तीन व्यक्ति A, B और C एक साथ मिलकर एक कारोबार चलाते हैं, जिसमें उनका हिस्सा क्रमशः 17%, 37% और 46% है। कारोबार में कमाया गया कोई भी लाभ उनके हिस्सों के अनुपात के अनुसार बाँटा जाता है। यदि दिए गए किसी दिनांक को B और A के लाभों का अंतर ₹ 1,000 है, तो उस दिन C का लाभ कितना है?
- (a)₹ 2,300
- (b)₹ 2,350
- (c)₹ 2,450
- (d)₹ 4,600
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) ₹ 2,300। निर्णायक चरण यह पहचानना है कि जब लाभ हिस्सों के अनुपात में बँटता है, तो किन्हीं दो व्यक्तियों के लाभों का अंतर भी कुल लाभ का एक निश्चित प्रतिशत होता है — और वह प्रतिशत उनके हिस्सों का अंतर ही है। इसलिए एक अंतर बता देने से पूरा कुल लाभ तय हो जाता है।
कुल लाभ P मान लीजिए।
A का लाभ = P का 17%, B का लाभ = P का 37%, C का लाभ = P का 46%।
B और A के लाभों का अंतर = P का (37 − 17)% = P का 20%।
दिया है कि यह अंतर ₹ 1,000 है, इसलिए P का 20% = 1,000, अर्थात P = ₹ 5,000।
अब C का लाभ = 5,000 का 46% = ₹ 2,300।
यही हल एक पंक्ति में भी हो जाता है, और परीक्षा में वही करने योग्य है। C का हिस्सा और अंतर वाला हिस्सा एक ही कुल लाभ में से हैं, इसलिए उनका अनुपात सीधे लिया जा सकता है — C : (B − A) = 46 : 20 = 23 : 10। अतः C का लाभ = 1,000 × 23/10 = ₹ 2,300। इसमें कुल लाभ निकालने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली, प्रतिशत जोड़ने पर 17 + 37 + 46 = 100 आता है, इसलिए तीनों हिस्से पूरे लाभ को ठीक-ठीक बाँट देते हैं और कोई चौथा हिस्सेदार नहीं है — यह जाँच आरंभ में ही कर लेनी चाहिए, क्योंकि यदि योग 100 न होता तो 'हिस्सों के अनुपात में' वाला वाक्य अलग तरह से लगाना पड़ता। दूसरी, प्रश्न में क्रम 'B और A' लिखा है, वर्णक्रम में नहीं; इससे घबराने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि B का हिस्सा A से बड़ा है और अंतर वही 20% बनता है।
उत्तर की जाँच का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा पीछे लौटना है: यदि C का लाभ ₹ 2,300 है, तो कुल लाभ 2,300 ÷ 0·46 = ₹ 5,000 हुआ, और उसका 20% ठीक ₹ 1,000 आता है, जो प्रश्न की दी हुई शर्त है। यही जाँच शेष तीनों विकल्पों पर लगाइए और वे स्वयं कट जाते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)₹ 2,350 — ₹ 2,350 सही उत्तर के इतना पास है कि जल्दबाज़ी में सही लगता है, पर वह किसी सुसंगत गणना से नहीं निकलता। इसके लिए C का हिस्सा 47% चाहिए, जबकि प्रश्न में 46% दिया है; एक अंक की यह भूल पचास रुपये का अंतर बना देती है। पीछे लौटकर जाँचिए तो बात और साफ़ हो जाती है: यदि C का लाभ ₹ 2,350 होता, तो कुल लाभ 2,350 ÷ 0·46 = लगभग ₹ 5,108·70 होता, और B तथा A के लाभों का अंतर उसका 20%, यानी लगभग ₹ 1,021·74 — जो प्रश्न की दी हुई शर्त ₹ 1,000 से मेल नहीं खाता। साथ ही ध्यान दीजिए कि सही कुल लाभ ₹ 5,000 जैसी गोल संख्या बनता है, जो ऐसे प्रश्नों में एक अच्छा संकेत होता है; यह विकल्प उस गोलाई को तोड़ देता है।
- (c)₹ 2,450 — ₹ 2,450 भी उसी कोटि का निकट-भ्रम है और किसी सही चरण से नहीं आता। पीछे लौटकर देखिए — यदि C का लाभ ₹ 2,450 होता, तो कुल लाभ 2,450 ÷ 0·46 = लगभग ₹ 5,326·09 होता, और B तथा A के लाभों का अंतर उसका 20%, यानी लगभग ₹ 1,065·22, जो दी हुई शर्त ₹ 1,000 से मेल नहीं खाता। एक और तेज़ जाँच अनुपात की है: सही उत्तर सदा दिए गए अंतर का 46/20 गुना, यानी ठीक 2·3 गुना होना चाहिए। 1,000 का 2·3 गुना 2,300 है; 2,450 उसका 2·45 गुना है, जिसके लिए C का हिस्सा 49% चाहिए। ऐसे विकल्प सूची में केवल इसलिए रखे जाते हैं कि सही उत्तर के आसपास कई मिलती-जुलती राशियाँ दिखें और अनुमान से चुनना कठिन हो जाए।
- (d)₹ 4,600 — ₹ 4,600 ठीक सही उत्तर का दोगुना है, और यही उसकी पहचान भी है। यह तब निकलता है जब दिए गए अंतर को कुल लाभ का दस प्रतिशत मान लिया जाए, बीस प्रतिशत नहीं; तब कुल लाभ ₹ 10,000 बैठता है और उसका 46% ₹ 4,600 हो जाता है। पर हिस्सों का अंतर 37 − 17 = 20 प्रतिशत है, और वही ₹ 1,000 के बराबर है। पीछे लौटकर जाँचने पर यह विकल्प तुरंत टूट जाता है: यदि C का लाभ ₹ 4,600 होता, तो कुल लाभ ठीक ₹ 10,000 होता और B तथा A के लाभों का अंतर उसका 20%, यानी ₹ 2,000 — जो प्रश्न में दिए गए ₹ 1,000 से दोगुना है। ऐसी दोगुनी या आधी राशियाँ प्रतिशत वाले प्रश्नों में सबसे आम भूल हैं, क्योंकि वे किसी एक चरण के छूट जाने से बनती हैं।
अवधारणा
साझेदारी और अनुपात वाले प्रश्नों में एक ही विचार बार-बार काम आता है — जब कोई राशि निश्चित अनुपात में बँटती है, तो उस बँटवारे से जुड़ी हर राशि उसी कुल का एक निश्चित अंश होती है, चाहे वह किसी एक का हिस्सा हो, दो के हिस्सों का योग हो, या दो के हिस्सों का अंतर। इसलिए इनमें से कोई एक राशि बता दी जाए तो कुल निकल आता है और उससे बाक़ी सब। यहाँ हिस्से 17%, 37% और 46% हैं, जिनका योग ठीक 100 है, इसलिए तीनों मिलकर पूरा लाभ बाँट लेते हैं। ऐसे प्रश्नों में कुल निकालना अनिवार्य नहीं होता; प्रायः सीधे अनुपात लगाना तेज़ पड़ता है, क्योंकि माँगी गई राशि और दी गई राशि दोनों एक ही कुल के अंश हैं — यहाँ C : (B − A) = 46 : 20। यही विधि तब भी चलती है जब हिस्से प्रतिशत में न देकर अनुपात में दिए जाएँ, जैसे 17 : 37 : 46; तब कुल भागों की संख्या 100 मानकर वही गणना होती है। और यदि प्रश्न में पूँजी के साथ समय भी दिया हो, तो पहले पूँजी और समय का गुणनफल निकालकर उसी से अनुपात बनाया जाता है।
यह प्रश्न संख्यात्मक अभियोग्यता खंड में है, जो इस प्रश्नपत्र में प्रश्न 106 से 120 तक चलता है। साझेदारी और लाभ-विभाजन के प्रश्न इस परीक्षा के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं, क्योंकि पद लेखा अधिकारी का भी है और वही अनुपात-गणित लेखाशास्त्र वाले खंड में साझेदारी फ़र्म के लाभ-हानि विनियोजन के रूप में लौटता है। इस प्रश्नपत्र में साझेदारी पर लेखाशास्त्र की ओर से भी प्रश्न आते हैं, इसलिए दोनों को एक साथ देखना लाभदायक रहता है — वहाँ लाभ-विभाजन अनुपात, ब्याज और वेतन के साथ आता है, यहाँ शुद्ध प्रतिशत के रूप में। इस प्रश्न की बनावट का एक और सुख यह है कि इसमें कोई तिथि या अवधि नहीं दी गई, इसलिए समय का भार निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती और पूरा हल दो पंक्तियों में आ जाता है।
मुख्य तथ्य
- तीनों हिस्से 17%, 37% और 46% हैं, जिनका योग ठीक 100 है, इसलिए वे पूरा लाभ बाँट लेते हैं।
- B और A के लाभों का अंतर कुल लाभ का (37 − 17) = 20 प्रतिशत होता है।
- यह अंतर ₹ 1,000 दिया है, इसलिए कुल लाभ ₹ 5,000 बनता है।
- C का लाभ ₹ 5,000 का 46 प्रतिशत, यानी ₹ 2,300 है।
- कुल निकाले बिना भी हल होता है — C : (B − A) = 46 : 20 = 23 : 10, इसलिए C का लाभ 1,000 × 2·3 = ₹ 2,300।
- अनुपात में बँटी राशि में दो हिस्सों का अंतर भी कुल का एक निश्चित प्रतिशत होता है।
- उत्तर की जाँच पीछे लौटकर की जा सकती है — C के लाभ को 0·46 से भाग देकर कुल निकालिए और उसका 20% देखिए।
- विकल्प ₹ 4,600 ठीक सही उत्तर का दोगुना है, जो अंतर को 20 के बजाय 10 प्रतिशत मानने से निकलता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- अंतर को किसी एक व्यक्ति का हिस्सा मान लेना, जबकि वह दो हिस्सों का अंतर है।
- हिस्सों का अंतर 20 के बजाय 10 प्रतिशत ले लेना, जिससे उत्तर ठीक दोगुना हो जाता है।
- 'B और A' का उल्टा क्रम देखकर घबरा जाना, जबकि अंतर वही रहता है।
- प्रतिशत का योग 100 है या नहीं, यह जाँचे बिना हल आरंभ कर देना।
- 46 और 47 जैसी मिलती-जुलती संख्याओं में एक अंक की भूल कर देना, जो पचास रुपये का अंतर बना देती है।
इस प्रकार के प्रश्न तीन दिशाओं से पूछे जाते हैं। पहली दिशा यही है — हिस्से प्रतिशत या अनुपात में देकर किन्हीं दो के लाभों का अंतर बताना और तीसरे का लाभ पूछना; यहाँ कुल लाभ जानबूझकर छिपाया जाता है, ताकि परीक्षार्थी को अंतर से कुल तक जाना पड़े। दूसरी दिशा उलटी है — कुल लाभ देकर किसी एक का हिस्सा अथवा दो के हिस्सों का अंतर पूछना, जो सीधा प्रतिशत का प्रश्न बन जाता है। तीसरी दिशा समय जोड़ देती है — साझेदार अलग-अलग अवधि के लिए पूँजी लगाते हैं, और तब अनुपात पूँजी और समय के गुणनफल से बनता है; यह रूप सबसे अधिक भूल कराता है, क्योंकि अकेली पूँजी का अनुपात ग़लत उत्तर देता है। तीनों में एक ही आदत सबसे अधिक काम आती है: दी गई राशि और माँगी गई राशि, दोनों को कुल के अंश के रूप में लिखिए, फिर उनका अनुपात सीधे ले लीजिए। इससे गणना छोटी होती है और कुल निकालने का चरण प्रायः बच जाता है।
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EPFO_EOAO_2017_Q117खोलें व हल करें →The area of the smallest circle which contains a square of area 4 cm² inside is
- (a) π cm²
- (b) 2π cm²
- (c) 3π cm²
- (d) 4π cm²
उत्तर(b) 2π cm²
इसी प्रश्नपत्र का प्रश्न — 4 cm² के वर्ग को समाने वाले सबसे छोटे वृत्त का क्षेत्रफल; वहाँ भी उत्तर उस एक चरण से निकलता है जो दी गई राशि को माँगी गई राशि से जोड़ता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
तीन साझेदार X, Y और Z का लाभ में हिस्सा क्रमशः 20%, 30% और 50% है। यदि Z और X के लाभों का अंतर ₹ 1,500 है, तो Y का लाभ कितना होगा?
- (a)₹ 1,000
- (b)₹ 1,500
- (c)₹ 1,800
- (d)₹ 2,000
उत्तर(b) ₹ 1,500 — अंतर कुल का 30% है, इसलिए कुल लाभ ₹ 5,000 हुआ और Y का हिस्सा भी उसका 30%, यानी ₹ 1,500।
- practice — not a real PYQ
एक कारोबार में P, Q और R के हिस्से क्रमशः 25%, 35% और 40% हैं। यदि R का लाभ ₹ 3,200 है, तो Q और P के लाभों का अंतर कितना होगा?
- (a)₹ 600
- (b)₹ 800
- (c)₹ 1,000
- (d)₹ 1,200
उत्तर(b) ₹ 800 — R के 40% से कुल लाभ ₹ 8,000 निकलता है, और अंतर कुल का (35 − 25) = 10%, यानी ₹ 800।