किस समाज सुधारक की आत्मकथा, जिसका शीर्षक लुकिंग बैक है, 1890 के दशक में पूना में महिलाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना करने के उसके अनुभवों के बारे में बताती है?
- (a)धोंडो केशव कर्वे
- (b)के॰ टी॰ तेलंग
- (c)ज्योतिराव फुले
- (d)डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) धोंडो केशव कर्वे। 'लुकिंग बैक' महर्षि धोंडो केशव कर्वे की अंग्रेज़ी आत्मकथा है, जो 1936 में प्रकाशित हुई; इससे पहले 1928 में उनकी मराठी आत्मकथा 'आत्मवृत्त' आ चुकी थी। प्रश्न ने आत्मकथा के साथ एक दूसरा संकेत भी दिया है — '1890 के दशक में पूना में महिलाओं के लिए विद्यालयों की स्थापना' — और यही संकेत उत्तर को निर्णायक रूप से तय कर देता है, क्योंकि कर्वे का काम ठीक उसी दशक में उसी नगर के आसपास आरंभ हुआ था। उन्होंने 1893 में स्वयं एक विधवा से विवाह किया, जो उस समय के समाज में साहस का काम था; 1896 में पूना के निकट हिंगणे में विधवाओं और अनाथ बालिकाओं के लिए 'बालिका अनाथाश्रम' खोला; 1907 में स्त्रियों के लिए विद्यालय स्थापित किया; और 1916 में भारतीय महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आगे चलकर श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरसी (SNDT) महिला विश्वविद्यालय के रूप में जाना गया — भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय। इस पूरे जीवन-कार्य का लेखा-जोखा ही 'लुकिंग बैक' का विषय है, और इसी कारण प्रश्न में आत्मकथा और विद्यालय-स्थापना को एक साथ रखा गया है। कर्वे को 1958 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया, उसी वर्ष जब वे सौ वर्ष के हुए, और उनका देहावसान 1962 में हुआ। यह भी ध्यान देने योग्य है कि कर्वे का काम केवल विद्यालय खोलने का नहीं था; उन्होंने विधवा-पुनर्विवाह के लिए संगठन बनाया, आश्रय-गृह चलाए और शिक्षिकाओं का प्रशिक्षण आरंभ किया, ताकि जिन स्त्रियों को समाज ने घर से काट दिया था वे स्वयं जीविका अर्जित कर सकें। यही निरंतरता उन्हें उस पीढ़ी के अन्य सुधारकों से अलग करती है। शेष तीनों विकल्पों में से एक का देहावसान प्रश्न में दिए गए दशक से पहले हो चुका था, दूसरे का उसी दशक में हुआ, और तीसरा उस दशक में बालक था — अर्थात् कालक्रम की एक ही जाँच तीनों को बाहर कर देती है। अतः विकल्प (a) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)के॰ टी॰ तेलंग — काशीनाथ त्र्यंबक तेलंग (के॰ टी॰ तेलंग) बंबई के प्रतिष्ठित विधिवेत्ता, संस्कृत के विद्वान और कांग्रेस की उदारवादी धारा के नेता थे; उन्होंने भगवद्गीता का अंग्रेज़ी अनुवाद किया, जो 'सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द ईस्ट' शृंखला में प्रकाशित हुआ, और वे बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा बंबई विश्वविद्यालय के कुलपति रहे। पर उनका देहावसान 1893 में हो गया, अर्थात् प्रश्न में दिए गए दशक के आरंभ में ही — इसलिए '1890 के दशक में विद्यालय स्थापित करने के अनुभवों' पर आत्मकथा लिखना उनके लिए संभव ही नहीं था। यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि तेलंग महाराष्ट्र के सुधारवादी परिवेश का ही नाम हैं और सतही तौर पर उपयुक्त लगते हैं; बचाव कालक्रम की जाँच से होता है।
- (c)ज्योतिराव फुले — ज्योतिराव फुले भारत में स्त्री-शिक्षा के अग्रदूत अवश्य थे — उन्होंने और सावित्रीबाई फुले ने 1848 से पुणे में बालिकाओं के लिए विद्यालय खोले, 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना की और उसी वर्ष 'ग़ुलामगिरी' लिखी। पर उनका देहावसान 1890 में हुआ, अर्थात् प्रश्न जिस दशक की बात कर रहा है वह उनके बाद का है, और उनका अपना विद्यालय-कार्य उससे चार दशक पहले का। इस विकल्प का जाल दुहरा है: नगर भी वही है (पूना) और विषय भी वही (स्त्री-शिक्षा), केवल दशक अलग है। इसीलिए इस प्रकार के प्रश्नों में दशक को उतनी ही गंभीरता से पढ़ना चाहिए जितनी गंभीरता से विषय को — यहाँ '1890 के दशक' अकेले ही फुले को बाहर कर देता है।
- (d)डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर — डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर का जन्म 1891 में हुआ था, इसलिए 1890 के दशक में वे शिशु और बालक थे — उस दशक में विद्यालय स्थापित करने का प्रश्न ही नहीं उठता। उनका सार्वजनिक जीवन 1920 के दशक से आरंभ होता है, और उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ अर्थशास्त्र, जाति और संविधान से संबंधित हैं; आत्मकथात्मक लेखन के रूप में उनका 'वेटिंग फ़ॉर अ वीज़ा' नामक अपूर्ण संस्मरण जाना जाता है, 'लुकिंग बैक' नहीं। यह विकल्प केवल इसलिए रखा गया है कि अम्बेडकर महाराष्ट्र के सबसे प्रसिद्ध सुधारक हैं और अनिश्चित अभ्यर्थी उन्हीं की ओर झुकता है। यहाँ भी जन्म-वर्ष की एक जाँच पर्याप्त है, और यही दिखाता है कि सुधारकों के जीवन-काल याद रखना अलग से लाभदायक है।
अवधारणा
महाराष्ट्र के सामाजिक सुधार-आंदोलन को तीन पीढ़ियों में समझना सुविधाजनक है, और इस प्रश्न के चारों विकल्प इन्हीं तीन पीढ़ियों से आते हैं। पहली पीढ़ी उन्नीसवीं सदी के मध्य की है — बालशास्त्री जांभेकर, गोपाल हरि देशमुख 'लोकहितवादी', और ज्योतिराव तथा सावित्रीबाई फुले, जिन्होंने 1848 से बालिका विद्यालय आरंभ किए तथा जाति-प्रश्न को केंद्र में रखा। दूसरी पीढ़ी उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध की है — महादेव गोविंद रानाडे, आर॰ जी॰ भंडारकर, के॰ टी॰ तेलंग और प्रार्थना समाज की धारा, जिसने विधवा-पुनर्विवाह तथा स्त्री-शिक्षा को संस्थागत रूप देने का प्रयत्न किया। तीसरी पीढ़ी उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी के आरंभ की है — धोंडो केशव कर्वे और पंडिता रमाबाई, जिन्होंने आश्रय-गृह, विद्यालय और अंततः विश्वविद्यालय जैसी स्थायी संस्थाएँ खड़ी कीं। इन तीन पीढ़ियों को दशकों के साथ याद रख लेने पर विकल्पों की छँटनी लगभग स्वतः हो जाती है। इसी कारण महाराष्ट्र के सुधारकों को पढ़ते समय हर नाम के आगे उसका दशक लिख लेना सबसे उपयोगी अभ्यास है।
आत्मकथा के आधार पर पूछे जाने वाले प्रश्नों में हिन्दी-माध्यम अभ्यर्थी के लिए एक अतिरिक्त कठिनाई रहती है। इस पुस्तिका के हिन्दी स्तंभ में 'लुकिंग बैक' शीर्षक देवनागरी में लिप्यंतरित है और शेष प्रश्न-वाक्य की तरह सीधे टाइप में छपा है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ में वही शीर्षक तिरछे टाइप में है — अर्थात् हिन्दी पढ़ने वाले को शीर्षक पर कोई दृश्य संकेत नहीं मिलता और उसे स्वयं यह पहचानना पड़ता है कि ये शब्द किसी पुस्तक का नाम हैं। यही स्थिति इसी पेपर के प्रश्न 21 और प्रश्न 45 में भी है। इसलिए इस पुस्तिका को हल करते समय यह आदत उपयोगी है कि देवनागरी में लिखा कोई भी अपरिचित अंग्रेज़ी शब्द-समूह मिलते ही उसे अंग्रेज़ी में लौटाकर पढ़ा जाए। कर्वे के प्रसंग में यह और भी उपयोगी है, क्योंकि उनकी दो आत्मकथाएँ हैं — मराठी में 'आत्मवृत्त' (1928) और अंग्रेज़ी में 'लुकिंग बैक' (1936) — और प्रश्न किसी एक का नाम लेकर पूछ सकता है।
मुख्य तथ्य
- 'लुकिंग बैक' धोंडो केशव कर्वे की अंग्रेज़ी आत्मकथा है, जो 1936 में प्रकाशित हुई; उनकी मराठी आत्मकथा 'आत्मवृत्त' 1928 में आई थी।
- कर्वे ने 1893 में एक विधवा से विवाह किया और उसी वर्ष विधवा-विवाह से जुड़े संगठन-कार्य में सक्रिय हुए।
- 1896 में उन्होंने पूना के निकट हिंगणे में विधवाओं तथा अनाथ बालिकाओं के लिए 'बालिका अनाथाश्रम' खोला और 1907 में स्त्रियों के लिए विद्यालय स्थापित किया।
- 1916 में उन्होंने भारतीय महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की, जो आगे चलकर SNDT महिला विश्वविद्यालय कहलाया — भारत का पहला महिला विश्वविद्यालय।
- कर्वे को 1958 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया और उनका देहावसान 1962 में हुआ।
- के॰ टी॰ तेलंग का देहावसान 1893 में और ज्योतिराव फुले का 1890 में हुआ; डॉ॰ अम्बेडकर का जन्म 1891 में हुआ — तीनों 1890 के दशक की इस भूमिका में नहीं आ सकते।
- ज्योतिराव और सावित्रीबाई फुले ने बालिकाओं के लिए विद्यालय 1848 से आरंभ किए थे, अर्थात् प्रश्न के दशक से लगभग चार दशक पहले।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'पूना' और 'स्त्री-शिक्षा' पढ़ते ही ज्योतिराव फुले चुन लेना; उनका विद्यालय-कार्य 1848 से है और उनका देहावसान 1890 में हो चुका था।
- प्रश्न में दिए गए दशक की उपेक्षा करना; '1890 का दशक' अकेला ही तीनों ग़लत विकल्पों को कालक्रम के आधार पर बाहर कर देता है।
- कर्वे की दो आत्मकथाओं को गड्डमड्ड कर देना — मराठी 'आत्मवृत्त' 1928 की है और अंग्रेज़ी 'लुकिंग बैक' 1936 की।
- अम्बेडकर को हर महाराष्ट्रीय सुधार-प्रसंग से जोड़ देना; उनका जन्म 1891 में हुआ और सार्वजनिक जीवन 1920 के दशक से आरंभ होता है।
आत्मकथा-आधारित प्रश्न परीक्षा में दो कारणों से लोकप्रिय हैं: वे एक साथ पुस्तक, लेखक और उसके कार्य-क्षेत्र तीनों की जाँच कर लेते हैं, और उनमें विकल्प एक ही प्रदेश तथा एक ही आंदोलन से लिए जा सकते हैं, जिससे प्रश्न कठिन बन जाता है। इस प्रकार के प्रश्न में सबसे भरोसेमंद उपकरण जीवन-काल है — जन्म और मृत्यु के वर्ष। यदि चारों नामों के जीवन-काल स्मरण हों तो प्रश्न में दिया गया दशक अपने आप छँटनी कर देता है, जैसा यहाँ हुआ। दूसरा उपकरण संस्था है: प्रत्येक सुधारक के साथ एक संस्था और उसका वर्ष जोड़कर याद रखिए — कर्वे के साथ भारतीय महिला विश्वविद्यालय 1916, फुले के साथ सत्यशोधक समाज 1873, रानाडे के साथ प्रार्थना समाज। तीसरा उपकरण भाषा है, क्योंकि आत्मकथाएँ प्रायः मातृभाषा और अंग्रेज़ी दोनों में मिलती हैं और प्रश्न किसी एक का नाम ले सकता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
1916 में स्थापित भारतीय महिला विश्वविद्यालय, जो आगे चलकर SNDT महिला विश्वविद्यालय कहलाया, किस समाज-सुधारक की पहल से बना था?
- (a)धोंडो केशव कर्वे
- (b)महादेव गोविंद रानाडे
- (c)आर॰ जी॰ भंडारकर
- (d)गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर(a) धोंडो केशव कर्वे
- practice — not a real PYQ
ज्योतिराव फुले ने 1873 में जिस संगठन की स्थापना की और उसी वर्ष जो पुस्तक लिखी, वे क्रमशः कौन-से थे?
- (a)प्रार्थना समाज और 'शेतकऱ्याचा आसूड'
- (b)सत्यशोधक समाज और 'ग़ुलामगिरी'
- (c)आर्य समाज और 'सत्यार्थ प्रकाश'
- (d)इंडियन एसोसिएशन और 'अ नेशन इन मेकिंग'
उत्तर(b) सत्यशोधक समाज और 'ग़ुलामगिरी'