‘‘समाज के एक सदस्य के रूप में प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है, और प्रत्येक राज्य के संसाधनों एवं संगठन के अनुसार तथा राष्ट्रीय प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से, अपने व्यक्तित्व के स्वतंत्र विकास और अपनी मान-मर्यादा के लिए अपरिहार्य आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों की प्राप्ति का वह हकदार है।’’ सामाजिक सुरक्षा के महत्त्व को बल देने वाला यह कथन निम्नलिखित में से किसमें अभिव्यक्त किया गया है?
- (a)मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा
- (b)ILO की फिलाडेल्फिया घोषणा
- (c)प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग की रिपोर्ट
- (d)भारत के संविधान में राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा। उद्धृत वाक्य सार्वभौम घोषणा का अनुच्छेद 22 है — वही अनुच्छेद जो 'सामाजिक सुरक्षा' को नाम लेकर एक अधिकार के रूप में स्थापित करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह घोषणा 10 दिसंबर 1948 को पेरिस में संकल्प 217 A (III) द्वारा अंगीकार की थी; इसमें कुल तीस अनुच्छेद हैं।
यदि पाठ याद न हो तब भी उत्तर भाषा की परख से निकल आता है, और यही इस प्रश्न का सिखाने योग्य कौशल है। तीन संकेत देखिए। पहला, वाक्य का कर्ता 'प्रत्येक व्यक्ति' है, कोई श्रमिक-वर्ग या कोई देश-विशेष का नागरिक नहीं। दूसरा, वह 'अधिकार है' और 'हकदार है' कहता है — यानी अधिकारों की भाषा, न कि लक्ष्यों, कार्यक्रमों या सिफ़ारिशों की। तीसरा, वह 'प्रत्येक राज्य के संसाधनों' और 'अंतर्राष्ट्रीय सहयोग' की बात करता है, यानी बहुवचन में सब राज्यों को संबोधित करता है। ये तीनों लक्षण एक साथ केवल किसी सार्वभौम मानवाधिकार दस्तावेज़ में मिलते हैं — किसी एक संगठन के उद्देश्य-पत्र में नहीं, किसी एक देश की जाँच-रिपोर्ट में नहीं, और किसी एक देश के संविधान में भी नहीं।
एक बात ध्यान में रखिए, क्योंकि यह प्रश्नपत्र की अपनी बात है। पुस्तिका में छपा उद्धरण संयुक्त राष्ट्र के मूल पाठ से हूबहू नहीं है। अंग्रेज़ी स्तंभ चार जगह मूल से हटता है — वह 'a member of the society' छापता है जबकि मूल में 'as a member of society' है; 'national efforts' छापता है जबकि मूल में एकवचन 'national effort' है; 'each state of economic, social and cultural rights' छापता है जबकि मूल में 'each State, of the economic, social and cultural rights' है; और अंत में 'free development' छापता है जबकि मूल में 'the free development' है। हिन्दी स्तंभ में वाक्यांशों का क्रम भी अंग्रेज़ी से भिन्न है — यहाँ 'राष्ट्रीय प्रयासों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग' राज्य के संसाधनों के बाद आता है, अंग्रेज़ी में पहले। इनमें से कोई अंतर उत्तर नहीं बदलता, क्योंकि विचार, ढाँचा और शब्दावली तीनों अनुच्छेद 22 की ही हैं।
घोषणा के भीतर पड़ोसी अनुच्छेद भी याद रखने योग्य हैं, क्योंकि परीक्षा उन्हें आपस में बदलकर पूछती है। अनुच्छेद 23 काम का अधिकार, रोज़गार का स्वतंत्र चुनाव, काम की न्यायसंगत दशाएँ और समान काम के लिए समान वेतन देता है। अनुच्छेद 25 समुचित जीवन-स्तर का अधिकार देता है और बेकारी, बीमारी, नि:शक्तता, वैधव्य तथा वृद्धावस्था में सुरक्षा की बात करता है। पर 'सामाजिक सुरक्षा' पद जिस अनुच्छेद में सीधे आता है, वह 22 है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)ILO की फिलाडेल्फिया घोषणा — फिलाडेल्फिया घोषणा 1944 इस प्रश्न का सबसे भ्रामक विकल्प है, और इसका कारण यह है कि वह सचमुच सामाजिक सुरक्षा की बात करती है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन ने अपने 26वें अधिवेशन में 10 मई 1944 को इसे फिलाडेल्फिया में अंगीकार किया और 1946 में यह ILO के संविधान के साथ नत्थी कर दी गई। इसका भाग III संगठन को उन कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का दायित्व देता है जिनसे 'सामाजिक सुरक्षा उपायों का विस्तार' हो, ताकि जिन्हें ऐसे संरक्षण की आवश्यकता है उन सबको आधारभूत आय और व्यापक चिकित्सा देखभाल मिल सके। इसके बावजूद उद्धरण इसका नहीं है। फिलाडेल्फिया घोषणा एक संगठन के उद्देश्यों और कार्यक्रमों का दस्तावेज़ है — 'श्रम कोई पण्य वस्तु नहीं है' और 'कहीं भी गरीबी सर्वत्र समृद्धि के लिए ख़तरा है' जैसे सिद्धांत उसी की पहचान हैं — और वह श्रम तथा श्रमिक की भाषा बोलती है। यहाँ उद्धृत वाक्य 'समाज के एक सदस्य के रूप में प्रत्येक व्यक्ति' की बात करता है और उसे व्यक्तित्व के विकास तथा मान-मर्यादा से जोड़ता है, जो अनुच्छेद 22 की अपनी शब्दावली है।
- (c)प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग की रिपोर्ट — प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग 24 दिसंबर 1966 को न्यायमूर्ति पी. बी. गजेन्द्रगडकर की अध्यक्षता में गठित हुआ और उसने अगस्त 1969 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। वह भारत के भीतर की एक जाँच थी — भारतीय मज़दूरी नीति, औद्योगिक संबंध, ट्रेड यूनियन और भारतीय श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर सिफ़ारिशें, जो भारत सरकार को संबोधित थीं। उद्धृत वाक्य का पता ही दूसरा है: वह 'प्रत्येक राज्य' को बहुवचन में संबोधित करता है और 'अंतर्राष्ट्रीय सहयोग' को प्राप्ति का साधन बताता है, जो किसी एक देश की आयोग-रिपोर्ट की भाषा हो ही नहीं सकती। कालक्रम भी इसी ओर ले जाता है — सार्वभौम घोषणा 1948 की है और यह आयोग उससे अठारह वर्ष बाद बना, इसलिए 1948 के पाठ का स्रोत 1969 की रिपोर्ट नहीं हो सकती। रिपोर्ट का महत्त्व अपनी जगह बना रहता है, पर यह उद्धरण उसका नहीं है।
- (d)भारत के संविधान में राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व — राज्य की नीति के निदेशक तत्त्व संविधान के भाग IV में, अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं, और उनमें सामाजिक सुरक्षा से जुड़े तत्त्व भी हैं — अनुच्छेद 41 बेकारी, बुढ़ापा, बीमारी और नि:शक्तता की दशाओं में लोक सहायता की बात करता है, अनुच्छेद 42 काम की न्यायसंगत तथा मानवोचित दशाओं और प्रसूति सहायता की, और अनुच्छेद 43 निर्वाह मज़दूरी की। इतना निकट होने पर भी यह उद्धरण उनका नहीं हो सकता, और कारण दस्तावेज़ की बनावट में है। निदेशक तत्त्व राज्य को दिए गए निदेश हैं, व्यक्ति को दिए गए अधिकार नहीं, और अनुच्छेद 37 स्वयं कहता है कि वे किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होंगे। उद्धरण इसके ठीक उलट 'अधिकार है' और 'हकदार है' कहता है। साथ ही वह 'प्रत्येक राज्य' और 'अंतर्राष्ट्रीय सहयोग' की बात करता है, जबकि भाग IV का हर अनुच्छेद केवल भारत के राज्य को संबोधित है।
अवधारणा
स्रोत पहचानने वाले प्रश्नों में उद्धरण की भाषा ही सबसे भरोसेमंद सुराग होती है, और उसे तीन कसौटियों पर परखा जा सकता है। पहली, कर्ता कौन है — 'प्रत्येक व्यक्ति' और 'हर कोई' सार्वभौम मानवाधिकार दस्तावेज़ों की पहचान है, 'श्रमिक' और 'नियोजक' श्रम-दस्तावेज़ों की, और 'राज्य' संविधान के निदेशक भाग की। दूसरी, क्रिया किस भाव में है — 'अधिकार है' अधिकार-पत्र की भाषा है, 'प्रयास करेगा' अथवा 'सुनिश्चित करेगा' निदेश की, और 'सिफ़ारिश की जाती है' किसी आयोग की रिपोर्ट की। तीसरी, संबोधन का दायरा क्या है — 'प्रत्येक राज्य' और 'अंतर्राष्ट्रीय सहयोग' बहुपक्षीय दस्तावेज़ का पता देते हैं, जबकि एक देश की रिपोर्ट या एक देश का संविधान अपने ही राज्य को संबोधित करता है। सामाजिक सुरक्षा के संदर्भ में चार पाठ बार-बार आमने-सामने आते हैं: सार्वभौम घोषणा 1948 का अनुच्छेद 22, ILO की फिलाडेल्फिया घोषणा 1944, प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग 1969 की रिपोर्ट और भारतीय संविधान का भाग IV। चारों सामाजिक सुरक्षा को महत्त्वपूर्ण मानते हैं, पर चारों उसे अलग-अलग व्याकरण में कहते हैं, और परीक्षा उसी अंतर की जाँच करती है।
सामाजिक सुरक्षा इस प्रश्नपत्र के श्रम-विधि खंड का केंद्रीय विषय है, और यह प्रश्न उस खंड के अंतिम पाँच प्रश्नों में पहला है — इसके बाद ESI अधिनियम, बेवेरिज की योजना, अटल पेंशन योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना आते हैं। क्रम यों बनता है कि पहले अंतर्राष्ट्रीय आधार-वाक्य पूछा जाता है, फिर भारत का पहला बड़ा सामाजिक बीमा कानून, फिर आधुनिक कल्याणकारी राज्य की मूल योजना, और अंत में दो वर्तमान भारतीय योजनाएँ। तैयारी के लिए यही क्रम उपयोगी है — 1948 की सार्वभौम घोषणा और 1944 की फिलाडेल्फिया घोषणा को एक साथ पढ़िए, क्योंकि दोनों युद्ध के तुरंत बाद के वर्षों की हैं और दोनों सामाजिक सुरक्षा को नाम लेकर उठाती हैं, पर एक अधिकार की भाषा में और दूसरी संगठन के उद्देश्यों की भाषा में। इसी प्रश्नपत्र में ILO और फिलाडेल्फिया घोषणा पर एक अलग प्रश्न भी है, इसलिए दोनों दस्तावेज़ों का अंतर याद रखना दोहरा लाभ देता है।
मुख्य तथ्य
- उद्धृत वाक्य मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा का अनुच्छेद 22 है, जो सामाजिक सुरक्षा के अधिकार को नाम लेकर स्थापित करता है।
- सार्वभौम घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसंबर 1948 को पेरिस में संकल्प 217 A (III) द्वारा अंगीकार की; इसमें तीस अनुच्छेद हैं।
- अनुच्छेद 22 प्राप्ति के दो साधन बताता है — राष्ट्रीय प्रयास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग — तथा उसे प्रत्येक राज्य के संगठन और संसाधनों से जोड़ता है।
- सार्वभौम घोषणा का अनुच्छेद 23 काम का अधिकार, रोज़गार का स्वतंत्र चुनाव और समान काम के लिए समान वेतन देता है।
- सार्वभौम घोषणा का अनुच्छेद 25 समुचित जीवन-स्तर तथा बेकारी, बीमारी, नि:शक्तता, वैधव्य और वृद्धावस्था में सुरक्षा की बात करता है।
- फिलाडेल्फिया घोषणा 10 मई 1944 को अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के 26वें अधिवेशन में अंगीकार हुई और 1946 में ILO के संविधान से नत्थी कर दी गई।
- प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग 24 दिसंबर 1966 को न्यायमूर्ति पी. बी. गजेन्द्रगडकर की अध्यक्षता में बना और अगस्त 1969 में उसने रिपोर्ट सौंपी।
- निदेशक तत्त्व भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक हैं और अनुच्छेद 37 के अनुसार वे किसी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
- इस पुस्तिका का उद्धरण संयुक्त राष्ट्र के मूल पाठ से चार जगह भिन्न छपा है, और हिन्दी स्तंभ में वाक्यांशों का क्रम भी अंग्रेज़ी से अलग है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- फिलाडेल्फिया घोषणा को चुन लेना, क्योंकि वह भी सामाजिक सुरक्षा की बात करती है — पर वह संगठन के उद्देश्य कहती है, व्यक्ति का अधिकार नहीं।
- सामाजिक सुरक्षा का अनुच्छेद 25 मान लेना; 25 जीवन-स्तर का है, 'सामाजिक सुरक्षा' पद अनुच्छेद 22 में आता है।
- 'अंतर्राष्ट्रीय सहयोग' जैसे बहुपक्षीय संकेत को अनदेखा करके किसी घरेलू दस्तावेज़ का विकल्प चुन लेना।
- निदेशक तत्त्वों को अधिकारों की तरह पढ़ लेना, जबकि अनुच्छेद 37 उन्हें न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं मानता।
- पुस्तिका के उद्धरण को मूल पाठ मान लेना — यहाँ छपा पाठ मूल से कुछ शब्दों में भिन्न है।
स्रोत-पहचान वाले प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला यही — कोई प्रसिद्ध वाक्य देकर पूछना कि वह किस दस्तावेज़ का है; यहाँ विकल्प जान-बूझकर एक ही विषय-क्षेत्र से लिए जाते हैं, ताकि केवल विषय पहचानने से काम न चले। दूसरा रूप उलटा होता है — दस्तावेज़ का नाम देकर पूछना कि उसमें कौन-सा उपबंध है, जैसे 'सार्वभौम घोषणा का कौन-सा अनुच्छेद सामाजिक सुरक्षा से संबंधित है'; इसका उत्तर संख्या में देना पड़ता है, इसलिए 22, 23 और 25 अलग-अलग याद रखने पड़ते हैं। तीसरा रूप जोड़ी मिलाने का होता है, जिसमें एक स्तंभ में दस्तावेज़ और दूसरे में वर्ष अथवा विषय रहता है — 1944 फिलाडेल्फिया, 1948 सार्वभौम घोषणा, 1952 सामाजिक सुरक्षा अभिसमय, 1969 प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग। तीनों रूपों की एक ही तैयारी है: हर दस्तावेज़ का वर्ष, जारी करने वाला निकाय और उसका एक पहचान-वाक्य साथ-साथ याद कीजिए।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2017_Q87खोलें व हल करें →For the first time in India, medical benefit as a non-cash benefit was provided under
- (a) the Employees’ State Insurance Act, 1948
- (b) the Factories Act, 1948
- (c) the Maternity Benefit Act, 1961
- (d) the Mines Act, 1952
उत्तर(a) the Employees’ State Insurance Act, 1948
इसी प्रश्नपत्र का अगला प्रश्न — भारत में पहली बार ग़ैर-नक़द चिकित्सा प्रसुविधा किस अधिनियम के अंतर्गत मिली; वहाँ यही सामाजिक सुरक्षा का विचार भारतीय कानून में उतरता है।
EPFO_EOAO_2017_Q88खोलें व हल करें →Which one of the following is the correct set of contingencies identified by William Beveridge in his comprehensive social security scheme?
- (a) Want, disease, ignorance, squalor and idleness
- (b) Want, sickness, disability, squalor and idleness
- (c) Want, disease, old age, squalor and unemployment
- (d) Disease, invalidity, old age, unemployment and ignorance
उत्तर(a) Want, disease, ignorance, squalor and idleness
इसी प्रश्नपत्र का प्रश्न — विलियम बेवेरिज की योजना में अभिज्ञान की गई आकस्मिकताएँ; आधुनिक सामाजिक सुरक्षा की वह रूपरेखा जिस पर युद्धोत्तर कल्याणकारी राज्य खड़ा हुआ।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा का कौन-सा अनुच्छेद सामाजिक सुरक्षा के अधिकार से संबंधित है?
- (a)अनुच्छेद 19
- (b)अनुच्छेद 22
- (c)अनुच्छेद 25
- (d)अनुच्छेद 30
उत्तर(b) अनुच्छेद 22 — यही वह अनुच्छेद है जो 'सामाजिक सुरक्षा' पद का प्रयोग करता है; अनुच्छेद 25 समुचित जीवन-स्तर का है।
- practice — not a real PYQ
'श्रम कोई पण्य वस्तु नहीं है' — यह सिद्धांत निम्नलिखित में से किस दस्तावेज़ में अभिव्यक्त हुआ है?
- (a)मानव अधिकार की सार्वभौम घोषणा
- (b)ILO की फिलाडेल्फिया घोषणा
- (c)भारत के संविधान का भाग IV
- (d)प्रथम राष्ट्रीय श्रम आयोग की रिपोर्ट
उत्तर(b) ILO की फिलाडेल्फिया घोषणा — 10 मई 1944 को अंगीकृत इस घोषणा के भाग I का पहला सिद्धांत यही है।