निम्नलिखित में से कौन-सी कृति प्रसिद्ध समाज सुधारक बेगम रोकैया की नहीं है?
- (a)अर्धांगी
- (b)गृह
- (c)मदर इंडिया
- (d)सुल्तानास ड्रीम
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) मदर इंडिया। यह निषेधात्मक प्रश्न है — पूछा गया है कि कौन-सी कृति बेगम रुकैया की 'नहीं' है, और हिन्दी स्तंभ में यह 'नहीं' मोटे टाइप में छपा है। इसलिए तीन कृतियाँ उनकी हैं और एक नहीं; ढूँढ़ना उसी एक को है। 'मदर इंडिया' अमेरिकी पत्रकार कैथरीन मेयो की 1927 में प्रकाशित पुस्तक है। यह पुस्तक भारतीय समाज की — विशेषतः बाल-विवाह, स्त्रियों की दशा और स्वास्थ्य-व्यवस्था की — अत्यंत नकारात्मक तस्वीर खींचकर यह तर्क देती है कि भारत स्वशासन के योग्य नहीं है। भारत में इसका तीखा विरोध हुआ और महात्मा गांधी ने इसे 'गटर इंस्पेक्टर की रिपोर्ट' कहा था। अर्थात् यह किसी भारतीय समाज-सुधारक की कृति नहीं, बल्कि उपनिवेशवाद के पक्ष में लिखी गई विदेशी पुस्तक है, और इसीलिए यह इस समूह में अपवाद है। शेष तीनों कृतियाँ बेगम रुकैया की हैं। 'अर्धांगी' और 'गृह' उनके उन निबंधों में हैं जो 1903 में प्रकाशित हुए और आगे चलकर उनके निबंध-संग्रह 'मोतीचूर' में संकलित हुए, जिसका पहला खंड 1904 में तथा दूसरा 1922 में आया; इसी समूह के अन्य निबंध 'स्त्रीजातिर अबनति', 'सुगृहिणी' और 'बोरका' हैं। 'सुल्तानास ड्रीम' 1905 में प्रकाशित उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है — एक कल्पना-कथा, जिसमें स्त्रियाँ शासन करती हैं और पुरुष घर के भीतर रहते हैं, अर्थात् पर्दे की व्यवस्था को उलटकर दिखाया गया है। बेगम रुकैया का लेखन ही नहीं, उनका संस्था-निर्माण भी इसी दिशा में था — 1909 में भागलपुर में सखावत मेमोरियल गर्ल्स स्कूल की स्थापना, जिसे 1911 में कलकत्ता ले जाया गया, और 1916 में 'अंजुमन-ए-ख़वातीन-ए-इस्लाम' नामक महिला संगठन। तीनों कृतियों का विषय एक ही है: स्त्री-शिक्षा, पर्दा-प्रथा और स्त्री की सामाजिक अधीनता। इस समूह में 'मदर इंडिया' न विषय से मेल खाती है, न लेखक से, न दृष्टिकोण से — अतः विकल्प (c) ही उत्तर है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)अर्धांगी — 'अर्धांगी' बेगम रुकैया की ही रचना है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। यह उन निबंधों में है जो 1903 में प्रकाशित हुए और बाद में उनके संग्रह 'मोतीचूर' में संकलित हुए। शीर्षक का अर्थ ही उनके तर्क का सार है — स्त्री को समाज का 'आधा अंग' कहा तो जाता है, पर उसे आधे के अधिकार नहीं दिए जाते; रुकैया इसी विरोधाभास पर लिखती हैं और स्त्री की शिक्षा तथा आत्मनिर्भरता को उसका उपाय बताती हैं। निषेधात्मक प्रश्न में ऐसे विकल्प को छोड़ देना ही सही है। ध्यान रहे कि रुकैया का अधिकांश लेखन बांग्ला में है और उसके शीर्षक हिन्दी में लिप्यंतरित होकर आते हैं, इसलिए शीर्षक का अर्थ जान लेना उन्हें स्मृति में टिकाने का सबसे अच्छा तरीक़ा है।
- (b)गृह — 'गृह' भी बेगम रुकैया की ही रचना है और 1903 के उन्हीं निबंधों में गिनी जाती है जो 'मोतीचूर' में संकलित हुए। इसका विषय घर और स्त्री का संबंध है — कि जिस घर को स्त्री का क्षेत्र कहा जाता है, उसी घर में उसकी हैसियत क्या है, और घर की चारदीवारी सुरक्षा है या बंधन। रुकैया के लेखन की विशेषता यही है कि वे रोज़मर्रा की परिचित संस्थाओं — घर, पर्दा, विवाह, शिक्षा — को लेकर उन पर सीधा प्रश्न खड़ा करती हैं, और उनकी भाषा में व्यंग्य तथा तर्क दोनों साथ चलते हैं। चूँकि यह उनकी कृति है, निषेधात्मक प्रश्न में यह उत्तर नहीं है। परीक्षा में यह विकल्प उन अभ्यर्थियों को उलझाता है जो केवल 'सुल्तानास ड्रीम' का नाम जानते हैं और शेष रचनाओं से अपरिचित हैं।
- (d)सुल्तानास ड्रीम — 'सुल्तानास ड्रीम' बेगम रुकैया की सबसे प्रसिद्ध कृति है, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। यह 1905 में प्रकाशित हुई और अंग्रेज़ी में लिखी गई थी; इसे नारीवादी कल्पना-साहित्य की आरंभिक और अत्यंत मौलिक रचनाओं में गिना जाता है। इसमें 'लेडीलैंड' नामक एक ऐसे देश की कल्पना है जहाँ स्त्रियाँ शासन और विज्ञान का काम सँभालती हैं और पुरुष घर के भीतर रहते हैं — अर्थात् पर्दा-प्रथा को उलटकर उसका अर्थ दिखा दिया जाता है, और साथ ही यह भी कि यदि स्त्रियों को शिक्षा तथा अवसर मिलें तो समाज कैसा हो सकता है। इस विकल्प को चुनने की भूल प्रायः वही करता है जो शीर्षक को अंग्रेज़ी-नुमा देखकर मान लेता है कि यह किसी विदेशी लेखक की कृति होगी; वस्तुतः रुकैया ने इसे स्वयं अंग्रेज़ी में लिखा था।
अवधारणा
बेगम रुकैया सखावत हुसैन (1880–1932) उन्नीसवीं-बीसवीं सदी के बंगाल में मुस्लिम स्त्री-शिक्षा की सबसे महत्त्वपूर्ण प्रवर्तक मानी जाती हैं, और उनका काम लेखन तथा संस्था-निर्माण दोनों दिशाओं में चला। लेखन में उनकी तीन कोटियाँ हैं — निबंध ('अर्धांगी', 'गृह', 'स्त्रीजातिर अबनति' आदि, जो 'मोतीचूर' में संकलित हुए), कल्पना-कथा ('सुल्तानास ड्रीम', 1905) और उपन्यास ('पद्मराग', 1924)। संस्था-निर्माण में उनका सबसे बड़ा काम 1909 में भागलपुर में सखावत मेमोरियल गर्ल्स स्कूल की स्थापना है, जिसे 1911 में कलकत्ता ले जाया गया और जिसे उन्होंने जीवन-भर चलाया; 1916 में उन्होंने 'अंजुमन-ए-ख़वातीन-ए-इस्लाम' नामक महिला संगठन भी बनाया। उनके लेखन का केंद्रीय तर्क यह है कि स्त्रियों की अधीनता का मूल कारण शिक्षा से वंचित रखना है, और पर्दा उस वंचना को स्थायी बनाने का साधन है। इस पृष्ठभूमि को जान लेने पर उनकी रचनाओं के शीर्षक भी अर्थपूर्ण हो जाते हैं और याद रखना सरल। परीक्षा प्रायः इन्हीं तीन कोटियों में से किसी एक शीर्षक को उठाकर प्रश्न बनाती है।
'मदर इंडिया' का प्रसंग अलग से जानने योग्य है, क्योंकि उस पर स्वतंत्र प्रश्न भी बनते हैं। कैथरीन मेयो अमेरिकी पत्रकार थीं और उनकी 1927 की यह पुस्तक भारतीय समाज की दुर्दशा का चित्र खींचकर यह निष्कर्ष निकालती है कि भारत स्वशासन के योग्य नहीं है — अर्थात् उसका उद्देश्य समाज-सुधार नहीं, औपनिवेशिक शासन का समर्थन था। भारत में इसका व्यापक विरोध हुआ, अनेक खंडन-पुस्तकें लिखी गईं, और गांधीजी की टिप्पणी — कि यह पुस्तक 'गटर इंस्पेक्टर की रिपोर्ट' है — सबसे अधिक उद्धृत होती है। परीक्षा में यह पुस्तक दो प्रकार से आती है: कभी लेखक पूछकर, कभी गांधीजी की टिप्पणी पूछकर। यही कारण है कि इस प्रश्न में उसे विकल्प के रूप में रखा गया — नाम इतना परिचित है कि वह किसी भी सूची में स्वाभाविक लगता है, और निषेधात्मक प्रश्न इसी परिचय का लाभ उठाता है। भेद स्पष्ट रखिए: लेखिका विदेशी, वर्ष 1927, दृष्टिकोण उपनिवेश-समर्थक।
मुख्य तथ्य
- 'मदर इंडिया' अमेरिकी पत्रकार कैथरीन मेयो की 1927 में प्रकाशित पुस्तक है, जो यह तर्क देती है कि भारत स्वशासन के योग्य नहीं है।
- महात्मा गांधी ने 'मदर इंडिया' को 'गटर इंस्पेक्टर की रिपोर्ट' कहा था; भारत में इस पुस्तक का व्यापक विरोध हुआ।
- 'अर्धांगी' और 'गृह' बेगम रुकैया के 1903 में प्रकाशित निबंधों में हैं, जो आगे चलकर उनके संग्रह 'मोतीचूर' में संकलित हुए (खंड एक 1904, खंड दो 1922)।
- उसी निबंध-समूह की अन्य रचनाएँ 'स्त्रीजातिर अबनति', 'सुगृहिणी' और 'बोरका' हैं — सभी स्त्री-शिक्षा तथा पर्दा-प्रथा पर केंद्रित।
- 'सुल्तानास ड्रीम' 1905 में प्रकाशित हुई और अंग्रेज़ी में लिखी गई थी; इसमें 'लेडीलैंड' की कल्पना है, जहाँ स्त्रियाँ शासन करती हैं और पुरुष घर के भीतर रहते हैं।
- बेगम रुकैया सखावत हुसैन (1880–1932) ने 1909 में भागलपुर में सखावत मेमोरियल गर्ल्स स्कूल खोला, जिसे 1911 में कलकत्ता ले जाया गया।
- उन्होंने 1916 में 'अंजुमन-ए-ख़वातीन-ए-इस्लाम' नामक महिला संगठन की स्थापना की; उनका उपन्यास 'पद्मराग' 1924 में आया।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- निषेधात्मक 'नहीं' को पढ़े बिना 'सुल्तानास ड्रीम' चुन लेना, क्योंकि वही नाम सबसे परिचित है — इस पुस्तिका में 'नहीं' मोटे टाइप में छपा है, उसे देख लीजिए।
- 'सुल्तानास ड्रीम' के अंग्रेज़ी शीर्षक से यह मान लेना कि वह किसी विदेशी लेखक की कृति है; बेगम रुकैया ने उसे स्वयं अंग्रेज़ी में लिखा था।
- 'अर्धांगी' और 'गृह' जैसे कम परिचित शीर्षकों को संदिग्ध मानकर चुन लेना; दोनों 1903 के उनके निबंधों में हैं और 'मोतीचूर' में संकलित हैं।
- 'मदर इंडिया' को किसी भारतीय लेखक की समाज-सुधार-संबंधी कृति समझ लेना; वह 1927 की विदेशी पुस्तक है और उपनिवेश-समर्थक तर्क रखती है।
'निम्नलिखित में से कौन-सी कृति अमुक लेखक की नहीं है' — यह प्रकार परीक्षा में बार-बार आता है और उसकी बनावट लगभग तय रहती है: तीन असली कृतियाँ, जिनमें एक-दो कम परिचित होती हैं, और एक ऐसी प्रसिद्ध कृति जो किसी दूसरे लेखक की है। इसलिए दो सावधानियाँ काम आती हैं। पहली, निषेध को रेखांकित कीजिए — यहाँ पुस्तिका ने स्वयं वह काम मोटे टाइप से कर दिया है। दूसरी, चयन 'जो कृति सबसे कम परिचित हो' के आधार पर मत कीजिए, बल्कि 'जिसका लेखक निश्चित रूप से कोई और है' के आधार पर; अपरिचय अपने आप में प्रमाण नहीं है। तैयारी की दृष्टि से हर बड़े लेखक के साथ तीन-चार शीर्षक और उनका वर्ष याद रखिए, और साथ में एक-दो ऐसी प्रसिद्ध कृतियों की सूची भी जो प्रायः दूसरों के नाम कर दी जाती हैं — 'मदर इंडिया' ऐसी ही एक कृति है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
1927 में प्रकाशित पुस्तक 'मदर इंडिया', जिसे महात्मा गांधी ने 'गटर इंस्पेक्टर की रिपोर्ट' कहा था, किसने लिखी थी?
- (a)बेगम रुकैया सखावत हुसैन
- (b)ऐनी बेसेंट
- (c)कैथरीन मेयो
- (d)मार्गरेट कज़िन्स
उत्तर(c) कैथरीन मेयो
- practice — not a real PYQ
बेगम रुकैया सखावत हुसैन ने मुस्लिम बालिकाओं के लिए सखावत मेमोरियल गर्ल्स स्कूल की स्थापना 1909 में किस नगर में की थी, जिसे बाद में कलकत्ता स्थानांतरित किया गया?
- (a)ढाका
- (b)भागलपुर
- (c)पटना
- (d)लखनऊ
उत्तर(b) भागलपुर