भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक कौन थे?
- (a)जॉन मार्शल
- (b)अलेक्ज़ेंडर कनिंगहम
- (c)मॉर्टिमर व्हीलर
- (d)फ्रांसिस बुकानन
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) अलेक्ज़ेंडर कनिंगहम। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक अलेक्ज़ेंडर कनिंगहम थे। उनका संबंध इस संस्था से दो चरणों में बना, और यही भेद प्रश्न को समझने की कुंजी है। पहला चरण 1861 का है, जब उनके लिए विशेष रूप से 'पुरातत्त्व सर्वेक्षक' (Archaeological Surveyor) का पद सृजित किया गया और उन्होंने उत्तर भारत का व्यवस्थित सर्वेक्षण आरंभ किया; पर 1865 में धन की कमी के कारण यह सर्वेक्षण बंद कर दिया गया। दूसरा चरण 1870 का है, जब लॉर्ड मेयो ने सर्वेक्षण को पुनः स्थापित किया, और 1 जनवरी 1871 से कनिंगहम भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक बने। इस पद पर वे 30 सितम्बर 1885 को अपनी सेवानिवृत्ति तक रहे। इस अंतर को स्पष्ट रखना उपयोगी है — 1861 में वे सर्वेक्षक बने और 1871 में महानिदेशक — क्योंकि परीक्षा दोनों वर्षों को अलग-अलग प्रश्नों में प्रयोग करती है। कनिंगहम मूलतः बंगाल इंजीनियर्स के अधिकारी थे और उन्होंने चीनी यात्रियों फ़ाह्यान तथा ह्वेनसांग के वृत्तांतों को मार्गदर्शक बनाकर प्राचीन स्थलों की पहचान का काम किया; सारनाथ, साँची और भरहुत जैसे स्थलों पर उनका काम तथा 'द ऐंशेंट जिओग्रफ़ी ऑफ़ इंडिया' जैसी कृति इसी पद्धति का परिणाम है। यह भी उल्लेखनीय है कि हड़प्पा का टीला कनिंगहम के समय में ही देखा जा चुका था और उन्होंने वहाँ से मिली एक मुद्रा का उल्लेख भी किया था, पर उसका ऐतिहासिक अर्थ तब खुल नहीं सका — वह काम आगे की पीढ़ी के लिए बचा रहा। शेष तीनों नाम भारतीय पुरातत्त्व से जुड़े वास्तविक और बड़े नाम हैं, पर उनमें दो कनिंगहम के बाद के महानिदेशक हैं और एक ऐसे सर्वेक्षक हैं जिनका काम इस संस्था के अस्तित्व में आने से पहले का है। अतः विकल्प (b) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)जॉन मार्शल — जॉन मार्शल भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के महानिदेशक अवश्य रहे, पर पहले नहीं — उनका कार्यकाल 1902 से 1928 तक रहा, अर्थात् कनिंगहम के तीन दशक से भी अधिक बाद। उनका सबसे प्रसिद्ध योगदान 1924 में हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो की खोज की सार्वजनिक घोषणा है, जिसने भारतीय इतिहास की कालरेखा को एक झटके में सहस्राब्दियों पीछे खींच दिया। उनके काल में तक्षशिला और साँची पर व्यापक उत्खनन हुए और संरक्षण के आधुनिक तरीक़े अपनाए गए। यह विकल्प इसीलिए सबसे प्रबल भ्रम है कि सिंधु सभ्यता की खोज के कारण मार्शल का नाम सबसे अधिक परिचित है; पर प्रश्न 'प्रथम' पूछ रहा है, और उस कसौटी पर वे नहीं उतरते। ऐसे प्रश्नों में प्रसिद्धि नहीं, कालक्रम निर्णायक होता है।
- (c)मॉर्टिमर व्हीलर — मॉर्टिमर व्हीलर का कार्यकाल 1944 से 1948 तक रहा, अर्थात् स्वतंत्रता के ठीक पहले के वर्ष। उनका योगदान पद्धति का है: उन्होंने भारत में स्तर-विन्यास (stratigraphy) पर आधारित वैज्ञानिक उत्खनन की तकनीक स्थापित की, उत्खनन के अभिलेखन को कठोर बनाया, और अरिकामेडु तथा ब्रह्मगिरि जैसे स्थलों पर काम करके दक्षिण भारत की कालरेखा को रोमन व्यापार से जोड़ा। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो पर भी उन्होंने पुनः उत्खनन किए। पर यह सब कनिंगहम के लगभग एक शताब्दी बाद का है। 'प्रथम महानिदेशक' के प्रश्न में इन तीनों — कनिंगहम, मार्शल, व्हीलर — का क्रम याद रखना ही पर्याप्त है, और वह क्रम है 1871, 1902 तथा 1944।
- (d)फ्रांसिस बुकानन — फ़्रांसिस बुकानन का काम भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अस्तित्व में आने से बहुत पहले का है — उन्होंने 1807 से 1814 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए बंगाल प्रांत का विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें भूगोल, कृषि, जनसंख्या, उद्योग और पुरावशेष सब सम्मिलित थे। यह सर्वेक्षण आज भी उस काल के अध्ययन का मूल्यवान स्रोत है, पर वह एक सामान्य सांख्यिकीय-भौगोलिक सर्वेक्षण था, पुरातत्त्व की स्वतंत्र संस्था नहीं; और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण तो 1861 तथा 1871 की घटना है। इसलिए यह विकल्प काल की दृष्टि से ही असंभव है। इसका काम केवल यह है कि विकल्प-समूह में एक ऐसा नाम रहे जो औपनिवेशिक सर्वेक्षण-परंपरा का हो और परिचित लगे।
अवधारणा
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण का इतिहास चार चरणों में देखा जा सकता है और परीक्षा इन्हीं चरणों से प्रश्न बनाती है। पहला चरण संस्था-पूर्व है, जिसमें विलियम जोन्स द्वारा 1784 में स्थापित एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल, जेम्स प्रिंसेप द्वारा 1830 के दशक में ब्राह्मी तथा खरोष्ठी लिपियों का पठन, और फ़्रांसिस बुकानन जैसे सर्वेक्षकों का काम आता है। दूसरा चरण 1861 से 1885 तक कनिंगहम का है, जिसमें स्थलों की पहचान और सर्वेक्षण पर बल रहा और चीनी यात्रियों के वृत्तांत मार्गदर्शक बने। तीसरा चरण 1902 से 1928 तक जॉन मार्शल का है, जिसमें बड़े उत्खनन, संरक्षण-क़ानून और सिंधु सभ्यता की खोज हुई; इसी काल में 1904 का प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम बना। चौथा चरण 1944 से आगे का है, जिसमें मॉर्टिमर व्हीलर ने वैज्ञानिक उत्खनन-पद्धति स्थापित की और स्वतंत्रता के बाद संस्था ने 1958 के प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्त्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम के अंतर्गत काम करना आरंभ किया। यह कालरेखा एक बार ठीक से बैठ जाए तो पुरातत्त्व के अधिकांश प्रश्न इसी से हल हो जाते हैं।
कनिंगहम की कार्यपद्धति अपने आप में एक शिक्षाप्रद प्रसंग है। वे बंगाल इंजीनियर्स के अधिकारी थे और सैन्य-सर्वेक्षण की प्रशिक्षित दृष्टि उनके पास थी; उन्होंने उसे प्राचीन ग्रंथों तथा यात्रा-वृत्तांतों के अध्ययन से जोड़ दिया। चौथी-पाँचवीं शताब्दी के फ़ाह्यान और सातवीं शताब्दी के ह्वेनसांग ने अपने वृत्तांतों में जिन नगरों, विहारों और स्तूपों का उल्लेख किया था, कनिंगहम ने उनकी दूरियों और दिशाओं का मिलान करके ज़मीन पर स्थल खोजे — सारनाथ, साँची, भरहुत और उत्तर भारत के अनेक बौद्ध स्थल इसी पद्धति से पहचाने या पुनः प्रकाश में आए। उनकी कृति 'द ऐंशेंट जिओग्रफ़ी ऑफ़ इंडिया' इसी काम का सार है। यह भी उल्लेखनीय है कि हड़प्पा का टीला कनिंगहम के समय में ही देखा गया था और उन्होंने वहाँ से एक मुद्रा का उल्लेख भी किया, पर उसका ऐतिहासिक महत्त्व तब समझा नहीं जा सका — वह काम मार्शल के काल तक रुका रहा। इस प्रकार दोनों नाम एक ही कहानी की दो कड़ियाँ हैं, और प्रश्न उनके क्रम की जाँच करता है।
मुख्य तथ्य
- भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक अलेक्ज़ेंडर कनिंगहम थे, जिन्होंने 1 जनवरी 1871 से यह पद सँभाला।
- 1861 में उनके लिए 'पुरातत्त्व सर्वेक्षक' का नया पद सृजित हुआ था; 1865 में धन की कमी से सर्वेक्षण बंद हुआ और 1870 में लॉर्ड मेयो ने उसे पुनः स्थापित किया।
- कनिंगहम 30 सितम्बर 1885 को इस पद से सेवानिवृत्त हुए; वे मूलतः बंगाल इंजीनियर्स के अधिकारी थे और सैन्य-सर्वेक्षण की प्रशिक्षित दृष्टि उनके काम का आधार बनी।
- उन्होंने फ़ाह्यान तथा ह्वेनसांग के यात्रा-वृत्तांतों को मार्गदर्शक बनाकर स्थल पहचाने; 'द ऐंशेंट जिओग्रफ़ी ऑफ़ इंडिया' उनकी प्रसिद्ध कृति है।
- जॉन मार्शल महानिदेशक 1902 से 1928 तक रहे और 1924 में हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो की खोज की घोषणा उन्हीं के काल में हुई।
- मॉर्टिमर व्हीलर महानिदेशक 1944 से 1948 तक रहे और उन्होंने स्तर-विन्यास पर आधारित वैज्ञानिक उत्खनन-पद्धति स्थापित की।
- फ़्रांसिस बुकानन ने 1807 से 1814 के बीच बंगाल प्रांत का सर्वेक्षण किया, अर्थात् भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अस्तित्व में आने से बहुत पहले।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- सिंधु सभ्यता की खोज के कारण जॉन मार्शल को 'प्रथम महानिदेशक' मान लेना; वे 1902 से 1928 तक इस पद पर रहे, कनिंगहम के बहुत बाद।
- 1861 और 1871 को एक मान लेना; 1861 में कनिंगहम पुरातत्त्व सर्वेक्षक बने और 1871 में महानिदेशक — परीक्षा दोनों वर्षों को अलग-अलग प्रयोग करती है।
- मॉर्टिमर व्हीलर को औपनिवेशिक काल के आरंभ से जोड़ देना; उनका कार्यकाल 1944 से 1948 तक, अर्थात् स्वतंत्रता के ठीक पहले का है।
- फ़्रांसिस बुकानन के सर्वेक्षण को पुरातत्त्व सर्वेक्षण मान लेना; वह 1807–14 का सामान्य सांख्यिकीय-भौगोलिक सर्वेक्षण था और संस्था के जन्म से पहले का है।
संस्था और उसके 'प्रथम' पदाधिकारी वाले प्रश्न इस परीक्षा में नियमित हैं, और इनमें विकल्प प्रायः उसी संस्था के बाद के पदाधिकारियों से भरे जाते हैं — जिससे चारों नाम सही लगते हैं और केवल क्रम निर्णय करता है। इसलिए तैयारी में प्रत्येक बड़ी संस्था के लिए तीन नाम क्रम से याद रखिए: पहला पदाधिकारी, सबसे प्रसिद्ध पदाधिकारी, और स्वतंत्रता के समय का पदाधिकारी। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के लिए यह क्रम बनता है — कनिंगहम 1871, मार्शल 1902, व्हीलर 1944। दूसरा उपयोगी अभ्यास यह है कि संस्था की स्थापना-वर्ष और उसके किसी बड़े क़ानून का वर्ष साथ याद रखा जाए, क्योंकि परीक्षा उन्हें भी पूछती है — यहाँ 1904 का प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम और 1958 का प्राचीन संस्मारक अधिनियम दोनों संभावित प्रश्न हैं। तीसरा, प्रत्येक नाम के साथ एक विशिष्ट उपलब्धि जोड़ दीजिए, ताकि नामों की अदला-बदली पकड़ में आ जाए।
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EPFO_APFC_2023_Q21Which one among the following observations pertaining to the works of Nineteenth-Twentieth Century archaeologists is not correct?
- (a) Alexander Cunningham, the first Director-General of the Archaeological Survey of India, was of the view that the history of India began with the origins of the Indus Valley Civilization.
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उत्तर(a) Alexander Cunningham, the first Director-General of the Archaeological Survey of India, was of the view that the history of India began with the origins of the Indus Valley Civilization.
EPFO APFC 2023 का प्रश्न उन्नीसवीं–बीसवीं सदी के पुरातत्त्वविदों के कार्यों के बारे में है — वही विषय, निषेधात्मक रूप में।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के किस महानिदेशक के कार्यकाल में 1924 में हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो की खोज की घोषणा की गई थी?
- (a)अलेक्ज़ेंडर कनिंगहम
- (b)जॉन मार्शल
- (c)मॉर्टिमर व्हीलर
- (d)एच॰ डी॰ सांकलिया
उत्तर(b) जॉन मार्शल
- practice — not a real PYQ
भारत में स्तर-विन्यास पर आधारित वैज्ञानिक उत्खनन-पद्धति स्थापित करने वाले, तथा 1944 से 1948 तक भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के महानिदेशक रहे पुरातत्त्वविद् कौन थे?
- (a)जॉन मार्शल
- (b)फ़्रांसिस बुकानन
- (c)मॉर्टिमर व्हीलर
- (d)अलेक्ज़ेंडर कनिंगहम
उत्तर(c) मॉर्टिमर व्हीलर