भारत स्त्री महामंडल, जिसकी पहली बार 1910 में इलाहाबाद में बैठक हुई थी, की स्थापना किसने की थी?
- (a)एनी बेसेंट
- (b)मेहेरबाई टाटा
- (c)सरलादेवी चौधुरानी
- (d)ताराबाई शिंदे
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) सरलादेवी चौधुरानी। भारत स्त्री महामंडल की स्थापना 1910 में सरला देवी चौधुरानी ने की और उसकी पहली बैठक इलाहाबाद में हुई — प्रश्न ने यह दूसरी सूचना स्वयं दे दी है, इसलिए वस्तुतः केवल नाम पहचानना बाक़ी रह जाता है। यह संगठन भारतीय महिला-आंदोलन के इतिहास में इसलिए महत्त्वपूर्ण है कि यह पहला ऐसा अखिल भारतीय स्तर का महिला संगठन माना जाता है जिसे किसी भारतीय महिला ने स्वयं खड़ा किया। इसका घोषित उद्देश्य स्त्री-शिक्षा का प्रसार था — विशेषतः उन स्त्रियों तक शिक्षा पहुँचाना जो पर्दे और घर की चारदीवारी के कारण विद्यालय तक नहीं जा सकती थीं — और यह काम जाति तथा धर्म का भेद किए बिना करने का संकल्प इसमें शामिल था। महामंडल ने कई नगरों में शाखाएँ खोलीं, जिनमें लाहौर, इलाहाबाद, दिल्ली, कराची, अमृतसर, हैदराबाद, कानपुर, बाँकुड़ा, हज़ारीबाग़, मेदिनीपुर और कलकत्ता शामिल हैं — अर्थात् इसका फैलाव किसी एक प्रांत तक सीमित नहीं रहा, और यही उसे 'अखिल भारतीय' बनाता है। सरला देवी स्वयं एक असाधारण पृष्ठभूमि से आती थीं: वे स्वर्णकुमारी देवी और जानकीनाथ घोषाल की पुत्री थीं, रवीन्द्रनाथ ठाकुर उनके मामा थे, उन्होंने 1895 से 1907 तक 'भारती' पत्रिका का संपादन किया, और 1905 में राष्ट्रवादी अधिवक्ता रामभुज दत्त चौधरी से विवाह के बाद 'हिन्दुस्थान' का सह-संपादन किया। उनकी आत्मकथा 'जीवनेर झरा पाता' बांग्ला में है। प्रश्न में 'जिसकी पहली बार 1910 में इलाहाबाद में बैठक हुई थी' वाला वाक्यांश केवल सजावट नहीं है; वह छँटनी का औज़ार है, क्योंकि उस वर्ष और उस नगर से शेष तीनों नामों का कोई संगठन नहीं जुड़ता। शेष तीनों नाम भारतीय समाज-सुधार और महिला-आंदोलन के वास्तविक नाम हैं, पर उनमें से कोई भी इस संगठन का संस्थापक नहीं है, इसलिए विकल्प (c) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)एनी बेसेंट — एनी बेसेंट का संबंध महिला-संगठन से अवश्य है, पर दूसरे संगठन और दूसरे वर्ष से। उन्होंने 1917 में अड्यार (मद्रास) में मार्गरेट कज़िन्स और डोरोथी जिनराजदास के साथ मिलकर 'वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन' (WIA) की स्थापना की, जो भारत स्त्री महामंडल के सात वर्ष बाद की घटना है। बेसेंट थियोसॉफिकल सोसाइटी की अध्यक्ष (1907) थीं, उन्होंने 1898 में बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज खोला, 1916 में होम रूल लीग चलाई और 1917 में कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला बनीं। यह विकल्प इसीलिए फुसलाता है कि बेसेंट का नाम इस काल के हर आंदोलन में मिलता है; बचाव यह है कि संगठन के साथ उसका वर्ष जोड़कर याद रखा जाए — महामंडल 1910, WIA 1917।
- (b)मेहेरबाई टाटा — मेहरबाई टाटा भारतीय महिला-आंदोलन की महत्त्वपूर्ण हस्ती थीं, पर उनका काम मुख्यतः 1920 के दशक और उसके बाद का है, तथा दूसरे मंचों से जुड़ा है। वे बाल-विवाह के विरुद्ध अभियान में सक्रिय रहीं और बाल विवाह निरोधक अधिनियम, 1929 (शारदा अधिनियम) के पक्ष में जनमत बनाने में उनकी भूमिका रही; वे बंबई प्रेसीडेंसी महिला परिषद् तथा नैशनल काउंसिल ऑफ़ वीमेन इन इंडिया से जुड़ी रहीं। भारत स्त्री महामंडल की स्थापना से उनका कोई संबंध नहीं है, और 1910 का वर्ष उनके सार्वजनिक कार्य के मुख्य दौर से भी पहले का है। ऐसे प्रश्नों में सुरक्षित जाँच यही है कि व्यक्ति के सक्रिय दशक और संगठन के स्थापना-वर्ष को आमने-सामने रखा जाए।
- (d)ताराबाई शिंदे — ताराबाई शिंदे लेखिका थीं, संगठनकर्ता नहीं। उनकी प्रसिद्धि 1882 में प्रकाशित मराठी पुस्तिका 'स्त्री पुरुष तुलना' से है, जो पितृसत्ता की तीखी और अत्यंत मौलिक आलोचना मानी जाती है और सत्यशोधक समाज के वैचारिक परिवेश से जुड़ी हुई है। उनका हस्तक्षेप वैचारिक और साहित्यिक था — उन्होंने कोई अखिल भारतीय संगठन नहीं खड़ा किया, न ही उनका कार्यक्षेत्र इलाहाबाद या उत्तर भारत रहा। इस विकल्प का काम यह है कि 'महिला-आंदोलन' शब्द सुनकर स्मृति में आने वाला कोई भी नाम चुन लेने की प्रवृत्ति को पकड़े। भेद स्पष्ट रखिए: ताराबाई शिंदे — 1882, मराठी लेखन; सरला देवी चौधुरानी — 1910, अखिल भारतीय संगठन।
अवधारणा
भारत में महिला-संगठनों का विकास तीन चरणों में देखा जा सकता है, और यह प्रश्न उसके पहले चरण से आता है। पहला चरण उन्नीसवीं सदी का है, जिसमें सुधार मुख्यतः पुरुष समाज-सुधारकों ने आरंभ किया — सती-प्रथा का अंत, विधवा-पुनर्विवाह, स्त्री-शिक्षा — और स्त्रियाँ प्रायः सुधार की पात्र थीं, कर्ता नहीं। दूसरा चरण बीसवीं सदी के आरंभ का है, जिसमें स्त्रियाँ स्वयं संगठन बनाती हैं और नेतृत्व करती हैं; भारत स्त्री महामंडल (1910) इसी चरण की पहली बड़ी अखिल भारतीय पहल है, और उसके बाद वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन (1917), नैशनल काउंसिल ऑफ़ वीमेन इन इंडिया (1925) तथा अखिल भारतीय महिला परिषद् (1927) आती हैं। तीसरा चरण 1920 के दशक से आगे का है, जिसमें महिला संगठन विधायी सुधारों — मताधिकार, बाल-विवाह पर रोक, उत्तराधिकार — की माँग उठाते हैं और राष्ट्रीय आंदोलन में भी बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। इन तीन चरणों को क्रम से याद रखने पर संगठन, वर्ष और संस्थापक के प्रश्न स्वतः सुलझ जाते हैं।
सरला देवी चौधुरानी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि उस पीढ़ी की शिक्षित बंगाली महिलाएँ सांस्कृतिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में सक्रिय थीं। उन्होंने 'भारती' पत्रिका का संपादन किया, बंगाल में वीरता और शारीरिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाले आयोजनों से जुड़ीं, और विवाह के बाद पंजाब जाकर वहाँ की राष्ट्रवादी पत्रकारिता में भाग लिया। महात्मा गांधी ने उनके लेखन को उद्धृत किया है, और उनकी आत्मकथा 'जीवनेर झरा पाता' का अंग्रेज़ी अनुवाद भी हुआ है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि उनके नाम को कभी-कभी श्रमिक-आंदोलन से जोड़ दिया जाता है, जो ठीक नहीं — वे राष्ट्रवादी और महिला-आंदोलन की नेत्री थीं; ट्रेड यूनियन संगठन की धारा में अनसूया साराभाई जैसे नाम आते हैं, जिन्होंने 1917 में अहमदाबाद में मज़दूर महाजन संघ की स्थापना की। इस पेपर के आरंभिक खंड में समाज-सुधार और महिला-आंदोलन के कई प्रश्न हैं, इसलिए इन नामों की सीमा-रेखाएँ स्पष्ट रखना लाभदायक है।
मुख्य तथ्य
- भारत स्त्री महामंडल की स्थापना 1910 में सरला देवी चौधुरानी ने की; उसकी पहली बैठक इलाहाबाद में हुई।
- यह पहला ऐसा अखिल भारतीय स्तर का महिला संगठन माना जाता है जिसे किसी भारतीय महिला ने स्वयं स्थापित किया; इसका मुख्य उद्देश्य स्त्री-शिक्षा का प्रसार था।
- महामंडल की शाखाएँ लाहौर, इलाहाबाद, दिल्ली, कराची, अमृतसर, हैदराबाद, कानपुर, बाँकुड़ा, हज़ारीबाग़, मेदिनीपुर और कलकत्ता में खुलीं।
- सरला देवी (1872–1945) स्वर्णकुमारी देवी और जानकीनाथ घोषाल की पुत्री थीं; रवीन्द्रनाथ ठाकुर उनके मामा थे।
- उन्होंने 1895 से 1907 तक 'भारती' पत्रिका का संपादन किया और 1905 में रामभुज दत्त चौधरी से विवाह के बाद 'हिन्दुस्थान' का सह-संपादन किया; आत्मकथा 'जीवनेर झरा पाता' है।
- एनी बेसेंट ने 1917 में अड्यार में मार्गरेट कज़िन्स और डोरोथी जिनराजदास के साथ वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन की स्थापना की और उसी वर्ष कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
- ताराबाई शिंदे की प्रसिद्धि 1882 में प्रकाशित मराठी पुस्तिका 'स्त्री पुरुष तुलना' से है; वे लेखिका थीं, संगठनकर्ता नहीं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- एनी बेसेंट को हर महिला संगठन से जोड़ देना; उनका संगठन वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन है और उसका वर्ष 1917 है, 1910 नहीं।
- सरला देवी चौधुरानी को श्रमिक या ट्रेड यूनियन नेत्री मान लेना; वे राष्ट्रवादी और महिला-आंदोलन की नेत्री थीं, और मज़दूर संगठन की धारा में अनसूया साराभाई आती हैं।
- ताराबाई शिंदे को संगठनकर्ता समझ लेना; उनका योगदान 1882 की मराठी पुस्तिका 'स्त्री पुरुष तुलना' के रूप में वैचारिक और साहित्यिक है।
- स्थापना-वर्ष 1910 और पहली बैठक के नगर इलाहाबाद को अलग-अलग सूचना मानकर उलझ जाना; प्रश्न ने दोनों एक साथ दे दिए हैं और वे एक ही घटना के दो पक्ष हैं।
समाज-सुधार और महिला-आंदोलन के खंड में परीक्षा तीन प्रकार के प्रश्न बनाती है — संस्था से संस्थापक, संस्थापक से संस्था, और संस्था से स्थापना-वर्ष या स्थान। तीनों का सामना करने के लिए एक ही तैयारी काफ़ी है: प्रत्येक प्रमुख संगठन के लिए एक पंक्ति में चार सूचनाएँ लिख लीजिए — नाम, संस्थापक, वर्ष और नगर। भारत स्त्री महामंडल — सरला देवी चौधुरानी, 1910, इलाहाबाद; वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन — एनी बेसेंट और साथी, 1917, अड्यार; आर्य महिला समाज — पंडिता रमाबाई, 1882, पुणे। इस तालिका के बन जाने पर प्रश्न किसी भी दिशा से आए, उत्तर एक ही जगह से निकलता है। ध्यान रखने की दूसरी बात यह है कि परीक्षा प्रायः प्रश्न में ही एक सूचना दे देती है — जैसे यहाँ वर्ष और नगर दोनों — जिससे शेष विकल्पों को उसी कसौटी पर तुरंत परखा जा सके।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q93In the year 1911, who among the following formed the Social Service League in Bombay ?
- (a) G.K. Gokhale
- (b) S.A. Dange
- (c) N.M. Joshi
- (d) M.R. Jayakar
उत्तर(c) N.M. Joshi
EPFO EO/AO 2020 में पूछा गया है कि 1911 में बंबई में सोशल सर्विस लीग किसने बनाई — उसी दशक की सामाजिक संगठन-निर्माण की धारा का दूसरा प्रश्न।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
वीमेन्स इंडियन एसोसिएशन की स्थापना 1917 में अड्यार में एनी बेसेंट ने किन दो सहयोगियों के साथ मिलकर की थी?
- (a)सरला देवी चौधुरानी और स्वर्णकुमारी देवी
- (b)मार्गरेट कज़िन्स और डोरोथी जिनराजदास
- (c)मेहरबाई टाटा और रमाबाई रानाडे
- (d)ताराबाई शिंदे और पंडिता रमाबाई
उत्तर(b) मार्गरेट कज़िन्स और डोरोथी जिनराजदास
- practice — not a real PYQ
1882 में प्रकाशित मराठी पुस्तिका 'स्त्री पुरुष तुलना', जो पितृसत्ता की आरंभिक और तीखी आलोचना मानी जाती है, किसने लिखी थी?
- (a)पंडिता रमाबाई
- (b)सावित्रीबाई फुले
- (c)ताराबाई शिंदे
- (d)रमाबाई रानाडे
उत्तर(c) ताराबाई शिंदे