निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशेषता मुग़ल इतिवृत्तियों की नहीं है?
- (a)इनमें घटनाओं का एक सतत कालानुक्रमिक अभिलेख प्रस्तुत किया गया है।
- (b)ये मुग़लों के बारे में तथ्यात्मक जानकारी के संग्रह थे।
- (c)इनसे हम यह समझ पाते हैं कि साम्राज्यिक विचारधाराएँ किस तरह से उत्पन्न और प्रसारित हुई थीं।
- (d)इनमें इतिवृत्तियों के लेखकों की संक्षिप्त जीवनियाँ दी गयी हैं।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) इनमें इतिवृत्तियों के लेखकों की संक्षिप्त जीवनियाँ दी गयी हैं। यह निषेधात्मक प्रश्न है और हिन्दी स्तंभ में 'नहीं' मोटे टाइप में छपा है, इसलिए पहला काम यही है कि तीन सही विशेषताएँ छोड़कर एक अपवाद पकड़ा जाए। मुग़ल इतिवृत्तियाँ (chronicles) दरबार के संरक्षण में लिखी गई ऐसी रचनाएँ थीं जिनका विषय बादशाह और उसका शासन था — अकबरनामा (अबुल फ़ज़्ल), बादशाहनामा (अब्दुल हमीद लाहौरी) इसी कोटि की प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। इनका केंद्र सदैव सम्राट रहा: उसके अभियान, आदेश, दरबार, प्रशासन और उसकी 'न्यायप्रियता' का चित्रण। लेखक इनमें दरबारी और संकलनकर्ता की भूमिका में है, विषय नहीं; इसलिए इनमें इतिवृत्ति-लेखकों की जीवनियाँ देना इनकी विशेषता नहीं है। लेखकों के जीवन के बारे में हमारी जानकारी प्रायः अन्य स्रोतों से आती है, इन्हीं ग्रंथों की अपनी सामग्री से नहीं। ध्यान रखने योग्य एक भेद और है: बाबर की 'बाबरनामा' और जहाँगीर की 'तुज़ुक-ए-जहाँगीरी' आत्मकथात्मक स्मृति-ग्रंथ हैं, पर वे बादशाहों द्वारा स्वयं लिखे गए हैं — इतिवृत्ति-लेखकों द्वारा नहीं — इसलिए वे इस कथन का समर्थन नहीं करते। यह भेद इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि तीनों कोटियाँ अलग-अलग प्रकार की सूचना देती हैं: स्मृति-ग्रंथ लेखक-बादशाह के अपने अनुभव और मत बताते हैं, दरबारी इतिवृत्तियाँ शासन का आधिकारिक विवरण, और दरबार-बाह्य वृत्तांत असहमति की आवाज़। शेष तीनों कथन इतिवृत्तियों की मान्य विशेषताएँ हैं: वे घटनाओं का सिलसिलेवार कालानुक्रमिक विवरण देती हैं (यही 'इतिवृत्ति' शब्द का अर्थ भी है), वे मुग़ल राज्य और उसकी संस्थाओं के बारे में तथ्यात्मक सूचनाओं का भंडार हैं, और वे यह समझने में सहायक हैं कि साम्राज्यिक विचारधारा किस प्रकार गढ़ी और फैलाई गई। अतः विकल्प (d) ही उत्तर है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)इनमें घटनाओं का एक सतत कालानुक्रमिक अभिलेख प्रस्तुत किया गया है। — यह इतिवृत्तियों की परिभाषात्मक विशेषता ही है, इसलिए यह अपवाद नहीं हो सकता। 'इतिवृत्ति' का अर्थ ही होता है घटनाओं को उनके घटित होने के क्रम में दर्ज करना, और मुग़ल इतिवृत्तियाँ ठीक यही करती हैं — शासन-वर्षों के अनुसार अभियानों, नियुक्तियों, दरबारी आयोजनों और आदेशों का सिलसिलेवार विवरण। अकबरनामा के आरंभिक खंड इसी शैली में अकबर के शासन का वर्षवार वृत्तांत देते हैं। इसी कारण आधुनिक इतिहासकार इन ग्रंथों का उपयोग तिथि-क्रम बैठाने के लिए करते हैं, यद्यपि वे उनके प्रशस्ति-भाव के प्रति सतर्क भी रहते हैं। निषेधात्मक प्रश्न में इस विकल्प को छोड़ देना ही सही है, क्योंकि यह कथन इतिवृत्ति की परिभाषा को ही दुहरा रहा है।
- (b)ये मुग़लों के बारे में तथ्यात्मक जानकारी के संग्रह थे। — यह भी इतिवृत्तियों की मान्य विशेषता है। ये ग्रंथ मुग़ल राज्य की संस्थाओं और व्यवहारों के बारे में सूचनाओं का बड़ा भंडार हैं — प्रांतों तथा सूबों का प्रशासन, मनसबदारी की व्यवस्था, राजस्व-प्रबंध, दरबार के शिष्टाचार, सैन्य अभियान, तथा दरबार से जुड़े व्यक्तियों के नाम और पद। अकबरनामा के तीसरे खंड, अर्थात् आईन-ए-अकबरी, में तो साम्राज्य का लगभग सांख्यिकीय विवरण मिलता है — सूबों, उनकी भूमि, राजस्व, जातियों और उत्पादों की सूचियाँ। यही कारण है कि मुग़ल काल के प्रशासनिक इतिहास का बड़ा हिस्सा इन्हीं ग्रंथों पर टिका है। इसलिए इस कथन को अपवाद मानना तथ्य के विरुद्ध होगा; यह ठीक वैसा ही वाक्य है जैसा पाठ्यपुस्तकें इन ग्रंथों के स्रोत-मूल्य के लिए प्रयोग करती हैं।
- (c)इनसे हम यह समझ पाते हैं कि साम्राज्यिक विचारधाराएँ किस तरह से उत्पन्न और प्रसारित हुई थीं। — यह कथन भी सही है, इसलिए यह उत्तर नहीं है। इतिवृत्तियाँ केवल सूचना का संग्रह नहीं थीं; वे एक सुविचारित उद्देश्य से लिखी गई थीं — शासन की एक आदर्श छवि गढ़ना और उसे साम्राज्य के भीतर तथा भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना। इनमें बादशाह को दैवी प्रकाश से युक्त, न्यायप्रिय और सब समुदायों के प्रति समभाव रखने वाला दिखाया जाता है, और यह संदेश दिया जाता है कि मुग़ल सत्ता का विरोध व्यर्थ है। इसीलिए आधुनिक इतिहास-लेखन इन ग्रंथों को दो तरह से पढ़ता है — तथ्यों के स्रोत के रूप में, और विचारधारा के दस्तावेज़ के रूप में। यह दूसरा पाठ ही इस कथन का आधार है, और वह इन ग्रंथों की सबसे चर्चित विशेषताओं में गिना जाता है।
अवधारणा
मुग़ल दरबार के लिखित स्रोतों को तीन कोटियों में बाँटकर देखना उपयोगी है, क्योंकि परीक्षा प्रायः इन्हीं कोटियों को आपस में मिला देती है। पहली कोटि आत्मकथात्मक स्मृति-ग्रंथों की है, जिन्हें बादशाहों ने स्वयं लिखा या लिखवाया — बाबर की 'बाबरनामा' (तुर्की में, जिसका फ़ारसी अनुवाद अकबर के काल में हुआ) और जहाँगीर की 'तुज़ुक-ए-जहाँगीरी'। दूसरी कोटि दरबारी इतिवृत्तियों की है, जो बादशाह के आदेश से दरबारी लेखकों ने तैयार कीं — अबुल फ़ज़्ल की 'अकबरनामा' और अब्दुल हमीद लाहौरी की 'बादशाहनामा'। तीसरी कोटि दरबार से बाहर लिखे गए वृत्तांतों की है, जिनमें असहमति और आलोचना भी मिलती है। इनमें से इतिवृत्तियाँ ही 'क्रॉनिकल' (chronicle) कहलाती हैं और प्रश्न उन्हीं के बारे में है। इनकी भाषा फ़ारसी थी, जो अकबर के काल में दरबार की भाषा बनी; उसी काल में एक अनुवाद-विभाग भी बना, जिसने संस्कृत ग्रंथों का फ़ारसी में अनुवाद किया — महाभारत का अनुवाद 'रज़्मनामा' के नाम से इसी प्रयास का परिणाम है।
अबुल फ़ज़्ल की 'अकबरनामा' तीन खंडों में है: पहले दो खंड अकबर के पूर्वजों तथा उसके शासन का कालानुक्रमिक विवरण देते हैं और तीसरा खंड 'आईन-ए-अकबरी' है, जो साम्राज्य का संस्थागत तथा सांख्यिकीय चित्र प्रस्तुत करता है — सूबों का विवरण, राजस्व के आँकड़े, दरबार की व्यवस्थाएँ, तथा भारत के लोगों, रीतियों और परंपराओं का वर्णन। शाहजहाँ के काल की 'बादशाहनामा' अब्दुल हमीद लाहौरी ने लिखी। इन ग्रंथों की एक और विशेषता यह है कि वे प्रायः सचित्र तैयार किए जाते थे, और उनके चित्र स्वयं ऐतिहासिक स्रोत हैं — वे दरबार की सज्जा, पदानुक्रम और प्रतीकों को दिखाते हैं। आधुनिक इतिहासकार इन ग्रंथों का उपयोग सावधानी से करते हैं, क्योंकि इनकी दृष्टि दरबार की दृष्टि है; प्रतिपक्ष की आवाज़ जानने के लिए उन्हें अन्य स्रोतों — दरबार-बाह्य वृत्तांतों, स्थानीय दस्तावेज़ों और विदेशी यात्रियों के विवरणों — से मिलाना पड़ता है। यही पद्धतिगत सतर्कता प्रश्न के विकल्प (c) में झलकती है।
मुख्य तथ्य
- मुग़ल इतिवृत्तियाँ दरबार के संरक्षण में लिखी गईं और उनका विषय बादशाह तथा उसका शासन था — लेखक उनमें विषय नहीं, संकलनकर्ता था।
- इसीलिए इतिवृत्ति-लेखकों की जीवनियाँ देना इन ग्रंथों की विशेषता नहीं है; यही प्रश्न का अपवाद-कथन है।
- 'अकबरनामा' अबुल फ़ज़्ल की कृति है और तीन खंडों में है; उसका तीसरा खंड 'आईन-ए-अकबरी' साम्राज्य का संस्थागत तथा सांख्यिकीय विवरण देता है।
- 'बादशाहनामा' शाहजहाँ के काल की इतिवृत्ति है, जिसे अब्दुल हमीद लाहौरी ने लिखा।
- बाबर की 'बाबरनामा' और जहाँगीर की 'तुज़ुक-ए-जहाँगीरी' आत्मकथात्मक स्मृति-ग्रंथ हैं, जो बादशाहों द्वारा स्वयं लिखे गए — दरबारी इतिवृत्तियों से भिन्न कोटि।
- इन ग्रंथों की भाषा फ़ारसी थी, जो अकबर के काल में दरबार की भाषा बनी; उसी काल में महाभारत का फ़ारसी अनुवाद 'रज़्मनामा' नाम से हुआ।
- इतिवृत्तियाँ तथ्यों का भंडार होने के साथ-साथ विचारधारा के दस्तावेज़ भी हैं — वे बादशाह की आदर्श छवि गढ़कर उसे साम्राज्य में प्रसारित करती थीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- निषेधात्मक 'नहीं' पढ़े बिना पहला सही दिखने वाला कथन चुन लेना; इस पुस्तिका में वह मोटे टाइप में छपा है और उसे देखना कठिन नहीं।
- 'बाबरनामा' तथा 'तुज़ुक-ए-जहाँगीरी' को इतिवृत्ति मानकर यह सोच लेना कि इनमें लेखक की जीवनी है; वे बादशाहों की अपनी स्मृतियाँ हैं, दरबारी इतिवृत्तियाँ नहीं।
- विकल्प (c) को अत्यधिक 'सैद्धांतिक' समझकर उसे अपवाद मान लेना; विचारधारा का प्रसार इन ग्रंथों का घोषित उद्देश्य ही था।
- आईन-ए-अकबरी को अकबरनामा से अलग स्वतंत्र ग्रंथ मान लेना; वह अकबरनामा का तीसरा खंड है।
मध्यकालीन भारत के स्रोतों पर प्रश्न प्रायः दो शैलियों में आते हैं — ग्रंथ से लेखक या काल पूछना, और ग्रंथ-वर्ग की विशेषताएँ पूछना। दूसरी शैली, जो यहाँ है, कठिन मानी जाती है क्योंकि उसमें विकल्प पाठ्यपुस्तक के वाक्यों से लगभग ज्यों-के-त्यों उठाए जाते हैं और एक विकल्प उसी शैली में गढ़कर जोड़ दिया जाता है। इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि प्रत्येक स्रोत-वर्ग की तीन-चार मान्य विशेषताएँ एक सूची में याद रखी जाएँ; फिर प्रश्न पढ़ते ही यह दिखने लगता है कि कौन-सा कथन उस सूची में नहीं है। दूसरा उपयोगी नियम यह है कि विषय और लेखक को अलग करके पूछिए — इतिवृत्ति का विषय बादशाह है, लेखक नहीं; यात्रा-वृत्तांत का विषय यात्री का अनुभव है; और स्मृति-ग्रंथ का विषय लेखक का अपना जीवन। इसी भेद पर यह प्रश्न टिका है।
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EPFO_EOAO_2020_Q72What did Ain-i-Akbari seek to promote within the frontiers of the Mughal State ?
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
अबुल फ़ज़्ल की 'अकबरनामा' के तीसरे खंड का, जो मुग़ल साम्राज्य का संस्थागत तथा सांख्यिकीय विवरण प्रस्तुत करता है, नाम क्या है?
- (a)आईन-ए-अकबरी
- (b)बादशाहनामा
- (c)तुज़ुक-ए-जहाँगीरी
- (d)मुंतख़ब-उत-तवारीख़
उत्तर(a) आईन-ए-अकबरी
- practice — not a real PYQ
अकबर के काल में जिस अनुवाद-कार्य के अंतर्गत महाभारत का फ़ारसी में अनुवाद हुआ, उस अनूदित ग्रंथ का नाम क्या रखा गया था?
- (a)रज़्मनामा
- (b)सिर्र-ए-अकबर
- (c)अनवार-ए-सुहैली
- (d)इक़बालनामा
उत्तर(a) रज़्मनामा