इनमें से कौन चॉइस ऑफ टेकनीक्स पुस्तक का लेखक है?
- (a)ए॰ के॰ सेन
- (b)के॰ एन॰ राज
- (c)वी॰ के॰ आर॰ वी॰ राव
- (d)सुखमय चक्रवर्ती
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) ए॰ के॰ सेन। 'चॉइस ऑफ टेकनीक्स' अमर्त्य कुमार सेन की कृति है, जो पहली बार 1960 में प्रकाशित हुई और जिसका पूरा शीर्षक विषय भी बता देता है — नियोजित आर्थिक विकास के सिद्धांत का एक पक्ष। पुस्तक जिस प्रश्न से जूझती है, वह विकासशील अर्थव्यवस्था का सबसे व्यावहारिक प्रश्न है: जहाँ श्रम बहुतायत में हो और पूँजी दुर्लभ, वहाँ नियोजक को कौन-सी उत्पादन-तकनीक चुननी चाहिए — श्रम-प्रधान या पूँजी-प्रधान? पहली दृष्टि में उत्तर सीधा लगता है कि श्रम-प्रधान तकनीक चुननी चाहिए, क्योंकि उससे तत्काल अधिक रोज़गार बनता है। पर सेन ने दिखाया कि यह निर्णय इतना सरल नहीं है, क्योंकि तकनीक का चुनाव वर्तमान रोज़गार और भावी बचत तथा पुनर्निवेश की दर के बीच का चुनाव भी है: पूँजी-प्रधान तकनीक तत्काल रोज़गार कम देती है, पर अधिशेष अधिक छोड़ सकती है, जिससे भविष्य में विकास और रोज़गार दोनों तेज़ हो सकते हैं। अर्थात् प्रश्न वर्तमान और भविष्य के बीच का है, और उत्तर इस पर निर्भर करता है कि नियोजक किस काल-क्षितिज को महत्त्व दे रहा है। यही तर्क आगे चलकर भारत की नियोजन-बहस — विशेषतः द्वितीय पंचवर्षीय योजना के भारी-उद्योग वाले मार्ग बनाम श्रम-प्रधान लघु उद्योग वाले मार्ग की बहस — से सीधे जुड़ जाता है, और इसीलिए यह पुस्तक भारतीय विकास-अर्थशास्त्र की क्लासिक मानी जाती है। सेन को आगे चलकर 1998 में अर्थशास्त्र का नोबेल स्मृति पुरस्कार मिला, मुख्यतः कल्याण-अर्थशास्त्र, सामाजिक चयन तथा अकाल और निर्धनता के अध्ययन के लिए। शेष तीनों विकल्प भारत के प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री हैं, पर उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ और कार्यक्षेत्र अलग हैं। अतः विकल्प (a) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)के॰ एन॰ राज — के॰ एन॰ राज भारतीय नियोजन के प्रमुख अर्थशास्त्रियों में थे, पर 'चॉइस ऑफ टेकनीक्स' उनकी कृति नहीं है। उनकी आरंभिक पुस्तक भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति पर थी, और उनका सबसे उद्धृत योगदान प्रथम पंचवर्षीय योजना के प्रारूप-निर्माण में भागीदारी है, जो उन्होंने बहुत कम आयु में की। आगे चलकर उन्होंने तिरुवनंतपुरम में विकास अध्ययन केंद्र की स्थापना की, जो विकास-अर्थशास्त्र के शोध का महत्त्वपूर्ण संस्थान बना। उनका लेखन कृषि, विकास और केरल के अनुभव पर केंद्रित रहा। यह विकल्प इसीलिए भ्रम पैदा करता है कि राज और सेन दोनों एक ही पीढ़ी के, नियोजन से जुड़े अर्थशास्त्री हैं; भेद पुस्तक के स्तर पर करना पड़ता है, व्यक्ति की प्रसिद्धि के स्तर पर नहीं।
- (c)वी॰ के॰ आर॰ वी॰ राव — वी॰ के॰ आर॰ वी॰ राव भारत में राष्ट्रीय आय के आकलन के अग्रदूत थे — औपनिवेशिक भारत की राष्ट्रीय आय पर उनका अध्ययन इस क्षेत्र का आरंभिक और मानक काम माना जाता है, और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय आय समिति के कार्य से भी वे जुड़े रहे। संस्था-निर्माण में उनका योगदान असाधारण है: दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स, इंस्टिट्यूट ऑफ़ इकोनॉमिक ग्रोथ और बंगलौर का सामाजिक तथा आर्थिक परिवर्तन संस्थान — तीनों की स्थापना से उनका नाम जुड़ा है। पर तकनीक-चयन के सिद्धांत पर लिखी यह पुस्तक उनकी नहीं है। इस विकल्प को हटाने की सरल कसौटी यह है कि राव का नाम राष्ट्रीय आय और संस्था-निर्माण से जुड़ा है, नियोजन के तकनीक-चयन के सैद्धांतिक प्रश्न से नहीं।
- (d)सुखमय चक्रवर्ती — सुखमय चक्रवर्ती भारत के अग्रणी विकास-अर्थशास्त्री और नियोजन-विशेषज्ञ थे, पर उनकी प्रसिद्ध पुस्तक भारत के नियोजन-अनुभव का समग्र मूल्यांकन प्रस्तुत करती है, न कि तकनीक-चयन का सैद्धांतिक विश्लेषण। वे योजना आयोग से लंबे समय तक जुड़े रहे और मौद्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली की समीक्षा के लिए बनी समिति के अध्यक्ष भी रहे, जिसकी सिफ़ारिशों ने भारत की मौद्रिक नीति के ढाँचे को प्रभावित किया। यह विकल्प इसलिए आकर्षक लगता है कि विषय — नियोजित विकास — दोनों के काम में साझा है। पर परीक्षा पुस्तक का नाम पूछ रही है, विषय नहीं; और पुस्तक-स्तर पर भेद स्पष्ट है। यही कारण है कि इस प्रकार के प्रश्नों के लिए हर अर्थशास्त्री के साथ कम-से-कम एक शीर्षक याद रखना आवश्यक है।
अवधारणा
'तकनीक का चुनाव' विकास-अर्थशास्त्र का एक केंद्रीय प्रश्न है और उसका ढाँचा इस प्रकार है। किसी अल्पविकसित अर्थव्यवस्था में साधनों की उपलब्धता असमान होती है — श्रम अधिक, पूँजी कम। ऐसी स्थिति में यदि केवल साधन-अनुपात देखा जाए तो श्रम-प्रधान तकनीक उपयुक्त लगती है, क्योंकि वह दुर्लभ साधन की बचत करती है और अधिक लोगों को काम देती है। पर निर्णय की कसौटी केवल वर्तमान रोज़गार नहीं है। यदि पूँजी-प्रधान तकनीक अधिक अधिशेष उत्पन्न करती है और वह अधिशेष पुनर्निवेश में जाता है, तो दीर्घकाल में पूँजी-संचय तेज़ होगा और भविष्य में रोज़गार तथा उत्पादन दोनों अधिक होंगे। इस प्रकार तकनीक-चयन वर्तमान उपभोग और भावी वृद्धि के बीच का चुनाव बन जाता है, और उसका उत्तर इस पर निर्भर करता है कि अधिशेष का वितरण कैसा है, बचत की प्रवृत्ति किसकी अधिक है, और नियोजक भविष्य को कितना महत्त्व देता है। भारत की योजना-बहस में यही तर्क महालनोबिस के भारी-उद्योग मॉडल तथा उसके आलोचकों के बीच के विवाद का सैद्धांतिक केंद्र रहा।
इस प्रश्न को हल करने के लिए भारतीय अर्थशास्त्रियों की एक छोटी-सी तालिका पर्याप्त है, जिसमें हर नाम के आगे एक प्रसिद्ध कृति और एक विशिष्ट योगदान लिखा हो। अमर्त्य सेन — 'चॉइस ऑफ टेकनीक्स' (1960), और आगे चलकर कल्याण-अर्थशास्त्र, सामाजिक चयन तथा अकाल के अध्ययन के लिए 1998 का नोबेल स्मृति पुरस्कार। के॰ एन॰ राज — प्रथम पंचवर्षीय योजना के प्रारूप में भागीदारी और तिरुवनंतपुरम के विकास अध्ययन केंद्र की स्थापना। वी॰ के॰ आर॰ वी॰ राव — राष्ट्रीय आय के आकलन के अग्रदूत और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स सहित तीन प्रमुख संस्थानों के संस्थापक। सुखमय चक्रवर्ती — भारत के नियोजन-अनुभव पर प्रसिद्ध पुस्तक और मौद्रिक व्यवस्था की समीक्षा करने वाली समिति की अध्यक्षता। ध्यान दीजिए कि हिन्दी स्तंभ ने पुस्तक का शीर्षक अनूदित नहीं किया, केवल देवनागरी में लिप्यंतरित किया है और उसे तिरछे टाइप में छापा है — इसी पेपर के प्रश्न 21 और 32 में भी यही परिपाटी है, इसलिए शीर्षक को अंग्रेज़ी में लौटाकर पढ़ना इस पुस्तिका की एक सामान्य आवश्यकता है।
मुख्य तथ्य
- 'चॉइस ऑफ टेकनीक्स' अमर्त्य सेन की कृति है और वह पहली बार 1960 में प्रकाशित हुई।
- पुस्तक का विषय यह है कि अल्पविकसित अर्थव्यवस्था में नियोजक को श्रम-प्रधान तकनीक चुननी चाहिए या पूँजी-प्रधान, और यह निर्णय किन कसौटियों पर टिकता है।
- सेन का तर्क यह है कि तकनीक का चुनाव वर्तमान रोज़गार और भावी बचत तथा पुनर्निवेश के बीच का चुनाव भी है, इसलिए उत्तर काल-क्षितिज पर निर्भर करता है।
- अमर्त्य सेन को 1998 में अर्थशास्त्र का नोबेल स्मृति पुरस्कार मिला, मुख्यतः कल्याण-अर्थशास्त्र, सामाजिक चयन तथा अकाल और निर्धनता के अध्ययन के लिए।
- के॰ एन॰ राज प्रथम पंचवर्षीय योजना के प्रारूप-निर्माण से जुड़े रहे और उन्होंने तिरुवनंतपुरम में विकास अध्ययन केंद्र की स्थापना की।
- वी॰ के॰ आर॰ वी॰ राव भारत में राष्ट्रीय आय के आकलन के अग्रदूत थे और दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स सहित कई संस्थानों की स्थापना से जुड़े रहे।
- सुखमय चक्रवर्ती भारत के नियोजन-अनुभव के मूल्यांकन के लिए प्रसिद्ध हैं और मौद्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने वाली समिति के अध्यक्ष रहे।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पुस्तक और विषय को गड्डमड्ड कर देना; नियोजन पर सभी चारों अर्थशास्त्रियों ने लिखा है, पर यह विशेष शीर्षक केवल एक का है।
- देवनागरी में लिप्यंतरित अंग्रेज़ी शीर्षक को बिना अंग्रेज़ी में लौटाए पढ़ना; तब विषय ही समझ में नहीं आता और अनुमान लगाना पड़ता है।
- सुखमय चक्रवर्ती को इस पुस्तक का लेखक मान लेना; उनका प्रसिद्ध लेखन भारत के नियोजन-अनुभव के मूल्यांकन पर है।
- वी॰ के॰ आर॰ वी॰ राव को सैद्धांतिक विकास-अर्थशास्त्र से जोड़ देना; उनका नाम मुख्यतः राष्ट्रीय आय के आकलन और संस्था-निर्माण से जुड़ा है।
इस पेपर में पुस्तक-और-लेखक का प्रश्न तीन बार आता है — प्रश्न 21, प्रश्न 32 और यह प्रश्न 45 — जो दिखाता है कि यह प्रकार कितना भरोसेमंद रूप से दुहराया जाता है। तीनों जगह बनावट एक जैसी है: चारों विकल्प उसी क्षेत्र के प्रतिष्ठित नाम, और उत्तर विषय-मिलान से निकलता है। इसलिए तैयारी की सबसे कारगर पद्धति एक तालिका बनाना है जिसमें अर्थशास्त्र, समाज-सुधार, इतिहास और राजनीति के प्रत्येक बड़े नाम के आगे एक प्रामाणिक शीर्षक और उसका वर्ष लिखा हो। परीक्षा-कक्ष में इसे लागू करने का तरीक़ा यह है कि पहले शीर्षक से विषय पहचानिए — यहाँ 'तकनीक का चुनाव' सैद्धांतिक विकास-अर्थशास्त्र है — और फिर उसी उपक्षेत्र का विशेषज्ञ चुनिए। जहाँ दो नाम एक ही उपक्षेत्र के लगें, वहाँ पीढ़ी और काल देखिए, क्योंकि पुस्तक का वर्ष प्रायः निर्णायक हो जाता है।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q32Who among the following is the author of ‘Gandhi as Mahatma’ ?
- (a) Mahadev Desai
- (b) Shahid Amin
- (c) Louis Fischer
- (d) David Arnold
उत्तर(b) Shahid Amin
EPFO EO/AO 2020 में 'गांधी ऐज़ महात्मा' के लेखक पूछे गए हैं — यही पुस्तक-और-लेखक वाला प्रकार, दूसरे विषय-क्षेत्र में।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल स्मृति पुरस्कार किस वर्ष प्रदान किया गया था?
- (a)1987
- (b)1993
- (c)1998
- (d)2004
उत्तर(c) 1998
- practice — not a real PYQ
तिरुवनंतपुरम स्थित विकास अध्ययन केंद्र (Centre for Development Studies) की स्थापना निम्नलिखित में से किस अर्थशास्त्री ने की थी?
- (a)के॰ एन॰ राज
- (b)वी॰ के॰ आर॰ वी॰ राव
- (c)सुखमय चक्रवर्ती
- (d)अमर्त्य सेन
उत्तर(a) के॰ एन॰ राज