स्टार्टअप हब को कहाँ पर स्थापित करने के संबंध में सहमति हुई है? 1. IIITs 2. IISERs 3. NITs 4. केन्द्रीय विश्वविद्यालय नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)1, 2 और 3
- (b)केवल 1 और 4
- (c)केवल 3 और 4
- (d)1, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) 1, 2 और 3। चारों मदों का अलग-अलग निर्णय कीजिए।
मद 1 — IIITs अर्थात् भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान: सम्मिलित।
मद 2 — IISERs अर्थात् भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान: सम्मिलित।
मद 3 — NITs अर्थात् राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान: सम्मिलित।
मद 4 — केन्द्रीय विश्वविद्यालय: सम्मिलित नहीं।
स्टार्टअप इंडिया कार्ययोजना के अंतर्गत यह तय हुआ था कि राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी तथा विज्ञान-संस्थानों में स्टार्टअप हब स्थापित किए जाएँगे, और उस सूची में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान तथा राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान रखे गए थे; इस प्रकार पचहत्तर से अधिक हब बनाने की बात कही गई। ध्यान दीजिए कि इस सूची में एक नाम — राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान — ऐसा है जो प्रश्न के विकल्पों में है ही नहीं, और केंद्रीय विश्वविद्यालय, जो प्रश्न में हैं, उस सूची में नहीं थे। यही इस प्रश्न की पूरी चाल है: सूची में से एक नाम हटाकर उसकी जगह एक ऐसा नाम रख दिया गया जो सुनने में उतना ही स्वाभाविक लगता है।
चयन का तर्क भी समझ में आने योग्य है। ये सभी संस्थान केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित, प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान-केंद्रित और अपेक्षाकृत एकरूप ढाँचे वाले हैं, इसलिए उनमें एक जैसा कार्यक्रम लागू करना सरल था; केंद्रीय विश्वविद्यालय बहु-संकाय संस्थाएँ हैं, जिनका स्वरूप और शासन-ढाँचा भिन्न-भिन्न है। एक भाषिक संकेत भी यहाँ काम आता है: हिन्दी स्तंभ में पहली तीन मदें रोमन लिपि के संक्षेपाक्षर ही रहीं, जबकि चौथी मद हिन्दी में अनूदित है — यही अनुवाद-भेद संकेत देता है कि चौथी मद शेष तीन से भिन्न कोटि की है। इसलिए कूट में 1, 2 और 3 वाला संयोजन ही सही बैठता है, और वह विकल्प (a) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)केवल 1 और 4 — यह विकल्प केवल दो मदों को स्वीकार करता है — IIITs तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय — और दोनों में से दूसरा निर्णय ग़लत है, तथा साथ ही यह IISERs तथा NITs दोनों को छोड़ देता है। NITs का छूटना विशेष रूप से असंगत है, क्योंकि वे देश का सबसे बड़ा तकनीकी संस्थान-जाल हैं और किसी भी ऐसे कार्यक्रम की स्वाभाविक पहली पसंद होंगे जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यम खड़े करना हो। इस प्रकार यह विकल्प भीतर से ही असंगत है। कथन-आधारित प्रश्नों में ऐसे संयोजन का काम केवल यह होता है कि विकल्प-समूह में सभी संभावित रूप मौजूद रहें; उसे गंभीरता से तौलने की आवश्यकता तभी होती है जब शेष मदों पर निश्चय न हो।
- (c)केवल 3 और 4 — यह विकल्प NITs तथा केंद्रीय विश्वविद्यालय को स्वीकार करता है और IIITs तथा IISERs को छोड़ देता है। यहाँ दो भूलें एक साथ हैं: केंद्रीय विश्वविद्यालय सूची में नहीं थे, और जिन दो संस्थान-वर्गों को छोड़ा गया है वे दोनों उसमें थे। IISERs का छूटना इसलिए भी ध्यान देने योग्य है कि वे विशुद्ध विज्ञान-शिक्षा तथा अनुसंधान के संस्थान हैं, और नवाचार-आधारित उद्यम का बड़ा हिस्सा मूल विज्ञान से ही निकलता है — जैव-प्रौद्योगिकी, पदार्थ-विज्ञान, आँकड़ा-विज्ञान। इसलिए उन्हें छोड़ना कार्यक्रम के उद्देश्य से भी मेल नहीं खाता। इस प्रश्न में केवल दो मदों वाले विकल्प इसीलिए संदिग्ध हैं कि कार्यक्रम का दायरा उससे कहीं व्यापक था।
- (d)1, 3 और 4 — यह विकल्प इस प्रश्न का सबसे प्रबल भ्रम है, क्योंकि इसमें तीन में से दो मदें सही हैं — IIITs तथा NITs — और केवल एक मद, केंद्रीय विश्वविद्यालय, ग़लत है; साथ ही यह IISERs को छोड़ देता है। अर्थात् इसमें बदलाव केवल एक जोड़े का है: सही मद 2 हटाकर ग़लत मद 4 रख दी गई। यही वह बनावट है जिससे कथन-प्रश्नों में सबसे अधिक अंक कटते हैं, क्योंकि विकल्प का बड़ा हिस्सा सही होने से पूरा विकल्प सही लगने लगता है। बचाव का एक ही तरीक़ा है — कूट देखने से पहले प्रत्येक मद पर स्वतंत्र निर्णय लिख लेना। यहाँ यदि यह तय हो जाए कि केंद्रीय विश्वविद्यालय सूची में नहीं थे, तो विकल्प (b), (c) तथा (d) तीनों एक साथ कट जाते हैं और केवल (a) बचता है।
अवधारणा
स्टार्टअप इंडिया कार्ययोजना जनवरी 2016 में घोषित हुई और उसके प्रस्ताव तीन बड़े शीर्षकों में बँटे थे। पहला शीर्षक सरलीकरण तथा सहायता का था — स्वप्रमाणन के आधार पर अनुपालन, एकल खिड़की व्यवस्था, पेटेंट आवेदन में सहायता और आसान निकास की व्यवस्था। दूसरा शीर्षक वित्तपोषण तथा प्रोत्साहन का था — निधियों की निधि, ऋण-गारंटी की व्यवस्था और कर-संबंधी रियायतें। तीसरा शीर्षक उद्योग तथा शिक्षा-जगत की साझेदारी और उद्भवन का था, और इसी शीर्षक के अंतर्गत संस्थानों में स्टार्टअप हब, नवाचार केंद्र तथा शोध-उद्यान बनाने की बात आती है। इस तीसरे शीर्षक का तर्क यह है कि नए उद्यम प्रायः विश्वविद्यालय तथा संस्थान की प्रयोगशाला से निकलते हैं, पर वहाँ से बाज़ार तक पहुँचने में जो सहारा चाहिए — स्थान, परामर्श, प्रारंभिक पूँजी, विधिक तथा पेटेंट-सहायता — वह विद्यार्थी या शोधार्थी के पास नहीं होता; उद्भवन-केंद्र यही अंतर पाटता है। यही तर्क आगे चलकर विद्यार्थी-स्टार्टअप की अलग नीति तक ले जाता है, जिस पर इसी पेपर का प्रश्न 46 है।
इस प्रश्न को हल करने में एक व्यावहारिक सहारा संस्थान-वर्गों के पूरे नाम जानने से मिलता है, क्योंकि हिन्दी स्तंभ में तीनों संक्षेपाक्षर रोमन लिपि में ही छपे हैं और अंग्रेज़ी बहुवचन का 's' भी उनके साथ बना रहा है, जबकि चौथी मद हिन्दी में अनूदित है — 'केन्द्रीय विश्वविद्यालय'। यही अनुवाद-भेद स्वयं एक संकेत है कि चौथी मद शेष तीन से भिन्न कोटि की है। संस्थान-वर्ग इस प्रकार हैं: IIIT अर्थात् भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, IISER अर्थात् भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, और NIT अर्थात् राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान। इनके साथ मूल सूची में NIPER अर्थात् राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भी था। एक बात दोनों स्तंभों के अंतर की भी: अंग्रेज़ी स्तंभ में चौथी मद 'Central Universities' बहुवचन में है, जबकि हिन्दी स्तंभ में 'केन्द्रीय विश्वविद्यालय' एकवचन-सा दिखता है; अर्थ पर इसका प्रभाव नहीं पड़ता, पर यह दिखाता है कि दोनों स्तंभ स्वतंत्र रूप से संयोजित हुए थे।
मुख्य तथ्य
- स्टार्टअप इंडिया कार्ययोजना के अंतर्गत स्टार्टअप हब NITs, IIITs, IISERs तथा NIPERs में स्थापित करने पर सहमति हुई थी — पचहत्तर से अधिक हब बनाने की बात कही गई।
- केंद्रीय विश्वविद्यालय इस सूची में सम्मिलित नहीं थे; यही प्रश्न की चौथी मद का दोष है।
- सूची में NIPER अर्थात् राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान भी था, जो प्रश्न के विकल्पों में कहीं नहीं आता।
- IIIT का पूरा रूप भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, IISER का भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, और NIT का राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान है।
- स्टार्टअप इंडिया कार्ययोजना जनवरी 2016 में घोषित हुई और उसके प्रस्ताव तीन शीर्षकों में बँटे थे — सरलीकरण, वित्तपोषण, तथा उद्योग-शिक्षा साझेदारी एवं उद्भवन।
- स्टार्टअप हब का विचार तीसरे शीर्षक से आता है, जिसका तर्क यह है कि संस्थानों की प्रयोगशाला से निकले विचार को बाज़ार तक पहुँचने में सहारा चाहिए।
- चुने गए सभी संस्थान-वर्ग केंद्र द्वारा वित्तपोषित, प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान-केंद्रित और अपेक्षाकृत एकरूप ढाँचे वाले हैं, जिससे एक जैसा कार्यक्रम लागू करना सरल था।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- केंद्रीय विश्वविद्यालय को सूची में मान लेना; वे इस कार्यक्रम की मूल सूची में नहीं थे, यद्यपि नाम स्वाभाविक लगता है।
- कूट पहले पढ़ लेना; सही क्रम यह है कि प्रत्येक मद पर स्वतंत्र निर्णय लिया जाए और तभी विकल्प देखे जाएँ।
- तीन में से दो मदें सही देखकर पूरा विकल्प सही मान लेना; विकल्प (d) की बनावट ठीक इसी प्रवृत्ति के लिए बनी है।
- संक्षेपाक्षरों के पूरे नाम न जानना; IIIT, IISER तथा NIT के पूरे नाम जान लेने पर यह दिखने लगता है कि चारों मदें एक ही कोटि की नहीं हैं।
योजनाओं की सूची-आधारित मदों पर प्रश्न इस परीक्षा में बार-बार आते हैं, और उनकी बनावट में एक निश्चित चाल होती है: मूल सूची में से एक नाम चुपचाप हटा दिया जाता है और उसकी जगह एक ऐसा नाम रख दिया जाता है जो उसी परिवार का लगे। यहाँ हटाया गया नाम राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान है और जोड़ा गया नाम केंद्रीय विश्वविद्यालय। इसलिए तैयारी में योजना के दिशा-निर्देशों की सूची शब्दशः याद रखनी चाहिए, न कि उसका सार। परीक्षा-कक्ष में तीन सहारे काम आते हैं। पहला, संक्षेपाक्षरों के पूरे नाम खोलिए, क्योंकि उससे कोटि-भेद दिखने लगता है। दूसरा, जिस मद पर सबसे अधिक निश्चय हो उसी से आरंभ करके विकल्प काटिए; यहाँ एक ही निर्णय से तीन विकल्प कट जाते हैं। तीसरा, ऐसे विकल्प से सावधान रहिए जिसमें अधिकांश मदें सही हों, क्योंकि प्रश्न-निर्माता ठीक उसी को सबसे आकर्षक बनाता है।
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- (a) 1 only
- (b) 2 only
- (c) Both 1 and 2
- (d) Neither 1 nor 2
उत्तर(b) 2 only
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- (a)राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान
- (b)भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान
- (c)केन्द्रीय विश्वविद्यालय
- (d)भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान
उत्तर(c) केन्द्रीय विश्वविद्यालय
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- (a)राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान
- (b)राष्ट्रीय अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान
- (c)राष्ट्रीय योजना तथा आर्थिक अनुसंधान संस्थान
- (d)राष्ट्रीय भौतिकी शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान
उत्तर(a) राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान