दि इवोल्यूशन ऑफ प्रॉविंशिएल फाइनैंस इन ब्रिटिश इंडिया : अ स्टडी इन द प्रॉविंशिएल डीसेंट्रलाइजेशन ऑफ इम्पीरिअल फाइनैंस के लेखक कौन हैं?
- (a)दादाभाई नौरोजी
- (b)डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर
- (c)एम॰ एन॰ रॉय
- (d)जवाहरलाल नेहरू
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) डॉ॰ बी॰ आर॰ अम्बेडकर। इस प्रश्न में पहला काम शीर्षक को पहचानना है। हिन्दी स्तंभ ने पुस्तक का नाम अनूदित नहीं किया, केवल देवनागरी में लिप्यंतरित कर दिया है — 'दि इवोल्यूशन ऑफ प्रॉविंशिएल फाइनैंस इन ब्रिटिश इंडिया : अ स्टडी इन द प्रॉविंशिएल डीसेंट्रलाइजेशन ऑफ इम्पीरिअल फाइनैंस'। इसे मन-ही-मन अंग्रेज़ी में लौटा लीजिए — The Evolution of Provincial Finance in British India : A Study in the Provincial Decentralization of Imperial Finance — और विषय स्पष्ट हो जाता है: ब्रिटिश भारत में साम्राज्यिक (केंद्रीय) वित्त का प्रांतों की ओर विकेंद्रीकरण कैसे हुआ, इसका इतिहास और विश्लेषण। यह कृति भीमराव रामजी अम्बेडकर की है और 1925 में लंदन के प्रकाशक P. S. King & Son से छपी थी। अम्बेडकर को आज संविधान-निर्माण और सामाजिक न्याय के लिए स्मरण किया जाता है, पर उनका औपचारिक प्रशिक्षण अर्थशास्त्र का था, और यही इस प्रश्न की कुंजी है। कोलंबिया विश्वविद्यालय से उन्होंने 1915 में अर्थशास्त्र में एम॰ए॰ की, जिसका शोध-प्रबंध 'ऐंशेंट इंडियन कॉमर्स' था; 1916 की दूसरी एम॰ए॰ का शोध-प्रबंध 'नैशनल डिविडेंड ऑफ इंडिया — अ हिस्टॉरिक ऐंड ऐनालिटिकल स्टडी' था; कोलंबिया ने उन्हें अर्थशास्त्र में पीएच॰डी॰ 1927 में दी; और लंदन विश्वविद्यालय से 1923 में डी॰एस-सी॰ का शोध-प्रबंध 'द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी : इट्स ऑरिजिन ऐंड इट्स सॉल्यूशन' था। इसी अर्थशास्त्रीय ग्रंथ-परंपरा की दो अन्य पुस्तकें हैं — 'ऐडमिनिस्ट्रेशन ऐंड फाइनैंस ऑफ द ईस्ट इंडिया कंपनी' और प्रश्न में उद्धृत यह कृति। शेष तीनों विकल्पों में से कोई भी लोक-वित्त (public finance) का शास्त्रीय अध्येता नहीं था, इसलिए विकल्प (b) ही सही है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)दादाभाई नौरोजी — दादाभाई नौरोजी (1825–1917) निश्चय ही भारतीय अर्थशास्त्रीय लेखन के प्रवर्तक थे, पर उनकी प्रसिद्ध कृति 'पॉवर्टी ऐंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (1901) है, जिसमें 'धन-निष्कासन' (drain of wealth) का सिद्धांत रखा गया — अर्थात् भारत की संपत्ति का एकतरफ़ा प्रवाह इंग्लैंड की ओर। उनका प्रश्न यह था कि ब्रिटिश शासन भारत को कितना दरिद्र बना रहा है, न कि यह कि केंद्र और प्रांतों के बीच राजस्व का बँटवारा किन चरणों में बदला। विषय-दृष्टि से दोनों पुस्तकें अलग कोटि की हैं: नौरोजी की कृति राष्ट्रीय आय और निर्धनता का अभियोग-पत्र है, प्रश्न में उद्धृत कृति लोक-वित्त की संस्थागत रचना का इतिहास। नौरोजी ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में चुने जाने वाले पहले भारतीय भी थे और कांग्रेस के तीन बार अध्यक्ष रहे।
- (c)एम॰ एन॰ रॉय — मानवेंद्रनाथ राय (एम॰ एन॰ रॉय, 1887–1954) की प्रसिद्ध पुस्तक 'इंडिया इन ट्रांज़िशन' (1922) है। वे मैक्सिको की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना से जुड़े रहे, 1920 में ताशकंद में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के गठन में भाग लिया, कॉमिन्टर्न में सक्रिय रहे, और अंतिम वर्षों में मार्क्सवाद छोड़कर 'आमूल मानववाद' (Radical Humanism) की ओर बढ़े। उनका लेखन उपनिवेशवाद, वर्ग और क्रांति की राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर है, प्रांतीय वित्त के संस्थागत विकास पर नहीं। जो अभ्यर्थी 'इंडिया' और 'ब्रिटिश' शब्द देखकर किसी भी वामपंथी चिंतक का नाम भर देता है, वह इसी विकल्प पर फिसलता है; बचाव यह है कि पुस्तक का उपशीर्षक — विकेंद्रीकरण और साम्राज्यिक वित्त — पढ़कर विषय तय किया जाए।
- (d)जवाहरलाल नेहरू — जवाहरलाल नेहरू लेखक तो थे, पर उनकी कृतियाँ इतिहास-चिंतन और आत्मकथा की हैं, लोक-वित्त की नहीं — 'ऐन ऑटोबायोग्राफ़ी' (1936), 'ग्लिम्प्सेज़ ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री' (1934) और 'द डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया' (1946)। इनमें से कोई भी प्रांतीय और केंद्रीय राजस्व-शीर्षों के बँटवारे का तकनीकी अध्ययन नहीं है, और न ही नेहरू ने अर्थशास्त्र में शोध-उपाधि ली थी; उनका औपचारिक प्रशिक्षण प्राकृतिक विज्ञान और विधि का था। इस प्रश्न का ढाँचा 'प्रसिद्ध नाम बनाम विषय-विशेषज्ञ नाम' का है: चारों नाम एक ही युग के प्रसिद्ध भारतीय हैं, पर उनमें केवल एक ही लोक-वित्त का शास्त्रीय अध्येता था।
अवधारणा
लोक-वित्त (public finance) में 'वित्तीय विकेंद्रीकरण' का अर्थ है कि कर लगाने और व्यय करने के अधिकार केंद्र से नीचे की सरकारों को सौंपे जाएँ। ब्रिटिश भारत में यह प्रक्रिया चरणों में चली। 1833 के चार्टर अधिनियम के बाद वित्त पूरी तरह केंद्रीकृत था — प्रांतों के पास अपना कोई राजस्व-शीर्ष नहीं था। 1870 में लॉर्ड मेयो के प्रस्ताव से प्रांतों को कुछ विभागों के लिए एकमुश्त अनुदान देकर व्यय की स्वतंत्रता दी गई; 1877 में लॉर्ड लिटन ने इसका विस्तार किया; 1882 में लॉर्ड रिपन ने नियत अनुदान समाप्त करके प्रांतों को कुछ राजस्व-शीर्षों में हिस्सा दिया, जिससे 'विभाजित शीर्ष' (divided heads) और आवधिक बंदोबस्त की पद्धति बनी; और भारत शासन अधिनियम, 1919 ने केंद्रीय तथा प्रांतीय राजस्व-स्रोतों को अलग-अलग सूचीबद्ध कर दिया। अम्बेडकर की पुस्तक इसी शृंखला का अध्ययन है — कि 'साम्राज्यिक वित्त' का प्रांतीय विकेंद्रीकरण किन दबावों में, किस क्रम से और किन परिणामों के साथ हुआ। आज के संदर्भ में यही प्रश्न संविधान की सातवीं अनुसूची, अनुच्छेद 268–281 और वित्त आयोग के रूप में जीवित है।
यह प्रश्न इस पेपर के आरंभिक इतिहास-खंड में आता है और उसकी विशिष्ट शैली दिखाता है: चारों विकल्प एक ही युग के अत्यंत प्रसिद्ध नाम हैं, इसलिए 'सुना हुआ नाम' चुनने की रणनीति काम नहीं करती। हिन्दी स्तंभ ने शीर्षक का लिप्यंतरण किया है, अनुवाद नहीं — यह इस पूरी पुस्तिका की परिपाटी है (आगे प्रश्न 32 का 'लुकिंग बैक' और प्रश्न 45 का 'चॉइस ऑफ टेकनीक्स' भी इसी तरह छपे हैं) — इसलिए हिन्दी-माध्यम अभ्यर्थी को शीर्षक अंग्रेज़ी में लौटाकर पढ़ने की आदत डालनी चाहिए, अन्यथा देवनागरी अक्षरों की लंबी लड़ी में विषय ही ओझल हो जाता है। दूसरी बात यह कि प्रश्न में कोलन के दोनों ओर स्पेस छपा है — 'इंडिया : अ स्टडी' — जो अंग्रेज़ी स्तंभ की भी वही सज्जा है; यह मुद्रण-शैली है, कोई संकेत नहीं। तीसरी बात, अम्बेडकर के अर्थशास्त्रीय लेखन को केवल 'सामाजिक न्याय' के खाने में रखकर छोड़ देना इस प्रकार के प्रश्नों में महँगा पड़ता है — EPFO और अन्य परीक्षाएँ उनसे मुद्रा, प्रांतीय वित्त और श्रम-नीति तीनों दिशाओं में प्रश्न बना चुकी हैं।
मुख्य तथ्य
- 'द इवोल्यूशन ऑफ प्रॉविंशिएल फाइनैंस इन ब्रिटिश इंडिया' के लेखक बी॰ आर॰ अम्बेडकर हैं; पुस्तक 1925 में लंदन के प्रकाशक P. S. King & Son से प्रकाशित हुई।
- अम्बेडकर ने कोलंबिया विश्वविद्यालय से 1915 में अर्थशास्त्र में एम॰ए॰ की — शोध-प्रबंध 'ऐंशेंट इंडियन कॉमर्स'; 1916 की दूसरी एम॰ए॰ का शोध-प्रबंध 'नैशनल डिविडेंड ऑफ इंडिया — अ हिस्टॉरिक ऐंड ऐनालिटिकल स्टडी' था।
- कोलंबिया से अर्थशास्त्र में पीएच॰डी॰ उन्हें 1927 में मिली; लंदन विश्वविद्यालय से 1923 की डी॰एस-सी॰ का शोध-प्रबंध 'द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी : इट्स ऑरिजिन ऐंड इट्स सॉल्यूशन' था।
- उनकी चौथी अर्थशास्त्रीय पुस्तक 'ऐडमिनिस्ट्रेशन ऐंड फाइनैंस ऑफ द ईस्ट इंडिया कंपनी' है — चारों कृतियाँ लोक-वित्त और मुद्रा के क्षेत्र की हैं।
- दादाभाई नौरोजी की प्रसिद्ध कृति 'पॉवर्टी ऐंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (1901) है, जिसमें धन-निष्कासन का सिद्धांत प्रस्तुत हुआ; वे ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स में चुने जाने वाले पहले भारतीय थे।
- एम॰ एन॰ रॉय की प्रसिद्ध कृति 'इंडिया इन ट्रांज़िशन' (1922) है; नेहरू की कृतियाँ 'ऐन ऑटोबायोग्राफ़ी' (1936), 'ग्लिम्प्सेज़ ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री' (1934) और 'द डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया' (1946) हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अम्बेडकर को केवल संविधान और सामाजिक न्याय से जोड़कर देखना, और उनके अर्थशास्त्रीय ग्रंथों को भूल जाना — यही इस प्रश्न का मुख्य जाल है।
- 'द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी' और 'द इवोल्यूशन ऑफ प्रॉविंशिएल फाइनैंस' को आपस में बदल देना; दोनों अम्बेडकर की हैं, पर विषय और उपाधि अलग-अलग हैं।
- देवनागरी में लिप्यंतरित लंबे अंग्रेज़ी शीर्षक को पढ़े बिना छोड़ देना; शीर्षक को अंग्रेज़ी में लौटाए बिना विषय ही समझ में नहीं आता।
- 'पॉवर्टी ऐंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' का लेखक अम्बेडकर मान लेना — वह दादाभाई नौरोजी की कृति है।
पुस्तक-और-लेखक का यह प्रकार EPFO की सामान्य योग्यता परीक्षा में लगभग निश्चित रूप से आता है, और इसी पेपर में दो बार और आता है — प्रश्न 32 में 'लुकिंग बैक' आत्मकथा का लेखक पूछा गया है और प्रश्न 45 में 'चॉइस ऑफ टेकनीक्स' का। तीनों जगह विकल्प एक ही युग के प्रसिद्ध नाम हैं, इसलिए उत्तर पहचान से नहीं, विषय-मिलान से निकलता है: पहले तय कीजिए कि पुस्तक किस अनुशासन की है — अर्थशास्त्र, समाज-सुधार या राजनीति — फिर उसी अनुशासन का विशेषज्ञ चुनिए। दूसरा उपयोगी अभ्यास यह है कि हर बड़े नाम के साथ एक-दो प्रामाणिक शीर्षक और उनका वर्ष याद रखा जाए, क्योंकि परीक्षा प्रश्न को उलटकर भी पूछती है — कभी लेखक से पुस्तक, कभी पुस्तक से लेखक, और कभी वर्ष से दोनों।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2020_Q32Who among the following is the author of ‘Gandhi as Mahatma’ ?
- (a) Mahadev Desai
- (b) Shahid Amin
- (c) Louis Fischer
- (d) David Arnold
उत्तर(b) Shahid Amin
EPFO EO/AO 2020 के पेपर में भी ठीक इसी ढाँचे का प्रश्न है — 'गांधी ऐज़ महात्मा' के लेखक कौन हैं; पुस्तक-और-लेखक इस परीक्षा का नियमित प्रकार है।
EPFO_EOAO_2020_Q111Who among the following is the author of the book ‘The Little Book of Encouragement’ ?
- (a) Dalai Lama
- (b) A.P.J. Abdul Kalam
- (c) Ravi Shankar
- (d) Jagadish Vasudev
उत्तर(a) Dalai Lama
उसी पेपर का एक और पुस्तक-लेखक प्रश्न — 'द लिटिल बुक ऑफ एनकरेजमेंट' के लेखक — जो दिखाता है कि यह प्रकार समसामयिक पुस्तकों पर भी लागू होता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
'द प्रॉब्लम ऑफ द रुपी : इट्स ऑरिजिन ऐंड इट्स सॉल्यूशन' शीर्षक शोध-प्रबंध, जिस पर लंदन विश्वविद्यालय ने डी॰एस-सी॰ की उपाधि दी, किसने लिखा था?
- (a)दादाभाई नौरोजी
- (b)बी॰ आर॰ अम्बेडकर
- (c)आर॰ सी॰ दत्त
- (d)महादेव गोविंद रानाडे
उत्तर(b) बी॰ आर॰ अम्बेडकर
- practice — not a real PYQ
धन-निष्कासन के सिद्धांत को प्रस्तुत करने वाली पुस्तक 'पॉवर्टी ऐंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (1901) के लेखक निम्नलिखित में से कौन थे?
- (a)दादाभाई नौरोजी
- (b)एम॰ एन॰ रॉय
- (c)गोपाल कृष्ण गोखले
- (d)बाल गंगाधर तिलक
उत्तर(a) दादाभाई नौरोजी