भारत की संविधान सभा के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही नहीं है?
- (a)संविधान सभा को उन सदस्यों से बनाया गया था, जो प्रांतीय विधान सभा के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित हुए थे।
- (b)संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को आयोजित की गयी थी।
- (c)प्रत्येक प्रांत में सीटें तीन मुख्य समुदायों—मुस्लिम, सिख और सामान्य में, उनकी अपनी-अपनी आबादी के अनुपात में बाँटी गई थीं।
- (d)भारत के राज्यों के प्रतिनिधियों के मामले में चयन की विधि भारत के गवर्नर-जनरल द्वारा निर्धारित की जानी थी।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) भारत के राज्यों के प्रतिनिधियों के मामले में चयन की विधि भारत के गवर्नर-जनरल द्वारा निर्धारित की जानी थी। यह निषेधात्मक प्रश्न है और हिन्दी स्तंभ में 'नहीं' मोटे टाइप में छपा है, इसलिए ढूँढ़ना उस कथन को है जो ग़लत है। संविधान सभा का गठन कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के अनुसार हुआ, और उस योजना ने प्रांतों तथा देशी रियासतों के लिए दो अलग-अलग व्यवस्थाएँ रखीं। प्रांतों के लिए विधि स्पष्ट थी — जनसंख्या के अनुपात में सीटें, प्रत्येक प्रांत की सीटें तीन मुख्य समुदायों में बाँटी जाएँ, और चुनाव प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाए। देशी रियासतों के लिए योजना ने ऐसी कोई विधि निर्धारित नहीं की; उसने केवल इतना कहा कि रियासतों को अंतिम संविधान सभा में उपयुक्त प्रतिनिधित्व मिलेगा, जो ब्रिटिश भारत के लिए अपनाए गए जनसंख्या-आधार पर तिरानबे से अधिक नहीं होगा, और यह भी कि चयन की विधि परामर्श से तय करनी होगी। अर्थात् निर्णय का अधिकार गवर्नर-जनरल को नहीं दिया गया था, बल्कि उसे बातचीत के लिए खुला छोड़ा गया था; प्रारंभिक चरण में रियासतों का पक्ष एक वार्ता-समिति के माध्यम से रखा जाना था। इसीलिए विकल्प (d) का कथन तथ्यतः ग़लत है और कुंजी उसी को चुनती है। यह भेद स्मरण रखने योग्य है, क्योंकि प्रांतों और रियासतों की भिन्न व्यवस्था संविधान सभा की संरचना की सबसे विशिष्ट बात है — रियासतों के प्रतिनिधि आरंभ में सभा से बाहर रहे और धीरे-धीरे उसमें सम्मिलित हुए। व्यवहार में रियासतों के प्रतिनिधि 1947 के दौरान क्रमशः सभा में सम्मिलित हुए। शेष तीनों कथन कैबिनेट मिशन योजना तथा संविधान सभा के इतिहास के सही विवरण हैं। अतः विकल्प (d) ही उत्तर है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)संविधान सभा को उन सदस्यों से बनाया गया था, जो प्रांतीय विधान सभा के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित हुए थे। — यह कथन सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। संविधान सभा का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं, अप्रत्यक्ष था: प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्य ही निर्वाचक-मंडल थे और उन्होंने आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से संविधान सभा के सदस्य चुने। यह व्यवस्था इसीलिए अपनाई गई कि 1946 में भारत में वयस्क मताधिकार लागू नहीं था और सीधा चुनाव कराना समय तथा प्रशासन दोनों दृष्टियों से असंभव था। यही कारण है कि संविधान सभा को कभी-कभी 'सार्वभौम वयस्क मताधिकार पर आधारित न होने' के आधार पर आलोचना का विषय भी बनाया गया, और संविधान सभा के सदस्यों ने स्वयं इस प्रश्न पर बहस की। चूँकि कथन तथ्यतः सही है, निषेधात्मक प्रश्न में इसे छोड़ देना ही उचित है।
- (b)संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को आयोजित की गयी थी। — यह भी सही है। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को नई दिल्ली में हुई। उस बैठक में सबसे वरिष्ठ सदस्य होने के नाते डॉ॰ सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया, और 11 दिसम्बर 1946 को डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित हुए। मुस्लिम लीग ने इस पहली बैठक का बहिष्कार किया था, इसलिए सभा उस समय अपनी पूरी संरचना में नहीं बैठी। 13 दिसम्बर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने 'उद्देश्य प्रस्ताव' प्रस्तुत किया, जो आगे चलकर संविधान की प्रस्तावना का आधार बना और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार हुआ। ये तिथियाँ परीक्षा में अलग-अलग प्रश्नों के रूप में लौटती हैं, इसलिए इन्हें क्रम से याद रखना चाहिए। यह कथन सही होने के कारण अपवाद नहीं है।
- (c)प्रत्येक प्रांत में सीटें तीन मुख्य समुदायों—मुस्लिम, सिख और सामान्य में, उनकी अपनी-अपनी आबादी के अनुपात में बाँटी गई थीं। — यह कथन भी सही है। कैबिनेट मिशन योजना ने प्रांतों की सीटें तीन मुख्य समुदायों — मुस्लिम, सिख और सामान्य — में उनकी जनसंख्या के अनुपात में बाँटने की व्यवस्था की थी, और 'सामान्य' श्रेणी में मुस्लिम तथा सिख को छोड़कर शेष सब आते थे। सीटों का आवंटन मोटे तौर पर दस लाख की जनसंख्या पर एक सीट के अनुपात से हुआ। यह सांप्रदायिक आधार पर सीटों का बँटवारा उस समय की राजनीतिक विवशता थी, क्योंकि 1909 से चली आ रही पृथक् प्रतिनिधित्व की व्यवस्था और 1946 की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए किसी सर्वसम्मत ढाँचे तक पहुँचना कठिन था। स्वतंत्र भारत के संविधान ने आगे चलकर धार्मिक आधार पर पृथक् निर्वाचन-मंडल को अस्वीकार कर दिया। चूँकि यह कथन योजना का सही विवरण है, यह उत्तर नहीं है।
अवधारणा
संविधान सभा की संरचना कैबिनेट मिशन योजना, 1946 से तय हुई और उसके तीन स्तंभ याद रखने योग्य हैं। पहला, सीटों की कुल संख्या 389 रखी गई — जिनमें 292 ब्रिटिश भारत के प्रांतों से, 93 देशी रियासतों से, और 4 मुख्य आयुक्त प्रांतों से थीं। दूसरा, प्रांतों की सीटें जनसंख्या के अनुपात में और तीन समुदायों — मुस्लिम, सिख तथा सामान्य — में बाँटी गईं, और चुनाव प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से हुआ। तीसरा, रियासतों के प्रतिनिधियों के चयन की विधि तय नहीं की गई, उसे परामर्श पर छोड़ा गया। विभाजन के बाद सभा की सदस्य-संख्या घटकर लगभग 299 रह गई। सभा का काम 9 दिसम्बर 1946 से आरंभ हुआ और संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया गया, जो 26 जनवरी 1950 से प्रवृत्त हुआ। इन तीन स्तंभों और चार तिथियों को साथ याद रखने पर संविधान सभा से जुड़े अधिकांश प्रश्न स्वतः हल हो जाते हैं। यह भी ध्यान रखिए कि यही सभा 1950 तक अस्थायी संसद के रूप में भी कार्य करती रही।
देशी रियासतों का प्रश्न संविधान सभा के इतिहास का सबसे नाज़ुक हिस्सा है, और वही इस प्रश्न की जड़ में है। रियासतें ब्रिटिश भारत का अंग नहीं थीं, इसलिए उन पर प्रांतीय विधान सभाओं जैसी चुनाव-व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती थी; साथ ही उनके शासकों की स्थिति संधि-आधारित थी, इसलिए एकतरफ़ा आदेश से प्रतिनिधि तय करना राजनीतिक रूप से संभव नहीं था। यही कारण है कि योजना ने केवल सीटों की ऊपरी सीमा तय की और शेष बातचीत पर छोड़ दी; आरंभिक चरण में रियासतों का पक्ष एक वार्ता-समिति के माध्यम से रखा जाना था। व्यवहार में रियासतों के प्रतिनिधि 1947 के दौरान क्रमशः सभा में सम्मिलित हुए। इसी पृष्ठभूमि में सरदार वल्लभभाई पटेल तथा वी॰ पी॰ मेनन के नेतृत्व में रियासतों के विलय की प्रक्रिया चली, जिसमें विलय-पत्र (Instrument of Accession) का प्रयोग हुआ। इसलिए इस प्रश्न को केवल एक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि संघीय भारत के बनने की कहानी के एक चरण के रूप में पढ़ना अधिक उपयोगी है।
मुख्य तथ्य
- कैबिनेट मिशन योजना, 1946 ने कहा कि देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चयन की विधि परामर्श से तय होगी — गवर्नर-जनरल द्वारा नहीं; यही प्रश्न का ग़लत कथन है।
- योजना के अनुसार रियासतों को अंतिम संविधान सभा में उपयुक्त प्रतिनिधित्व मिलना था, जो ब्रिटिश भारत के जनसंख्या-आधार पर 93 से अधिक नहीं होता।
- संविधान सभा की कुल सदस्य-संख्या 389 रखी गई थी — 292 प्रांतों से, 93 रियासतों से और 4 मुख्य आयुक्त प्रांतों से; विभाजन के बाद यह घटकर लगभग 299 रह गई।
- प्रांतों की सीटें तीन समुदायों — मुस्लिम, सिख तथा सामान्य — में जनसंख्या के अनुपात में बाँटी गईं, मोटे तौर पर दस लाख की जनसंख्या पर एक सीट के अनुपात से।
- सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति से हुआ — अर्थात् अप्रत्यक्ष निर्वाचन।
- संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई; डॉ॰ सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने और 11 दिसम्बर 1946 को डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
- जवाहरलाल नेहरू ने 13 दिसम्बर 1946 को 'उद्देश्य प्रस्ताव' प्रस्तुत किया, जो 22 जनवरी 1947 को स्वीकार हुआ और आगे चलकर प्रस्तावना का आधार बना।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- देशी रियासतों और प्रांतों के लिए एक ही चयन-विधि मान लेना; प्रांतों में चुनाव हुआ, जबकि रियासतों की विधि परामर्श पर छोड़ी गई थी।
- गवर्नर-जनरल को हर औपनिवेशिक निर्णय का कर्ता मान लेना; कैबिनेट मिशन योजना ने यह विशेष निर्णय उन्हें नहीं सौंपा था।
- संविधान सभा को प्रत्यक्ष निर्वाचित निकाय समझ लेना; उसका निर्वाचन प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से हुआ था।
- 9 दिसम्बर 1946 और 11 दिसम्बर 1946 को गड्डमड्ड कर देना — पहली तिथि पहली बैठक की है और दूसरी स्थायी अध्यक्ष के निर्वाचन की।
संविधान सभा पर प्रश्न इस परीक्षा में नियमित रूप से आते हैं और वे तीन कोटियों में बँटते हैं — तिथियाँ, संरचना, और समितियाँ तथा उनके अध्यक्ष। इस प्रश्न की कोटि संरचना की है, और उसकी बनावट निषेधात्मक है, इसलिए तीन कथन पाठ्यपुस्तक के वाक्यों से लगभग ज्यों-के-त्यों आते हैं और एक में एक शब्द बदल दिया जाता है — यहाँ 'परामर्श' के स्थान पर 'गवर्नर-जनरल'। ऐसे प्रश्न में उपयोगी पद्धति यह है कि विकल्प पढ़ते समय यह पूछा जाए कि निर्णय का कर्ता कौन बताया गया है; औपनिवेशिक संदर्भ में कर्ता बदल देना विकल्प बनाने का सबसे सस्ता तरीक़ा है। दूसरी उपयोगी आदत यह है कि संविधान सभा की चार तिथियाँ — 9 दिसम्बर 1946, 13 दिसम्बर 1946, 26 नवम्बर 1949 और 26 जनवरी 1950 — क्रम से याद रखी जाएँ, क्योंकि वे लगभग हर वर्ष किसी न किसी रूप में पूछी जाती हैं।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के अनुसार संविधान सभा में देशी रियासतों के प्रतिनिधियों के चयन की विधि किस प्रकार तय की जानी थी?
- (a)भारत के गवर्नर-जनरल द्वारा
- (b)परामर्श के माध्यम से
- (c)प्रांतीय विधान सभाओं के सदस्यों द्वारा चुनाव से
- (d)ब्रिटिश संसद के अधिनियम द्वारा
उत्तर(b) परामर्श के माध्यम से
- practice — not a real PYQ
संविधान सभा की पहली बैठक में अस्थायी अध्यक्ष कौन चुने गए थे, और स्थायी अध्यक्ष का पद किसने सँभाला?
- (a)अस्थायी सच्चिदानंद सिन्हा, स्थायी राजेन्द्र प्रसाद
- (b)अस्थायी राजेन्द्र प्रसाद, स्थायी सच्चिदानंद सिन्हा
- (c)अस्थायी बी॰ आर॰ अम्बेडकर, स्थायी राजेन्द्र प्रसाद
- (d)अस्थायी जवाहरलाल नेहरू, स्थायी वल्लभभाई पटेल
उत्तर(a) अस्थायी सच्चिदानंद सिन्हा, स्थायी राजेन्द्र प्रसाद