निम्नलिखित में से कौन-सा एक सांविधानिक निकाय नहीं है?
- (a)भारत का निर्वाचन आयोग
- (b)वित्त आयोग
- (c)राजभाषा आयोग
- (d)राष्ट्रीय महिला आयोग
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) राष्ट्रीय महिला आयोग। यह निषेधात्मक प्रश्न है और हिन्दी स्तंभ में 'नहीं' मोटे टाइप में छपा है, इसलिए खोजना उस निकाय को है जो सांविधानिक नहीं है। भेद की कसौटी सीधी है: सांविधानिक निकाय वह है जिसका उल्लेख संविधान में हो और जो संविधान के किसी अनुच्छेद से जन्म लेता हो; वैधानिक निकाय वह है जिसे संसद या विधानमंडल ने किसी अधिनियम से बनाया हो। राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के अंतर्गत हुई और आयोग ने 1992 में काम आरंभ किया — अर्थात् उसका स्रोत संसद का एक अधिनियम है, संविधान का कोई अनुच्छेद नहीं। इसलिए वह वैधानिक निकाय है, सांविधानिक नहीं, और कुंजी उसी को अपवाद के रूप में चुनती है। शेष तीनों के अनुच्छेद इस प्रकार हैं। भारत का निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 से आता है, जो संसद, राज्य विधानमंडलों तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण उसे सौंपता है। वित्त आयोग अनुच्छेद 280 से आता है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले आयोग गठित करते हैं, जो संघ तथा राज्यों के बीच करों के बँटवारे और राज्यों को सहायता-अनुदान के सिद्धांतों पर सिफ़ारिश करता है। राजभाषा आयोग अनुच्छेद 344(1) से आता है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से पाँच वर्ष की समाप्ति पर और उसके बाद दस वर्ष की समाप्ति पर एक आयोग गठित करेंगे, जो राजभाषा के प्रयोग के बारे में सिफ़ारिश करेगा। इस प्रश्न की चाल यह है कि इसमें सबसे अपरिचित नाम — राजभाषा आयोग — ही सांविधानिक है, जबकि सबसे परिचित लगने वाला नाम — राष्ट्रीय महिला आयोग — वैधानिक। अपरिचय को अपवाद का प्रमाण मान लेना यहाँ सीधे ग़लत उत्तर तक ले जाता है। अतः विकल्प (d) ही उत्तर है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)भारत का निर्वाचन आयोग — भारत का निर्वाचन आयोग सांविधानिक निकाय है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। इसका स्रोत अनुच्छेद 324 है, जो निर्वाचन नामावली तैयार कराने तथा संसद, राज्य विधानमंडलों और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचन के संचालन का पूरा दायित्व आयोग को देता है। संविधान में इसके सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल तथा हटाए जाने की व्यवस्था भी है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने जैसी ही रखी गई है, जिससे उसकी स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है। ध्यान रहे कि राज्य निर्वाचन आयोग एक अलग निकाय है, जो 73वें तथा 74वें संशोधनों के बाद अनुच्छेद 243K तथा 243ZA से आता है और पंचायत तथा नगरपालिका चुनाव कराता है। इस विकल्प का सांविधानिक होना निर्विवाद है।
- (b)वित्त आयोग — वित्त आयोग भी सांविधानिक निकाय है और इसीलिए यह अपवाद नहीं। अनुच्छेद 280 के अनुसार राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले वित्त आयोग गठित करते हैं, जिसमें एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं। उसका काम संघ तथा राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय के वितरण, राज्यों को दिए जाने वाले सहायता-अनुदान के सिद्धांतों, और राज्य की संचित निधि के संवर्धन के उपायों पर सिफ़ारिश करना है, ताकि पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ सकें। इसकी सिफ़ारिशें सलाहकारी होती हैं, पर परंपरा से उन्हें स्वीकार किया जाता रहा है। नीति आयोग से इसका भेद स्पष्ट रखिए — नीति आयोग मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से बना कार्यपालक निकाय है, न सांविधानिक न वैधानिक, जबकि वित्त आयोग संविधान से आता है।
- (c)राजभाषा आयोग — राजभाषा आयोग भी सांविधानिक निकाय है, इसलिए यह उत्तर नहीं है। अनुच्छेद 344(1) कहता है कि राष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से पाँच वर्ष की समाप्ति पर और उसके बाद दस वर्ष की समाप्ति पर एक आयोग गठित करेंगे, जिसमें एक अध्यक्ष तथा आठवीं अनुसूची में उल्लिखित विभिन्न भाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले सदस्य होंगे; उसका काम संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिन्दी के उत्तरोत्तर प्रयोग तथा अंग्रेज़ी के प्रयोग पर निर्बंधनों के बारे में सिफ़ारिश करना है। इसी अनुच्छेद का खंड (4) संसद की एक राजभाषा समिति की भी व्यवस्था करता है, जिसमें तीस सदस्य होते हैं — बीस लोक सभा से और दस राज्य सभा से। पहला राजभाषा आयोग 1955 में गठित हुआ था। संविधान में उल्लेख होने के कारण इसका सांविधानिक होना निश्चित है, यद्यपि इसका नाम अन्य दो विकल्पों जितना परिचित नहीं है — और परीक्षा ठीक इसी अपरिचय पर दाँव लगाती है।
अवधारणा
भारत के लोक-निकायों को तीन कोटियों में बाँटना इस प्रकार के प्रश्नों की कुंजी है। पहली कोटि सांविधानिक निकायों की है, जिनका स्रोत संविधान का कोई अनुच्छेद है — निर्वाचन आयोग (324), संघ लोक सेवा आयोग (315), नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (148), वित्त आयोग (280), राजभाषा आयोग (344), महान्यायवादी (76), राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (338), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (338A) और अंतर-राज्य परिषद् (263)। दूसरी कोटि वैधानिक निकायों की है, जो संसद के किसी अधिनियम से बनते हैं — राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, केंद्रीय सूचना आयोग और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग। तीसरी कोटि कार्यपालक निकायों की है, जो सरकार के प्रस्ताव या आदेश से बनते हैं — नीति आयोग तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग जैसा कोई निकाय अपने आरंभिक रूप में। इन तीन कोटियों की सूची एक बार बना लेने पर 'कौन-सा सांविधानिक नहीं है' वाला प्रश्न कुछ ही क्षणों में हल हो जाता है।
एक बात जो इस विषय में भ्रम पैदा करती है, वह यह है कि कुछ निकायों की कोटि समय के साथ बदल भी जाती है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा जनजाति आयोग मूलतः एक ही निकाय थे और 89वें संविधान संशोधन (2003) से अनुच्छेद 338 तथा 338A के अंतर्गत अलग-अलग किए गए। इसी प्रकार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग लंबे समय तक 1993 के अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक निकाय रहा और बाद में 102वें संविधान संशोधन से अनुच्छेद 338B के अंतर्गत सांविधानिक दर्जा पा गया — अर्थात् किसी निकाय की कोटि उस तिथि पर निर्भर करती है जिस पर प्रश्न पूछा जा रहा है। केंद्रीय सतर्कता आयोग भी आरंभ में कार्यपालक संकल्प से बना था और 2003 के अधिनियम से वैधानिक हुआ। राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थिति इस दृष्टि से स्थिर रही है — वह 1990 के अधिनियम से बना और वैधानिक निकाय ही है। इसीलिए यह प्रश्न आज भी उसी उत्तर पर टिका रहता है, और यही उसे परीक्षा का भरोसेमंद प्रश्न बनाता है।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के अंतर्गत हुई और आयोग ने 1992 में कार्य आरंभ किया — यह वैधानिक निकाय है, सांविधानिक नहीं।
- भारत का निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 से आता है, जो निर्वाचनों के अधीक्षण, निदेशन तथा नियंत्रण का दायित्व उसे सौंपता है।
- वित्त आयोग अनुच्छेद 280 से आता है; राष्ट्रपति उसे प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले गठित करते हैं, और उसमें एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं।
- राजभाषा आयोग अनुच्छेद 344(1) से आता है — राष्ट्रपति संविधान के प्रारंभ से पाँच वर्ष की समाप्ति पर और उसके बाद दस वर्ष की समाप्ति पर उसका गठन करते हैं; पहला आयोग 1955 में बना।
- अनुच्छेद 344(4) संसद की राजभाषा समिति की व्यवस्था करता है, जिसमें तीस सदस्य होते हैं — बीस लोक सभा से और दस राज्य सभा से।
- अन्य प्रमुख सांविधानिक निकाय — संघ लोक सेवा आयोग (315), नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (148), महान्यायवादी (76), अंतर-राज्य परिषद् (263), तथा अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग (338 तथा 338A)।
- नीति आयोग सांविधानिक या वैधानिक नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से बना कार्यपालक निकाय है — वित्त आयोग से उसका भेद स्पष्ट रखना चाहिए।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'राष्ट्रीय आयोग' नाम देखकर हर ऐसे निकाय को सांविधानिक मान लेना; राष्ट्रीय महिला आयोग 1990 के अधिनियम से बना वैधानिक निकाय है।
- राजभाषा आयोग को अपरिचित नाम मानकर उसे ही अपवाद चुन लेना; वह अनुच्छेद 344(1) से आता है और सांविधानिक है।
- वित्त आयोग और नीति आयोग को एक कोटि में रख देना; पहला अनुच्छेद 280 से आता है और दूसरा मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से बना कार्यपालक निकाय है।
- निकाय की कोटि को स्थायी मान लेना; राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग वैधानिक से सांविधानिक हुआ, इसलिए प्रश्न की तिथि भी महत्त्व रखती है।
'निम्नलिखित में से कौन-सा सांविधानिक निकाय नहीं है' — यह प्रश्न इस परीक्षा में लगभग हर वर्ष किसी न किसी रूप में आता है, और उसकी बनावट में एक सुनियोजित चाल रहती है: दो अत्यंत परिचित सांविधानिक निकाय, एक कम परिचित सांविधानिक निकाय, और एक परिचित वैधानिक निकाय। अभ्यर्थी की प्रवृत्ति सबसे अपरिचित नाम को अपवाद मान लेने की होती है, और प्रश्न ठीक उसी प्रवृत्ति का लाभ उठाता है — यहाँ 'राजभाषा आयोग' वह अपरिचित नाम है, पर वही सांविधानिक है। इसलिए एकमात्र भरोसेमंद तैयारी सूची बनाकर याद करने की है: सांविधानिक निकायों के नाम उनके अनुच्छेद के साथ, और वैधानिक निकायों के नाम उनके अधिनियम-वर्ष के साथ। परीक्षा-कक्ष में इसे लागू करने का तरीक़ा यह है कि प्रत्येक विकल्प के आगे मन में या तो अनुच्छेद-संख्या रखिए या अधिनियम का वर्ष; जिसके आगे अधिनियम आ जाए, वही उत्तर है।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2023_Q91Which one of the following is not a constitutional body in India ?
- (a) National Human Rights Commission
- (b) National Commission for Scheduled Tribes
- (c) National Commission for Backward Classes
- (d) National Commission for Scheduled Castes
उत्तर(a) National Human Rights Commission
EPFO EO/AO 2023 में ठीक यही प्रश्न दूसरे विकल्पों के साथ दुहराया गया है — भारत में कौन-सा निकाय सांविधानिक नहीं है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राष्ट्रपति द्वारा राजभाषा आयोग के गठन की व्यवस्था करता है?
- (a)अनुच्छेद 343
- (b)अनुच्छेद 344
- (c)अनुच्छेद 350
- (d)अनुच्छेद 351
उत्तर(b) अनुच्छेद 344
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय न सांविधानिक है और न वैधानिक, बल्कि मंत्रिमंडल के प्रस्ताव से बना कार्यपालक निकाय है?
- (a)वित्त आयोग
- (b)संघ लोक सेवा आयोग
- (c)नीति आयोग
- (d)राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
उत्तर(c) नीति आयोग