इनमें से किन्हें ऐसा पहला भारतीय माना जाता है, जिन्हें एक पत्रकार के रूप में अपना कार्य करते हुए जेल जाना पड़ा?
- (a)महात्मा गांधी
- (b)रवीन्द्रनाथ टैगोर
- (c)लोकमान्य तिलक
- (d)सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी। प्रश्न में तीन शर्तें एक साथ जुड़ी हैं — 'पहला भारतीय', 'पत्रकार के रूप में अपना कार्य करते हुए' और 'जेल जाना पड़ा' — और तीनों एक ही नाम पर मिलती हैं। सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी 'द बंगाली' नामक अंग्रेज़ी पत्र के संपादक थे। 1883 में उन्होंने अपने पत्र में कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की कड़ी आलोचना छाप दी; उन पर अदालत की अवमानना का अभियोग चला और उन्हें कारावास की सज़ा हुई। यही वह घटना है जिसके कारण उन्हें कर्तव्य-पालन के दौरान जेल जाने वाला पहला भारतीय पत्रकार माना जाता है। इस घटना का महत्त्व केवल व्यक्तिगत नहीं था — गिरफ़्तारी के विरोध में बंगाल भर में हड़तालें और प्रदर्शन हुए, और यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के आरंभिक दौर की उन पहली घटनाओं में गिनी जाती है जिनमें किसी नेता की गिरफ़्तारी पर जनसाधारण सड़कों पर उतरा। बैनर्जी का व्यक्तित्व भी इस उत्तर को स्वाभाविक बनाता है: वे भारतीय सिविल सेवा से हटाए जाने के बाद शिक्षक और पत्रकार बने, 1876 में इंडियन एसोसिएशन की स्थापना की, और 'द बंगाली' के माध्यम से बंगाल के शिक्षित वर्ग को राजनीतिक रूप से संगठित किया — अर्थात् पत्रकारिता उनके लिए जीविका नहीं, राजनीतिक कर्म थी, और उसी कर्म ने उन्हें कारागार तक पहुँचाया। शेष तीनों नामों की छँटनी कालक्रम से हो जाती है। लोकमान्य तिलक को राजद्रोह के मुक़दमों में सज़ा अवश्य हुई, पर वे 1897 और 1908 के मामले हैं, अर्थात् 1883 से बाद के। महात्मा गांधी को 'यंग इंडिया' के लेखों पर 1922 के प्रसिद्ध मुक़दमे में सज़ा मिली, जो और भी बाद की घटना है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर पत्रकारिता के कारण कभी कारागार नहीं गए। अर्थात् 'पहला' शब्द ही इस प्रश्न की धुरी है: प्रश्न यह नहीं पूछ रहा कि किस-किस पत्रकार को जेल हुई, बल्कि यह कि सबसे पहले किसे। अतः विकल्प (d) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)महात्मा गांधी — महात्मा गांधी को पत्रकारिता के कारण सज़ा अवश्य हुई — मार्च 1922 के जिस मुक़दमे को 'द ग्रेट ट्रायल' कहा जाता है, उसका आधार 'यंग इंडिया' में छपे उनके लेख ही थे, और उन्हें छह वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई गई। पर यह घटना 1883 से लगभग चार दशक बाद की है, इसलिए 'पहला भारतीय' के प्रश्न में वे नहीं आ सकते। यही इस प्रकार के प्रश्नों का सामान्य ढाँचा है: विकल्पों में ऐसे नाम रखे जाते हैं जिनके साथ वह घटना सचमुच जुड़ी हो, पर बाद के काल में — और उत्तर वही होता है जिसका काल सबसे पहले पड़ता है। इसलिए ऐसे प्रश्न को हल करने का सबसे सीधा तरीक़ा यह है कि चारों नामों के साथ उनका संबंधित वर्ष लिख लिया जाए और फिर सबसे पुराना चुन लिया जाए।
- (b)रवीन्द्रनाथ टैगोर — रवीन्द्रनाथ ठाकुर के साथ यह घटना जुड़ी ही नहीं है। वे पत्रकार के रूप में नहीं, कवि, कथाकार, नाटककार और शिक्षाविद् के रूप में जाने जाते हैं; 1913 में उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला और 1921 में उन्होंने विश्व-भारती की स्थापना की। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उनका सबसे प्रसिद्ध प्रतिकार 1919 में जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के बाद 'नाइटहुड' की उपाधि लौटा देना था — पर वह त्याग का कार्य था, कारावास का नहीं। इस विकल्प का काम केवल यह है कि बंगाल का एक अत्यंत प्रसिद्ध नाम विकल्प-समूह में रहे, ताकि जो अभ्यर्थी 'बंगाल और पत्रकारिता' का जोड़ बना रहा हो वह भ्रमित हो। कसौटी स्पष्ट रखिए: प्रश्न कारावास की माँग करता है, और ठाकुर उस कसौटी पर उतरते ही नहीं।
- (c)लोकमान्य तिलक — लोकमान्य तिलक इस प्रश्न का सबसे प्रबल भ्रम हैं, क्योंकि पत्रकारिता और कारावास दोनों उनके जीवन में हैं। उन्होंने 'केसरी' (मराठी) और 'मराठा' (अंग्रेज़ी) निकाले, और उनके लेखन पर राजद्रोह के दो प्रसिद्ध मुक़दमे चले — 1897 में, तथा 1908 में, जिसमें उन्हें छह वर्ष की सज़ा हुई और वे मांडले भेजे गए। पर दोनों मुक़दमे 1883 के बाद के हैं, इसलिए 'पहला भारतीय' की शर्त पर वे नहीं उतरते। यह विकल्प इसलिए भी फुसलाता है कि तिलक का नाम भारतीय पत्रकारिता और राजद्रोह के मुक़दमों से सबसे अधिक जुड़ा हुआ है, और कई अभ्यर्थी 'पहला' शब्द पढ़े बिना ही उन्हें चुन लेते हैं। निषेध की तरह 'पहला' भी छँटनी का शब्द है — उसे रेखांकित करके पढ़िए।
अवधारणा
औपनिवेशिक भारत में समाचार-पत्र और राज्य-शक्ति के बीच का टकराव एक सतत विषय है, और परीक्षा उसे तीन रूपों में पूछती है — दमनकारी क़ानून, प्रसिद्ध मुक़दमे, और पत्रकार-संपादक। दमनकारी क़ानूनों की शृंखला में 1799 का सेंसरशिप ऑफ़ प्रेस अधिनियम, 1823 के लाइसेंसिंग नियम, 1835 का मेटकाफ़ अधिनियम (जिसने प्रतिबंध ढीले किए), 1878 का वर्नाकुलर प्रेस अधिनियम, 1908 का न्यूज़पेपर्स (इंसाइटमेंट टु ऑफ़ेंसेज़) अधिनियम और 1910 का इंडियन प्रेस अधिनियम आते हैं। मुक़दमों में तिलक के 1897 तथा 1908 के मामले और गांधीजी का 1922 का मुक़दमा प्रमुख हैं। और पत्रकार-संपादकों में सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी की 1883 की घटना इस पूरी शृंखला का आरंभ-बिंदु मानी जाती है। इन तीनों सूचियों को साथ-साथ याद रखने पर प्रेस से जुड़ा कोई भी प्रश्न कठिन नहीं रह जाता, क्योंकि उत्तर प्रायः कालक्रम में सबसे पहले या सबसे बाद वाली कड़ी होता है। ध्यान रहे कि 1878 का वर्नाकुलर प्रेस अधिनियम भारतीय भाषाओं के पत्रों को निशाना बनाता था और अंग्रेज़ी पत्रों को छोड़ देता था, तथा 1882 में लॉर्ड रिपन ने उसे निरस्त कर दिया — यह भेद अपने आप में एक प्रश्न बन जाता है।
सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी (1848–1925) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के आरंभिक दौर के सबसे प्रभावशाली संगठनकर्ताओं में थे। भारतीय सिविल सेवा में चुने जाने के बाद विवादास्पद परिस्थितियों में उन्हें 1874 में सेवा से हटा दिया गया, और इसके बाद वे शिक्षक तथा पत्रकार बने। 1876 में उन्होंने आनंद मोहन बोस के साथ मिलकर 'इंडियन एसोसिएशन' की स्थापना की, जो कांग्रेस से पहले की सबसे महत्त्वपूर्ण राजनीतिक संस्थाओं में गिनी जाती है। वे 'द बंगाली' के संपादक रहे, 1895 में पुणे और 1902 में अहमदाबाद अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष बने, और उन्हें 'राष्ट्रगुरु' कहा गया। उनकी आत्मकथा 'अ नेशन इन मेकिंग' है। बाद के वर्षों में वे उदारवादी धारा के साथ रहे और 1919 के सुधारों को स्वीकार करने के कारण उग्रवादी धारा से उनका मतभेद बढ़ा। 1883 की जेल-यात्रा उनके जीवन का वह प्रसंग है जिसने पहली बार यह दिखाया कि प्रेस पर हमला जनांदोलन खड़ा कर सकता है।
मुख्य तथ्य
- सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी 'द बंगाली' पत्र के संपादक थे; 1883 में अदालत की अवमानना के अभियोग में उन्हें कारावास हुआ।
- उन्हें अपने पत्रकारीय कर्तव्य के निर्वाह में जेल जाने वाला पहला भारतीय पत्रकार माना जाता है; उनकी गिरफ़्तारी पर बंगाल भर में हड़तालें और प्रदर्शन हुए।
- बैनर्जी (1848–1925) को 1874 में भारतीय सिविल सेवा से हटा दिया गया था; 1876 में उन्होंने आनंद मोहन बोस के साथ इंडियन एसोसिएशन की स्थापना की।
- वे 1895 (पुणे) और 1902 (अहमदाबाद) में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे; उनकी आत्मकथा 'अ नेशन इन मेकिंग' है और उन्हें 'राष्ट्रगुरु' कहा गया।
- बाल गंगाधर तिलक पर राजद्रोह के मुक़दमे 1897 और 1908 में चले; 1908 में छह वर्ष की सज़ा के बाद वे मांडले भेजे गए।
- महात्मा गांधी को 'यंग इंडिया' के लेखों पर मार्च 1922 के 'ग्रेट ट्रायल' में छह वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई गई थी।
- रवीन्द्रनाथ ठाकुर कभी पत्रकारिता के कारण कारागार नहीं गए; 1919 में जलियाँवाला बाग़ के बाद उन्होंने नाइटहुड की उपाधि लौटा दी थी।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'पहला' शब्द की उपेक्षा करके तिलक चुन लेना; उनके मुक़दमे 1897 और 1908 के हैं, जबकि बैनर्जी की जेल-यात्रा 1883 की है।
- गांधीजी के 1922 के 'ग्रेट ट्रायल' को इस प्रश्न का उत्तर मानना; वह पत्रकारिता से जुड़ा मुक़दमा तो है, पर कालक्रम में बहुत बाद का।
- रवीन्द्रनाथ ठाकुर के नाइटहुड लौटाने को कारावास के समकक्ष मान लेना; वह प्रतीकात्मक त्याग था, दंड नहीं।
- बैनर्जी के 1883 के मामले को राजद्रोह का मुक़दमा समझ लेना; वह अदालत की अवमानना का मामला था, राजद्रोह का नहीं।
'प्रथम' वाले प्रश्न इस परीक्षा में नियमित रूप से आते हैं — पहला भारतीय पत्रकार जो जेल गया, पहली महिला कांग्रेस अध्यक्ष, पहला भारतीय जो ब्रिटिश संसद में चुना गया, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण का पहला महानिदेशक। इनकी संरचना एक जैसी होती है: चारों विकल्प उस क्षेत्र के वास्तविक और प्रसिद्ध नाम होते हैं, और अंतर केवल कालक्रम का होता है। इसलिए तैयारी में 'प्रथम' की एक अलग सूची बनाना अत्यंत लाभदायक है, जिसमें हर प्रविष्टि के साथ वर्ष लिखा हो। परीक्षा-कक्ष में इन प्रश्नों को हल करने की पद्धति भी सीधी है: विकल्प पढ़ते ही प्रत्येक नाम के आगे मन में एक वर्ष रखिए, फिर सबसे पुराना चुनिए। जहाँ वर्ष स्मरण न हो, वहाँ यह जाँचिए कि व्यक्ति का सार्वजनिक जीवन किस दशक में आरंभ हुआ — यही मोटा अनुमान भी प्रायः पर्याप्त होता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी ने 1876 में आनंद मोहन बोस के साथ मिलकर किस राजनीतिक संस्था की स्थापना की थी, जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से पहले की महत्त्वपूर्ण संस्थाओं में गिनी जाती है?
- (a)ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन
- (b)इंडियन एसोसिएशन
- (c)पूना सार्वजनिक सभा
- (d)मद्रास महाजन सभा
उत्तर(b) इंडियन एसोसिएशन
- practice — not a real PYQ
बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के जिस मुक़दमे में छह वर्ष के कारावास की सज़ा हुई और वे मांडले भेजे गए, वह किस वर्ष का था?
- (a)1897
- (b)1905
- (c)1908
- (d)1916
उत्तर(c) 1908