नीचे दिए गए रेखाचित्र पर विचार कीजिए : [रेखाचित्र: बाईं ओर सीढ़ीनुमा तीर, जिसके नीचे “वस्तु” लिखा है, और दाहिनी ओर हैचिंग वाली एक ऊर्ध्वाधर रेखा, जिसके नीचे “दर्पण (समतल)” लिखा है — figure_note देखें] दर्पण में वस्तु का प्रतिबिम्ब निम्न में से कौन-सा है?
- (a)[आरेख] वही सीढ़ीनुमा आकृति, पर बाएँ-से-दाएँ पलटी हुई: ऊपरी क्षैतिज खंड दाहिनी ओर है और उसका दाहिना खुला सिरा खुले शेवरॉन (“<” जैसा) से चिह्नित है; उस ऊपरी खंड के बाएँ सिरे से रेखा नीचे उतरती है, फिर निचले तल पर बाईं ओर जाकर बाईं ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त होती है।
- (b)[आरेख] प्रश्न में दी गयी वस्तु से बिल्कुल वही आकृति और वही दिशा: ऊपरी क्षैतिज खंड बाईं ओर, उसके बाएँ खुले सिरे पर खुला शेवरॉन (“>” जैसा), दाहिने सिरे से नीचे उतरती ऊर्ध्वाधर रेखा, फिर निचला क्षैतिज खंड दाहिनी ओर जाकर दाहिनी ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त।
- (c)[आरेख] वही सीढ़ीनुमा आकृति, पर ऊपर-नीचे पलटी हुई, यानी सीढ़ी नीचे नहीं, ऊपर चढ़ती है: खुले शेवरॉन वाला क्षैतिज खंड अब निचला है और उसका बायाँ सिरा शेवरॉन से चिह्नित है; उसके दाहिने सिरे से रेखा ऊपर उठती है, फिर ऊपरी तल पर दाहिनी ओर जाकर दाहिनी ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त होती है।
- (d)[आरेख] वस्तु जैसी ही सीढ़ी, नीचे उतरती हुई, पर दोनों सिरों के चिह्न आपस में बदले हुए: बाईं ओर का ऊपरी क्षैतिज खंड बाईं ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त होता है, और दाहिनी ओर का निचला क्षैतिज खंड खुले शेवरॉन (“<” जैसा) पर।
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) — वह रेखाचित्र जिसमें वही सीढ़ीनुमा आकृति बाएँ-से-दाएँ पलटी हुई बनी है: ऊपरी क्षैतिज खंड दाहिनी ओर है और उसका खुला सिरा खुले शेवरॉन से चिह्नित है, वहाँ से रेखा नीचे उतरती है, और निचले तल पर बाईं ओर जाकर बाईं ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त होती है। सबसे पहले यह स्पष्ट कर लीजिए कि इस प्रश्न के चारों विकल्प रेखाचित्र हैं। पृष्ठ पर (a) से (d) तक केवल अक्षर छपे हैं और हर अक्षर के आगे एक-एक आकृति बनी है; विकल्पों का कोई पाठ पुस्तिका में है ही नहीं। प्रश्न-भाग में भी एक चित्र है, जिसमें बाईं ओर वस्तु और दाहिनी ओर दर्पण बना है, और उनके नीचे केवल दो नामांकन छपे हैं — 'वस्तु' और 'दर्पण (समतल)'। इसलिए उत्तर ज्यामिति से निकालना पड़ता है, शब्दों से नहीं।
पहले वस्तु को ठीक से पढ़िए। वह एक सीढ़ीनुमा टूटी रेखा है — ऊपर एक क्षैतिज खंड, उसके दाहिने सिरे से नीचे उतरती एक खड़ी रेखा, और फिर निचले तल पर दाहिनी ओर जाता दूसरा क्षैतिज खंड। उसके दोनों खुले सिरे अलग-अलग चिह्नों से पहचाने जाते हैं: ऊपरी खंड का बायाँ सिरा खुले शेवरॉन से और निचले खंड का दाहिना सिरा ठोस तीर-सिरे से, जो दाहिनी ओर, यानी दर्पण की ओर इशारा करता है। दर्पण दाहिनी ओर एक खड़ी रेखा है जिसकी पिछली ओर हैचिंग है, इसलिए उसका परावर्तक तल बाईं ओर, वस्तु की ओर मुड़ा है।
अब दर्पण का नियम। समतल दर्पण केवल उसी दिशा को उलटता है जो उसके तल के लंबवत है। यहाँ दर्पण खड़ा है, इसलिए लंबवत दिशा क्षैतिज है — बायाँ और दायाँ आपस में बदल जाते हैं, जबकि ऊपर और नीचे ज्यों के त्यों रहते हैं। इसी को पार्श्व-प्रतिलोमन कहते हैं, और यही समझ इस प्रश्न का पूरा उत्तर देती है।
निर्णायक जाँच एक पंक्ति की है: वस्तु का जो सिरा दर्पण के सबसे पास है, प्रतिबिम्ब में भी वही सिरा दर्पण के सबसे पास रहेगा। वस्तु में दर्पण के सबसे पास ठोस तीर-सिरा है, जो निचले तल पर है। इसलिए प्रतिबिम्ब में भी ठोस तीर-सिरा दर्पण की ओर वाला सिरा होगा और वह निचले तल पर ही रहेगा, पर अब दर्पण की ओर, यानी बाईं ओर इशारा करेगा। खुले शेवरॉन वाला सिरा दर्पण से सबसे दूर था और दूर ही रहेगा, यानी ऊपरी तल पर, दाहिनी ओर।
विकल्प (a) की आकृति ठीक यही है — ऊपरी खंड दाहिनी ओर शेवरॉन के साथ, निचला खंड बाईं ओर ठोस तीर-सिरे के साथ, और सीढ़ी पहले की तरह नीचे उतरती हुई। शेष तीनों में या तो कुछ भी नहीं बदला, या ऊपर-नीचे बदल गया, जो कोई खड़ा दर्पण करता ही नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)[आरेख] प्रश्न में दी गयी वस्तु से बिल्कुल वही आकृति और वही दिशा: ऊपरी क्षैतिज खंड बाईं ओर, उसके बाएँ खुले सिरे पर खुला शेवरॉन (“>” जैसा), दाहिने सिरे से नीचे उतरती ऊर्ध्वाधर रेखा, फिर निचला क्षैतिज खंड दाहिनी ओर जाकर दाहिनी ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त। — इस आकृति में वस्तु से कुछ भी नहीं बदला — वही सीढ़ी, वही दिशाएँ, वही सिरे। यह उस भ्रम से चुना जाता है कि दर्पण वस्तु की 'हूबहू नक़ल' बनाता है। नक़ल वह अवश्य बनाता है, पर पलटी हुई। किसी असममित आकृति का दर्पण-प्रतिबिम्ब उसके समान हो ही नहीं सकता; समान तभी होता जब आकृति खड़ी अक्ष के सापेक्ष सममित होती, जैसे अंग्रेज़ी का अक्षर A या H। यहाँ आकृति सममित नहीं है, क्योंकि उसके दोनों सिरों के चिह्न अलग हैं और सीढ़ी एक ही दिशा में उतरती है। एक व्यावहारिक जाँच भी यही बताती है: वस्तु में ठोस तीर-सिरा दर्पण की ओर इशारा करता है, और यहाँ प्रतिबिम्ब में भी वह दर्पण से दूर की ओर नहीं, उसी दिशा में इशारा कर रहा है, जो असंभव है।
- (c)[आरेख] वही सीढ़ीनुमा आकृति, पर ऊपर-नीचे पलटी हुई, यानी सीढ़ी नीचे नहीं, ऊपर चढ़ती है: खुले शेवरॉन वाला क्षैतिज खंड अब निचला है और उसका बायाँ सिरा शेवरॉन से चिह्नित है; उसके दाहिने सिरे से रेखा ऊपर उठती है, फिर ऊपरी तल पर दाहिनी ओर जाकर दाहिनी ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त होती है। — इस आकृति में सीढ़ी ऊपर-नीचे पलट दी गई है — शेवरॉन वाला खंड अब नीचे है और ठोस तीर-सिरे वाला ऊपर, यानी सीढ़ी उतरने के बजाय चढ़ती है। यह किसी दर्पण का काम है, पर उस दर्पण का नहीं जो यहाँ खड़ा है। ऊपर-नीचे का उलटाव तब होता जब दर्पण का तल क्षैतिज होता, जैसे मेज़ पर रखा दर्पण या पानी की सतह; तब लंबवत दिशा ऊर्ध्वाधर होती और ऊपर-नीचे बदलते, बायाँ-दायाँ नहीं। प्रश्न स्पष्ट कहता है कि दर्पण समतल है और चित्र में वह खड़ी रेखा के रूप में बना है, इसलिए उलटाव क्षैतिज दिशा में होना चाहिए। दूसरी जाँच भी यही कहती है — इस आकृति में ठोस तीर-सिरा अब भी दाहिनी ओर इशारा कर रहा है, जबकि प्रतिबिम्ब में उसे दर्पण की ओर, यानी बाईं ओर मुड़ना चाहिए।
- (d)[आरेख] वस्तु जैसी ही सीढ़ी, नीचे उतरती हुई, पर दोनों सिरों के चिह्न आपस में बदले हुए: बाईं ओर का ऊपरी क्षैतिज खंड बाईं ओर इशारा करते ठोस तीर-सिरे पर समाप्त होता है, और दाहिनी ओर का निचला क्षैतिज खंड खुले शेवरॉन (“<” जैसा) पर। — यह आकृति सबसे चतुराई से बनाई गई है। इसमें सीढ़ी वस्तु की तरह ही नीचे उतरती है, पर दोनों सिरों के चिह्न आपस में बदल दिए गए हैं — ऊपरी बाएँ खंड पर ठोस तीर-सिरा, जो बाईं ओर इशारा करता है, और निचले दाहिने खंड पर खुला शेवरॉन। इसका अर्थ यह हुआ कि आकृति को क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर दोनों दिशाओं में पलटा गया है, यानी उसे आधा घुमा दिया गया है। दर्पण इतना नहीं करता; वह केवल एक दिशा उलटता है, अपने तल के लंबवत वाली। सबसे तेज़ जाँच सिरों के तल की है: वस्तु में शेवरॉन ऊपरी तल पर था और ठोस तीर-सिरा निचले तल पर, और कोई भी खड़ा दर्पण इन तलों को आपस में नहीं बदलता। यहाँ वे बदल गए हैं, इसलिए यह प्रतिबिम्ब नहीं, घुमाई हुई आकृति है।
अवधारणा
समतल दर्पण में प्रतिबिम्ब बनने का नियम तीन पंक्तियों में समा जाता है, और आरेख वाले प्रश्न उन्हीं तीन पर टिके होते हैं। पहली, प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और वस्तु के बराबर आकार का होता है। दूसरी, वस्तु दर्पण के तल से जितनी दूर होती है, प्रतिबिम्ब उतनी ही दूर दूसरी ओर बनता है, और वस्तु तथा प्रतिबिम्ब को जोड़ने वाली रेखा दर्पण के तल पर लंब होती है। तीसरी, दर्पण केवल उसी दिशा को उलटता है जो उसके तल के लंबवत है — इसी को पार्श्व-प्रतिलोमन कहते हैं। खड़े दर्पण में यह दिशा क्षैतिज होती है, इसलिए बायाँ-दायाँ बदलता है और ऊपर-नीचे नहीं; क्षैतिज दर्पण में, जैसे पानी की सतह में, ठीक उलटा होता है। यहीं वह प्रचलित प्रश्न भी सुलझता है कि दर्पण ऊपर-नीचे क्यों नहीं उलटता — वह बाएँ-दाएँ भी नहीं उलटता, वह आगे-पीछे उलटता है, और हम उसे अपने शरीर की बाईं-दाईं भाषा में पढ़ लेते हैं। हल करने की व्यावहारिक विधि यही है कि आकृति के दो अलग-अलग पहचानने योग्य सिरे चुनिए और देखिए कि उनमें से कौन दर्पण के पास है; वही पास वाला सिरा प्रतिबिम्ब में भी पास रहेगा, और दूर वाला दूर।
यह प्रश्नपत्र के उन दो प्रश्नों में दूसरा है जिनके विकल्प स्वयं रेखाचित्र हैं, और अकेला ऐसा है जिसके प्रश्न-भाग में भी चित्र बना है; पहला प्रश्न 109 है, जो समुच्चय-आरेख का है। ऐसे प्रश्नों में समय बचाने का एक ही उपाय है — विकल्प देखने से पहले शब्दों में लिख लेना कि सही आकृति में क्या-क्या होना चाहिए, और फिर उसी सूची से चारों को मिलाना। यहाँ वह सूची दो पंक्तियों की है: ठोस तीर-सिरा निचले तल पर रहे और दर्पण की ओर मुड़ जाए, तथा शेवरॉन ऊपरी तल पर रहे और दर्पण से दूर। दर्पण-प्रतिबिम्ब के प्रश्न सामान्य योग्यता परीक्षण में तर्कशक्ति और सामान्य विज्ञान दोनों की ओर से आते हैं, इसलिए इनकी तैयारी दोहरा काम करती है। इस प्रश्न को प्रश्न 109 के साथ पढ़ना विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि दोनों में विकल्पों का कोई पाठ नहीं है और दोनों का उत्तर आकृति की बनावट से निकलता है।
मुख्य तथ्य
- इस प्रश्न के चारों विकल्प रेखाचित्र हैं; पुस्तिका में उनका कोई पाठ नहीं छपा, केवल (a) से (d) तक अक्षर हैं।
- प्रश्न-भाग के चित्र में केवल दो शब्द छपे हैं — 'वस्तु' और 'दर्पण (समतल)'; और कोई नामांकन नहीं है।
- वस्तु एक सीढ़ीनुमा टूटी रेखा है, जिसका ऊपरी बायाँ सिरा खुले शेवरॉन से और निचला दाहिना सिरा ठोस तीर-सिरे से चिह्नित है।
- दर्पण खड़ी रेखा के रूप में बना है और हैचिंग उसकी पिछली ओर है, इसलिए परावर्तक तल वस्तु की ओर मुड़ा है।
- समतल दर्पण केवल अपने तल के लंबवत दिशा उलटता है; खड़े दर्पण में बायाँ-दायाँ बदलता है और ऊपर-नीचे नहीं।
- वस्तु का जो सिरा दर्पण के सबसे पास होता है, प्रतिबिम्ब में भी वही सिरा दर्पण के सबसे पास रहता है।
- समतल दर्पण का प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और वस्तु के बराबर आकार का होता है।
- वस्तु और प्रतिबिम्ब दर्पण के तल से बराबर दूरी पर होते हैं और उन्हें जोड़ने वाली रेखा उस तल पर लंब होती है।
- किसी असममित आकृति का दर्पण-प्रतिबिम्ब उसके समान नहीं हो सकता; समान केवल खड़ी अक्ष पर सममित आकृतियों का होता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- प्रतिबिम्ब को ऊपर-नीचे पलट देना, जो खड़े दर्पण में कभी नहीं होता — वह क्षैतिज दर्पण का काम है।
- आकृति को आधा घुमाकर मिली आकृति को प्रतिबिम्ब मान लेना, जिसमें दोनों दिशाएँ एक साथ उलट जाती हैं।
- यह मान लेना कि दर्पण असममित आकृति की हूबहू नक़ल बना देता है।
- यह भूल जाना कि दर्पण के पास वाला सिरा प्रतिबिम्ब में भी पास ही रहता है।
- विकल्पों की आकृतियाँ पहले देख लेना और सही आकृति की शर्तें बाद में सोचना।
दर्पण-प्रतिबिम्ब के प्रश्न चार रूपों में आते हैं। पहला यही आरेख वाला रूप है — कोई असममित आकृति और उसके पास दर्पण देकर चार आकृतियों में से प्रतिबिम्ब चुनवाना; यहाँ विकल्प जान-बूझकर घूर्णन और ऊर्ध्वाधर पलटाव से बनाए जाते हैं, ताकि केवल 'कुछ बदला हुआ' देखकर उत्तर न दिया जा सके। दूसरा रूप घड़ी का है — दर्पण में दिख रहा समय देकर वास्तविक समय पूछना, जिसका हल 11:60 में से दिया गया समय घटाकर निकलता है। तीसरा रूप अक्षरों और अंकों का है — कौन-सा शब्द अथवा अक्षर दर्पण में अपरिवर्तित दिखेगा, जिसका उत्तर खड़ी अक्ष की सममिति से मिलता है। चौथा रूप जल-प्रतिबिम्ब का है, जो ठीक उलटा है, क्योंकि वहाँ परावर्तक तल क्षैतिज होता है और ऊपर-नीचे बदलते हैं। चारों की एक ही तैयारी है — यह पहचानना कि दर्पण का तल किस दिशा में है, क्योंकि उलटाव सदा उसी तल के लंबवत होता है।
संबंधित PYQ
EPFO_EOAO_2017_Q109खोलें व हल करें →Which one of the following diagrams is most appropriate to the statement, “Tea-producing places are either in Assam or in Bengal”?
- (a) [FIGURE] One large ellipse with two separate rectangles drawn inside it, side by side; the two rectangles do not touch each other or the ellipse.
- (b) [FIGURE] Two rectangles side by side with a clear gap between them, plus an ellipse straddling the RIGHT-HAND EDGE of the left rectangle — roughly half the ellipse lies inside that left rectangle and the other half projects into the gap. The ellipse does not reach the right-hand rectangle, and the two rectangles do not touch.
- (c) [FIGURE] Two rectangles side by side with a gap between them, plus an ellipse centred ON THE GAP so that it overlaps BOTH rectangles — its left part crosses into the right end of the left rectangle and its right part crosses into the left end of the right rectangle. The two rectangles themselves do not touch.
- (d) [FIGURE] ONE rectangle divided into two halves by a vertical line down its middle, with an ellipse centred on that dividing line and lying wholly inside the rectangle, so that half the ellipse falls in each half of the rectangle.
उत्तर(d) [FIGURE] ONE rectangle divided into two halves by a vertical line down its middle, with an ellipse centred on that dividing line and lying wholly inside the rectangle, so that half the ellipse falls in each half of the rectangle.
इसी प्रश्नपत्र का पहला चित्र-प्रश्न — 'या तो असम में या बंगाल में' वाले कथन का समुच्चय-आरेख; वहाँ भी विकल्प रेखाचित्र हैं और उत्तर आकृति की बनावट से निकलता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
एक दीवार पर लगे समतल दर्पण में किसी घड़ी का प्रतिबिम्ब 7:30 दिखा रहा है। घड़ी में वास्तविक समय क्या है?
- (a)3:30
- (b)4:30
- (c)5:30
- (d)8:30
उत्तर(b) 4:30 — दर्पण में दिखे समय को 11:60 में से घटाने पर वास्तविक समय मिलता है, इसलिए 11:60 − 7:30 = 4:30।
- practice — not a real PYQ
किसी दीवार पर लगे समतल दर्पण में निम्नलिखित में से कौन-सा अंग्रेज़ी बड़ा अक्षर अपरिवर्तित दिखाई देगा?
- (a)F
- (b)G
- (c)H
- (d)R
उत्तर(c) H — यह अक्षर खड़ी अक्ष के सापेक्ष सममित है, इसलिए बायाँ-दायाँ बदलने पर भी इसका रूप वही रहता है।