ऐसे संघ को क्या कहा जाता है जिसकी सदस्यता में बहुत से उद्योगों, रोजगार और शिल्पकारी में कार्य करने वाले कामगारों को शामिल किया जाता है?
- (a)औद्योगिक संघ
- (b)सामान्य संघ
- (c)शिल्प संघ
- (d)क्षेत्र-सह-उद्योग स्तरीय संघ
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) सामान्य संघ। ट्रेड यूनियनों का संरचनात्मक वर्गीकरण इस एक प्रश्न पर टिका है कि संघ की सदस्यता किस आधार पर बनती है, अर्थात् कोई कामगार उसका सदस्य किस कारण बन सकता है। तीन उत्तर संभव हैं और उन्हीं से तीन मुख्य प्रकार बनते हैं। यदि आधार कामगार का शिल्प या कौशल है, तो वह शिल्प संघ है — बढ़ई, बिजली-मिस्त्री या टंकक अपने-अपने संघ में, चाहे वे किसी भी उद्योग में काम करते हों। यदि आधार वह उद्योग है जिसमें वह काम करता है, तो वह औद्योगिक संघ है — कपड़ा उद्योग के सब कामगार एक संघ में, चाहे उनका काम बुनाई का हो, मरम्मत का हो या लिपिकीय। और यदि कोई आधार ही न हो, अर्थात् संघ किसी भी उद्योग, किसी भी रोजगार और किसी भी शिल्प के कामगार को सदस्य बना ले, तो वह सामान्य संघ है। प्रश्न-वाक्य में ठीक यही तीसरी स्थिति वर्णित है — ‘बहुत से उद्योगों, रोजगार और शिल्पकारी में कार्य करने वाले कामगारों को शामिल किया जाता है’ — अर्थात् तीनों सीमाएँ एक साथ हटा दी गई हैं। इसलिए उत्तर सामान्य संघ है। ऐसे संघ प्रायः वहाँ बनते हैं जहाँ कामगार बिखरे हुए, अकुशल अथवा छोटी इकाइयों में लगे होते हैं और अलग-अलग संघ बनाकर टिक नहीं सकते; एक बड़ा संघ उन्हें संख्या-बल और सौदेबाज़ी की शक्ति देता है। इसका दूसरा पक्ष यह है कि ऐसे संघ में सदस्यों की समस्याएँ बहुत भिन्न होती हैं, इसलिए किसी एक उद्योग की विशिष्ट माँगों पर गहराई से काम करना उसके लिए कठिन रहता है। इस भेद को एक वाक्य में यों बाँध लीजिए: शिल्प संघ पूछता है ‘तुम क्या काम करते हो’, औद्योगिक संघ पूछता है ‘तुम किस उद्योग में काम करते हो’, और सामान्य संघ कुछ नहीं पूछता — उसके लिए इतना ही पर्याप्त है कि तुम कामगार हो। यही तीन प्रश्न इस पूरे वर्गीकरण की कुंजी हैं और किसी भी नए उदाहरण पर भी काम करते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)औद्योगिक संघ — औद्योगिक संघ की सदस्यता एक ही उद्योग तक सीमित रहती है, पर उस उद्योग के भीतर वह सबको लेता है — कुशल और अकुशल, उत्पादन में लगे और कार्यालय में बैठे, सब। इसीलिए उसे ऊर्ध्वाधर संघ भी कहा जाता है, क्योंकि वह एक ही उद्योग में ऊपर से नीचे तक फैलता है। यह विकल्प इसलिए भ्रम पैदा करता है कि उसमें भी अनेक प्रकार के कामगार आते हैं और प्रश्न-वाक्य में भी ‘बहुत से’ शब्द है। पर भेद निर्णायक है: औद्योगिक संघ अनेक शिल्पों को समेटता है, अनेक उद्योगों को नहीं; प्रश्न-वाक्य स्पष्ट रूप से ‘बहुत से उद्योगों’ कहता है, एक उद्योग नहीं। इसी कारण यह विकल्प नहीं बनता। भारत में अधिकांश बड़े संघ इसी औद्योगिक रूप के हैं, इसलिए यह विकल्प परिचित भी लगता है — और परिचय ही यहाँ जाल है।
- (c)शिल्प संघ — शिल्प संघ की सदस्यता एक ही शिल्प, व्यवसाय या कौशल वाले कामगारों तक सीमित रहती है, चाहे वे अलग-अलग नियोक्ताओं के यहाँ काम करते हों; इसीलिए उसे क्षैतिज संघ कहा जाता है। यह ट्रेड यूनियन आंदोलन का सबसे पुराना रूप है और इंग्लैंड तथा अमेरिका में इसी से आंदोलन आरंभ हुआ था, क्योंकि कुशल कारीगरों के पास दुर्लभ कौशल था और इसी कारण सौदेबाज़ी की शक्ति भी। इस विकल्प को इस प्रश्न में केवल इसलिए रखा गया है कि प्रश्न-वाक्य में ‘शिल्पकारी’ शब्द आता है और आँख उसी शब्द को पकड़कर उधर चली जाती है। पर वाक्य को पूरा पढ़िए: वह कह रहा है कि सदस्यता अनेक शिल्पों में फैली है, न कि किसी एक शिल्प तक सीमित। अर्थ ठीक उलटा है।
- (d)क्षेत्र-सह-उद्योग स्तरीय संघ — यह नाम सदस्यता के आधार का नहीं, संगठन तथा सौदेबाज़ी के स्तर का है। ऐसा संघ किसी एक क्षेत्र के किसी एक उद्योग के कामगारों को जोड़ता है — जैसे किसी विशेष औद्योगिक पट्टी के कपड़ा कामगार — ताकि उस क्षेत्र के नियोक्ताओं के साथ एक ही स्तर पर मोल-भाव किया जा सके। ध्यान दीजिए कि यह सामान्य संघ का ठीक उलटा है: वहाँ दोनों सीमाएँ हटा दी जाती हैं, यहाँ दो सीमाएँ एक साथ लगा दी जाती हैं, क्षेत्र की भी और उद्योग की भी। इसलिए यह विकल्प प्रश्न-वाक्य की शर्त पूरी नहीं करता। सौदेबाज़ी के स्तरों वाला यह वर्गीकरण अपने आप में उपयोगी है — संयंत्र स्तर, क्षेत्र-सह-उद्योग स्तर, और राष्ट्रीय उद्योग स्तर — पर उसे संरचनात्मक वर्गीकरण के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
अवधारणा
ट्रेड यूनियन कामगारों का वह स्थायी संगठन है जो अपने सदस्यों की सेवा-शर्तों की रक्षा और सुधार के लिए बनाया जाता है। भारत में इसका विधिक आधार ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 है, जो पंजीकरण की व्यवस्था करता है और पंजीकृत संघ को कुछ महत्त्वपूर्ण लाभ देता है — निगमित निकाय का दर्जा, अपने नाम से संपत्ति रखने तथा वाद लाने की क्षमता, तथा व्यापार-विवाद के अनुध्यान में की गई कुछ कार्रवाइयों के लिए आपराधिक और सिविल दायित्व से प्रतिरक्षा। पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर उसके बिना ये लाभ नहीं मिलते, इसलिए व्यवहार में संघ पंजीकरण कराते ही हैं। आवेदन के समय संघ के कम से कम सात सदस्य होने चाहिए, और अधिनियम में संबद्ध स्थापन या उद्योग के कामगारों में से एक न्यूनतम अनुपात की भी अपेक्षा जोड़ी गई है। संघ अपनी दो निधियाँ रख सकता है — सामान्य निधि, जो अधिनियम में गिनाए गए प्रयोजनों पर ख़र्च होती है, और अलग से बनाई गई राजनीतिक निधि, जिसमें अंशदान देना किसी सदस्य के लिए अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
संघों को समझने के तीन अलग-अलग वर्गीकरण चलते हैं और परीक्षा प्रायः इन्हीं के बीच भ्रम पैदा करती है, इसलिए तीनों को अलग-अलग खाँचों में रखिए। पहला, संरचनात्मक वर्गीकरण — सदस्यता किस आधार पर बनती है; इससे शिल्प, औद्योगिक और सामान्य संघ बनते हैं, और इनके साथ श्वेत-कॉलर अथवा कर्मचारी संघ भी गिने जाते हैं। यही वर्गीकरण इस प्रश्न का विषय है। दूसरा, कार्यमूलक वर्गीकरण — संघ करना क्या चाहता है और किन साधनों से; रॉबर्ट हॉक्सी का प्रसिद्ध वर्गीकरण इसी का है और इसी पेपर का प्रश्न 73 उसी पर है। तीसरा, स्तर के अनुसार वर्गीकरण — संघ किस स्तर पर संगठित और सक्रिय है; संयंत्र स्तर, क्षेत्र-सह-उद्योग स्तर, राष्ट्रीय उद्योग स्तर, और उनके ऊपर केंद्रीय महासंघ, जो अलग-अलग उद्योगों के संघों को जोड़ते हैं। भारत में बहु-संघवाद के कारण एक ही प्रतिष्ठान में कई संघ मिलते हैं, और तब मान्यता का प्रश्न उठता है — किस संघ के साथ नियोक्ता सौदेबाज़ी करेगा — जिसका उत्तर प्रायः राज्य के नियमों अथवा सत्यापन की पद्धति से निकाला जाता है।
मुख्य तथ्य
- सामान्य संघ वह है जिसकी सदस्यता अनेक उद्योगों, अनेक रोजगारों और अनेक शिल्पों के कामगारों को एक साथ समेटती है, अर्थात् उस पर कोई सीमा नहीं होती।
- शिल्प संघ की सदस्यता एक ही शिल्प, व्यवसाय या कौशल तक सीमित रहती है, चाहे सदस्य अलग-अलग नियोक्ताओं के यहाँ काम करते हों; इसीलिए उसे क्षैतिज संघ कहा जाता है।
- औद्योगिक संघ की सदस्यता एक ही उद्योग तक सीमित रहती है पर उस उद्योग के सब प्रकार के कामगारों को लेती है; उसे ऊर्ध्वाधर संघ कहा जाता है।
- क्षेत्र-सह-उद्योग स्तरीय संघ सदस्यता के आधार का नहीं, बल्कि संगठन तथा सौदेबाज़ी के स्तर का वर्गीकरण है, और वह एक क्षेत्र के एक उद्योग तक सीमित रहता है।
- सामान्य संघ प्रायः वहाँ बनते हैं जहाँ कामगार बिखरे हुए, अकुशल अथवा छोटी इकाइयों में लगे होते हैं और अलग-अलग संघ बनाकर टिक नहीं सकते।
- भारत में ट्रेड यूनियनों का विधिक आधार ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 है; उसके अंतर्गत पंजीकरण अनिवार्य नहीं है, पर उसके बिना संघ को अधिनियम के लाभ नहीं मिलते।
- पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय संघ के कम से कम सात सदस्य होने चाहिए, और अधिनियम में संबद्ध स्थापन के कामगारों में से एक न्यूनतम अनुपात की अपेक्षा भी जोड़ी गई है।
- पंजीकृत संघ को निगमित निकाय का दर्जा मिलता है, वह अपने नाम से संपत्ति रख सकता है और वाद ला सकता है, तथा उसे व्यापार-विवाद के अनुध्यान में कुछ प्रतिरक्षाएँ प्राप्त होती हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रश्न-वाक्य में ‘शिल्पकारी’ शब्द देखकर शिल्प संघ चुन लेना, जबकि वाक्य अनेक शिल्पों में फैली सदस्यता की बात कर रहा है, किसी एक शिल्प की नहीं।
- औद्योगिक संघ को सामान्य संघ मान लेना; वह अनेक शिल्प समेटता है पर रहता एक ही उद्योग तक सीमित है।
- स्तर वाले वर्गीकरण को सदस्यता वाले वर्गीकरण के साथ मिला देना; क्षेत्र-सह-उद्योग स्तरीय संघ उसी दूसरे वर्गीकरण से यहाँ लाया गया है।
- संरचनात्मक और कार्यमूलक वर्गीकरण की श्रेणियाँ आपस में बदल देना; पहला सदस्यता का आधार देखता है और दूसरा संघ का उद्देश्य।
इस पेपर के श्रम खंड में ट्रेड यूनियन का विषय दो बार आया है — एक बार कार्यमूलक वर्गीकरण के रूप में और एक बार यहाँ संरचनात्मक वर्गीकरण के रूप में — और दोनों बार प्रश्न परिभाषा से नाम पूछता है। ऐसे प्रश्न में सबसे उपयोगी आदत यह है कि परिभाषा में से सीमा खोजिए: संघ किसे सदस्य बना सकता है और किसे नहीं। यदि सीमा शिल्प की है तो शिल्प संघ, यदि उद्योग की है तो औद्योगिक संघ, और यदि कोई सीमा नहीं है तो सामान्य संघ। यही एक प्रश्न तीनों को अलग कर देता है। दूसरी सावधानी विकल्पों की शब्दावली को लेकर है — इस प्रकार के प्रश्नों में एक विकल्प प्रायः दूसरे वर्गीकरण से उठाकर रख दिया जाता है, जैसे यहाँ स्तर वाला विकल्प; वह अपने आप में सही शब्द होता है, इसीलिए ग़लत होते हुए भी विश्वसनीय लगता है। ऐसे विकल्प को पहचानने के लिए यह पूछिए कि वह किस प्रश्न का उत्तर होता — यदि वह किसी दूसरे प्रश्न का उत्तर है, तो इस प्रश्न का नहीं है।
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उत्तर(c) 7 members
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उत्तर(a) optional
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उत्तर(d) Evolutionary Unionism
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- (a) 2, 1, 4, 6, 5, 3
- (b) 2, 1, 3, 4, 6, 5
- (c) 1, 2, 5, 4, 3, 6
- (d) 1, 3, 2, 4, 5, 6
उत्तर(a) 2, 1, 4, 6, 5, 3
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- practice — not a real PYQ
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- (a)औद्योगिक संघ
- (b)सामान्य संघ
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उत्तर(c) शिल्प संघ
- practice — not a real PYQ
ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 के अंतर्गत पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय किसी ट्रेड यूनियन के कम से कम कितने सदस्य होने चाहिए?
- (a)दो
- (b)तीन
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- (d)दस
उत्तर(c) सात