ISRO ने अगस्त 2016 में पराध्वनिक दहन रैमजेट (स्क्रैमजेट) इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। स्क्रैमजेट इंजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. इसे अवध्वनिक (सबसॉनिक) और पराध्वनिक (सुपरसॉनिक) दोनों दहन-तंत्र पद्धतियों में कुशलतापूर्वक प्रचालित किया जा सकता है। 2. भारत किसी स्क्रैमजेट इंजन के उड़ान परीक्षण को प्रदर्शित करने वाला पहला देश है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) केवल 1। दोनों कथनों का अलग-अलग निर्णय कीजिए। कथन 1 सही है। स्क्रैमजेट, अर्थात् 'सुपरसॉनिक कम्बशन रैमजेट', उस वायु-श्वासी इंजन को कहते हैं जिसमें दहन-कक्ष से गुज़रती वायु की गति पराध्वनिक बनी रहती है। इससे पहले की तकनीक रैमजेट है, जिसमें आती हुई वायु को दहन से पूर्व अवध्वनिक गति तक धीमा कर दिया जाता है। व्यावहारिक उड़ान के लिए एक ही इंजन को दोनों प्रकार से काम करना पड़ता है, क्योंकि वाहन कम गति से चलकर धीरे-धीरे तेज़ होता है — कम माख संख्या पर वह रैमजेट की तरह, अर्थात् अवध्वनिक दहन-तंत्र में, और अधिक माख संख्या पर स्क्रैमजेट की तरह, अर्थात् पराध्वनिक दहन-तंत्र में। इसी को द्वि-प्रकारीय (dual-mode) प्रचालन कहते हैं, और यही इस तकनीक की मूल विशेषता है, इसलिए कथन 1 सही है। कथन 2 ग़लत है। भारत स्क्रैमजेट इंजन के उड़ान परीक्षण को प्रदर्शित करने वाला पहला देश नहीं है — वह ऐसा करने वाला चौथा देश बना। अगस्त 2016 का परीक्षण भारत के लिए महत्त्वपूर्ण उपलब्धि अवश्य थी, पर 'पहला देश' का दावा तथ्यतः ग़लत है, क्योंकि इससे पहले कुछ अन्य देश यह प्रदर्शन कर चुके थे। इस प्रकार के कथनों में 'पहला', 'एकमात्र' तथा 'सर्वप्रथम' जैसे शब्द सदा सावधानी से पढ़ने चाहिए, क्योंकि परीक्षा प्रायः किसी सच्ची उपलब्धि में यही एक शब्द बदलकर कथन को ग़लत बना देती है। अतः केवल कथन 1 सही है और विकल्प (a) ही उत्तर है। परीक्षण का विवरण भी जान लीजिए: यह 28 अगस्त 2016 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया और इसमें उन्नत प्रौद्योगिकी वाहन का प्रयोग हुआ, जिसके दोनों ओर स्क्रैमजेट इंजन लगाए गए थे।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)केवल 2 — यह विकल्प कथन 2 को सही और कथन 1 को ग़लत मानता है — अर्थात् दोनों निर्णय उलटे हैं। कथन 2 का दोष 'पहला देश' वाले दावे में है: भारत ने अगस्त 2016 में स्क्रैमजेट इंजन का सफल उड़ान परीक्षण अवश्य किया, पर वह ऐसा करने वाला चौथा देश था, पहला नहीं। और कथन 1 को ग़लत मानना तकनीक की परिभाषा के ही विरुद्ध है, क्योंकि द्वि-प्रकारीय प्रचालन इस इंजन-वर्ग की मूल विशेषता है। यह विकल्प उन अभ्यर्थियों के लिए बनाया गया है जिन्हें उपलब्धि की स्मृति तो है पर उसका ठीक-ठीक स्थान याद नहीं, और जो राष्ट्रीय उपलब्धि से जुड़े किसी भी 'पहला' वाले कथन को सही मान लेते हैं। ऐसे कथनों की जाँच का एक ही तरीक़ा है — क्रम याद रखिए, केवल घटना नहीं।
- (c)1 और 2 दोनों — यह विकल्प दोनों कथनों को सही मानता है, जो कथन 2 के कारण संभव नहीं। कथन 1 सही है, पर कथन 2 का 'पहला देश' वाला दावा तथ्य के विरुद्ध है, क्योंकि भारत इस प्रदर्शन में चौथे स्थान पर आया। यह विकल्प इस प्रश्न का सबसे आकर्षक जाल है, क्योंकि परीक्षण की ख़बर उस समय बड़े पैमाने पर आई थी और उसे प्रायः 'ऐतिहासिक' तथा 'अभूतपूर्व' शब्दों के साथ प्रस्तुत किया गया था — और उन शब्दों से 'पहला' तक पहुँच जाना सरल है। कथन-आधारित प्रश्नों में इसीलिए यह अभ्यास उपयोगी है कि 'दोनों सही' वाले विकल्प पर तभी जाइए जब दोनों कथन स्वतंत्र रूप से जाँच लिए गए हों; किसी एक की पुष्टि से दूसरे को स्वीकार कर लेना सबसे आम भूल है।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह विकल्प दोनों कथनों को ग़लत मानता है, जो कथन 1 के कारण संभव नहीं। कथन 1 केवल सही ही नहीं, बल्कि इस तकनीक की परिभाषा का ही अंग है — एक ही इंजन का कम गति पर अवध्वनिक दहन-तंत्र में और अधिक गति पर पराध्वनिक दहन-तंत्र में काम करना ही उसे व्यावहारिक बनाता है, क्योंकि कोई वाहन सीधे उच्च माख संख्या पर उड़ान आरंभ नहीं कर सकता। इस विकल्प को चुनने की प्रवृत्ति उस अभ्यर्थी में होती है जो कथन 2 के 'पहला देश' वाले दोष को पकड़ लेता है और फिर सावधानी में दूसरे कथन को भी संदिग्ध मान बैठता है। ध्यान दीजिए कि इस प्रश्न के कूट में 'दोनों ग़लत' वाली शाखा उपलब्ध है, इसलिए यहाँ यह मान लेने का सहारा नहीं है कि कम-से-कम एक कथन सही होगा; हर कथन की स्वतंत्र जाँच ही एकमात्र उपाय है।
अवधारणा
वायु-श्वासी (air-breathing) प्रणोदन का मूल विचार यह है कि इंजन दहन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन वायुमंडल से ले, न कि उसे साथ लेकर चले। रॉकेट को ईंधन के साथ ऑक्सीकारक भी ढोना पड़ता है, जो उसके कुल भार का बड़ा हिस्सा होता है; यदि वह भार बचे तो उतना ही अधिक नीतभार ले जाया जा सकता है, और प्रक्षेपण सस्ता हो जाता है। इसी दिशा की तीन कोटियाँ हैं। टर्बोजेट में घूमने वाला संपीडक वायु को दबाता है और वह अपेक्षाकृत कम गति पर काम करता है। रैमजेट में कोई घूमने वाला भाग नहीं होता — वाहन की अपनी अग्रगामी गति ही वायु को दबाती है, और दहन से पहले वायु को अवध्वनिक गति तक धीमा किया जाता है; यह लगभग माख तीन से छह तक कारगर रहता है। स्क्रैमजेट में वायु को इतना धीमा नहीं किया जाता — दहन पराध्वनिक प्रवाह में ही होता है — और यही उसे बहुत उच्च गति पर काम करने देता है। कठिनाई यह है कि वहाँ ईंधन को मिलीसेकंड के अंश में मिलाना, प्रज्वलित करना और जलाए रखना पड़ता है, तथा अत्यधिक ताप सहना पड़ता है; इसीलिए इस तकनीक का उड़ान-प्रदर्शन गिने-चुने देशों ने ही किया है।
भारत का यह परीक्षण 28 अगस्त 2016 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। इसमें उन्नत प्रौद्योगिकी वाहन नामक ध्वनि-अनुसंधान रॉकेट का प्रयोग हुआ, जिसके दोनों ओर स्क्रैमजेट इंजन लगाए गए थे; उड़ान के एक निर्धारित चरण में, अत्यधिक ऊँचाई तथा उच्च माख संख्या पर, इंजनों को प्रज्वलित किया गया और कुछ सेकंड तक दहन बनाए रखा गया। इसका उद्देश्य पदार्थ, प्रज्वलन, ईंधन-अंतःक्षेपण तथा ताप-प्रबंधन से जुड़ी तकनीकों की जाँच था, न कि किसी वाहन को कक्षा में पहुँचाना। यह परीक्षण उसी वर्ष के एक दूसरे प्रयोग के साथ पढ़ा जाना चाहिए — मई 2016 में पुनःप्रयोज्य प्रक्षेपण यान के प्रौद्योगिकी प्रदर्शक की उड़ान हुई थी — क्योंकि दोनों का दीर्घकालीन लक्ष्य एक ही है: प्रक्षेपण की लागत घटाना। परीक्षा-दृष्टि से यह प्रश्न उस श्रेणी का है जो किसी एक क्षण से बँधा है, इसलिए उसे उसी क्षण के अनुसार पढ़ाना चाहिए और बाद के घटनाक्रम को पृष्ठभूमि में रखना चाहिए।
मुख्य तथ्य
- स्क्रैमजेट का पूरा रूप 'सुपरसॉनिक कम्बशन रैमजेट' है — इसमें दहन-कक्ष से गुज़रती वायु की गति पराध्वनिक बनी रहती है।
- रैमजेट में आती हुई वायु को दहन से पूर्व अवध्वनिक गति तक धीमा किया जाता है; व्यावहारिक उड़ान के लिए एक ही इंजन को दोनों प्रकार से काम करना पड़ता है, जिसे द्वि-प्रकारीय प्रचालन कहते हैं।
- भारत स्क्रैमजेट इंजन के उड़ान परीक्षण को प्रदर्शित करने वाला चौथा देश बना, पहला नहीं — यही प्रश्न के कथन 2 का दोष है।
- यह परीक्षण 28 अगस्त 2016 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया।
- परीक्षण में उन्नत प्रौद्योगिकी वाहन नामक रॉकेट का प्रयोग हुआ, जिसके दोनों ओर स्क्रैमजेट इंजन लगाए गए थे और उड़ान के एक चरण में उन्हें प्रज्वलित किया गया।
- वायु-श्वासी प्रणोदन का लाभ यह है कि इंजन ऑक्सीजन वायुमंडल से लेता है, जिससे ऑक्सीकारक का भार बचता है और नीतभार बढ़ाया जा सकता है।
- उसी वर्ष मई 2016 में पुनःप्रयोज्य प्रक्षेपण यान के प्रौद्योगिकी प्रदर्शक की उड़ान भी हुई थी; दोनों का दीर्घकालीन लक्ष्य प्रक्षेपण-लागत घटाना है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- किसी राष्ट्रीय उपलब्धि से जुड़े 'पहला देश' वाले कथन को बिना जाँचे सही मान लेना; भारत इस प्रदर्शन में चौथा देश था।
- कथन 1 को इसलिए संदिग्ध मान लेना कि वह तकनीकी लगता है; द्वि-प्रकारीय प्रचालन इस इंजन-वर्ग की परिभाषात्मक विशेषता है।
- एक कथन की पुष्टि होते ही 'दोनों सही' वाला विकल्प चुन लेना; कथन-प्रश्न में हर कथन की स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।
- रैमजेट और स्क्रैमजेट को एक मान लेना; भेद यह है कि दहन अवध्वनिक प्रवाह में होता है या पराध्वनिक प्रवाह में।
समसामयिक विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी पर बने कथन-प्रश्नों की बनावट लगभग निश्चित रहती है: एक कथन तकनीक की परिभाषा या क्षमता के बारे में होता है और दूसरा उस उपलब्धि के 'क्रम' या 'प्रथमता' के बारे में। पहला कथन प्रायः सही होता है और दूसरे में ही दोष रखा जाता है, क्योंकि क्रम बदल देना विकल्प बनाने का सबसे सरल तरीक़ा है। इसलिए दो आदतें बनाइए। पहली, हर बड़ी उपलब्धि के साथ यह भी याद रखिए कि उस काम को पहले किन देशों ने किया था और भारत का स्थान क्या रहा; केवल घटना याद रखना पर्याप्त नहीं। दूसरी, तकनीकी कथन को उसकी परिभाषा से मिलाइए — यदि कथन उस तकनीक की परिभाषा को ही दुहरा रहा हो, तो वह प्रायः सही होता है। तीसरी बात, कूट की शाखाओं पर ध्यान दीजिए: जब 'न तो 1 और न ही 2' वाली शाखा उपलब्ध हो, तब यह मान लेने का सहारा नहीं रहता कि कम-से-कम एक कथन सही होगा।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
वायु-श्वासी प्रणोदन की दो कोटियों — स्क्रैमजेट तथा रैमजेट इंजन — के बीच मूल अंतर निम्नलिखित में से क्या है?
- (a)स्क्रैमजेट में घूमने वाला संपीडक होता है, रैमजेट में नहीं
- (b)स्क्रैमजेट में दहन पराध्वनिक प्रवाह में होता है, जबकि रैमजेट में वायु को दहन से पूर्व अवध्वनिक गति तक धीमा किया जाता है
- (c)स्क्रैमजेट ऑक्सीकारक साथ ले जाता है, रैमजेट नहीं
- (d)रैमजेट केवल अंतरिक्ष में काम करता है, स्क्रैमजेट केवल वायुमंडल में
उत्तर(b) स्क्रैमजेट में दहन पराध्वनिक प्रवाह में होता है, जबकि रैमजेट में वायु को दहन से पूर्व अवध्वनिक गति तक धीमा किया जाता है
- practice — not a real PYQ
वायु-श्वासी प्रणोदन प्रणाली का पारंपरिक रॉकेट की तुलना में मुख्य लाभ निम्नलिखित में से क्या है?
- (a)वह वायुमंडल से बाहर भी काम कर सकती है
- (b)उसे ऑक्सीकारक साथ नहीं ढोना पड़ता, जिससे नीतभार बढ़ाया जा सकता है
- (c)उसमें ईंधन की आवश्यकता ही नहीं होती
- (d)वह केवल अवध्वनिक गति पर काम करती है
उत्तर(b) उसे ऑक्सीकारक साथ नहीं ढोना पड़ता, जिससे नीतभार बढ़ाया जा सकता है