ऋणी प्रणाली के अंतर्गत शाखा लेखा है
- (a)संपत्ति लेखा
- (b)वैयक्तिक लेखा
- (c)आय-व्यय लेखा
- (d)देयता लेखा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) आय-व्यय लेखा। यह वही वर्ग है जिसे मानक शब्दावली में नाममात्र लेखा कहा जाता है — आय, व्यय, लाभ और हानि के लेखों का वर्ग — और यह पुस्तिका उसे ‘आय-व्यय लेखा’ नाम से छापती है; इसी पेपर के प्रश्न 62 में भी यही विकल्प इसी अर्थ में आया है। अब देखिए कि शाखा लेखा उसी वर्ग में क्यों बैठता है। ऋणी पद्धति छोटी और आश्रित शाखाओं के लिए अपनायी जाती है, जो अपनी पूरी बहियाँ नहीं रखतीं; ऐसी स्थिति में मुख्यालय अपनी बही में हर शाखा के नाम का एक खाता खोल लेता है। उस खाते के नामे पक्ष में प्रारंभिक स्टॉक, प्रारंभिक ऋणी, भेजा गया माल तथा मुख्यालय द्वारा किए गए शाखा-व्यय जाते हैं, और जमा पक्ष में शाखा से प्राप्त प्रेषण, वापस आया माल तथा अंतिम स्टॉक और अंतिम ऋणी। इसके बाद जो शेष निकलता है वह किसी की देनदारी या लेनदारी नहीं होता — वह उस शाखा का लाभ या हानि होता है, और उसे मुख्यालय के सामान्य लाभ और हानि लेखे में भेज दिया जाता है। यही निर्णायक कसौटी है: लेखे का वर्ग इस बात से तय होता है कि उसका शेष क्या दर्शाता है। जिस खाते का शेष लाभ या हानि दर्शाता हो और जो वर्ष के अंत में बंद कर दिया जाता हो, वह नाममात्र वर्ग का है। इसीलिए ऋणी पद्धति का शाखा लेखा उसी वर्ग में आता है और उत्तर विकल्प (c) है। इसी कसौटी से यह भी समझ लीजिए कि पद्धति बदलने पर उत्तर क्यों बदल सकता है। स्टॉक और ऋणी पद्धति में शाखा का स्टॉक अलग खाते में रखा जाता है और वह खाता वास्तव में संपत्ति लेखा होता है, जबकि लाभ शाखा समायोजन लेखे से निकलता है। अंतिम खाता पद्धति में शाखा के लिए पूरा व्यापार तथा लाभ-हानि लेखा बनता है। प्रश्न ने ऋणी पद्धति का नाम लिया है, इसलिए उत्तर उसी पद्धति के एकमात्र खाते के बारे में है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)संपत्ति लेखा — संपत्ति या वास्तविक लेखे उन मदों के होते हैं जिनका अस्तित्व वर्ष के अंत में भी बना रहता है और जिनका शेष तुलनपत्र में जाकर अगले वर्ष आगे बढ़ता है — भवन, मशीन, स्टॉक, रोकड़। यह सच है कि शाखा की अपनी अलग-अलग संपत्तियाँ, जैसे शाखा का स्टॉक या शाखा का फ़र्नीचर, संपत्ति लेखे ही हैं; पर प्रश्न उनके बारे में नहीं है। प्रश्न उस एक समेकित खाते के बारे में है जिसे मुख्यालय शाखा के नाम से खोलता है, और उसका शेष कोई संपत्ति नहीं बल्कि लाभ या हानि होता है। यही भेद इस विकल्प को काट देता है, और यही भेद स्टॉक और ऋणी पद्धति में और स्पष्ट हो जाता है, जहाँ शाखा स्टॉक लेखा अलग से बनता है और वह वास्तव में संपत्ति लेखा होता है।
- (b)वैयक्तिक लेखा — यह इस प्रश्न का सबसे चतुर विकल्प है, क्योंकि पद्धति का नाम ही ‘ऋणी पद्धति’ है और इस पद्धति में शाखा का खाता बनाया भी ऋणी के खाते जैसा जाता है — मुख्यालय शाखा को भेजे गए माल और व्ययों से नामे करता है और उससे मिले प्रेषण से जमा। रूप देखकर यह वैयक्तिक लेखा जैसा ही लगता है। पर वर्ग रूप से नहीं, शेष के अर्थ से तय होता है। ऋणी का खाता बंद होने पर जो शेष बचता है वह वसूली योग्य राशि होती है और तुलनपत्र में जाती है; शाखा लेखे में जो शेष बचता है वह लाभ या हानि होता है और लाभ-हानि लेखे में जाता है। इसीलिए वह वैयक्तिक नहीं, नाममात्र वर्ग का है। यहाँ यह भी ध्यान रखिए कि स्वतंत्र शाखा वाली व्यवस्था में शाखा की बहियों में जो मुख्यालय लेखा बनता है, वह अवश्य वैयक्तिक होता है — पर वह दूसरी व्यवस्था है।
- (d)देयता लेखा — परंपरागत वर्गीकरण में ‘देयता लेखा’ नाम का कोई अलग वर्ग है ही नहीं; वर्ग तीन हैं — वैयक्तिक, संपत्ति या वास्तविक, और आय-व्यय अर्थात् नाममात्र। देयताएँ इन्हीं में बँट जाती हैं: लेनदारों तथा ऋणदाताओं के खाते वैयक्तिक होते हैं, और अदत्त व्यय जैसे मद प्रतिनिधि वैयक्तिक। इसके अलावा विषय-वस्तु की दृष्टि से भी यह विकल्प नहीं टिकता, क्योंकि शाखा मुख्यालय की अपनी ही इकाई है, कोई बाहरी पक्ष नहीं जिसे मुख्यालय कुछ देना हो। ध्यान दीजिए कि इस प्रश्न के पहले तीन विकल्प वही हैं जो इसी पेपर के प्रश्न 62 में थे और केवल चौथा बदला गया है — यह उसी वर्गीकरण को दो बार जाँचने का ढंग है।
अवधारणा
शाखा लेखांकन का प्रश्न तब उठता है जब एक ही व्यवसाय कई स्थानों से चलता है और मुख्यालय यह जानना चाहता है कि प्रत्येक शाखा कितना कमा रही है। शाखाएँ दो प्रकार की मानी जाती हैं। आश्रित शाखा अपनी पूरी बहियाँ नहीं रखती; उसका लेखा मुख्यालय ही रखता है, और इसके लिए तीन पद्धतियाँ प्रचलित हैं — ऋणी पद्धति, स्टॉक और ऋणी पद्धति, तथा अंतिम खाता पद्धति। स्वतंत्र शाखा अपनी पूरी दोहरी प्रविष्टि वाली बहियाँ स्वयं रखती है और अपना तलपट मुख्यालय को भेजती है; ऐसी शाखा की बहियों में मुख्यालय लेखा और मुख्यालय की बहियों में शाखा लेखा आपस में मेल खाते हैं और वे वैयक्तिक प्रकृति के होते हैं। ऋणी पद्धति सबसे सरल है और छोटी शाखाओं के लिए है, जहाँ माल लागत पर भेजा जाता है और शाखा नक़द तथा उधार बिक्री करती है। इस पद्धति में केवल एक खाता बनता है और उसी से लाभ निकल आता है, इसलिए वह नाममात्र वर्ग का होता है। इसी सरलता के कारण यह पद्धति सबसे पहले पढ़ायी जाती है और परीक्षा में सबसे अधिक पूछी भी जाती है।
तीनों पद्धतियों का भेद परीक्षा में बार-बार आता है, इसलिए उसे साथ-साथ याद रखना चाहिए। ऋणी पद्धति में मुख्यालय की बही में शाखा के नाम का एक ही खाता खुलता है और उसका शेष सीधे लाभ या हानि बताता है; यह उन शाखाओं के लिए है जिनका आकार छोटा है और जहाँ माल प्रायः लागत पर भेजा जाता है। स्टॉक और ऋणी पद्धति उन शाखाओं के लिए है जहाँ माल विक्रय-मूल्य पर भेजा जाता है और मुख्यालय स्टॉक तथा वसूली पर कड़ी निगरानी रखना चाहता है; उसमें कई खाते बनते हैं — शाखा स्टॉक लेखा, शाखा ऋणी लेखा, शाखा व्यय लेखा और शाखा समायोजन लेखा — और लाभ शाखा समायोजन लेखे से निकलता है। अंतिम खाता पद्धति में मुख्यालय शाखा के लिए एक पूरा व्यापार तथा लाभ-हानि लेखा बनाता है, मानो वह एक स्वतंत्र इकाई हो। तीनों में उद्देश्य एक ही है, केवल विस्तार और नियंत्रण का स्तर भिन्न है — और यही अंतर तय करता है कि किस स्थिति में कौन-सी पद्धति अपनायी जाए।
मुख्य तथ्य
- ऋणी पद्धति छोटी और आश्रित शाखाओं के लिए अपनायी जाती है, जो अपनी पूरी दोहरी प्रविष्टि वाली बहियाँ नहीं रखतीं और जिन्हें माल प्रायः लागत पर भेजा जाता है।
- इस पद्धति में मुख्यालय अपनी बही में शाखा के नाम का केवल एक खाता खोलता है, और उसी खाते का शेष उस शाखा का लाभ या हानि बता देता है।
- शेष लाभ या हानि दर्शाता है और वर्ष के अंत में मुख्यालय के सामान्य लाभ और हानि लेखे में भेज दिया जाता है, इसलिए यह लेखा नाममात्र वर्ग का है।
- खाते के नामे पक्ष में प्रारंभिक स्टॉक, प्रारंभिक ऋणी, भेजा गया माल और शाखा-व्यय जाते हैं; जमा पक्ष में प्रेषण, वापस आया माल तथा अंतिम स्टॉक और ऋणी।
- पद्धति का नाम ऋणी पद्धति इसलिए है कि खाता ऋणी के खाते के रूप में बनाया जाता है; पर उसका वर्ग शेष के अर्थ से तय होता है, रूप से नहीं।
- स्टॉक और ऋणी पद्धति में एक के बजाय कई खाते बनते हैं — शाखा स्टॉक लेखा, शाखा ऋणी लेखा, शाखा व्यय लेखा और शाखा समायोजन लेखा — और लाभ अंतिम खाते से निकलता है।
- अंतिम खाता पद्धति में मुख्यालय शाखा के लिए पूरा व्यापार तथा लाभ-हानि लेखा बनाता है, मानो वह कोई स्वतंत्र इकाई हो।
- स्वतंत्र शाखा अपनी बहियाँ स्वयं रखती है और उसकी बहियों में बनने वाला मुख्यालय लेखा वैयक्तिक प्रकृति का होता है, जो मुख्यालय के शाखा लेखे से मेल खाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पद्धति का नाम ‘ऋणी’ देखकर शाखा लेखे को वैयक्तिक मान लेना; वर्ग खाते के रूप से नहीं, उसके शेष के अर्थ से तय होता है।
- शाखा की अलग-अलग संपत्तियों और शाखा लेखे को एक मान लेना; संपत्तियाँ वास्तविक लेखे हैं, यह समेकित खाता नहीं।
- ‘देयता लेखा’ को एक अलग वर्ग मान लेना, जबकि परंपरागत वर्गीकरण में वर्ग केवल तीन हैं और देयताएँ उन्हीं में बँट जाती हैं।
- स्वतंत्र शाखा वाली व्यवस्था के मुख्यालय लेखे को इस प्रश्न पर लागू कर देना; वह दूसरी व्यवस्था है और वहाँ खाता सचमुच वैयक्तिक होता है।
लेखों का वर्गीकरण इस भर्ती के लेखांकन खंड का सबसे नियमित विषय है, और इसी पेपर में वह दो बार पूछा गया है — एक बार आय एवं व्यय लेखे के लिए और एक बार ऋणी पद्धति के शाखा लेखे के लिए, दोनों बार लगभग एक ही विकल्प-समूह के साथ। इससे तैयारी की दिशा स्पष्ट है: किसी एक खाते का वर्ग रटने के बजाय वर्ग तय करने की कसौटी साधिए। दो प्रश्न पूछिए। पहला, इस खाते में क्या दर्ज होता है — व्यक्ति के साथ लेन-देन, कोई वस्तु या संपत्ति, या आय-व्यय। दूसरा, वर्ष के अंत में इसका शेष कहाँ जाता है — तुलनपत्र में, या अंतिम खातों में बंद हो जाता है। दूसरी कसौटी अधिक भरोसेमंद है, क्योंकि वह उन मिश्रित दिखने वाले खातों पर भी काम करती है जिनका रूप एक वर्ग का और अर्थ दूसरे वर्ग का होता है — ठीक जैसे यह शाखा लेखा। परीक्षा ऐसे ही खातों पर प्रश्न बनाती है, इसलिए यही कसौटी सबसे उपयोगी है।
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EPFO_EOAO_2017_Q62खोलें व हल करें →Income and Expenditure Account is
- (a) Real Account
- (b) Personal Account
- (c) Nominal Account
- (d) Capital Account
उत्तर(c) Nominal Account
इसी पेपर का प्रश्न 62 आय एवं व्यय लेखे का वर्ग पूछता है, और उसके पहले तीन विकल्प ठीक वही हैं जो यहाँ हैं।
EPFO_EOAO_2020_Q110Which one of the following statements is correct about Income and Expenditure Account ?
- (a) It is a Real Account.
- (b) It is a Personal Account.
- (c) It is a Nominal Account.
- (d) It is a Representative Personal Account.
उत्तर(c) It is a Nominal Account.
EPFO EO/AO 2020 में भी आय एवं व्यय लेखे के वर्ग पर प्रश्न आया — वही वर्गीकरण, दूसरे वर्ष का पेपर।
EPFO_APFC_2023_Q110Goodwill Account is a/an
- (a) Personal Account
- (b) Real Account
- (c) Nominal Account
- (d) Expense Account
उत्तर(b) Real Account
EPFO APFC 2023 में ख्याति के लेखे का वर्ग पूछा गया, जो इसी वर्गीकरण की दूसरी दिशा है।
EPFO_EOAO_2023_Q45'Outstanding rent' may be classified as :
- (a) Natural personal account
- (b) Representative personal account
- (c) Real account
- (d) Nominal account
उत्तर(b) Representative personal account
EPFO EO/AO 2023 में अदत्त किराए का वर्गीकरण पूछा गया — प्रतिनिधि वैयक्तिक लेखे का उदाहरण।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
ऋणी पद्धति के अंतर्गत मुख्यालय की बही में बनाए गए शाखा लेखे का शेष अंततः निम्नलिखित में से किस लेखे में भेजा जाता है?
- (a)शाखा का तुलनपत्र
- (b)मुख्यालय का सामान्य लाभ और हानि लेखा
- (c)शाखा स्टॉक लेखा
- (d)शाखा समायोजन लेखा
उत्तर(b) मुख्यालय का सामान्य लाभ और हानि लेखा
- practice — not a real PYQ
शाखा लेखांकन की किस पद्धति में शाखा स्टॉक लेखा, शाखा ऋणी लेखा और शाखा समायोजन लेखा बनाए जाते हैं?
- (a)ऋणी पद्धति
- (b)स्टॉक और ऋणी पद्धति
- (c)अंतिम खाता पद्धति
- (d)स्वतंत्र शाखा पद्धति
उत्तर(b) स्टॉक और ऋणी पद्धति