अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संदर्भ में, लॉर्ड कर्जन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?
- (a)उसने शांतिवादी नीति का पक्षसमर्थन किया।
- (b)वह फारस की खाड़ी और सीस्तान पर ब्रिटिश प्रभाव-क्षेत्र स्थापित करना चाहता था।
- (c)वह चीन के विरुद्ध, इंग्लैंड और रूस को मित्र बनाना चाहता था।
- (d)वह USA के लिए एक ध्वज लहराव मिशन (फ्लैग-वेविंग मिशन) का नेतृत्व करना चाहता था।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) वह फारस की खाड़ी और सीस्तान पर ब्रिटिश प्रभाव-क्षेत्र स्थापित करना चाहता था। प्रश्न स्पष्ट रूप से 'अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संदर्भ में' कहकर कर्ज़न की भारत-भीतरी नीतियों — बंगाल विभाजन, विश्वविद्यालय अधिनियम, कलकत्ता निगम अधिनियम — को दायरे से बाहर कर देता है, और उसकी विदेश-नीति पर ध्यान केंद्रित करता है। लॉर्ड कर्ज़न (वायसराय 1899–1905) की विदेश-नीति की धुरी एक ही चिंता थी: भारत की उत्तर-पश्चिमी परिधि पर रूस का बढ़ता प्रभाव। भारत आने से पहले ही वे इस क्षेत्र के जानकार माने जाते थे — 'पर्शिया ऐंड द पर्शियन क्वेश्चन' (1892) उन्हीं की दो-खंडीय कृति है। वायसराय बनने पर उन्होंने फारस की खाड़ी को भारत की सामुद्रिक रक्षा-रेखा और सीस्तान को स्थल-मार्ग की चौकी माना, और चाहा कि दोनों पर ब्रिटेन का अनन्य प्रभाव-क्षेत्र (sphere of influence) बने ताकि कोई अन्य शक्ति वहाँ पैर न जमा सके। इस नीति के तीन ठोस पड़ाव देखिए। पहला, 1899 में कुवैत के शासक के साथ ब्रिटिश समझौता, जिसने कुवैत को ब्रिटिश संरक्षण की ओर खींच लिया। दूसरा, मई 1903 में विदेश सचिव लॉर्ड लैंसडाउन की संसद में की गई वह घोषणा, जिसमें कहा गया कि किसी भी अन्य शक्ति द्वारा फारस की खाड़ी में नौसैनिक अड्डा या क़िलेबंद बंदरगाह बनाना ब्रिटिश हितों के लिए गंभीर ख़तरा माना जाएगा और उसका हर उपलब्ध साधन से प्रतिरोध किया जाएगा। तीसरा, नवम्बर 1903 में कर्ज़न की स्वयं की खाड़ी-यात्रा, जिसमें 21 नवम्बर 1903 को शारजाह में दरबार हुआ — यह ब्रिटिश प्रभुत्व का खुला प्रदर्शन था। यही नीति आगे चलकर 1907 के आंग्ल-रूसी अभिसमय में दिखाई देती है, जिसमें ईरान तीन क्षेत्रों में बाँटा गया और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र — विशेषतः किरमान, सीस्तान और बलूचिस्तान — ब्रिटिश हिस्से में आया। अतः विकल्प (b) ही कर्ज़न की घोषित मंशा को ठीक-ठीक कहता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)उसने शांतिवादी नीति का पक्षसमर्थन किया। — कर्ज़न शांतिवादी नहीं, अग्रगामी (forward policy) नीति के प्रतीक थे। उनकी सीमांत-नीति ने 1901 में पंजाब से काटकर पृथक् उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत बनाया; 1903–04 में उन्होंने यंगहसबैंड के नेतृत्व में तिब्बत की ओर सैन्य अभियान भेजा; और फारस की खाड़ी में उन्होंने बल-प्रदर्शन को नीति का अंग बनाया। शांतिवाद का अर्थ है बलप्रयोग और प्रभाव-क्षेत्र की राजनीति से सैद्धांतिक परहेज़, जो कर्ज़न के किसी भी कार्य से मेल नहीं खाता। यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए रखा गया है जो कर्ज़न को केवल एक प्रशासक-सुधारक के रूप में याद रखता है और उसकी सीमांत-रणनीति से परिचित नहीं; ध्यान रहे कि प्रश्न ने 'अंतर्राष्ट्रीय मामलों' का उल्लेख करके ठीक इसी पक्ष की ओर संकेत किया है।
- (c)वह चीन के विरुद्ध, इंग्लैंड और रूस को मित्र बनाना चाहता था। — यह विकल्प दिशा उलट देता है। कर्ज़न के लिए प्रतिद्वंद्वी चीन नहीं, रूस था — मध्य एशिया में ब्रिटेन और रूस की जिस होड़ को 'ग्रेट गेम' कहा जाता है, कर्ज़न उसी के सबसे मुखर ब्रिटिश प्रवक्ता थे, और फारस, अफ़ग़ानिस्तान तथा तिब्बत के प्रति उनकी पूरी नीति रूसी प्रसार रोकने के लिए बनी थी। इंग्लैंड और रूस के बीच समझौता 1907 के आंग्ल-रूसी अभिसमय से हुआ, कर्ज़न की वायसरायी समाप्त होने के बाद, और वह समझौता चीन के विरुद्ध नहीं था — वह ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और तिब्बत में दोनों शक्तियों के हितों का सीमांकन था। कर्ज़न स्वयं उस अभिसमय के आलोचक रहे। अतः यह कथन न कर्ज़न की मंशा बताता है, न तत्कालीन कूटनीतिक ढाँचा।
- (d)वह USA के लिए एक ध्वज लहराव मिशन (फ्लैग-वेविंग मिशन) का नेतृत्व करना चाहता था। — USA कर्ज़न की चिंता के दायरे में था ही नहीं। उनकी रणनीतिक कल्पना भारत की स्थल और सामुद्रिक परिधि तक सीमित थी — फारस की खाड़ी, सीस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, तिब्बत और उत्तर-पश्चिम सीमांत। ध्वज-प्रदर्शन (फ्लैग-वेविंग) वाली यात्रा उन्होंने की अवश्य थी, पर वह नवम्बर 1903 की फारस की खाड़ी की यात्रा थी, जिसमें शारजाह में दरबार करके ब्रिटिश प्रभुत्व दिखाया गया; अमेरिका से उसका कोई संबंध नहीं। यह विकल्प एक सही शब्द ('ध्वज लहराव मिशन') को ग़लत स्थान से जोड़कर बनाया गया है, और यही इसे ख़तरनाक बनाता है — शब्द पहचान में आ जाता है तो पूरा वाक्य सही लगने लगता है। ऐसे विकल्पों में क्रिया नहीं, कर्म और स्थान जाँचिए।
अवधारणा
'प्रभाव-क्षेत्र' (sphere of influence) उपनिवेशवाद की वह व्यवस्था है जिसमें कोई शक्ति किसी भू-भाग पर औपचारिक अधिकार तो नहीं जताती, पर वहाँ किसी अन्य शक्ति का प्रवेश रोक देती है और स्थानीय शासकों से संधियाँ करके अपने आर्थिक तथा सामरिक हित सुरक्षित कर लेती है। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में ब्रिटेन और रूस की जिस प्रतिद्वंद्विता को 'ग्रेट गेम' कहा जाता है, वह मध्य एशिया, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और तिब्बत में इसी प्रकार के प्रभाव-क्षेत्र बनाने की होड़ थी। ब्रिटिश दृष्टि से भारत की रक्षा दो रेखाओं पर टिकी थी — स्थल पर अफ़ग़ानिस्तान और सीस्तान की चौकियाँ, और जल पर फारस की खाड़ी का नियंत्रण, क्योंकि वहीं से भारत तक का सामुद्रिक मार्ग नियंत्रित होता है। सीस्तान (ईरान–अफ़ग़ानिस्तान सीमा का क्षेत्र) इसीलिए महत्त्वपूर्ण था कि रूसी रेल और प्रभाव यदि वहाँ तक पहुँच जाते तो वे भारत की सीमा के निकट आ जाते। यह पूरी बहस 1907 के आंग्ल-रूसी अभिसमय में जाकर औपचारिक रूप ले लेती है, जहाँ ईरान को तीन क्षेत्रों — उत्तरी रूसी, मध्य तटस्थ और दक्षिण-पूर्वी ब्रिटिश — में बाँट दिया गया।
लॉर्ड कर्ज़न 1899 से 1905 तक भारत के वायसराय रहे। भारत के भीतर वे बंगाल विभाजन (1905), भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम (1904), प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम (1904) और पुलिस तथा सिंचाई आयोगों के लिए याद किए जाते हैं; भारत के बाहर वे सीमांत-नीति के लिए। यह प्रश्न जानबूझकर दूसरे पक्ष को चुनता है, और इसीलिए 'अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संदर्भ में' शब्द स्टेम में डाले गए हैं — वे केवल भूमिका नहीं, छँटनी का औज़ार हैं। ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि कर्ज़न इस क्षेत्र के अध्येता थे: 'पर्शिया ऐंड द पर्शियन क्वेश्चन' (1892) उनकी ही कृति है, और वायसराय बनने से पहले वे मध्य एशिया की यात्राएँ कर चुके थे। हिन्दी स्तंभ में विकल्प (d) का 'USA' रोमन लिपि में ही छपा है और उसके आगे कोष्ठक में लिप्यंतरण दिया गया है — इस पुस्तिका में संक्षेपाक्षर प्रायः रोमन ही रहते हैं, जिससे हिन्दी-माध्यम अभ्यर्थी को अंग्रेज़ी संक्षेपों की पहचान बनाए रखनी पड़ती है।
मुख्य तथ्य
- लॉर्ड कर्ज़न भारत के वायसराय 1899 से 1905 तक रहे; उनकी विदेश-नीति की धुरी भारत की परिधि पर रूसी प्रसार को रोकना थी।
- कर्ज़न ने वायसराय बनने से पहले 'पर्शिया ऐंड द पर्शियन क्वेश्चन' (1892) नामक दो-खंडीय ग्रंथ लिखा था — फारस उनके अध्ययन का पुराना विषय था।
- 1899 में कुवैत के शासक के साथ ब्रिटिश समझौता हुआ, जिससे कुवैत ब्रिटिश संरक्षण की परिधि में आ गया।
- मई 1903 में लॉर्ड लैंसडाउन ने घोषित किया कि फारस की खाड़ी में किसी अन्य शक्ति का नौसैनिक अड्डा या क़िलेबंद बंदरगाह गंभीर ख़तरा माना जाएगा और उसका हर साधन से प्रतिरोध होगा।
- नवम्बर 1903 में कर्ज़न ने स्वयं फारस की खाड़ी की यात्रा की और 21 नवम्बर 1903 को शारजाह में दरबार किया — ब्रिटिश प्रभुत्व का खुला प्रदर्शन।
- 1907 के आंग्ल-रूसी अभिसमय ने ईरान को तीन क्षेत्रों में बाँटा; दक्षिण-पूर्वी ब्रिटिश क्षेत्र में विशेषतः किरमान, सीस्तान और बलूचिस्तान आए।
- कर्ज़न की अन्य सीमांत-नीतियाँ — 1901 में पृथक् उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत का गठन और 1903–04 में यंगहसबैंड का तिब्बत अभियान।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रश्न के 'अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संदर्भ में' शब्दों की उपेक्षा करके बंगाल विभाजन जैसी भारत-भीतरी नीति खोजने लगना।
- कर्ज़न का मुख्य प्रतिद्वंद्वी चीन मान लेना; उसकी समूची सीमांत-नीति रूस के प्रसार को रोकने के लिए बनी थी, चीन के विरुद्ध नहीं।
- 1907 के आंग्ल-रूसी अभिसमय को कर्ज़न की उपलब्धि मान लेना; वह उनकी वायसरायी के बाद हुआ और वे उसके आलोचक थे।
- 'ध्वज लहराव मिशन' शब्द पहचानकर विकल्प (d) चुन लेना — वह यात्रा नवम्बर 1903 में फारस की खाड़ी की थी, संयुक्त राज्य अमेरिका की नहीं।
आधुनिक भारत के खंड में वायसरायों पर प्रश्न दो शैलियों में आते हैं। पहली शैली में किसी वायसराय से जुड़ी एक घटना या अधिनियम का वर्ष पूछ लिया जाता है, जो शुद्ध स्मृति का प्रश्न है। दूसरी शैली, जो यहाँ है, अधिक कठिन है — चार कथन दिए जाते हैं और यह पूछा जाता है कि कौन-सा उस व्यक्ति के बारे में सही है; ऐसे प्रश्न में हर विकल्प किसी न किसी वास्तविक घटना से मिलता-जुलता होता है, पर कर्ता, स्थान या दिशा बदल दी जाती है। इसका सुरक्षित उपाय यह है कि विकल्प पढ़ते समय क्रिया के बजाय तीन चीज़ें जाँची जाएँ — कौन, किसके विरुद्ध और कहाँ। साथ ही स्टेम में जोड़े गए विशेषण-वाक्यांश ('अंतर्राष्ट्रीय मामलों के संदर्भ में') को छँटनी का औज़ार मानिए; वह प्रायः आधे विकल्पों को पहले ही बाहर कर देता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
मई 1903 में ब्रिटिश संसद में यह घोषणा किसने की थी कि फारस की खाड़ी में किसी अन्य शक्ति द्वारा नौसैनिक अड्डा बनाना ब्रिटिश हितों के लिए गंभीर ख़तरा माना जाएगा?
- (a)लॉर्ड कर्ज़न
- (b)लॉर्ड लैंसडाउन
- (c)लॉर्ड मिंटो
- (d)लॉर्ड मॉर्ले
उत्तर(b) लॉर्ड लैंसडाउन
- practice — not a real PYQ
1907 के आंग्ल-रूसी अभिसमय के अनुसार ईरान का दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र, जिसमें किरमान, सीस्तान और बलूचिस्तान आते थे, किसके प्रभाव-क्षेत्र में रखा गया था?
- (a)रूस
- (b)फ्रांस
- (c)ब्रिटेन
- (d)जर्मनी
उत्तर(c) ब्रिटेन