डॉ॰ अयक्रोड का सूत्र किसके निर्धारण से संबंध रखता है?
- (a)उचित मजदूरी
- (b)न्यूनतम मजदूरी
- (c)निर्वाह मजदूरी
- (d)वास्तविक मजदूरी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) न्यूनतम मजदूरी। डॉ॰ अयक्रोड पोषण-विज्ञान के विशेषज्ञ थे और उनका सूत्र मूलतः आहार का सूत्र है — एक औसत भारतीय वयस्क के लिए संतुलित आहार, जिससे प्रतिदिन लगभग दो हज़ार सात सौ कैलोरी प्राप्त हो। यह सूत्र मजदूरी से इस प्रकार जुड़ा कि जब यह प्रश्न उठा कि न्यूनतम मजदूरी की राशि किस आधार पर तय की जाए, तब उत्तर यही निकला कि पहले यह गिना जाए कि एक कामगार-परिवार को जीवित और कार्यक्षम बने रहने के लिए कितनी वस्तुएँ चाहिए, और फिर उन वस्तुओं की क़ीमत जोड़कर मजदूरी निकाली जाए। इस गणना का सबसे बड़ा और सबसे बुनियादी मद भोजन है, और भोजन की मात्रा तय करने के लिए डॉ॰ अयक्रोड का पोषण-मानक अपनाया गया। यही काम 1957 में पंद्रहवें भारतीय श्रम सम्मेलन ने किया, जिसने आवश्यकता-आधारित न्यूनतम मजदूरी के मानदंड तय किए। वे मानदंड इस प्रकार थे — एक मानक कामगार-परिवार को तीन उपभोग इकाइयों के बराबर माना जाए, जिसमें केवल एक कमाने वाला हो और स्त्रियों, बालकों तथा किशोरों की कमाई गणना में न ली जाए; भोजन में प्रति औसत वयस्क दो हज़ार सात सौ कैलोरी की व्यवस्था हो; वस्त्र के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष बहत्तर गज कपड़ा माना जाए; आवास का किराया सरकार की औद्योगिक आवास योजना के न्यूनतम क्षेत्रफल के अनुरूप लिया जाए; और ईंधन, प्रकाश तथा अन्य प्रकीर्ण मदों के लिए कुल न्यूनतम मजदूरी का बीस प्रतिशत रखा जाए। इस पूरी सूची में डॉ॰ अयक्रोड का योगदान दूसरा मानदंड है, इसलिए उनका सूत्र न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण से जुड़ा है और उत्तर विकल्प (b) है। एक अंतिम संकेत, जो ऐसे प्रश्नों में बहुत काम आता है: जब किसी विशेषज्ञ का नाम आए, तो उसका क्षेत्र देखिए। डॉ॰ अयक्रोड पोषण-विज्ञानी थे, इसलिए उनका योगदान भोजन की मात्रा तय करने में होगा; और भोजन उसी श्रेणी की गणना में आता है जो कामगार की आवश्यकता से चलती है, न कि उद्योग की भुगतान-क्षमता से। यही एक तर्क विकल्प (a) को भी काट देता है और विकल्प (b) तक ले आता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)उचित मजदूरी — उचित मजदूरी मजदूरी की उस मध्यवर्ती श्रेणी का नाम है जो न्यूनतम मजदूरी से ऊपर और निर्वाह मजदूरी से नीचे पड़ती है। उसके निर्धारण का तर्क बिल्कुल अलग है: वह कामगार की आवश्यकता से नहीं, बल्कि उद्योग की देने की क्षमता से तय होती है। उचित मजदूरी तय करते समय जिन बातों को देखा जाता है वे हैं — उद्योग की भुगतान-क्षमता, श्रम की उत्पादकता, उसी या मिलते-जुलते उद्योगों में प्रचलित दरें, राष्ट्रीय आय का स्तर और उसका वितरण, तथा अर्थव्यवस्था में उस उद्योग का स्थान। ध्यान दीजिए कि इनमें से कोई भी बात पोषण, आहार या कैलोरी से नहीं जुड़ी; इसीलिए डॉ॰ अयक्रोड का सूत्र इस श्रेणी का आधार नहीं बन सकता। भेद को एक वाक्य में यों रखिए — न्यूनतम मजदूरी पूछती है कि कामगार को कितना चाहिए, उचित मजदूरी पूछती है कि उद्योग कितना दे सकता है।
- (c)निर्वाह मजदूरी — निर्वाह मजदूरी तीनों श्रेणियों में सबसे ऊँची है और वह केवल जीवित रहने की नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की बात करती है — मूलभूत आवश्यकताओं के साथ थोड़ा सुख, बच्चों की शिक्षा, बीमारी से बचाव, आवश्यक सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति, और विपत्ति के विरुद्ध बीमा। संविधान का अनुच्छेद 43 राज्य से यही अपेक्षा करता है कि वह सब कामगारों के लिए निर्वाह मजदूरी सुनिश्चित करने का प्रयास करे; ध्यान दीजिए कि वहाँ ‘प्रयास करेगा’ लिखा है, क्योंकि यह एक लक्ष्य है, तत्काल प्रवर्तनीय अधिकार नहीं। यही इस विकल्प को इस प्रश्न से अलग करता है: डॉ॰ अयक्रोड का सूत्र जीवित रहने और कार्यक्षम बने रहने के लिए आवश्यक न्यूनतम पोषण की गणना करता है, न कि सम्मानजनक जीवन-स्तर की। इसलिए वह न्यूनतम मजदूरी के मानदंडों में आता है, निर्वाह मजदूरी की परिभाषा में नहीं।
- (d)वास्तविक मजदूरी — वास्तविक मजदूरी इस सूची में सबसे अलग प्रकार की धारणा है, क्योंकि वह कोई मानक या लक्ष्य नहीं, बल्कि एक माप है। नक़द में मिलने वाली मजदूरी को मौद्रिक मजदूरी कहते हैं, और उससे वस्तुतः कितना ख़रीदा जा सकता है, यह वास्तविक मजदूरी बताती है; इसीलिए क़ीमतें बढ़ने पर मौद्रिक मजदूरी वही रहते हुए भी वास्तविक मजदूरी घट जाती है। इसी कारण मजदूरी के साथ महँगाई भत्ता जोड़ा जाता है, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़ा रहता है। स्पष्ट है कि यह अवधारणा गणना के बाद की है, गणना के आधार की नहीं — पहले किसी मानदंड से मजदूरी तय होगी, तभी उसकी क्रय-शक्ति की बात उठेगी। डॉ॰ अयक्रोड का सूत्र उसी पहले चरण से जुड़ा है, इसलिए यह विकल्प नहीं बनता।
अवधारणा
भारत में मजदूरी की श्रेणियों को स्पष्ट रूप में परिभाषित करने का काम स्वतंत्रता के तुरंत बाद बनी उचित मजदूरी समिति ने किया, और उसके बाद से यही ढाँचा चला आ रहा है। सबसे नीचे न्यूनतम मजदूरी है, जो केवल जीवित रहने भर की नहीं होनी चाहिए, बल्कि कामगार की कार्यक्षमता बनाए रखने लायक़ भी होनी चाहिए — इसमें कुछ शिक्षा, कुछ चिकित्सा और कुछ सुविधाओं की व्यवस्था भी सम्मिलित मानी जाती है। सबसे ऊपर निर्वाह मजदूरी है, जो सम्मानजनक जीवन-स्तर का लक्ष्य रखती है और जिसे संविधान का अनुच्छेद 43 राज्य के प्रयास का विषय बनाता है। इन दोनों के बीच उचित मजदूरी है, जिसका निर्धारण उद्योग की भुगतान-क्षमता को देखकर होता है। इसी ढाँचे में एक चौथी श्रेणी आगे चलकर जुड़ी — आवश्यकता-आधारित न्यूनतम मजदूरी, जिसे 1957 के पंद्रहवें भारतीय श्रम सम्मेलन ने मानदंडों के साथ परिभाषित किया और जो न्यूनतम से ऊपर पड़ती है। वास्तविक मजदूरी इन सबसे भिन्न प्रकार की धारणा है, क्योंकि वह मजदूरी का स्तर नहीं, उसकी क्रय-शक्ति बताती है।
पंद्रहवें भारतीय श्रम सम्मेलन के मानदंडों का महत्त्व इसलिए है कि उन्होंने मजदूरी के प्रश्न को अनुमान से निकालकर गणना में बदल दिया — कितनी कैलोरी, कितने गज कपड़ा, कितना किराया, और शेष मदों के लिए कितना प्रतिशत। यही उन्हें आज भी प्रासंगिक बनाता है, क्योंकि न्यूनतम मजदूरी तय करने वाली समितियाँ इसी ढाँचे में आँकड़े भरती हैं। इस ढाँचे में एक महत्त्वपूर्ण वृद्धि उच्चतम न्यायालय ने की, जिसने रैप्टाकोस ब्रेट एंड कंपनी बनाम उसके कर्मकार वाले मामले में एक छठा मानदंड जोड़ा — बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा आवश्यकताएँ, त्योहारों और संस्कारों सहित न्यूनतम मनोरंजन, तथा वृद्धावस्था और विवाह जैसी आवश्यकताओं के लिए कुल न्यूनतम मजदूरी का पच्चीस प्रतिशत और जोड़ा जाए। इस निर्णय ने न्यूनतम मजदूरी की धारणा को केवल भरण-पोषण से आगे बढ़ाकर जीवन-चक्र की आवश्यकताओं तक ले गया। इन मानदंडों का विधिक आधार न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 है, जो अनुसूचित नियोजनों के लिए दरें तय करने की प्रक्रिया देता है; उसी अधिनियम पर इस पेपर का प्रश्न 82 भी बना है।
मुख्य तथ्य
- डॉ॰ अयक्रोड का सूत्र न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण से जुड़ा है; वह मूलतः पोषण का मानक है, जिसे मजदूरी की गणना में भोजन की मद तय करने के लिए अपनाया गया।
- उस मानक के अनुसार एक औसत भारतीय वयस्क के लिए संतुलित आहार से प्रतिदिन लगभग दो हज़ार सात सौ कैलोरी की व्यवस्था होनी चाहिए।
- 1957 में हुए पंद्रहवें भारतीय श्रम सम्मेलन ने आवश्यकता-आधारित न्यूनतम मजदूरी के वे मानदंड तय किए जिनमें यह पोषण-मानक दूसरे स्थान पर रखा गया।
- उन मानदंडों में एक मानक कामगार-परिवार को तीन उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया, जिसमें केवल एक कमाने वाला हो और स्त्रियों तथा बालकों की कमाई गणना में न ली जाए।
- वस्त्र के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष बहत्तर गज कपड़ा और आवास के लिए सरकार की औद्योगिक आवास योजना के न्यूनतम क्षेत्रफल का किराया माना गया।
- ईंधन, प्रकाश तथा अन्य प्रकीर्ण मदों के लिए कुल न्यूनतम मजदूरी का बीस प्रतिशत रखा गया, जिससे शेष मदों की गणना के बाद यह भाग स्वतः जुड़ जाता है।
- उच्चतम न्यायालय ने रैप्टाकोस ब्रेट वाले मामले में छठा मानदंड जोड़ा — शिक्षा, चिकित्सा, न्यूनतम मनोरंजन तथा वृद्धावस्था और विवाह के लिए पच्चीस प्रतिशत और।
- उचित मजदूरी उद्योग की भुगतान-क्षमता से तय होती है, जबकि निर्वाह मजदूरी सबसे ऊँची श्रेणी है और अनुच्छेद 43 राज्य से उसे सुनिश्चित करने का प्रयास करने को कहता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- न्यूनतम और निर्वाह मजदूरी को आपस में बदल देना; पहली कार्यक्षमता बनाए रखने की है, दूसरी सम्मानजनक जीवन की।
- वास्तविक मजदूरी को मजदूरी की कोई श्रेणी मान लेना; वह कोई मानक नहीं, बल्कि मौद्रिक मजदूरी की क्रय-शक्ति का माप है।
- उचित मजदूरी को कामगार की आवश्यकता से जोड़ लेना; वह उद्योग की भुगतान-क्षमता, श्रम की उत्पादकता और प्रचलित दरों से तय होती है।
- पंद्रहवें श्रम सम्मेलन के मानदंडों में से किसी एक संख्या को दूसरे मानदंड पर लगा देना; हर मानदंड की अपनी अलग इकाई और अलग संख्या है।
मजदूरी की धारणाएँ इस भर्ती के श्रम खंड का स्थायी विषय हैं और वे तीन रूपों में पूछी जाती हैं — किसी व्यक्ति या समिति का नाम देकर उसे किसी धारणा से जोड़ना, जैसे यहाँ; किसी धारणा की परिभाषा देकर उसका नाम पूछना; और किसी संख्या-मानदंड को सीधे पूछ लेना, जैसे कितनी कैलोरी या कितने गज कपड़ा। तीनों के लिए एक ही तैयारी पर्याप्त है: चारों धारणाओं को एक सीढ़ी की तरह क्रम में लिखिए, हर सीढ़ी के सामने उसका निर्धारक तत्त्व लिखिए, और पंद्रहवें श्रम सम्मेलन के मानदंडों को उनकी संख्याओं के साथ अलग से नोट कर लीजिए। नाम और धारणा जोड़ने वाले प्रश्नों में एक अतिरिक्त सहायता यह है कि व्यक्ति का पेशा प्रायः संकेत दे देता है — पोषण-विज्ञानी का सूत्र भोजन से जुड़ेगा, और भोजन उस श्रेणी में आएगा जो आवश्यकता की गणना पर टिकी है, न कि उद्योग की क्षमता पर।
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EPFO_EOAO_2017_Q82खोलें व हल करें →Who among the following can be appointed as the Chairman of the Central Advisory Board constituted by the Central Government under the Minimum Wages Act, 1948?
- (a) One of the independent members of the Board
- (b) One of the employers’ representatives of the Board
- (c) One of the employees’ representatives of the Board
- (d) A functionary of the Central Government nominated by the Government
उत्तर(a) One of the independent members of the Board
इसी पेपर का प्रश्न 82 न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड पर है — उसी विषय का विधिक ढाँचा।
EPFO_APFC_2023_Q101Article 43 of the Constitution of India enjoins the State to endeavour through legislation or economic organization for payment of which of the following wages?
- (a) Living wage
- (b) Minimum wage
- (c) Fair wage
- (d) Need-based minimum wage
उत्तर(a) Living wage
EPFO APFC 2023 में अनुच्छेद 43 पर प्रश्न आया, जिसमें निर्वाह मजदूरी और अन्य श्रेणियों का भेद ही जाँचा गया।
EPFO_APFC_2023_Q97An employee working in an establishment draws a monthly wage of ₹ 9,000 as fixed under the Minimum Wages Act, 1948 and is eligible to get bonus under the Payment of Bonus Act, 1965 for the accounting year 2021–22. The bonus payable is at the rate of 10%. If the employee has worked continuously for whole of the said accounting year, then what is the amount of bonus that shall be paid to the employee?
- (a) ₹ 7,000
- (b) ₹ 8,400
- (c) ₹ 10,000
- (d) ₹ 10,800
उत्तर(d) ₹ 10,800
EPFO APFC 2023 में न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत तय मजदूरी पर बोनस की गणना पूछी गई।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
पंद्रहवें भारतीय श्रम सम्मेलन के मानदंडों के अनुसार, आवश्यकता-आधारित न्यूनतम मजदूरी की गणना के लिए एक मानक कामगार-परिवार को कितनी उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया?
- (a)दो
- (b)तीन
- (c)चार
- (d)पाँच
उत्तर(b) तीन
- practice — not a real PYQ
भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्य से कामगारों के लिए निर्वाह मजदूरी सुनिश्चित करने का प्रयास करने की अपेक्षा करता है?
- (a)अनुच्छेद 41
- (b)अनुच्छेद 42
- (c)अनुच्छेद 43
- (d)अनुच्छेद 43A
उत्तर(c) अनुच्छेद 43