नीचे दी गयी सूचना से बीमा राशि की गणना कीजिए : आग लगने का दिनांक—01.03.2016 दिनांक 01.03.2015 से 29.02.2016 तक कुल बिक्री—₹ 88,00,000 सहमत GP अनुपात—20% कारोबार राशि में 10% की वृद्धि के लिए उपलब्ध विशेष परिस्थिति शर्त
- (a)₹ 19,36,000
- (b)₹ 48,40,000
- (c)₹ 10,32,000
- (d)₹ 24,20,000
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) ₹ 19,36,000। यह लाभ-हानि (consequential loss) बीमा का प्रश्न है, जिसमें बीमा योग्य राशि निकालने का सूत्र एक ही है — समायोजित वार्षिक कारोबार को सहमत सकल लाभ अनुपात से गुणा कीजिए। गणना तीन चरणों में होती है। पहला चरण, वार्षिक कारोबार लीजिए। यहाँ आग 01.03.2016 को लगी और उससे ठीक पहले के बारह महीनों का कारोबार दिया गया है — 01.03.2015 से 29.02.2016 तक ₹ 88,00,000। दूसरा चरण, विशेष परिस्थिति शर्त लगाइए। यह शर्त पॉलिसी में इसीलिए रखी जाती है कि कारोबार बढ़ने की प्रवृत्ति को बीमा राशि में पहले से जोड़ लिया जाए; यहाँ वह 10% की वृद्धि देती है, इसलिए समायोजित कारोबार हुआ ₹ 88,00,000 × 1·10 = ₹ 96,80,000। तीसरा चरण, इस पर सहमत सकल लाभ अनुपात लगाइए — ₹ 96,80,000 का 20% = ₹ 19,36,000। यही बीमा योग्य राशि है और यही विकल्प (a) में छपी है। दो बातें यहाँ विशेष ध्यान माँगती हैं। पहली, बीमा योग्य राशि पूरा कारोबार नहीं होती, केवल उस कारोबार पर अर्जित सकल लाभ होती है — क्योंकि आग लगने पर व्यवसाय की बिक्री तो रुकती है, पर उसके साथ परिवर्तनशील लागत भी रुक जाती है; बीमा केवल उस लाभ और स्थिर व्ययों की भरपाई करता है जो बिक्री रुकने पर भी चलते रहते हैं। दूसरी, विशेष परिस्थिति शर्त छोड़ देने पर उत्तर ₹ 17,60,000 आता, जो विकल्पों में है ही नहीं — यही संकेत है कि प्रश्न उस शर्त को लगवाना चाहता है। इसलिए सही उत्तर विकल्प (a) है। एक बात और जोड़ लीजिए, क्योंकि परीक्षा उसे इसी प्रश्न के साथ पूछ सकती है। बीमा योग्य राशि और पॉलिसी में लिखी बीमा राशि दो अलग बातें हैं: पहली वह है जो गणना से निकलती है, और दूसरी वह जिस पर वास्तव में बीमा कराया गया। यदि दूसरी पहली से कम निकले, तो औसत खण्ड लागू होकर दावा उसी अनुपात में घटा दिया जाता है — अर्थात् कम बीमा कराने वाला अपनी हानि का उतना ही भाग स्वयं वहन करता है। इसीलिए इस गणना का महत्त्व केवल शैक्षिक नहीं है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)₹ 48,40,000 — यह राशि समायोजित कारोबार ₹ 96,80,000 का ठीक आधा है, अर्थात् इसमें सकल लाभ अनुपात 20% के स्थान पर 50% लगा दिया गया है। प्रश्न में सहमत अनुपात स्पष्ट रूप से 20% दिया है, इसलिए यह राशि किसी भी सही चरण से नहीं निकलती। इस विकल्प का असली काम आकार का भ्रम पैदा करना है — यह इतनी बड़ी है कि पहली दृष्टि में ‘पूरा कारोबार जैसा’ लगती है, और जो अभ्यर्थी सूत्र भूलकर कारोबार के ही किसी बड़े अंश को उत्तर मान लेता है, वह इसी पर जाता है। जाँच का सरल तरीका यह है कि बीमा योग्य राशि कभी भी कारोबार के सकल लाभ अनुपात से अधिक नहीं हो सकती; 20% अनुपात पर वह समायोजित कारोबार के पाँचवें भाग के बराबर होगी, आधे के नहीं।
- (c)₹ 10,32,000 — यह राशि गणना के किसी भी चरण से नहीं निकलती, और इसे केवल आकार देखकर ही काटा जा सकता है। बिना किसी समायोजन के भी ₹ 88,00,000 का 20% ₹ 17,60,000 होता है, और विशेष परिस्थिति शर्त कारोबार को बढ़ाती ही है, घटाती नहीं — इसलिए सही उत्तर ₹ 17,60,000 से कम हो ही नहीं सकता। ₹ 10,32,000 इससे बहुत नीचे है, अतः वह असंभव है। ऐसे प्रश्नों में यह ‘सीमा-जाँच’ बहुत उपयोगी है: पहले बिना समायोजन का मान निकालिए, फिर देखिए कि शर्त उसे ऊपर ले जाती है या नीचे, और उसी दिशा के विकल्प बचाइए। यहाँ यह एक जाँच ही दो विकल्पों को तुरंत बाहर कर देती है।
- (d)₹ 24,20,000 — यह समायोजित कारोबार ₹ 96,80,000 का 25% है, 20% नहीं। दूसरे शब्दों में, इसमें अंतिम चरण की दर बदल दी गई है — शेष गणना सही है। यही इसे सबसे ख़तरनाक विकल्प बनाता है, क्योंकि जिस अभ्यर्थी ने विशेष परिस्थिति शर्त ठीक-ठीक लगा ली है, उसे यह राशि परिचित लगती है। ध्यान दीजिए कि ₹ 24,20,000 ठीक ₹ 19,36,000 का सवा गुना है। बचाव यह है कि प्रश्न में दी गई दर को गणना से पहले अलग लिखकर घेर लीजिए — यहाँ 20% — और अंतिम गुणा करते समय उसी घिरे हुए अंक को देखिए, स्मृति को नहीं।
अवधारणा
अग्नि बीमा के दो अलग-अलग प्रकार हैं और इस प्रश्न को समझने के लिए उनका भेद जानना आवश्यक है। पहला है माल-हानि की पॉलिसी, जो आग में नष्ट हुए स्टॉक या परिसंपत्ति की क्षतिपूर्ति करती है। दूसरा है लाभ-हानि की पॉलिसी, जिसे परिणामी हानि की पॉलिसी भी कहते हैं; वह उस हानि की भरपाई करती है जो आग के बाद कारोबार ठप रहने से होती है। आग बुझ जाने पर भी कारखाना कुछ महीने बंद रहता है, बिक्री गिरती है, और उस अवधि में जो सकल लाभ कमाया जाना था वह नहीं कमाया जाता; साथ ही किराया, बीमा-किस्त, वेतन जैसे स्थिर व्यय चलते रहते हैं। यही दोहरी मार लाभ-हानि पॉलिसी का विषय है। इसी कारण इस पॉलिसी की बीमा राशि पूरे कारोबार पर नहीं, कारोबार पर अर्जित सकल लाभ पर तय होती है — बीमा योग्य राशि = वार्षिक कारोबार × सकल लाभ अनुपात। यहाँ ‘सकल लाभ’ का अर्थ भी सामान्य व्यापार लेखे वाला नहीं है, बल्कि शुद्ध लाभ में बीमित स्थिर व्यय जोड़कर निकाला गया मान है, जिसे पॉलिसी में पहले से परिभाषित कर लिया जाता है। प्रश्न में जब ‘सहमत सकल लाभ अनुपात’ कहा जाता है, तब यही परिभाषित अनुपात दिया जा रहा होता है और उसे ज्यों का त्यों लगाना होता है।
विशेष परिस्थिति शर्त इस पॉलिसी का वह उपबंध है जो बदलती परिस्थितियों को गणना में लाता है। बीमा राशि बीते बारह महीनों के कारोबार पर तय होती है, पर व्यवसाय बढ़ रहा हो तो बीता वर्ष अगले वर्ष की सच्चाई नहीं बताता; उस स्थिति में यह शर्त कारोबार को एक निश्चित प्रतिशत से बढ़ाकर मानने की अनुमति देती है, जैसे यहाँ 10%। यदि व्यवसाय घट रहा हो तो यही शर्त उल्टी दिशा में भी लगायी जा सकती है। इसी परिवार के दो और पद परीक्षा में साथ-साथ आते हैं। पहला है क्षतिपूर्ति अवधि — वह अधिकतम अवधि जिसके लिए हानि की भरपाई मिलेगी, जो पॉलिसी में लिखी होती है और प्रायः बारह महीने तक रखी जाती है। दूसरा है औसत खण्ड — यदि पॉलिसी में लिखी बीमा राशि वास्तविक बीमा योग्य राशि से कम निकले, तो दावा उसी अनुपात में घटा दिया जाता है, ताकि कम बीमा कराने वाला अपनी हानि का उतना ही भाग स्वयं वहन करे। यही कारण है कि बीमा योग्य राशि की सही गणना केवल एक शैक्षिक अभ्यास नहीं है; उसी पर यह निर्भर करता है कि दावे के समय पूरी भरपाई मिलेगी या कटी हुई।
मुख्य तथ्य
- लाभ-हानि अर्थात् परिणामी हानि की पॉलिसी में बीमा योग्य राशि निकालने का सूत्र है — समायोजित वार्षिक कारोबार को सहमत सकल लाभ अनुपात से गुणा कीजिए।
- वार्षिक कारोबार वह होता है जो आग की तिथि से ठीक पहले के बारह महीनों में हुआ हो; यहाँ 01.03.2015 से 29.02.2016 तक ₹ 88,00,000।
- विशेष परिस्थिति शर्त कारोबार की बढ़ती या घटती प्रवृत्ति को गणना में लाने के लिए होती है; यहाँ 10% की वृद्धि, अतः समायोजित कारोबार ₹ 96,80,000।
- इस प्रश्न में ₹ 96,80,000 का 20% निकालने पर ₹ 19,36,000 आता है, और यही बीमा योग्य राशि है, जो विकल्प (a) में छपी है।
- यदि विशेष परिस्थिति शर्त न लगायी जाए तो उत्तर ₹ 17,60,000 आता, जो विकल्पों में है ही नहीं — यही इस बात का संकेत है कि प्रश्न वह शर्त लगवाना चाहता है।
- क्षतिपूर्ति अवधि वह अधिकतम अवधि है जिसके लिए परिणामी हानि की भरपाई मिलती है; वह पॉलिसी में पहले से लिखी होती है और प्रायः बारह महीने तक रखी जाती है।
- औसत खण्ड लागू होने पर, यदि पॉलिसी में लिखी राशि बीमा योग्य राशि से कम निकले तो दावा उसी अनुपात में घटा दिया जाता है, जिससे कम बीमा कराने वाला हानि का उतना भाग स्वयं वहन करता है।
- इस पॉलिसी का ‘सकल लाभ’ सामान्य व्यापार लेखे वाला नहीं होता; वह शुद्ध लाभ में बीमित स्थिर व्यय जोड़कर निकाला जाता है और पॉलिसी में पहले से परिभाषित रहता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विशेष परिस्थिति शर्त लगाना भूल जाना; तब उत्तर ₹ 17,60,000 आता है, जो विकल्पों में है ही नहीं, और अभ्यर्थी दुबारा गणना करने में समय गँवाता है।
- सकल लाभ अनुपात को कारोबार पर लगाने के बजाय पूरे कारोबार को ही बीमा योग्य राशि मान लेना, जबकि यह पॉलिसी केवल सकल लाभ की भरपाई करती है, पूरी बिक्री की नहीं।
- अंतिम गुणा में प्रश्न की दी हुई दर 20% के स्थान पर कोई और दर लगा देना; विकल्प ₹ 24,20,000 ठीक इसी भूल का परिणाम है, क्योंकि वह 25% पर निकलता है।
- यह भूल जाना कि शर्त कारोबार को बढ़ाती है, इसलिए सही उत्तर बिना समायोजन वाले मान ₹ 17,60,000 से कम हो ही नहीं सकता।
यह प्रश्न बीमा-लेखांकन के उस हिस्से से आता है जो EPFO की लेखा-अधिकारी वाली भर्ती में नियमित रूप से पूछा जाता है, और उसका ढाँचा प्रायः यही रहता है — कुछ पंक्तियों में आँकड़े, और एक ही सूत्र की जाँच। हल करने का क्रम स्थिर रखिए: पहले वार्षिक कारोबार पहचानिए, फिर देखिए कि कोई प्रवृत्ति-समायोजन दिया है या नहीं, फिर सहमत अनुपात लगाइए। परीक्षा-कक्ष में सबसे उपयोगी आदत यह है कि पहले बिना समायोजन का मान निकाल लें; वह अपने आप बता देता है कि उत्तर किस दिशा में और लगभग कितना होना चाहिए, और उससे आधे विकल्प तुरंत कट जाते हैं। यही विषय दूसरे रूपों में भी आता है — कभी पूरा दावा निकलवाया जाता है, कभी औसत खण्ड लगाकर घटा हुआ दावा, और कभी केवल पद की परिभाषा पूछ ली जाती है, जैसे क्षतिपूर्ति अवधि क्या है। इसलिए सूत्र के साथ-साथ पदों की परिभाषाएँ भी याद रखनी चाहिए।
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- (a) ₹ 5,00,000
- (b) ₹ 6,25,000
- (c) ₹ 3,75,000
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अभ्यास
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उत्तर(b) सकल लाभ की दर
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आग से पहले के बारह महीनों का कारोबार ₹ 50,00,000 है, सहमत सकल लाभ अनुपात 25% है, और विशेष परिस्थिति शर्त कारोबार में 20% की वृद्धि की अनुमति देती है। बीमा योग्य राशि निम्नलिखित में से कौन-सी है?
- (a)₹ 10,00,000
- (b)₹ 12,50,000
- (c)₹ 15,00,000
- (d)₹ 18,00,000
उत्तर(c) ₹ 15,00,000