रॉबर्ट हॉक्सी द्वारा चिह्नित संघवाद के पाँच कार्यमूलक प्रकारों में से निम्नलिखित में से कौन-सा एक अपवाद है?
- (a)व्यापार संघवाद
- (b)स्वार्थचालित संघवाद
- (c)क्रांतिकारी संघवाद
- (d)विकासवादी संघवाद
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) विकासवादी संघवाद। रॉबर्ट हॉक्सी ने अमेरिका के ट्रेड यूनियन आंदोलन का अध्ययन करके संघों को उनके ढाँचे से नहीं, उनके उद्देश्य और कार्य-पद्धति से वर्गीकृत किया, और इसी कारण उनके वर्गीकरण को कार्यमूलक कहा जाता है। उनके पाँच प्रकार ये हैं। पहला, व्यापार संघवाद — यह तात्कालिक और ठोस लाभों पर केंद्रित रहता है, अर्थात् मजदूरी, काम के घंटे और काम की दशाएँ; यह विद्यमान आर्थिक व्यवस्था को स्वीकार कर लेता है और सामूहिक सौदेबाज़ी को अपना मुख्य साधन बनाता है। दूसरा, उत्थानवादी अथवा हितैषी संघवाद — यह आदर्शवादी है और कामगार के नैतिक तथा सामाजिक उत्थान की बात करता है; बीमा, सहकारिता, शिक्षा और सुधारवादी राजनीति इसके साधन हैं। तीसरा, क्रांतिकारी संघवाद — यह वर्ग-चेतना पर टिका है और विद्यमान व्यवस्था को बदल देना चाहता है; इसकी दो शाखाएँ मानी जाती हैं, एक जो राजनीतिक कार्रवाई पर बल देती है और दूसरी जो प्रत्यक्ष कार्रवाई पर। चौथा, स्वार्थचालित अथवा लुटेरा संघवाद — यह किसी सिद्धांत से नहीं चलता, केवल तात्कालिक लाभ से, और उसके लिए किसी भी साधन का प्रयोग कर सकता है, यहाँ तक कि नियोक्ता से गुप्त समझौते या बल-प्रयोग का भी। पाँचवाँ, आश्रित संघवाद — यह स्वतंत्र रूप से टिक ही नहीं सकता और किसी दूसरे के सहारे चलता है, जैसे नियोक्ता के समर्थन पर चलने वाला कंपनी-संघ, अथवा उपभोक्ताओं के समर्थन पर टिकने वाला वह संघ जो अपने लगाए चिह्न वाली वस्तुएँ ख़रीदने की अपील करता है। इन पाँचों में ‘विकासवादी संघवाद’ कहीं नहीं आता, इसलिए वही अपवाद है और उत्तर विकल्प (d) है। हॉक्सी के वर्गीकरण की एक और विशेषता जान लीजिए: उन्होंने इसे संघों की बनावट से नहीं, उनके व्यवहार से निकाला था, और उनका तर्क यह था कि संघ अपने परिवेश की उपज होते हैं। इसीलिए एक ही देश में, एक ही समय पर, बिल्कुल अलग स्वभाव वाले संघ साथ-साथ चल सकते हैं — और यही बात इस वर्गीकरण को आज भी उपयोगी बनाती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)व्यापार संघवाद — यह हॉक्सी के पाँच प्रकारों में पहला है, इसलिए यह इस प्रश्न का उत्तर नहीं हो सकता। इसकी पहचान यह है कि वह ‘व्यापार-चेतन’ है, वर्ग-चेतन नहीं — अर्थात् वह अपने ही व्यवसाय या शिल्प के कामगारों के हित देखता है और पूरे श्रमिक वर्ग की व्यवस्था बदलने का लक्ष्य नहीं रखता। इसका दृष्टिकोण व्यावहारिक होता है: नियोक्ता से मोल-भाव कीजिए, समझौता कीजिए, और जो मिल सके वह लीजिए। यही कारण है कि इसे प्रायः अमेरिकी ट्रेड यूनियन आंदोलन की मुख्य धारा का प्रतिनिधि माना जाता है। ध्यान दीजिए कि इस विकल्प का हिन्दी नाम कुछ भ्रामक हो सकता है, क्योंकि ‘व्यापार’ शब्द से व्यापारियों का संघ भी समझा जा सकता है; यहाँ उसका अर्थ कामगार का अपना व्यवसाय या धंधा है।
- (b)स्वार्थचालित संघवाद — यह भी हॉक्सी के पाँच प्रकारों में है, इसलिए यह भी अपवाद नहीं है। यह वह संघवाद है जो किसी विचारधारा से नहीं, केवल तात्कालिक लाभ से संचालित होता है और साधनों के चयन में कोई मर्यादा नहीं मानता — वह नियोक्ता से गुप्त समझौता करके अपने ही सदस्यों के हित की उपेक्षा कर सकता है, प्रतिद्वंद्वी संघ के विरुद्ध बल-प्रयोग कर सकता है, अथवा छोटे-छोटे दबाव बनाकर अपने लिए सुविधाएँ निकाल सकता है। हॉक्सी ने इसकी भी दो शाखाएँ बताईं — एक जो खुले दबाव से काम लेती है और दूसरी जो छिपकर, छापामार ढंग से। यह श्रेणी इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि वह याद दिलाती है कि संघ का होना अपने आप में कामगार-हित की गारंटी नहीं है; उसका उद्देश्य और उसकी पद्धति भी देखनी पड़ती है।
- (c)क्रांतिकारी संघवाद — यह भी हॉक्सी की सूची में है, इसलिए यह उत्तर नहीं है — और यही विकल्प (d) के साथ सबसे अधिक घुल-मिल सकता है, क्योंकि दोनों के हिन्दी नामों में परिवर्तन का भाव है। भेद यह है कि क्रांतिकारी संघवाद परिवर्तन को अचानक और मूलगामी मानता है: वह वर्तमान आर्थिक तथा सामाजिक व्यवस्था को स्वीकार ही नहीं करता और उसे बदल देना चाहता है, इसलिए वह सामूहिक सौदेबाज़ी को अंतिम लक्ष्य नहीं, केवल एक अस्थायी साधन मानता है। ‘विकासवादी’ शब्द इसके ठीक उलट क्रमिक परिवर्तन का भाव देता है, और यही विरोधाभास इस विकल्प को गढ़ने में काम आया है — पर हॉक्सी की सूची में क्रमिक परिवर्तन वाली श्रेणी का नाम विकासवादी नहीं, उत्थानवादी है।
अवधारणा
ट्रेड यूनियनों को समझने के दो अलग-अलग ढंग हैं और उन्हें आपस में नहीं मिलाना चाहिए। पहला ढंग संरचनात्मक है — इसमें यह देखा जाता है कि संघ की सदस्यता किस आधार पर बनती है, और उसी से शिल्प संघ, औद्योगिक संघ, सामान्य संघ तथा श्वेत-कॉलर संघ जैसी श्रेणियाँ निकलती हैं; इसी पेपर का प्रश्न 76 इसी वर्गीकरण पर है। दूसरा ढंग कार्यमूलक है — इसमें यह देखा जाता है कि संघ करना क्या चाहता है और किन साधनों से; हॉक्सी का वर्गीकरण इसी दूसरे ढंग का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। हॉक्सी का मूल तर्क यह था कि संघ किसी एक साँचे में नहीं ढलते; वे उस परिवेश की उपज होते हैं जिसमें उनके सदस्य जीते हैं, इसलिए एक ही देश में एक ही समय पर बिल्कुल अलग स्वभाव वाले संघ साथ-साथ चल सकते हैं। इसी से उनका यह विचार भी निकला कि संघवाद एक ‘समूह-मनोवृत्ति’ है, कोई सार्वभौम सिद्धांत नहीं — और यही उनके वर्गीकरण को आज भी उपयोगी बनाता है। दोनों वर्गीकरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, पूरक हैं — एक बताता है संघ किनका है, दूसरा बताता है वह करना क्या चाहता है।
भारत के संदर्भ में यह वर्गीकरण एक चेतावनी की तरह पढ़ा जाना चाहिए, क्योंकि यहाँ के संघ प्रायः एक श्रेणी में पूरी तरह नहीं बैठते। भारतीय ट्रेड यूनियन आंदोलन की एक बड़ी विशेषता राजनीतिक दलों से उसका निकट संबंध रही है, जिससे अनेक संघों में व्यापार संघवाद और राजनीतिक कार्रवाई दोनों साथ-साथ चलते हैं। दूसरी विशेषता बहु-संघवाद है, अर्थात् एक ही प्रतिष्ठान में कई संघों का होना, जिससे प्रतिद्वंद्विता बढ़ती है और मान्यता का प्रश्न जटिल हो जाता है। तीसरी विशेषता यह रही कि अधिकांश संघ छोटे हैं और उनकी वित्तीय स्थिति कमज़ोर, जिससे वे किसी बाहरी सहारे पर निर्भर हो जाते हैं। इन तीनों बातों को हॉक्सी की श्रेणियों के साथ रखकर पढ़िए तो भारतीय आंदोलन की समस्याएँ अधिक स्पष्ट दिखती हैं। विधिक ढाँचे की दृष्टि से यहाँ ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 आता है, जो संघों को पंजीकरण, विधिक व्यक्तित्व तथा कुछ प्रतिरक्षाएँ देता है — और यही अधिनियम आगे चलकर संघ-सुरक्षा तथा संघ के अधिकारों वाले प्रश्नों का आधार बनता है।
मुख्य तथ्य
- रॉबर्ट हॉक्सी ने संघवाद के पाँच कार्यमूलक प्रकार बताए — व्यापार, उत्थानवादी अथवा हितैषी, क्रांतिकारी, स्वार्थचालित अथवा लुटेरा, और आश्रित।
- ‘विकासवादी संघवाद’ नाम की कोई श्रेणी हॉक्सी की सूची में नहीं है, इसलिए इस प्रश्न में वही अपवाद है और वही उत्तर बनता है।
- व्यापार संघवाद तात्कालिक और ठोस लाभों पर केंद्रित रहता है, विद्यमान आर्थिक व्यवस्था को स्वीकार कर लेता है, और सामूहिक सौदेबाज़ी को अपना मुख्य साधन बनाता है।
- उत्थानवादी अथवा हितैषी संघवाद कामगार के नैतिक तथा सामाजिक उत्थान की बात करता है और बीमा, सहकारिता, शिक्षा तथा सुधारवादी राजनीति को अपने साधन मानता है।
- क्रांतिकारी संघवाद वर्ग-चेतना पर टिका है और विद्यमान व्यवस्था को बदल देना चाहता है; उसकी एक शाखा राजनीतिक कार्रवाई पर बल देती है और दूसरी प्रत्यक्ष कार्रवाई पर।
- स्वार्थचालित अथवा लुटेरा संघवाद किसी विचारधारा से नहीं, केवल तात्कालिक लाभ से चलता है और साधनों के चयन में कोई मर्यादा नहीं मानता।
- आश्रित संघवाद स्वतंत्र रूप से टिक ही नहीं सकता और किसी दूसरे के सहारे चलता है; नियोक्ता के समर्थन पर चलने वाला कंपनी-संघ उसका सबसे परिचित रूप है।
- हॉक्सी का यह वर्गीकरण कार्यमूलक है, जो संघ के उद्देश्य और साधनों पर आधारित है — सदस्यता के आधार वाले संरचनात्मक वर्गीकरण से भिन्न।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- ‘विकासवादी’ और ‘क्रांतिकारी’ को आपस में मिला देना; हॉक्सी की सूची में क्रमिक परिवर्तन वाली श्रेणी का नाम उत्थानवादी है।
- कार्यमूलक और संरचनात्मक वर्गीकरण को एक मान लेना; पहला संघ का उद्देश्य देखता है और दूसरा यह कि सदस्यता किस आधार पर बनती है।
- ‘व्यापार संघवाद’ को व्यापारियों का संघ समझ लेना; यहाँ ‘व्यापार’ का अर्थ कामगार का अपना धंधा या व्यवसाय है, वाणिज्य नहीं।
- पाँच में से केवल तीन-चार श्रेणियाँ याद रखना; ऐसा प्रश्न प्रायः छूटी हुई श्रेणी को ही अपवाद बनाकर पूछता है और तब अनुमान काम नहीं आता।
औद्योगिक संबंधों के सिद्धांतकारों पर प्रश्न इस भर्ती में लगातार आते हैं, और उनका ढाँचा प्रायः यही रहता है — किसी विद्वान की सूची में से एक नाम हटाकर उसकी जगह एक मिलता-जुलता नया नाम गढ़ दिया जाता है, और पूछ लिया जाता है कि अपवाद कौन-सा है। ऐसे प्रश्न का उत्तर तभी निकलता है जब पूरी सूची स्मृति में हो, क्योंकि तीन नाम पहचान लेने से चौथे के बारे में कुछ सिद्ध नहीं होता। इसलिए तैयारी करते समय हर सिद्धांतकार के साथ उसकी पूरी सूची लिखिए और उसे गिनती के साथ याद रखिए — यहाँ पाँच, और यही ‘पाँच’ प्रश्न-वाक्य में भी दिया गया है, जो एक सहायक संकेत है। दूसरी सावधानी गढ़े हुए नामों को पहचानने की है: वे प्रायः किसी वास्तविक नाम के पर्याय जैसे लगते हैं, जैसे यहाँ ‘विकासवादी’, जो ‘क्रांतिकारी’ का विपरीत भाव देकर विश्वसनीय लगने लगता है।
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अभ्यास
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रॉबर्ट हॉक्सी के वर्गीकरण में वह संघवाद कौन-सा है जो मजदूरी, काम के घंटे और काम की दशाओं जैसे तात्कालिक लाभों पर केंद्रित रहता है और विद्यमान आर्थिक व्यवस्था को स्वीकार कर लेता है?
- (a)व्यापार संघवाद
- (b)क्रांतिकारी संघवाद
- (c)आश्रित संघवाद
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उत्तर(a) व्यापार संघवाद
- practice — not a real PYQ
हॉक्सी के वर्गीकरण के अनुसार, वह संघ जो स्वतंत्र रूप से टिक नहीं सकता और नियोक्ता जैसे किसी दूसरे पक्ष के सहारे चलता है, किस श्रेणी में आता है?
- (a)व्यापार संघवाद
- (b)आश्रित संघवाद
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उत्तर(b) आश्रित संघवाद