स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम, प्रत्येक बैंक शाखा द्वारा ₹ 10 लाख से ₹ 100 लाख तक का ऋण निम्नलिखित में से किसको दिए जाने पर विचार करता है? 1. कम-से-कम एक SC/ST ऋणी 2. कम-से-कम एक महिला ऋणी 3. कम-से-कम एक ग्रामीण बेरोज़गार युवा ऋणी नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1
- (b)2 और 3
- (c)1 और 3
- (d)1 और 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 1 और 2। तीनों मदों का अलग-अलग निर्णय कीजिए। मद 1 — कम-से-कम एक SC/ST ऋणी: सही। स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम की मूल शर्त यही है कि प्रत्येक बैंक शाखा से कम-से-कम एक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के ऋणी को ऋण दिया जाए। मद 2 — कम-से-कम एक महिला ऋणी: सही। यही शर्त महिला उद्यमी के लिए भी है, और वह पहली शर्त के अतिरिक्त है, विकल्प नहीं — अर्थात् एक ही शाखा से दोनों प्रकार के ऋणी अपेक्षित हैं। मद 3 — कम-से-कम एक ग्रामीण बेरोज़गार युवा ऋणी: ग़लत। कार्यक्रम की शर्तों में ग्रामीण बेरोज़गार युवा नाम की कोई अलग श्रेणी नहीं है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य-वर्ग सामाजिक श्रेणी तथा लिंग के आधार पर तय किया गया है, निवास-स्थान या रोज़गार-स्थिति के आधार पर नहीं। बेरोज़गार युवाओं के लिए अलग कार्यक्रम हैं — जैसे अनुदान-आधारित प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम — और उन्हीं की शब्दावली यहाँ लाकर रख दी गई है, ताकि वह इस कार्यक्रम की शर्त जैसी लगे। अतः केवल मदें 1 और 2 सही हैं और विकल्प (d) ही उत्तर है। कार्यक्रम की शेष विशेषताएँ भी ध्यान में रखिए: यह 5 अप्रैल 2016 को आरंभ हुआ; ऋण दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक होता है; और वह नए अर्थात् 'ग्रीनफ़ील्ड' उद्यम के लिए होता है, जो विनिर्माण, सेवा अथवा व्यापार क्षेत्र में हो — इसी बात पर इसी पेपर का प्रश्न 51 टिका है। ध्यान दीजिए कि हिन्दी स्तंभ यहाँ 'दस लाख से एक सौ लाख तक' लिखता है, जो व्याकरण की दृष्टि से पूर्ण है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ वहाँ अधूरे वाक्य के रूप में टूटता है; और यह हिन्दी प्रश्न पूरा प्रश्न-वाक्य है जो प्रश्नचिह्न पर समाप्त होता है — दोनों स्तंभों का यह अंतर उत्तर पर कोई असर नहीं डालता।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 — यह विकल्प केवल मद 1 को स्वीकार करता है, अर्थात् महिला ऋणी वाली शर्त को छोड़ देता है — और यही इस कार्यक्रम की सबसे प्रसिद्ध विशेषताओं में से एक है। कार्यक्रम की रचना में दोनों शर्तें साथ-साथ रखी गई हैं, विकल्प के रूप में नहीं: प्रत्येक बैंक शाखा से कम-से-कम एक अनुसूचित जाति या जनजाति के ऋणी को और कम-से-कम एक महिला ऋणी को ऋण देने की अपेक्षा है। यह द्वैत ही उसे अन्य ऋण-कार्यक्रमों से अलग करता है, क्योंकि उसमें सामाजिक श्रेणी और लिंग दोनों को एक साथ लक्षित किया गया है। इसलिए 'केवल 1' का चयन कार्यक्रम को आधा पढ़ लेने के बराबर है। कथन-प्रश्नों में एक शर्त पढ़कर रुक जाना सबसे आम भूल है।
- (b)2 और 3 — यह विकल्प मद 1 को छोड़ देता है और मद 3 को जोड़ लेता है — दोनों निर्णय ग़लत हैं, और पहला विशेष रूप से गंभीर है। अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों तक औपचारिक ऋण पहुँचाना इस कार्यक्रम का घोषित उद्देश्य ही है, इसलिए उसे छोड़ देने पर कार्यक्रम की पहचान ही मिट जाती है। दूसरी ओर 'ग्रामीण बेरोज़गार युवा' इस कार्यक्रम की कोई श्रेणी नहीं है। इस विकल्प का जाल यह है कि दोनों मदें सामाजिक न्याय की भाषा में लिखी हैं और सतही तौर पर एक-दूसरे की जगह ले सकती लगती हैं; पर योजना की शर्तें सामान्य आशय से नहीं, उसके दिशा-निर्देशों की भाषा से तय होती हैं, और वहाँ यह श्रेणी नहीं मिलती।
- (c)1 और 3 — यह विकल्प मद 3 को स्वीकार करता है और मद 2 को छोड़ देता है, अर्थात् महिला ऋणी वाली वास्तविक शर्त हटाकर एक ऐसी श्रेणी रख देता है जो इस कार्यक्रम में है ही नहीं। यही इस प्रश्न की मुख्य चाल है, क्योंकि 'ग्रामीण बेरोज़गार युवा' सुनने में इतना स्वाभाविक लगता है कि उसे किसी भी रोज़गार-संबंधी योजना की शर्त मान लिया जा सकता है। बचाव यह है कि योजनाओं की लक्ष्य-श्रेणियाँ अलग से याद रखी जाएँ: स्टैंडअप इंडिया में अनुसूचित जाति-जनजाति तथा महिलाएँ; मुद्रा योजना में छोटे तथा सूक्ष्म उद्यमी, बिना किसी सामाजिक श्रेणी की शर्त के; और प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम में शिक्षित बेरोज़गार सहित व्यापक वर्ग, अनुदान के साथ। तीनों की शर्तें अलग हैं और परीक्षा उन्हें आपस में बदलकर विकल्प बनाती है।
अवधारणा
वित्तीय समावेशन की योजनाओं को समझने का सबसे उपयोगी तरीक़ा यह है कि प्रत्येक के लिए चार प्रश्नों के उत्तर याद रखे जाएँ — किसे मिलेगा, कितना मिलेगा, किस काम के लिए मिलेगा, और किस रूप में मिलेगा। स्टैंडअप इंडिया के लिए ये उत्तर इस प्रकार हैं: किसे — प्रत्येक बैंक शाखा से कम-से-कम एक अनुसूचित जाति या जनजाति का ऋणी तथा कम-से-कम एक महिला ऋणी; कितना — दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक; किस काम के लिए — नए अर्थात् 'ग्रीनफ़ील्ड' उद्यम के लिए, जो विनिर्माण, सेवा अथवा व्यापार क्षेत्र में हो; किस रूप में — मियादी ऋण तथा कार्यशील पूँजी सहित समग्र ऋण, अनुदान के रूप में नहीं। इसकी तुलना में मुद्रा योजना छोटे ऋणों की है और उसमें सामाजिक श्रेणी की शर्त नहीं है; प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम में सरकारी अनुदान का अंश होता है; और दीनदयाल अंत्योदय योजना स्वयं-सहायता समूहों के माध्यम से काम करती है। इन चार-चार उत्तरों की तालिका बना लेने पर योजनाओं पर बने किसी भी प्रश्न में विकल्प तेज़ी से कटते हैं।
स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय बात उसकी 'प्रति शाखा' वाली रचना है। सामान्यतः ऐसी योजनाओं में राष्ट्रीय या राज्य-स्तरीय लक्ष्य रखा जाता है, जिसे बैंक अपनी सुविधा से पूरा करते हैं; यहाँ लक्ष्य सीधे शाखा के स्तर पर रखा गया, ताकि कार्यक्रम का लाभ देश भर में फैले और कुछ ही केंद्रों में सिमटकर न रह जाए। इसी उद्देश्य से एक ऑनलाइन मंच भी बनाया गया, जिस पर संभावित उद्यमी आवेदन कर सके और उसे हाथ पकड़कर मार्गदर्शन देने की व्यवस्था हो — क्योंकि इस वर्ग के आवेदकों के लिए सबसे बड़ी बाधा प्रायः जानकारी तथा प्रक्रिया की होती है, न कि केवल धन की। आगे चलकर इस कार्यक्रम में परिवर्तन भी हुए, जैसे 2021-22 के बजट में मार्जिन मनी की अपेक्षा घटाने तथा कृषि से संबद्ध गतिविधियों को सम्मिलित करने की घोषणा; पर वे इस प्रश्न के उत्तर को नहीं बदलते, क्योंकि प्रश्न कार्यक्रम की मूल शर्तों के बारे में है और लाभार्थी-श्रेणियाँ वही रहीं।
मुख्य तथ्य
- स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम की शर्त है कि प्रत्येक बैंक शाखा से कम-से-कम एक अनुसूचित जाति या जनजाति के ऋणी को और कम-से-कम एक महिला ऋणी को ऋण दिया जाए।
- ये दोनों शर्तें साथ-साथ हैं, विकल्प के रूप में नहीं — अर्थात् एक ही शाखा से दोनों प्रकार के ऋणी अपेक्षित हैं, और यही द्वैत इस कार्यक्रम की पहचान है।
- 'ग्रामीण बेरोज़गार युवा' इस कार्यक्रम की कोई लक्ष्य-श्रेणी नहीं है; उसका लक्ष्य-वर्ग सामाजिक श्रेणी तथा लिंग के आधार पर तय है।
- ऋण की राशि दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक होती है और वह नए अर्थात् 'ग्रीनफ़ील्ड' उद्यम के लिए दिया जाता है।
- उद्यम विनिर्माण, सेवा अथवा व्यापार क्षेत्र में होना चाहिए; कार्यक्रम 5 अप्रैल 2016 को आरंभ हुआ और कृषि उसके मूल दायरे में नहीं थी।
- लक्ष्य सीधे शाखा के स्तर पर रखा गया, ताकि कार्यक्रम का लाभ देश भर में फैले और कुछ ही केंद्रों में सिमटकर न रह जाए।
- बेरोज़गार युवाओं के लिए अलग कार्यक्रम हैं, जैसे अनुदान-आधारित प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम — उसकी शर्तें इस कार्यक्रम से भिन्न हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- दोनों लाभार्थी-श्रेणियों में से एक ही पढ़कर रुक जाना; कार्यक्रम में अनुसूचित जाति-जनजाति और महिला — दोनों शर्तें साथ-साथ हैं।
- 'ग्रामीण बेरोज़गार युवा' को इस कार्यक्रम की श्रेणी मान लेना; वह सुनने में स्वाभाविक लगता है, पर दिशा-निर्देशों में ऐसी कोई श्रेणी नहीं है।
- अलग-अलग ऋण-योजनाओं की शर्तें आपस में मिला देना; मुद्रा, स्टैंडअप इंडिया तथा रोज़गार सृजन कार्यक्रम की लक्ष्य-श्रेणियाँ भिन्न हैं।
- ऋण की सीमा गड्डमड्ड कर देना; यहाँ वह दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक है, जो इस कार्यक्रम की पहचान बनाने वाली संख्या है।
सरकारी योजनाओं की शर्तों पर बने कथन-प्रश्न इस परीक्षा में सबसे अधिक बार आते हैं, और उनकी बनावट में लगभग सदा एक ऐसी मद रखी जाती है जो किसी दूसरी योजना से उधार ली गई हो। यहाँ वह मद 'ग्रामीण बेरोज़गार युवा' है, जो रोज़गार-सृजन की योजनाओं की भाषा से आती है। इसलिए तैयारी में योजनाओं को अलग-अलग याद करने के बजाय उन्हें एक तालिका में साथ रखिए, जिसमें लक्ष्य-श्रेणी, राशि, क्षेत्र और सहायता का रूप — चार खाने हों; तब उधार ली गई मद तुरंत पहचान में आ जाती है। परीक्षा-कक्ष में पद्धति यह हो कि कूट देखने से पहले हर मद पर 'हाँ' या 'नहीं' लिख लिया जाए। और जहाँ किसी योजना में दो शर्तें साथ चलती हों, वहाँ यह जाँचिए कि विकल्प उन्हें साथ रख रहा है या एक को हटा रहा है — यही अंतर प्रायः निर्णायक होता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक बैंक शाखा से किन दो श्रेणियों के ऋणियों को ऋण देने की अपेक्षा की जाती है?
- (a)कम-से-कम एक अनुसूचित जाति या जनजाति का ऋणी तथा कम-से-कम एक महिला ऋणी
- (b)कम-से-कम एक अल्पसंख्यक ऋणी तथा कम-से-कम एक ग्रामीण बेरोज़गार युवा
- (c)कम-से-कम एक लघु किसान तथा कम-से-कम एक भूमिहीन मज़दूर
- (d)कम-से-कम एक निर्यातक तथा कम-से-कम एक स्वयं-सहायता समूह
उत्तर(a) कम-से-कम एक अनुसूचित जाति या जनजाति का ऋणी तथा कम-से-कम एक महिला ऋणी
- practice — not a real PYQ
स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम किस तिथि को आरंभ किया गया था, जिसके अंतर्गत नए उद्यमों के लिए बैंक ऋण की व्यवस्था की गई?
- (a)15 अगस्त 2015
- (b)8 अप्रैल 2015
- (c)5 अप्रैल 2016
- (d)16 जनवरी 2016
उत्तर(c) 5 अप्रैल 2016