आय और व्यय लेखा क्या होता है?
- (a)संपत्ति लेखा
- (b)वैयक्तिक लेखा
- (c)आय-व्यय लेखा
- (d)पूँजीगत लेखा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) आय-व्यय लेखा। पहले इस विकल्प के पाठ के बारे में एक ज़रूरी बात, क्योंकि उसे पढ़कर भ्रम होना स्वाभाविक है। हिन्दी वाणिज्य की पारिभाषिक शब्दावली में लेखों के तीन वर्ग इस प्रकार कहे जाते हैं — संपत्ति या वास्तविक लेखा, वैयक्तिक लेखा, और तीसरा वह वर्ग जिसमें आय, व्यय, लाभ और हानि के लेखे आते हैं; इस पुस्तिका ने उसी तीसरे वर्ग को ‘आय-व्यय लेखा’ नाम दिया है, जबकि इसी पुस्तिका का अंग्रेज़ी स्तंभ वहाँ नाममात्र लेखा (Nominal Account) छापता है। कठिनाई यह है कि प्रश्न-वाक्य का विषय भी ‘आय और व्यय लेखा’ ही है, इसलिए विकल्प (c) पढ़ने में प्रश्न के ही नाम की पुनरावृत्ति जैसा लगता है और वर्ग का नाम होने के बजाय उसी लेखे का नाम लगने लगता है। इस कारण हिन्दी स्तंभ में यह विकल्प दोषपूर्ण है; यहाँ उसे जैसा छपा है वैसा ही रखा गया है और अंग्रेज़ी अर्थ में बदला नहीं गया है। अब वस्तु-सामग्री। आय एवं व्यय लेखा अलाभकारी संस्थाएँ बनाती हैं और वह व्यापारिक संस्था के लाभ और हानि लेखे के समतुल्य होता है — उसमें केवल चालू वर्ष की आगमी मदें उपचय आधार पर ली जाती हैं और शेष अधिशेष या घाटा कहलाता है, जिसे पूँजी कोष में जोड़ा या उससे घटाया जाता है। जिस लेखे में आय और व्यय ही दर्ज होते हों, वह परिभाषा से उसी तीसरे वर्ग का है — न वह किसी संपत्ति का लेखा है, न किसी व्यक्ति का। इसी कारण कुंजी विकल्प (c) पर जाती है। एक व्यावहारिक कसौटी भी याद रखिए, जो इस प्रकार के हर प्रश्न पर काम करती है: वर्ष के अंत में जिस खाते का शेष तुलनपत्र में जाता है वह पहले दो वर्गों का है, और जिसका शेष अंतिम खातों में बंद हो जाता है वह तीसरे वर्ग का। आय एवं व्यय लेखे का शेष हर वर्ष पूँजी कोष में मिलाकर शून्य कर दिया जाता है, इसलिए वह तीसरे वर्ग का ही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)संपत्ति लेखा — संपत्ति या वास्तविक लेखे उन मदों के होते हैं जिनका अस्तित्व वर्ष के अंत में भी बना रहता है — भवन, मशीन, फ़र्नीचर, रोकड़, स्टॉक। इनका सुनहरा नियम है कि जो आता है उसे नामे और जो जाता है उसे जमा कीजिए, और इनका शेष वर्ष के अंत में बंद नहीं किया जाता, बल्कि तुलनपत्र में ले जाकर अगले वर्ष आगे बढ़ाया जाता है। आय एवं व्यय लेखा इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि वह कोई संपत्ति नहीं है और उसका शेष हर वर्ष के अंत में पूँजी कोष में मिलाकर शून्य कर दिया जाता है। यहाँ ध्यान रखने योग्य बात यह भी है कि अलाभकारी संस्था का प्राप्ति एवं भुगतान लेखा वास्तव में रोकड़ बही का सारांश है, इसलिए वह संपत्ति लेखा है — पर प्रश्न उसके बारे में नहीं है।
- (b)वैयक्तिक लेखा — वैयक्तिक लेखे व्यक्तियों, फ़र्मों और संस्थाओं के होते हैं, जैसे किसी देनदार या लेनदार का खाता, और इनका सुनहरा नियम है कि पाने वाले को नामे और देने वाले को जमा कीजिए। इस वर्ग में प्रतिनिधि वैयक्तिक लेखे भी आते हैं — जैसे अदत्त किराया या पूर्वदत्त बीमा — जो किसी नामित व्यक्ति के नहीं होते पर किसी समूह के प्रति देयता या दावा दर्शाते हैं, इसलिए व्यक्ति की तरह बरते जाते हैं। आय एवं व्यय लेखा किसी व्यक्ति या संस्था से लेन-देन का लेखा नहीं है; वह पूरे वर्ष की आय और व्यय का सारांश है। इसलिए यह विकल्प वर्ग ही ग़लत बता रहा है।
- (d)पूँजीगत लेखा — यह विकल्प दो कारणों से हटता है। पहला, परंपरागत वर्गीकरण में वर्ग केवल तीन हैं और ‘पूँजीगत लेखा’ उनमें से कोई नहीं है; स्वामी का पूँजी खाता स्वयं वैयक्तिक लेखे में आता है, अलग वर्ग नहीं बनाता। दूसरा, अलाभकारी संस्था में पूँजी के स्थान पर पूँजी कोष होता है, जो तुलनपत्र में दिखता है, और आय एवं व्यय लेखे का अधिशेष उसी कोष में जोड़ा जाता है — अर्थात् दोनों अलग चीज़ें हैं और एक दूसरे को खिलाता है। परीक्षा ऐसे विकल्प इसलिए रखती है कि ‘पूँजीगत’ शब्द सुनते ही लेखांकन का पूँजीगत बनाम आगमी वाला भेद याद आ जाता है और उत्तर उसी ओर खिंचने लगता है; पर यहाँ प्रश्न व्यय के स्वरूप का नहीं, लेखे के वर्ग का है।
अवधारणा
परंपरागत वर्गीकरण में हर खाता तीन वर्गों में से किसी एक में जाता है, और यही वर्ग तय करता है कि उसे नामे किया जाएगा या जमा। पहला वर्ग वैयक्तिक लेखों का है — व्यक्ति, फ़र्म, कंपनी, बैंक, और उनके साथ प्रतिनिधि वैयक्तिक लेखे भी; नियम है, पाने वाले को नामे, देने वाले को जमा। दूसरा वर्ग वास्तविक या संपत्ति लेखों का है — भवन, मशीन, रोकड़, स्टॉक, तथा ख्याति जैसी अमूर्त संपत्तियाँ; नियम है, जो आता है उसे नामे, जो जाता है उसे जमा। तीसरा वर्ग आय, व्यय, लाभ और हानि के लेखों का है, जिसे मानक हिन्दी में नाममात्र लेखा कहा जाता है और यह पुस्तिका जिसे ‘आय-व्यय लेखा’ कहती है; नियम है, समस्त व्यय और हानियों को नामे, समस्त आय और लाभों को जमा। इस तीसरे वर्ग की सबसे बड़ी पहचान यह है कि उसके खाते वर्ष के अंत में बंद कर दिए जाते हैं और उनका शेष अंतिम खातों में चला जाता है, जबकि पहले दो वर्गों के शेष तुलनपत्र में जाकर अगले वर्ष आगे बढ़ते हैं। इसी कसौटी पर आय एवं व्यय लेखा तीसरे वर्ग में बैठता है।
अलाभकारी संस्थाएँ — क्लब, अस्पताल, पुस्तकालय, विद्यालय, धर्मार्थ न्यास — व्यापार लेखा और लाभ-हानि लेखा नहीं बनातीं, क्योंकि उनका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं होता। वे दो विवरण बनाती हैं। पहला है प्राप्ति एवं भुगतान लेखा, जो रोकड़ बही का वर्गीकृत सारांश है; उसमें रोकड़ की हर आवक-जावक आती है, चाहे वह चालू वर्ष की हो या पिछले या अगले वर्ष की, और चाहे वह आगमी हो या पूँजीगत। दूसरा है आय एवं व्यय लेखा, जो लाभ और हानि लेखे के समतुल्य है; उसमें केवल चालू वर्ष की आगमी मदें आती हैं, उपचय आधार पर, और पूँजीगत मदें बाहर रहती हैं। दोनों का अंतर परीक्षा का प्रिय विषय है: पहला रोकड़ आधार पर चलता है और उसका शेष रोकड़ का शेष होता है, दूसरा उपचय आधार पर चलता है और उसका शेष अधिशेष या घाटा कहलाता है। अधिशेष पूँजी कोष में जोड़ा जाता है, जो अलाभकारी संस्था के तुलनपत्र में पूँजी का स्थान लेता है।
मुख्य तथ्य
- परंपरागत वर्गीकरण में लेखों के तीन ही वर्ग हैं — वैयक्तिक लेखा, संपत्ति अथवा वास्तविक लेखा, और आय-व्यय वाला वह वर्ग जिसे मानक शब्दावली में नाममात्र लेखा कहते हैं।
- आय एवं व्यय लेखा इसी तीसरे वर्ग में आता है, क्योंकि उसमें केवल आय और व्यय दर्ज होते हैं और उसका शेष लाभ या हानि जैसा परिणाम बताता है।
- यह लेखा अलाभकारी संस्थाएँ बनाती हैं — क्लब, अस्पताल, विद्यालय, पुस्तकालय और न्यास — और वह व्यापारिक संस्था के लाभ और हानि लेखे के समतुल्य होता है।
- इसमें केवल चालू वर्ष की आगमी मदें उपचय आधार पर ली जाती हैं; पिछले या अगले वर्ष की मदें और सब पूँजीगत मदें इसमें नहीं आतीं।
- इसका शेष अधिशेष या घाटा कहलाता है और उसे तुलनपत्र में दिखने वाले पूँजी कोष में जोड़ा या उससे घटाया जाता है, जिससे यह खाता हर वर्ष बंद हो जाता है।
- प्राप्ति एवं भुगतान लेखा रोकड़ बही का वर्गीकृत सारांश है और रोकड़ आधार पर चलता है, इसलिए वह आगमी और पूँजीगत दोनों प्रकार की रोकड़ लेता है और इससे भिन्न है।
- नाममात्र वर्ग का सुनहरा नियम है — समस्त व्यय और हानियों को नामे कीजिए और समस्त आय तथा लाभों को जमा कीजिए।
- इस पुस्तिका के हिन्दी स्तंभ में विकल्प (c) का पाठ प्रश्न-वाक्य के ही नाम को दोहराता है, इसलिए वह विकल्प दोषपूर्ण छपा है और उसे यहाँ जैसा छपा है वैसा ही रखा गया है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विकल्प (c) का पाठ प्रश्न-वाक्य के नाम जैसा होने से उसे वर्ग का नाम न मानकर उसी लेखे की पुनरावृत्ति समझ लेना।
- आय एवं व्यय लेखा और प्राप्ति एवं भुगतान लेखा को एक मान लेना; दूसरा रोकड़ बही का सारांश है और संपत्ति लेखा है।
- ‘पूँजीगत’ शब्द देखकर पूँजीगत बनाम आगमी व्यय वाले भेद की ओर चले जाना, जबकि प्रश्न व्यय के स्वरूप का नहीं, लेखे के वर्ग का है।
- स्वामी के पूँजी खाते को एक अलग वर्ग मान लेना; परंपरागत वर्गीकरण में वह वैयक्तिक लेखा है और अलाभकारी संस्था में उसका स्थान पूँजी कोष लेता है।
लेखों के वर्गीकरण पर प्रश्न इस परीक्षा-परिवार में बार-बार आते हैं और उनका रूप लगभग एक ही रहता है — किसी एक खाते का नाम देकर पूछ लिया जाता है कि वह किस वर्ग का है, और चारों विकल्प वर्गों के नाम होते हैं। ऐसे प्रश्न में सबसे भरोसेमंद तरीका परिभाषा से चलना है, स्मृति से नहीं: पूछिए कि इस खाते में क्या दर्ज होता है। यदि व्यक्ति या संस्था से लेन-देन दर्ज होता है तो वैयक्तिक; यदि कोई वस्तु, संपत्ति या रोकड़ दर्ज होती है तो संपत्ति; और यदि आय, व्यय, लाभ या हानि दर्ज होती है तो तीसरा वर्ग। दूसरी कसौटी और भी तेज़ है — पूछिए कि वर्ष के अंत में इस खाते का शेष तुलनपत्र में जाता है या अंतिम खातों में बंद हो जाता है; बंद होने वाला खाता सदा तीसरे वर्ग का होता है। इसी पेपर में यही जाँच एक और प्रश्न में दोहरायी गई है, जहाँ ऋणी प्रणाली के शाखा लेखे का वर्ग पूछा गया है, और वहाँ भी उत्तर यही वर्ग है।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q110Which one of the following statements is correct about Income and Expenditure Account ?
- (a) It is a Real Account.
- (b) It is a Personal Account.
- (c) It is a Nominal Account.
- (d) It is a Representative Personal Account.
उत्तर(c) It is a Nominal Account.
EPFO EO/AO 2020 में ठीक यही बात पूछी गई — आय एवं व्यय लेखे के बारे में कौन-सा कथन सही है — और वहाँ भी उत्तर यही वर्ग है।
EPFO_EOAO_2017_Q67खोलें व हल करें →Branch Account under Debtors System is
- (a) Real Account
- (b) Personal Account
- (c) Nominal Account
- (d) Liability Account
उत्तर(c) Nominal Account
इसी पेपर का प्रश्न 67 ऋणी प्रणाली के शाखा लेखे का वर्ग पूछता है, और उसका विकल्प (c) का पाठ भी यही है।
EPFO_APFC_2023_Q110Goodwill Account is a/an
- (a) Personal Account
- (b) Real Account
- (c) Nominal Account
- (d) Expense Account
उत्तर(b) Real Account
EPFO APFC 2023 में ख्याति के लेखे का वर्ग पूछा गया — उसी वर्गीकरण की दूसरी दिशा से जाँच।
EPFO_EOAO_2023_Q45'Outstanding rent' may be classified as :
- (a) Natural personal account
- (b) Representative personal account
- (c) Real account
- (d) Nominal account
उत्तर(b) Representative personal account
EPFO EO/AO 2023 में अदत्त किराए का वर्गीकरण पूछा गया, जो प्रतिनिधि वैयक्तिक लेखे का उदाहरण है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
अलाभकारी संस्था का आय एवं व्यय लेखा व्यापारिक संस्था के निम्नलिखित में से किस लेखे के समतुल्य है?
- (a)व्यापार लेखा
- (b)लाभ और हानि लेखा
- (c)प्राप्ति एवं भुगतान लेखा
- (d)तुलनपत्र
उत्तर(b) लाभ और हानि लेखा
- practice — not a real PYQ
परंपरागत वर्गीकरण के अनुसार, आय, व्यय, लाभ और हानि वाले लेखों पर लागू होने वाला सुनहरा नियम निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- (a)जो आता है उसे नामे, जो जाता है उसे जमा
- (b)पाने वाले को नामे, देने वाले को जमा
- (c)समस्त व्यय और हानियों को नामे, समस्त आय और लाभों को जमा
- (d)संपत्तियों को नामे, देयताओं को जमा
उत्तर(c) समस्त व्यय और हानियों को नामे, समस्त आय और लाभों को जमा