश्रितजन और अंत्येष्टि से जुड़े भुगतान इसी कोटि के हैं, और उनका काम खोई हुई आय की भरपाई करना है। वस्तु-रूप या गैर-नगदी प्रसुविधा में लाभार्थी को सेवा मिलती है — चिकित्सा उपचार, परिचर्या, दवाइयाँ, अस्पताल में भर्ती — और उसका काम आय की भरपाई नहीं, बल्कि आवश्यकता की सीधी पूर्ति है। कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की धारा 46 में दोनों कोटियाँ एक साथ रखी गई हैं, और इसी कारण वह भारत का पहला ऐसा कानून बनता है जो चिकित्सा को सेवा के रूप में देता है। इसके साथ दूसरा भेद भी याद रखिए — सामाजिक बीमा और नियोजक-दायित्व का। सामाजिक बीमा में अंशदान से एक निधि बनती है और उससे प्रसुविधा दी जाती है; नियोजक-दायित्व में कानून सीधे नियोजक पर भुगतान या सुविधा देने का भार डालता है। फैक्टरी अधिनियम, खान अधिनियम और प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम दूसरी श्रेणी के हैं, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम पहली का।
यह प्रश्न श्रम-विधि खंड के सामाजिक सुरक्षा उपखंड में है और उसी शृंखला की दूसरी कड़ी है — पहले सामाजिक सुरक्षा का अंतर्राष्ट्रीय आधार-वाक्य पूछा गया, अब भारत का पहला बड़ा कानून, और आगे बेवेरिज की योजना तथा दो वर्तमान भारतीय योजनाएँ आती हैं। कर्मचारी राज्य बीमा से जुड़े प्रश्न इस परीक्षा में विशेष रूप से आते हैं, क्योंकि पद स्वयं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन का है और दोनों संगठन भारत के संगठित क्षेत्र की सामाजिक सुरक्षा के दो स्तंभ हैं। इसी प्रश्नपत्र में कर्मचारी राज्य बीमा निगम का उल्लेख एक और प्रश्न में भी आता है, जहाँ उसे केन्द्रीय स्तर के सांविधिक तंत्र के रूप में पहचानना होता है। इसलिए इस अधिनियम की तीन बातें एक साथ याद रखिए — निगम एक सांविधिक निकाय है, धारा 46 छह प्रसुविधाएँ देती है, और उनमें चिकित्सा प्रसुविधा अकेली वस्तु-रूप की है।
मुख्य तथ्य
- कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 भारत का पहला बड़ा सामाजिक बीमा कानून है और चिकित्सा को सेवा के रूप में देने वाला पहला अधिनियम भी।
- अधिनियम की धारा 46 छह प्रसुविधाएँ गिनाती है — बीमारी, प्रसूति, नि:शक्तता, आश्रितजन, चिकित्सा और अंत्येष्टि व्यय।
- धारा 46 की छह में से पाँच प्रसुविधाएँ नक़द में मिलती हैं; केवल चिकित्सा प्रसुविधा वस्तु-रूप में, उपचार और परिचर्या के रूप में।
- चिकित्सा प्रसुविधा धारा 46(1)(ङ) में है और वह बीमाकृत व्यक्ति के साथ उसके परिवार तक भी पहुँचती है।
- उपचार निगम की औषधालयों, अस्पतालों और पैनल पर रखे चिकित्सकों के माध्यम से दिया जाता है।
- इस अधिनियम की पृष्ठभूमि मार्च 1943 में बी. पी. अदरकर को सौंपा गया औद्योगिक श्रमिकों के स्वास्थ्य बीमा का प्रतिवेदन है।
- कर्मचारी राज्य बीमा योजना का उद्घाटन 24 फरवरी 1952 को कानपुर और दिल्ली में हुआ।
- प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961 की धारा 5(3) के अनुसार अधिकतम अवधि छब्बीस सप्ताह और दो या अधिक जीवित संतानों पर बारह सप्ताह है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- फैक्टरी अधिनियम चुन लेना, क्योंकि वह भी 1948 का है — तारीख़ बराबर है, प्रसुविधा की प्रकृति नहीं।
- प्राथमिक चिकित्सा और ऐंबुलेंस कक्ष जैसी सुरक्षा-बाध्यताओं को बीमाकृत चिकित्सा प्रसुविधा मान लेना।
- प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम के चिकित्सा बोनस को वस्तु-रूप की प्रसुविधा समझ लेना, जबकि वह नक़द है।
- 'पहली बार' शब्द को अनदेखा कर देना, जिससे 1952 और 1961 के अधिनियम स्वतः बाहर हो जाते हैं।
- चिकित्सा प्रसुविधा को केवल बीमाकृत व्यक्ति तक सीमित मान लेना, जबकि वह परिवार को भी मिलती है।
इस अधिनियम पर प्रश्न चार दिशाओं से आते हैं। पहली दिशा प्रसुविधाओं की है — धारा 46 की सूची में से कोई प्रसुविधा देकर पूछना कि वह नक़द है या वस्तु-रूप की, अथवा यह पूछना कि सूची में कौन-सी प्रसुविधा नहीं है। दूसरी दिशा संख्याओं की है — अंशदान की दर, मज़दूरी की सीमा, प्रतीक्षा अवधि और अंशदान अवधि से जुड़े प्रश्न, जिनमें आँकड़े समय के साथ बदले हैं, इसलिए प्रश्नपत्र के वर्ष का ध्यान रखना पड़ता है। तीसरी दिशा संस्थागत है — निगम, स्थायी समिति और चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् की संरचना तथा उनका सांविधिक स्वरूप। चौथी दिशा इतिहास की है — अदरकर प्रतिवेदन, 1952 का उद्घाटन और अधिनियम का भारत के पहले सामाजिक बीमा कानून होना। इस प्रश्न की तरह के 'पहली बार' वाले प्रश्नों के लिए एक ही तैयारी काम आती है: हर अधिनियम का वर्ष और उसकी मुख्य प्रसुविधा का रूप साथ-साथ याद रखिए।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 की धारा 46 में गिनाई गई प्रसुविधाओं में से कौन-सी वस्तु-रूप में दी जाती है?
- (a)बीमारी प्रसुविधा
- (b)चिकित्सा प्रसुविधा
- (c)आश्रितजन प्रसुविधा
- (d)अंत्येष्टि व्यय
उत्तर(b) चिकित्सा प्रसुविधा — यही एकमात्र प्रसुविधा है जो उपचार और परिचर्या के रूप में मिलती है, शेष रुपयों में चुकाई जाती हैं।
- practice — not a real PYQ
कर्मचारी राज्य बीमा योजना का उद्घाटन सबसे पहले किस नगर में किया गया था?
- (a)मुंबई
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उत्तर(c) कानपुर — योजना का उद्घाटन 24 फरवरी 1952 को कानपुर और दिल्ली में हुआ था।