मूल (कोर) मुद्रास्फीति, सकल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति से भिन्न है, क्योंकि मूल मुद्रास्फीति
- (a)कीमत सूचकांक में अस्थिर स्वरूप की वस्तुओं की उपेक्षा कर देती है
- (b)कीमत सूचकांक में अस्थिर स्वरूप की वस्तुओं को सम्मिलित कर लेती है
- (c)जिस कीमत सूचकांक पर आधारित नहीं होती है
- (d)कीमत सूचकांक में उपभोग की केवल महत्त्वपूर्ण वस्तुओं को ही सम्मिलित करती है
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) कीमत सूचकांक में अस्थिर स्वरूप की वस्तुओं की उपेक्षा कर देती है। मूल (कोर) मुद्रास्फीति की परिभाषा ही अपवर्जन पर टिकी है: सकल (हेडलाइन) मुद्रास्फीति उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सभी मदों को लेकर निकाली जाती है, और मूल मुद्रास्फीति उसी सूचकांक में से खाद्य तथा ऊर्जा की मदों को हटाकर निकाली जाती है। आर्थिक सर्वेक्षण की भाषा में — 'मूल मुद्रास्फीति सकल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति में से खाद्य तथा ऊर्जा की मदों को हटाकर मापी जाती है।' खाद्य और ईंधन को क्यों हटाया जाता है, इसका उत्तर उनकी अस्थिरता में है। खाद्य पदार्थों की क़ीमतें मानसून, फ़सल-चक्र और आपूर्ति की तात्कालिक बाधाओं से महीने-दर-महीने ऊपर-नीचे होती रहती हैं; ईंधन की क़ीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तथा विनिमय दर से हिलती हैं। ये उतार-चढ़ाव प्रायः अस्थायी होते हैं और उलट भी जाते हैं, इसलिए यदि नीति इन्हीं आँकड़ों पर प्रतिक्रिया करे तो वह शोर का पीछा करने लगेगी। इन मदों को हटाने पर जो शेष बचता है, वह मुद्रास्फीति की अंतर्निहित तथा टिकाऊ प्रवृत्ति दिखाता है — और मौद्रिक नीति के लिए वही अधिक उपयोगी संकेतक है, क्योंकि ब्याज दर का प्रभाव माँग पर पड़ता है, मानसून पर नहीं। इसीलिए केंद्रीय बैंक दोनों आँकड़े साथ-साथ देखते हैं: सकल मुद्रास्फीति लक्ष्य की कसौटी है, और मूल मुद्रास्फीति यह बताती है कि दबाव कितना जड़ जमा चुका है। इस प्रश्न के बारे में एक बात हिन्दी पढ़ने वाले को जान लेनी चाहिए: विकल्प (c) इस स्तंभ में जिस रूप में छपा है, वह वाक्य के रूप में दोषपूर्ण है और प्रश्न के अधूरे वाक्य से ठीक से जुड़ता नहीं; उसे जैसा छपा है वैसा ही यहाँ रखा गया है। विकल्प (a) ठीक यही क्रिया-विधि कहता है — अस्थिर स्वरूप की वस्तुओं की उपेक्षा — इसलिए वही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)कीमत सूचकांक में अस्थिर स्वरूप की वस्तुओं को सम्मिलित कर लेती है — यह विकल्प (a) का ठीक उल्टा है, और यही इसे ख़तरनाक बनाता है — दोनों वाक्य लगभग एक जैसे हैं और केवल क्रिया में भिन्न हैं, 'उपेक्षा कर देती है' बनाम 'सम्मिलित कर लेती है'। जो सूचकांक अस्थिर वस्तुओं को सम्मिलित कर लेता है, वह सकल अर्थात् हेडलाइन मुद्रास्फीति है, मूल मुद्रास्फीति नहीं। अर्थात् इस विकल्प में दोनों धारणाओं की परिभाषाएँ आपस में बदल दी गई हैं। ऐसे युग्म-विकल्पों में सुरक्षित तरीक़ा यह है कि विकल्प पढ़ने से पहले अपने मन में परिभाषा तय कर ली जाए — 'मूल = सकल में से खाद्य तथा ईंधन हटाकर' — और फिर उसी वाक्य से मिलान किया जाए। यदि परिभाषा पहले से तय न हो, तो दो विपरीत वाक्य पढ़ते समय भ्रम होना लगभग निश्चित है, क्योंकि दोनों समान रूप से 'तकनीकी' लगते हैं।
- (c)जिस कीमत सूचकांक पर आधारित नहीं होती है — इस विकल्प के बारे में सबसे पहले एक बात स्पष्ट कर देनी चाहिए: हिन्दी स्तंभ में यह विकल्प जिस रूप में छपा है, वह वाक्य के रूप में अधूरा और अटपटा है। यह 'जिस' से आरंभ होता है और प्रश्न के अधूरे वाक्य से ठीक से जुड़ता ही नहीं; अंग्रेज़ी स्तंभ में इसी स्थान पर जो विकल्प है, उसमें एक शब्द और है जो हिन्दी में नहीं आया। कार्ड इसे जैसा छपा है वैसा ही रखता है और अपनी ओर से सुधारकर नहीं पढ़ता। अब बात इसके आशय की: मूल मुद्रास्फीति किसी मूल्य सूचकांक पर आधारित न हो, यह हो ही नहीं सकता — वह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से ही निकाली जाती है, बस उसमें से कुछ मदें हटा दी जाती हैं। अर्थात् सूचकांक उसका आधार है, अपवाद नहीं। इसलिए इस विकल्प का आशय भी ग़लत है और उसकी छपाई भी दोषपूर्ण।
- (d)कीमत सूचकांक में उपभोग की केवल महत्त्वपूर्ण वस्तुओं को ही सम्मिलित करती है — यह विकल्प सुनने में उचित लगता है, पर वह अर्थ को उलट देता है। 'उपभोग की महत्त्वपूर्ण वस्तुएँ' कहते ही जो चीज़ें सबसे पहले मन में आती हैं — अनाज, दाल, सब्ज़ी, दूध, रसोई गैस, ईंधन — वे ठीक वही मदें हैं जिन्हें मूल मुद्रास्फीति निकालते समय हटा दिया जाता है। अर्थात् यदि इस विकल्प को शब्दशः लिया जाए तो वह मूल मुद्रास्फीति का नहीं, सकल मुद्रास्फीति का वर्णन बन जाता है। असल क्रिया-विधि महत्त्व के आधार पर चुनने की नहीं, अस्थिरता के आधार पर हटाने की है — और ये दोनों कसौटियाँ अलग हैं। यहाँ भ्रम अंग्रेज़ी शब्द 'core' के दो अर्थों से भी बढ़ता है: वह 'मूल' भी है और 'महत्त्वपूर्ण' भी। परिभाषा में उसका अर्थ पहला है — जो शेष बचता है, न कि जो सबसे आवश्यक है।
अवधारणा
मुद्रास्फीति के मापन में तीन धारणाएँ साथ-साथ चलती हैं और उनका भेद स्पष्ट रखना आवश्यक है। पहली, सकल अर्थात् हेडलाइन मुद्रास्फीति — उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सभी मदों को लेकर निकाली गई वार्षिक वृद्धि दर; भारत में मौद्रिक नीति का लक्ष्य इसी पर निर्धारित होता है। दूसरी, मूल अर्थात् कोर मुद्रास्फीति — उसी सूचकांक में से खाद्य तथा ऊर्जा की मदें हटाकर निकाली गई दर, जो अंतर्निहित प्रवृत्ति दिखाती है। तीसरी, थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति, जो उत्पादक-स्तर की क़ीमतों को दर्शाती है और जिसमें सेवाएँ सम्मिलित नहीं होतीं। मूल मुद्रास्फीति के भीतर भी विभाजन किया जाता है — मूल सेवाएँ और मूल वस्तुएँ; आवास इनमें मूल सेवाओं के अंतर्गत आता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वह केवल नगरीय क्षेत्र के लिए, मकान-किराए से संकलित होता है। मूल मुद्रास्फीति के दूसरे प्रकार भी होते हैं, जैसे 'काट-छाँट माध्य' (trimmed mean), जिसमें सबसे अधिक बढ़ी और सबसे अधिक घटी मदें दोनों छोड़ दी जाती हैं — पर परीक्षा के लिए अपवर्जन वाली परिभाषा ही पर्याप्त है।
इस भेद का नीतिगत महत्त्व यह है कि केंद्रीय बैंक को यह तय करना होता है कि किसी महीने की मुद्रास्फीति में दिखा उछाल अस्थायी है या टिकाऊ। यदि सकल मुद्रास्फीति खाद्य क़ीमतों के कारण बढ़ी हो और मूल मुद्रास्फीति स्थिर हो, तो यह संकेत है कि दबाव आपूर्ति-पक्ष का है और ब्याज दर बढ़ाने से उसका समाधान नहीं होगा; इसके विपरीत यदि मूल मुद्रास्फीति भी चढ़ रही हो, तो माँग-पक्ष का दबाव है और मौद्रिक कार्रवाई उपयोगी हो सकती है। भारत में लचीली मुद्रास्फीति-लक्ष्य व्यवस्था 2016 के संशोधनों के बाद औपचारिक रूप से लागू हुई और मौद्रिक नीति समिति का गठन हुआ; लक्ष्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की सकल मुद्रास्फीति पर है, पर समिति के विवेचन में मूल मुद्रास्फीति नियमित रूप से आती है। यही कारण है कि यह अंतर परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है — कभी परिभाषा के रूप में, कभी इस रूप में कि मूल मुद्रास्फीति में कौन-सी मदें सम्मिलित होती हैं और कौन-सी नहीं।
मुख्य तथ्य
- मूल (कोर) मुद्रास्फीति सकल (हेडलाइन) उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति में से खाद्य तथा ऊर्जा की मदें हटाकर मापी जाती है।
- खाद्य क़ीमतें मानसून, फ़सल-चक्र और आपूर्ति की बाधाओं से तथा ईंधन की क़ीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तथा विनिमय दर से हिलती हैं — इसीलिए वे अस्थिर मानी जाती हैं।
- इन मदों को हटाने पर जो शेष बचता है वह मुद्रास्फीति की अंतर्निहित तथा टिकाऊ प्रवृत्ति दिखाता है, जो मौद्रिक नीति के लिए अधिक उपयोगी संकेतक है।
- मूल मुद्रास्फीति भी मूल्य सूचकांक पर ही आधारित होती है — उसमें से कुछ मदें हटाई जाती हैं, आधार नहीं बदला जाता।
- मूल मुद्रास्फीति के भीतर मूल सेवाएँ तथा मूल वस्तुएँ अलग-अलग देखी जाती हैं; आवास मूल सेवाओं में आता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वह केवल नगरीय क्षेत्र के लिए, मकान-किराए से संकलित होता है।
- भारत में मौद्रिक नीति का लक्ष्य सकल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक मुद्रास्फीति पर निर्धारित है, यद्यपि मौद्रिक नीति समिति के विवेचन में मूल मुद्रास्फीति नियमित रूप से आती है।
- यदि सकल मुद्रास्फीति बढ़े पर मूल मुद्रास्फीति स्थिर रहे, तो दबाव प्रायः आपूर्ति-पक्ष का होता है, माँग-पक्ष का नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- मूल और सकल मुद्रास्फीति की परिभाषाएँ आपस में बदल देना; विकल्प (a) और (b) जानबूझकर लगभग एक जैसे शब्दों में लिखे गए हैं।
- अंग्रेज़ी शब्द 'core' को 'सबसे महत्त्वपूर्ण' मान लेना; परिभाषा में उसका अर्थ है 'जो शेष बचता है', और सबसे आवश्यक मदें तो हटाई ही जाती हैं।
- यह मान लेना कि मूल मुद्रास्फीति किसी मूल्य सूचकांक पर आधारित नहीं होती; वह उसी सूचकांक से निकलती है, केवल कुछ मदें हटाकर।
- विकल्प (c) के अधूरे वाक्य को अपनी ओर से पूरा करके पढ़ लेना; हिन्दी स्तंभ में वह जिस रूप में छपा है, वह वाक्य के रूप में दोषपूर्ण है।
मुद्रास्फीति की धारणाओं पर प्रश्न इस परीक्षा में लगभग हर वर्ष आते हैं, और उनकी सबसे आम बनावट युग्म-विकल्प की होती है — दो विकल्प एक ही वाक्य के दो विपरीत रूप, ताकि जिसने परिभाषा ठीक-ठीक नहीं पढ़ी वह उनमें फँस जाए। इसका एकमात्र उपाय यह है कि परिभाषा को क्रिया के स्तर पर याद रखा जाए, विशेषण के स्तर पर नहीं: मूल मुद्रास्फीति 'हटाती है', सकल मुद्रास्फीति 'रखती है'। दूसरी शैली में सीधे यह पूछ लिया जाता है कि मूल मुद्रास्फीति में कौन-सी मदें आती हैं या नहीं आतीं, और वहाँ खाद्य तथा ऊर्जा का उत्तर ही निर्णायक होता है। तीसरी शैली कथन-आधारित होती है, जिसमें मौद्रिक नीति के लक्ष्य और मापक को मिलाकर पूछा जाता है। इन तीनों का सामना एक ही तैयारी से हो जाता है — परिभाषा, अपवर्जित मदें, और यह कि लक्ष्य किस मापक पर निर्धारित है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
मूल (कोर) मुद्रास्फीति निकालते समय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में से सामान्यतः किन मदों को हटा दिया जाता है?
- (a)आवास तथा परिवहन
- (b)खाद्य तथा ऊर्जा
- (c)शिक्षा तथा स्वास्थ्य
- (d)वस्त्र तथा पादत्राण
उत्तर(b) खाद्य तथा ऊर्जा
- practice — not a real PYQ
यदि किसी महीने सकल मुद्रास्फीति तेज़ी से बढ़े पर मूल मुद्रास्फीति लगभग स्थिर रहे, तो इससे सामान्यतः क्या संकेत मिलता है?
- (a)दबाव मुख्यतः आपूर्ति-पक्ष का है
- (b)दबाव मुख्यतः माँग-पक्ष का है
- (c)अर्थव्यवस्था में अपस्फीति आ रही है
- (d)मुद्रा की पूर्ति में तीव्र संकुचन हुआ है
उत्तर(a) दबाव मुख्यतः आपूर्ति-पक्ष का है