जब संयुक्त उद्यम के लिए वस्तुएँ खरीदी जाती हैं, तब राशि किस लेखे में नामे की जाती है?
- (a)क्रय लेखा
- (b)संयुक्त उद्यम लेखा
- (c)जोखिमी पूँजीगत लेखा
- (d)लाभ और हानि लेखा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) संयुक्त उद्यम लेखा। संयुक्त उद्यम किसी एक निश्चित काम के लिए बनी अस्थायी साझेदारी है — जैसे माल की एक खेप ख़रीदकर बेच देना या एक ठेका पूरा कर देना — और काम पूरा होते ही वह समाप्त हो जाती है। इसका पूरा लेखांकन एक ही आवश्यकता से निकलता है: उस एक काम का लाभ या हानि अलग से निकल आनी चाहिए, सह-उद्यमियों के अपने कारोबार में घुल न जाए। इसीलिए उद्यम से जुड़ा हर व्यय और हर आय एक अलग खाते में इकट्ठा किया जाता है, जिसका नाम संयुक्त उद्यम लेखा है। यह लेखा उस काम का व्यापार तथा लाभ-हानि लेखा दोनों का काम करता है — उसके नामे पक्ष में ख़रीदा गया माल, ढुलाई, बीमा, गोदाम-भाड़ा और अन्य व्यय जाते हैं, और जमा पक्ष में बिक्री तथा अंत में बचा हुआ माल; जो शेष निकलता है वही उद्यम का लाभ या हानि है, जिसे तय अनुपात में सह-उद्यमियों में बाँट दिया जाता है। इसलिए जब उद्यम के लिए वस्तुएँ ख़रीदी जाती हैं, तब राशि संयुक्त उद्यम लेखे में नामे की जाती है और जिस स्रोत से भुगतान हुआ उसे जमा — अलग बहियाँ रखी गई हों तो संयुक्त बैंक लेखा, और न रखी गई हों तो सह-उद्यमी का अपना बैंक या रोकड़ लेखा। यह बात लेखांकन की तीनों प्रचलित पद्धतियों में एक जैसी रहती है, इसलिए प्रश्न किसी पद्धति का नाम लिए बिना भी पूछा जा सकता है, जैसे यहाँ पूछा गया है। एक बात इस प्रश्न के हिन्दी स्तंभ के बारे में भी कहनी आवश्यक है: विकल्प (c) का पाठ ‘जोखिमी पूँजीगत लेखा’ संयुक्त उद्यम के लेखांकन का कोई मान्य नाम नहीं है और वह विकल्प दोषपूर्ण छपा है; उसे यहाँ जैसा छपा है वैसा ही रखा गया है। इस प्रविष्टि की स्थिरता ध्यान देने योग्य है: चाहे उद्यम की अलग बहियाँ रखी जाएँ, चाहे प्रत्येक सह-उद्यमी केवल अपने लेन-देन लिखे, और चाहे स्मरण-पत्र पद्धति अपनायी जाए — माल की ख़रीद का नामे पक्ष सदा संयुक्त उद्यम लेखा ही रहता है, केवल जमा पक्ष बदलता है। इसीलिए यह प्रश्न किसी पद्धति का नाम लिए बिना भी पूछा जा सकता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)क्रय लेखा — क्रय लेखा किसी व्यापारी के अपने नियमित कारोबार का खाता है, जिसमें वह अपने लिए ख़रीदा गया माल दर्ज करता है और जो वर्ष के अंत में उसके व्यापार लेखे में बंद होता है। यदि उद्यम के लिए ख़रीदा गया माल भी उसी क्रय लेखे में डाल दिया जाए, तो संयुक्त उद्यम का सारा प्रयोजन ही समाप्त हो जाएगा — उस एक काम का लाभ अलग से निकल ही नहीं पाएगा, और सह-उद्यमियों के बीच बँटवारा किस राशि पर होगा यह भी तय नहीं होगा। यही कारण है कि उद्यम की हर मद अलग खाते में रखी जाती है। इस विकल्प को काटने की सबसे अच्छी कसौटी यही प्रश्न है कि इस प्रविष्टि का परिणाम किसके लाभ में जाएगा — अपने कारोबार के लाभ में, या उस साझे काम के लाभ में।
- (c)जोखिमी पूँजीगत लेखा — इस विकल्प का पाठ इस हिन्दी स्तंभ में दोषपूर्ण छपा है और संयुक्त उद्यम के लेखांकन में ‘जोखिमी पूँजीगत लेखा’ नाम का कोई खाता है ही नहीं; इसी पुस्तिका का अंग्रेज़ी स्तंभ वहाँ सह-उद्यमी के पूँजी लेखे (Venturer’s Capital Account) की बात करता है। उस अर्थ में भी विकल्प ग़लत ही रहता है, और यही सीखने लायक़ बात है। सह-उद्यमी का पूँजी या वैयक्तिक लेखा तब बनता है जब उद्यम की अलग बहियाँ रखी जाती हैं, और उसमें जमा वे राशियाँ होती हैं जो सह-उद्यमी ने उद्यम में लगाई हैं तथा अंत में उसके हिस्से का लाभ; नामे वह तब होता है जब वह उद्यम से माल या धन ले जाए, अथवा अंतिम निपटान में उसे भुगतान किया जाए। माल की ख़रीद उसमें कहीं नहीं आती, क्योंकि वह उद्यम का व्यय है, किसी सह-उद्यमी का व्यक्तिगत लेन-देन नहीं।
- (d)लाभ और हानि लेखा — लाभ और हानि लेखा सह-उद्यमी के अपने कारोबार का अंतिम खाता है, और उद्यम से उसका संबंध केवल एक जगह बनता है — जब उद्यम पूरा होकर उसका लाभ या हानि बँट जाती है, तब सह-उद्यमी अपने हिस्से की राशि अपने लाभ और हानि लेखे में ले जाता है। यह अंतिम चरण है, आरंभिक नहीं। माल की ख़रीद को सीधे लाभ और हानि लेखे में नामे कर देना दो कारणों से ग़लत होगा: पहला, ख़रीद अपने आप में हानि नहीं है, वह एक परिसंपत्ति बनती है जो आगे बिकेगी; और दूसरा, तब उद्यम का अलग परिणाम निकालने की व्यवस्था ही टूट जाएगी। इस विकल्प का काम यह है कि ‘अंत में सब कुछ लाभ-हानि में ही तो जाता है’ वाली सामान्य समझ का लाभ उठाकर उत्तर को उधर खींच ले।
अवधारणा
संयुक्त उद्यम की तीन पहचानें हैं और तीनों परीक्षा में पूछी जाती हैं। पहली, वह किसी एक निश्चित काम के लिए होता है और उस काम के पूरा होते ही समाप्त हो जाता है — इसी कारण उसे अस्थायी साझेदारी कहा जाता है। दूसरी, उसमें भाग लेने वाले सह-उद्यमी कहलाते हैं और लाभ-हानि तय अनुपात में बाँटते हैं; अनुपात तय न हो तो बराबर-बराबर। तीसरी, उसका कोई स्थायी नाम, स्थायी पूँजी या निरंतर चलने वाली बहियाँ नहीं होतीं। लेखांकन की तीन पद्धतियाँ प्रचलित हैं। पहली, अलग बहियाँ रखी जाएँ — तब संयुक्त बैंक लेखा, संयुक्त उद्यम लेखा और प्रत्येक सह-उद्यमी का वैयक्तिक लेखा बनता है। दूसरी, अलग बहियाँ न रखी जाएँ और हर सह-उद्यमी अपनी बहियों में केवल अपने किए हुए लेन-देन लिखे — तब वह एक संयुक्त उद्यम लेखा और दूसरे सह-उद्यमी का वैयक्तिक लेखा बनाता है। तीसरी, स्मरण-पत्र पद्धति — तब हर सह-उद्यमी अपनी बहियों में केवल एक वैयक्तिक प्रकृति का खाता रखता है और उद्यम का लाभ निकालने के लिए बहियों से बाहर एक स्मरण-पत्र संयुक्त उद्यम लेखा बना लिया जाता है। तीनों में माल की ख़रीद संयुक्त उद्यम लेखे में ही नामे होती है।
संयुक्त उद्यम की तुलना दो पड़ोसी विषयों से करते रहना चाहिए, क्योंकि परीक्षा प्रायः उन्हीं के बीच का भेद पूछती है। साझेदारी से तुलना कीजिए: साझेदारी निरंतर चलने वाला व्यवसाय है, उसका अपना नाम और स्थायी पूँजी होती है, और उस पर भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 लागू होता है; संयुक्त उद्यम एक काम तक सीमित रहता है और काम पूरा होते ही समाप्त हो जाता है। परेषण से तुलना कीजिए: परेषण में एक पक्ष स्वामी होता है और दूसरा केवल कमीशन पर बेचने वाला अभिकर्ता, और लाभ पूरा का पूरा परेषक का होता है; संयुक्त उद्यम में दोनों पक्ष स्वामी होते हैं और लाभ तय अनुपात में बाँटते हैं। इसी पेपर में ये तीनों अध्याय आस-पास पूछे गए हैं — प्रश्न 64 परेषण का, प्रश्न 65 संयुक्त उद्यम का और प्रश्न 67 शाखा लेखे का — जो बताता है कि विशिष्ट लेखों का यह पूरा खंड इस भर्ती के पाठ्यक्रम का नियमित भाग है।
मुख्य तथ्य
- संयुक्त उद्यम किसी एक निश्चित काम के लिए बनी अस्थायी साझेदारी है, जो उस काम के पूरा होते ही समाप्त हो जाती है और जिसका कोई स्थायी नाम या स्थायी पूँजी नहीं होती।
- उद्यम के लिए ख़रीदी गई वस्तुओं की राशि संयुक्त उद्यम लेखे में नामे की जाती है और भुगतान के स्रोत वाले लेखे में जमा।
- संयुक्त उद्यम लेखा उस काम के व्यापार तथा लाभ-हानि लेखे दोनों का काम करता है, और उसका शेष उस उद्यम का लाभ या हानि होता है, जिसे सह-उद्यमियों में बाँटा जाता है।
- उद्यम की अलग बहियाँ रखी जाएँ तो तीन प्रकार के खाते बनते हैं — संयुक्त बैंक लेखा, संयुक्त उद्यम लेखा, और प्रत्येक सह-उद्यमी का वैयक्तिक लेखा।
- सह-उद्यमी के वैयक्तिक लेखे में उसकी लगाई गई राशि तथा अंत में उसके हिस्से का लाभ जमा होता है; उद्यम के लिए ख़रीदा गया माल उसमें कहीं नहीं आता।
- यदि लाभ बाँटने का अनुपात पहले से तय न हो, तो सह-उद्यमी उसे बराबर-बराबर बाँटते हैं, ठीक वैसे ही जैसे साझेदारी में करार के अभाव में होता है।
- परेषण में एक पक्ष स्वामी होता है और दूसरा केवल कमीशन पर बेचने वाला अभिकर्ता, जबकि संयुक्त उद्यम में दोनों पक्ष स्वामी होते हैं और लाभ तय अनुपात में बाँटते हैं।
- इस पेपर के हिन्दी स्तंभ में विकल्प (c) का पाठ दोषपूर्ण छपा है, क्योंकि संयुक्त उद्यम के लेखांकन में उस नाम का कोई खाता है ही नहीं; उसे यहाँ जैसा छपा है वैसा ही रखा गया है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- उद्यम के लिए ख़रीदे माल को अपने क्रय लेखे में डाल देना, जिससे उस उद्यम का अलग परिणाम निकल ही नहीं पाता और बँटवारे का आधार भी नहीं बचता।
- सह-उद्यमी के पूँजी अथवा वैयक्तिक लेखे को उद्यम के व्ययों का ठिकाना मान लेना; वह खाता केवल उसके अपने लेन-देन और उसके हिस्से का लाभ दिखाता है।
- उद्यम की मदों को सीधे अपने लाभ और हानि लेखे में ले जाना; वहाँ केवल अंत में हिस्से का लाभ या हानि जाती है।
- यह मान लेना कि प्रविष्टि पद्धति के अनुसार बदल जाएगी; माल की ख़रीद तीनों पद्धतियों में संयुक्त उद्यम लेखे में ही नामे होती है।
विशिष्ट लेखों के इस खंड में प्रश्न प्रायः एक ही घटना उठाकर पूछते हैं कि वह किस लेखे में और किस पक्ष में जाएगी, और विकल्पों में उसी अध्याय के मिलते-जुलते नाम रख दिए जाते हैं। ऐसे प्रश्न में सबसे भरोसेमंद तरीका यह है कि प्रविष्टि पूरी लिखिए, आधी नहीं — पहले पूछिए कि किस चीज़ में वृद्धि हो रही है और किसमें कमी, फिर दोनों पक्ष लिखिए, और तब विकल्प देखिए। यहाँ प्रविष्टि है संयुक्त उद्यम लेखा नामे और भुगतान के स्रोत का लेखा जमा, इसलिए उत्तर बिना किसी अनुमान के निकल आता है। दूसरी उपयोगी आदत यह है कि हर अध्याय की तुलना उसके पड़ोसी अध्याय से करते रहिए — संयुक्त उद्यम बनाम साझेदारी, संयुक्त उद्यम बनाम परेषण — क्योंकि परीक्षा इन्हीं सीमाओं पर प्रश्न बनाती है, और भेद स्पष्ट हो तो विकल्प अपने आप छँट जाते हैं।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
जब संयुक्त उद्यम के लिए अलग बहियाँ रखी जाती हैं, तब सह-उद्यमियों द्वारा उद्यम में लगाई गई राशि किस लेखे में जमा की जाती है?
- (a)संयुक्त उद्यम लेखा
- (b)संयुक्त बैंक लेखा
- (c)सह-उद्यमी का वैयक्तिक लेखा
- (d)क्रय लेखा
उत्तर(c) सह-उद्यमी का वैयक्तिक लेखा
- practice — not a real PYQ
संयुक्त उद्यम और साझेदारी के बीच सबसे प्रमुख अंतर निम्नलिखित में से कौन-सा है, जो दोनों को अलग-अलग व्यवस्थाएँ बनाता है?
- (a)संयुक्त उद्यम किसी एक निश्चित काम के लिए होता है और उसके पूरा होने पर समाप्त हो जाता है
- (b)संयुक्त उद्यम में लाभ बाँटा नहीं जाता
- (c)संयुक्त उद्यम में केवल एक ही व्यक्ति होता है
- (d)संयुक्त उद्यम का पंजीकरण अनिवार्य होता है
उत्तर(a) संयुक्त उद्यम किसी एक निश्चित काम के लिए होता है और उसके पूरा होने पर समाप्त हो जाता है