निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशेषता आधार (वित्तीय और अन्य उपदानों, लाभों तथा सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 की नहीं है?
- (a)केवल भारत के नागरिक ही इस अधिनियम के तहत नामांकन के हकदार हैं।
- (b)नामांकन के लिए जनांकिकीय एवं जीवमितीय, दोनों सूचनाएँ देनी पड़ती हैं।
- (c)इस अधिनियम के तहत नामांकन एवं प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की है।
- (d)व्यक्तियों की पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करना विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का दायित्व है।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) केवल भारत के नागरिक ही इस अधिनियम के तहत नामांकन के हकदार हैं। यह निषेधात्मक प्रश्न है और हिन्दी स्तंभ में 'नहीं' मोटे टाइप में छपा है, इसलिए ढूँढ़ना उस कथन को है जो अधिनियम की विशेषता नहीं है। आधार (वित्तीय और अन्य उपदानों, लाभों तथा सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 की धारा 3(1) की भाषा निर्णायक है: वह कहती है कि 'प्रत्येक निवासी' जनांकिकीय तथा जीवमितीय सूचना देकर आधार संख्या प्राप्त करने का हकदार है। शब्द 'निवासी' है, 'नागरिक' नहीं — और यही अंतर पूरे प्रश्न का आधार है। अधिनियम की धारा 2 में 'निवासी' की परिभाषा भी दी गई है: ऐसा व्यक्ति जो नामांकन के आवेदन की तिथि से ठीक पहले के बारह महीनों में कुल मिलाकर एक सौ बयासी दिन या उससे अधिक भारत में रहा हो। अर्थात् कसौटी नागरिकता नहीं, भारत में निवास की अवधि है, और इसीलिए विदेशी नागरिक भी, यदि वह इस निवास-शर्त को पूरा करता है, नामांकन का पात्र है। यह रचना अधिनियम के उद्देश्य से मेल खाती है: आधार पहचान का साधन है, नागरिकता का प्रमाण नहीं — आधार संख्या से यह सिद्ध नहीं होता कि धारक भारत का नागरिक है। इसीलिए यह कहना कि 'केवल नागरिक ही नामांकन के हकदार हैं' अधिनियम के पाठ के विरुद्ध है, और कुंजी इसी कथन को अपवाद के रूप में चुनती है। इसी अधिनियम ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को वैधानिक निकाय का दर्जा भी दिया, जो उससे पहले एक कार्यपालक निकाय के रूप में काम कर रहा था। शेष तीनों कथन अधिनियम की सही विशेषताएँ हैं — नामांकन में दोनों प्रकार की सूचना देनी पड़ती है, नामांकन तथा प्रमाणीकरण की ज़िम्मेदारी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की है, और पहचान-सूचना की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसी का दायित्व है। अतः विकल्प (a) ही उत्तर है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)नामांकन के लिए जनांकिकीय एवं जीवमितीय, दोनों सूचनाएँ देनी पड़ती हैं। — यह कथन सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। धारा 3(1) के अनुसार नामांकन के लिए दो प्रकार की सूचना देनी होती है। जनांकिकीय सूचना में नाम, जन्म-तिथि, पता तथा अन्य निर्दिष्ट विवरण आते हैं, और अधिनियम स्पष्ट रूप से उसमें से नस्ल, धर्म, जाति, जनजाति, वंश, भाषा, हक़दारी के अभिलेख, आय तथा चिकित्सा-इतिहास को बाहर रखता है — यह अपवर्जन अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है और उस पर अलग प्रश्न भी बन सकता है। जीवमितीय सूचना में छायाचित्र, अंगुली-छाप, पुतली-स्कैन तथा ऐसी अन्य जैविक विशेषताएँ आती हैं। इन्हीं दो प्रकार की सूचनाओं के संयोजन से विशिष्टता स्थापित होती है, जो पूरी व्यवस्था का तकनीकी आधार है। इसलिए यह कथन अधिनियम की सही विशेषता है और निषेधात्मक प्रश्न में इसे छोड़ देना चाहिए।
- (c)इस अधिनियम के तहत नामांकन एवं प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की है। — यह भी सही है और अपवाद नहीं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को इसी अधिनियम ने वैधानिक निकाय का दर्जा दिया, और नामांकन तथा प्रमाणीकरण से जुड़े कार्य उसी को सौंपे गए — अधिनियम की धारा 11 तथा धारा 23 में प्राधिकरण की स्थापना और उसके कृत्यों का उल्लेख है, जिनमें नामांकन तथा प्रमाणीकरण की प्रक्रियाएँ, नामांकन-अभिकरणों तथा अनुरोधकर्ता संस्थाओं की व्यवस्था, और केंद्रीय पहचान डेटा भंडार का संचालन सम्मिलित हैं। यही कारण है कि आधार से जुड़ी हर प्रक्रियागत अधिसूचना और विनियम प्राधिकरण से निकलते हैं। इसलिए इस कथन को अपवाद मानना अधिनियम की योजना के विरुद्ध होगा; यह प्राधिकरण की मूल भूमिका का ही कथन है।
- (d)व्यक्तियों की पहचान की सुरक्षा सुनिश्चित करना विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का दायित्व है। — यह कथन भी सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं है। अधिनियम की धारा 28 प्राधिकरण पर यह दायित्व डालती है कि वह पहचान-सूचना तथा प्रमाणीकरण अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करे — अर्थात् सूचना की गोपनीयता और उसकी अनधिकृत पहुँच से रक्षा प्राधिकरण की विधिक ज़िम्मेदारी है, केवल प्रशासनिक अपेक्षा नहीं। इसी शृंखला में अधिनियम में सूचना के प्रकटन पर प्रतिबंध तथा उल्लंघन पर दंड के प्रावधान भी हैं। यह पक्ष आधार-व्यवस्था की सबसे अधिक चर्चित बहसों — निजता, आँकड़ों की सुरक्षा और निगरानी — से सीधे जुड़ा है, इसलिए परीक्षा इसे अलग से भी पूछती है। चूँकि यह अधिनियम की सही विशेषता है, निषेधात्मक प्रश्न में इसे छोड़ देना ही ठीक है।
अवधारणा
इस प्रश्न का पूरा भार दो विधिक शब्दों के भेद पर टिका है — 'नागरिक' और 'निवासी'। नागरिकता एक स्थायी विधिक संबंध है, जो नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत जन्म, वंश, पंजीकरण, देशीयकरण या भू-भाग के समावेशन से अर्जित होती है, और जिससे मताधिकार तथा कुछ मौलिक अधिकार जुड़े हैं। निवास एक तथ्यात्मक स्थिति है, जिसे किसी अवधि के मानदंड से नापा जाता है और जो नागरिकता से स्वतंत्र है। भारतीय क़ानून में यह भेद अनेक जगह मिलता है और उसका मानदंड हर अधिनियम में अलग हो सकता है — आयकर अधिनियम की निवास-परिभाषा अलग है, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम की अलग, और आधार अधिनियम की अलग। इसलिए किसी भी विधिक प्रश्न में यह पूछना उपयोगी होता है कि अधिनियम स्वयं किस शब्द का प्रयोग करता है। आधार अधिनियम 'निवासी' का प्रयोग करता है और उसे बारह महीनों में एक सौ बयासी दिन के निवास से परिभाषित करता है — यही एक तथ्य इस प्रश्न को हल कर देता है, और यही आधार को नागरिकता के प्रमाण से अलग भी करता है।
आधार अधिनियम, 2016 का पूरा नाम ही उसकी योजना बता देता है — 'वित्तीय और अन्य उपदानों, लाभों तथा सेवाओं का लक्षित वितरण' — अर्थात् उसका घोषित उद्देश्य सब्सिडी तथा लाभों को सही व्यक्ति तक पहुँचाना है। ध्यान देने योग्य है कि इससे पहले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण एक कार्यपालक निकाय के रूप में काम कर रहा था और इस अधिनियम ने उसे वैधानिक आधार दिया। इस विषय पर आगे की बड़ी घटनाएँ भी परीक्षा-दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं: 2017 में उच्चतम न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने निजता को मौलिक अधिकार माना, और 2018 में पाँच-न्यायाधीशों की पीठ ने आधार अधिनियम की संवैधानिकता को बड़े पैमाने पर बनाए रखते हुए कुछ प्रावधानों पर आपत्ति की; उसके बाद 2019 में अधिनियम में संशोधन भी हुआ। हिन्दी स्तंभ की एक बात और उल्लेखनीय है: अधिनियम का पूरा कोष्ठक-नाम यहाँ अनूदित रूप में छपा है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वह मूल अंग्रेज़ी में है — अर्थात् हिन्दी पढ़ने वाले को अधिनियम का नाम अपनी भाषा में मिलता है।
मुख्य तथ्य
- आधार अधिनियम, 2016 की धारा 3(1) कहती है कि 'प्रत्येक निवासी' जनांकिकीय तथा जीवमितीय सूचना देकर आधार संख्या प्राप्त करने का हकदार है — शब्द 'नागरिक' नहीं है।
- अधिनियम में 'निवासी' का अर्थ है ऐसा व्यक्ति जो नामांकन के आवेदन से ठीक पहले के बारह महीनों में कुल मिलाकर एक सौ बयासी दिन या उससे अधिक भारत में रहा हो।
- आधार पहचान का साधन है, नागरिकता का प्रमाण नहीं — आधार संख्या से यह सिद्ध नहीं होता कि धारक भारत का नागरिक है।
- जनांकिकीय सूचना में नाम, जन्म-तिथि तथा पता आते हैं, और अधिनियम उसमें से नस्ल, धर्म, जाति, जनजाति, भाषा, आय तथा चिकित्सा-इतिहास को स्पष्ट रूप से बाहर रखता है।
- जीवमितीय सूचना में छायाचित्र, अंगुली-छाप, पुतली-स्कैन तथा ऐसी अन्य जैविक विशेषताएँ सम्मिलित हैं।
- अधिनियम की धारा 11 तथा 23 भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की स्थापना और उसके कृत्य निर्धारित करती हैं, जिनमें नामांकन तथा प्रमाणीकरण सम्मिलित हैं।
- धारा 28 प्राधिकरण पर पहचान-सूचना तथा प्रमाणीकरण अभिलेखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व डालती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'नागरिक' और 'निवासी' को पर्याय मान लेना; अधिनियम की धारा 3(1) 'निवासी' शब्द का प्रयोग करती है और यही पूरे प्रश्न का निर्णायक बिंदु है।
- आधार को नागरिकता का प्रमाण समझ लेना; वह केवल पहचान का साधन है और उससे नागरिकता सिद्ध नहीं होती।
- निषेधात्मक 'नहीं' पढ़े बिना कोई सही कथन चुन लेना; तीन विकल्प अधिनियम की सच्ची विशेषताएँ हैं और केवल एक अपवाद है।
- यह मान लेना कि जनांकिकीय सूचना में जाति या धर्म भी आते हैं; अधिनियम उन्हें स्पष्ट रूप से बाहर रखता है।
विधिक विषयों पर बने निषेधात्मक प्रश्नों में परीक्षा प्रायः अधिनियम के किसी एक शब्द को बदलकर विकल्प तैयार करती है — 'निवासी' के स्थान पर 'नागरिक', 'कर सकेगा' के स्थान पर 'करेगा', 'अधिसूचित' के स्थान पर 'सभी'। इसलिए ऐसे प्रश्नों की तैयारी में अधिनियम की परिभाषा-धारा को पढ़ लेना असाधारण रूप से लाभदायक होता है, क्योंकि अधिकांश प्रश्न वहीं से निकलते हैं। दूसरी उपयोगी आदत यह है कि किसी नए क़ानून के लिए चार बिंदु अलग से याद रखे जाएँ — कौन पात्र है, किस निकाय को क्या ज़िम्मेदारी दी गई है, कौन-सी सूचना ली जाती है, और उल्लंघन पर क्या परिणाम है। इस प्रश्न के चारों विकल्प ठीक इन्हीं चार बिंदुओं से आते हैं, जो दिखाता है कि यह ढाँचा कितना दुहराया जाता है। तीसरा, विकल्पों में आए निरपेक्ष शब्दों — 'केवल', 'सभी', 'प्रत्येक' — को रेखांकित करके पढ़िए।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
आधार अधिनियम, 2016 के अनुसार आधार संख्या प्राप्त करने के लिए नामांकन का हकदार कौन है?
- (a)केवल भारत का नागरिक
- (b)प्रत्येक निवासी, जो निर्धारित निवास-अवधि की शर्त पूरी करता हो
- (c)केवल वह व्यक्ति जिसके पास पासपोर्ट हो
- (d)केवल वह व्यक्ति जो किसी सरकारी उपदान का लाभार्थी हो
उत्तर(b) प्रत्येक निवासी, जो निर्धारित निवास-अवधि की शर्त पूरी करता हो
- practice — not a real PYQ
आधार अधिनियम, 2016 में 'निवासी' की परिभाषा के अनुसार आवेदन से ठीक पहले के बारह महीनों में भारत में कितने दिन का निवास आवश्यक है?
- (a)90 दिन या उससे अधिक
- (b)120 दिन या उससे अधिक
- (c)182 दिन या उससे अधिक
- (d)240 दिन या उससे अधिक
उत्तर(c) 182 दिन या उससे अधिक