भारत में उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) (2014) तैयार करने के लिए क्रियापद्धति निर्धारित करने वाले कार्यदल का अध्यक्ष इनमें से कौन था?
- (a)सौमित्र चौधुरी
- (b)डी॰ वी॰ सुब्बाराव
- (c)अभिजीत सेन
- (d)बी॰ एन॰ गोलदार
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) बी॰ एन॰ गोलदार। भारत में उत्पादक मूल्य सूचकांक (Producer Price Index, PPI) तैयार करने की क्रियापद्धति निर्धारित करने के लिए 2014 में जो कार्यदल गठित किया गया, उसके अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी॰ एन॰ गोलदार थे। वे दिल्ली के इंस्टिट्यूट ऑफ़ इकोनॉमिक ग्रोथ से जुड़े रहे हैं और औद्योगिक उत्पादकता तथा मूल्य-सूचकांकों के अध्ययन में उनका काम जाना जाता है, इसलिए यह नियुक्ति विषय-विशेषज्ञता के अनुरूप ही थी। कार्यदल का काम यह तय करना था कि भारत में PPI किस ढाँचे पर बने — किन उद्योगों और सेवाओं को उसमें लिया जाए, भार किस आधार पर निर्धारित हों, क़ीमतें किस स्तर पर एकत्र की जाएँ, और मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक से उसका संबंध क्या हो। यह प्रश्न इसलिए महत्त्वपूर्ण था कि भारत में उत्पादक-स्तर की क़ीमतों को नापने के लिए दशकों से थोक मूल्य सूचकांक का ही उपयोग होता आया था, जो अपने स्वरूप में एक सच्चा उत्पादक मूल्य सूचकांक नहीं है — उसमें सेवाएँ सम्मिलित नहीं हैं और उसमें एक ही वस्तु का मूल्य आपूर्ति-शृंखला के कई चरणों में गिना जा सकता है। PPI इसके विपरीत यह नापता है कि घरेलू उत्पादक को अपने उत्पादन के बदले जो क़ीमत मिलती है उसमें औसतन कितना परिवर्तन हुआ, और उसमें कर तथा व्यापारिक मार्जिन नहीं जुड़ते। हिन्दी स्तंभ की एक छोटी-सी बात भी ध्यान देने योग्य है: यहाँ दो कोष्ठक लगातार छपे हैं — '(PPI) (2014)' — जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में ये दोनों सूचनाएँ वाक्य में अलग-अलग स्थानों पर पड़ती हैं। अर्थ पर इसका असर नहीं है, पर पढ़ते समय यह अटपटा लगता है। शेष तीनों विकल्प भारत के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री तथा नीति-विशेषज्ञ हैं और उनमें से दो का नाम मूल्य-सूचकांकों की दुनिया से जुड़ा भी है, पर इस विशेष कार्यदल की अध्यक्षता उनमें से किसी ने नहीं की। अतः विकल्प (d) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)सौमित्र चौधुरी — सौमित्र चौधुरी योजना आयोग के सदस्य तथा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद् के सदस्य रहे हैं, और मूल्य-सूचकांक की दुनिया से उनका संबंध भी है — पर दूसरे सूचकांक से। उन्होंने थोक मूल्य सूचकांक की शृंखला के पुनरीक्षण के लिए बने कार्यदल की अध्यक्षता की, जिसकी सिफ़ारिशों के आधार पर 2011-12 को आधार-वर्ष मानकर नई थोक मूल्य सूचकांक शृंखला तैयार हुई और 2017 में जारी की गई। इसी समानता के कारण यह विकल्प इस प्रश्न का सबसे प्रबल भ्रम है: दोनों कार्यदल एक ही कार्यालय के दायरे में, लगभग एक ही समय में, मूल्य-सूचकांकों पर बने। भेद यही याद रखिए — थोक मूल्य सूचकांक के पुनरीक्षण का कार्यदल सौमित्र चौधुरी का, और उत्पादक मूल्य सूचकांक की क्रियापद्धति का कार्यदल बी॰ एन॰ गोलदार का।
- (b)डी॰ वी॰ सुब्बाराव — इस विकल्प में जिस व्यक्ति की ओर संकेत है, वे भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे सुब्बाराव हैं, जिनका कार्यकाल 2008 से 2013 तक था और जिन्होंने वैश्विक वित्तीय संकट तथा उसके बाद के वर्षों में मौद्रिक नीति का संचालन किया; इससे पहले वे वित्त सचिव भी रहे। मूल्य-सूचकांक की क्रियापद्धति तय करने वाला यह कार्यदल उनकी अध्यक्षता में नहीं बना। एक बात मुद्रण के बारे में भी ध्यान देने योग्य है: इस पुस्तिका में यह नाम 'डी॰ वी॰ सुब्बाराव' के रूप में छपा है, जबकि यह नाम सामान्यतः 'डी॰ सुब्बाराव' अथवा 'दुव्वुरी सुब्बाराव' के रूप में लिखा जाता है; कार्ड विकल्प को जैसा छपा है वैसा ही रखता है। यह विकल्प उन अभ्यर्थियों के लिए है जो किसी भी आर्थिक समिति के लिए सबसे परिचित नाम चुन लेते हैं।
- (c)अभिजीत सेन — अभिजीत सेन कृषि-अर्थशास्त्री थे और योजना आयोग के सदस्य रहे। उनके नाम के साथ जुड़ी समितियाँ मुख्यतः कृषि तथा खाद्य से संबंधित हैं — वे कृषि लागत तथा मूल्य आयोग के अध्यक्ष रहे, दीर्घकालीन अनाज-नीति पर बनी विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष रहे, और जिंसों के वायदा कारोबार की समीक्षा करने वाली समिति का नेतृत्व भी उन्होंने किया। अर्थात् उनका क्षेत्र क़ीमतों से जुड़ा तो है, पर वह न्यूनतम समर्थन मूल्य, खाद्य-सुरक्षा और वायदा बाज़ार का क्षेत्र है, सांख्यिकीय मूल्य-सूचकांक की क्रियापद्धति का नहीं। इस विकल्प को हटाने की कसौटी यही है कि व्यक्ति के नाम के साथ जुड़ी समिति का विषय याद किया जाए — कृषि-मूल्य और सूचकांक-निर्माण दो अलग विषय हैं।
अवधारणा
किसी अर्थव्यवस्था में क़ीमतों के मापन के लिए तीन प्रमुख सूचकांक चलते हैं और उनका भेद उनके दृष्टिकोण से बनता है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक क्रेता के दृष्टिकोण से बनता है — वह नापता है कि उपभोक्ता को वस्तुओं तथा सेवाओं के लिए जो क़ीमत चुकानी पड़ती है उसमें कितना परिवर्तन हुआ, और उसमें कर तथा खुदरा मार्जिन भी सम्मिलित रहते हैं। उत्पादक मूल्य सूचकांक विक्रेता के दृष्टिकोण से बनता है — वह नापता है कि घरेलू उत्पादक को अपने उत्पादन के बदले जो क़ीमत मिलती है उसमें कितना परिवर्तन हुआ; इसमें कर तथा व्यापारिक मार्जिन नहीं जुड़ते और सेवाएँ भी सम्मिलित की जा सकती हैं। थोक मूल्य सूचकांक बाज़ार में थोक स्तर पर लेन-देन की क़ीमतों को नापता है; भारत में यह लंबे समय से चला आ रहा है, पर उसमें सेवाएँ नहीं आतीं और एक ही वस्तु का मूल्य आपूर्ति-शृंखला के कई चरणों में गिना जा सकता है, जिसे बहुगणना कहा जाता है। इन्हीं सीमाओं के कारण भारत में उत्पादक मूल्य सूचकांक की ओर बढ़ने की सिफ़ारिश की जाती रही, और उसी दिशा में यह कार्यदल गठित हुआ।
भारत में थोक मूल्य सूचकांक का संकलन वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा किया जाता है, और उत्पादक मूल्य सूचकांक की दिशा में काम भी उसी कार्यालय के दायरे में हुआ। 2014 में इस विषय पर कार्यदल गठित हुआ, जिसने यह जाँचा कि भारत में PPI किस पद्धति से बने और उसका राष्ट्रीय लेखा तथा नीति-निर्माण में क्या उपयोग हो। साथ ही थोक मूल्य सूचकांक की शृंखला के पुनरीक्षण का काम भी चल रहा था, जिसका परिणाम 2011-12 आधार-वर्ष वाली नई शृंखला के रूप में सामने आया। इसी काल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक भी मौद्रिक नीति का आधिकारिक लक्ष्य-सूचकांक बन गया, जिससे थोक मूल्य सूचकांक की भूमिका बदली। परीक्षा में यह पूरा प्रसंग तीन प्रकार के प्रश्नों में लौटता है — सूचकांकों का भेद, संकलक संस्था, और समिति या कार्यदल का अध्यक्ष। इनमें अंतिम प्रकार सबसे कठिन होता है, क्योंकि उसमें केवल नाम याद रखने से काम चलता है और अनुमान की कोई गुंजाइश नहीं रहती।
मुख्य तथ्य
- भारत में उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) की क्रियापद्धति निर्धारित करने के लिए 2014 में बने कार्यदल के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर बी॰ एन॰ गोलदार थे।
- उत्पादक मूल्य सूचकांक यह नापता है कि घरेलू उत्पादक को अपने उत्पादन के बदले मिलने वाली क़ीमतों में औसतन कितना परिवर्तन हुआ; उसमें कर तथा व्यापारिक मार्जिन सम्मिलित नहीं होते।
- थोक मूल्य सूचकांक में सेवाएँ सम्मिलित नहीं होतीं और एक ही वस्तु का मूल्य आपूर्ति-शृंखला के कई चरणों में गिना जा सकता है — यही बहुगणना की समस्या है।
- भारत में थोक मूल्य सूचकांक का संकलन वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा किया जाता है।
- थोक मूल्य सूचकांक की शृंखला के पुनरीक्षण के लिए बने कार्यदल की अध्यक्षता सौमित्र चौधुरी ने की; उसकी सिफ़ारिशों पर 2011-12 आधार-वर्ष वाली नई शृंखला 2017 में जारी हुई।
- अभिजीत सेन कृषि-अर्थशास्त्री थे, योजना आयोग के सदस्य रहे और कृषि लागत तथा मूल्य आयोग के अध्यक्ष भी रहे।
- सुब्बाराव भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर 2008 से 2013 तक रहे; इस कार्यदल से उनका संबंध नहीं है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सौमित्र चौधुरी और बी॰ एन॰ गोलदार के कार्यदलों को गड्डमड्ड कर देना; पहला थोक मूल्य सूचकांक के पुनरीक्षण का था और दूसरा उत्पादक मूल्य सूचकांक की क्रियापद्धति का।
- उत्पादक मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक को पर्याय मान लेना; पहला उत्पादक को मिलने वाली क़ीमत नापता है और उसमें कर नहीं जुड़ते।
- किसी भी आर्थिक समिति के लिए सबसे परिचित नाम — जैसे किसी पूर्व गवर्नर का नाम — चुन लेना; समिति और विषय का मिलान करना आवश्यक है।
- अभिजीत सेन को सांख्यिकीय सूचकांक-निर्माण से जोड़ देना; उनका क्षेत्र कृषि-मूल्य, खाद्य-नीति तथा वायदा बाज़ार रहा है।
समिति या कार्यदल के अध्यक्ष का नाम पूछने वाले प्रश्न इस परीक्षा में नियमित रूप से आते हैं और वे शुद्ध स्मृति के प्रश्न होते हैं — यहाँ तर्क से उत्तर तक पहुँचने की गुंजाइश बहुत कम रहती है। इसलिए तैयारी में एक अलग सूची बनाना अत्यंत लाभदायक होता है, जिसमें समिति का नाम, उसका विषय, गठन का वर्ष और अध्यक्ष — चार खाने हों। इस सूची में आर्थिक, वित्तीय, प्रशासनिक तथा श्रम-संबंधी सभी प्रमुख समितियाँ रखिए, क्योंकि प्रश्न किसी भी क्षेत्र से आ सकता है। परीक्षा-कक्ष में यदि नाम स्मरण न हो तो अनुमान की एक सीमित पद्धति यह है कि विषय-विशेषज्ञता देखी जाए — सांख्यिकीय सूचकांक की क्रियापद्धति के लिए कोई प्राध्यापक-अर्थशास्त्री अधिक संभावित है, न कि कोई पूर्व केंद्रीय बैंक अधिकारी या कृषि-नीति विशेषज्ञ। यह पद्धति निश्चित नहीं है, पर विकल्पों को दो तक घटा देती है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारत में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का संकलन और उसका मासिक प्रकाशन किस सरकारी कार्यालय द्वारा किया जाता है?
- (a)राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय
- (b)वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय का आर्थिक सलाहकार कार्यालय
- (c)भारतीय रिज़र्व बैंक का सांख्यिकी विभाग
- (d)श्रम ब्यूरो, शिमला
उत्तर(b) वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय का आर्थिक सलाहकार कार्यालय
- practice — not a real PYQ
उत्पादक मूल्य सूचकांक और थोक मूल्य सूचकांक के बीच निम्नलिखित में से कौन-सा अंतर सही है?
- (a)उत्पादक मूल्य सूचकांक में कर तथा व्यापारिक मार्जिन सम्मिलित नहीं होते
- (b)उत्पादक मूल्य सूचकांक केवल आयातित वस्तुओं को लेता है
- (c)थोक मूल्य सूचकांक केवल सेवाओं को लेता है
- (d)दोनों में कोई अंतर नहीं है, केवल नाम भिन्न हैं
उत्तर(a) उत्पादक मूल्य सूचकांक में कर तथा व्यापारिक मार्जिन सम्मिलित नहीं होते