एक डिब्बे में 300 लिटर हाइड्रोजन गैस भरी गई है। प्रथम दिन इसमें से 100 लिटर हाइड्रोजन गैस की हानि हो जाती है और प्रत्येक दिन इसमें से पूर्ववर्ती दिन खोये गये आयतन के एक-तिहाई आयतन का नुकसान हो जाता है। इस स्थिति में
- (a)डिब्बा 3 दिन में सारी हाइड्रोजन गैस खो देगा
- (b)डिब्बा 10 दिन में सारी हाइड्रोजन गैस खो देगा
- (c)डिब्बा 10 दिन में 150 लिटर हाइड्रोजन गैस खो देगा
- (d)डिब्बे में 100वें दिन कम-से-कम 150 लिटर हाइड्रोजन गैस बचेगी
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) डिब्बे में 100वें दिन कम-से-कम 150 लिटर हाइड्रोजन गैस बचेगी। निर्णायक चरण यह पहचानना है कि प्रतिदिन होने वाली हानियाँ एक गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाती हैं जिसका सार्व अनुपात 1/3 है, और उस श्रेढ़ी का अनंत तक का योग एक परिमित संख्या है। जो कुल गैस कभी निकल सकती है वह उसी योग से बँधी हुई है, इसलिए बचने वाली मात्रा भी नीचे से बँधी हुई है। हानियों को लिखिए। पहले दिन 100 लिटर। दूसरे दिन उसका एक-तिहाई, यानी 100/3। तीसरे दिन 100/9। इस प्रकार हानियाँ 100, 100/3, 100/9, 100/27 … चलती हैं, जो प्रथम पद 100 और सार्व अनुपात 1/3 वाली गुणोत्तर श्रेढ़ी है। चूँकि सार्व अनुपात का निरपेक्ष मान 1 से छोटा है, इस श्रेढ़ी का अनंत तक का योग निकाला जा सकता है — S = a/(1 − r) = 100/(1 − 1/3) = 100/(2/3) = 150। अर्थ इसका बहुत ठोस है: चाहे जितने दिन बीत जाएँ, डिब्बे से निकली कुल गैस 150 लिटर से कम ही रहेगी और उसी के पास पहुँचती जाएगी, कभी उसे पार नहीं करेगी। इसलिए बची हुई गैस सदा 300 − 150 = 150 लिटर से अधिक रहेगी। अब 100वें दिन की बात। पहले 100 दिनों की कुल हानि = 150 × (1 − (1/3)¹⁰⁰), जो 150 से ज़रा-सी कम है। अतः बची हुई गैस = 300 − 150 × (1 − (1/3)¹⁰⁰) = 150 + 150 × (1/3)¹⁰⁰, जो 150 से थोड़ी अधिक है। विकल्प (d) 'कम-से-कम 150 लिटर' कहता है, और यह ठीक बैठता है। दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली, इस प्रकार के प्रश्न में गणना पूरी करने की आवश्यकता नहीं — 100/(1 − 1/3) = 150 निकालते ही तीनों शेष विकल्प एक साथ कट जाते हैं, क्योंकि तीनों किसी न किसी रूप में यह मानते हैं कि हानि 150 तक पहुँच जाती है या उसे पार कर जाती है। दूसरी, 150 इस श्रेढ़ी की सीमा है, कोई ऐसा मान नहीं जो किसी दिन वास्तव में प्राप्त हो जाए; अनंत श्रेढ़ी का योग वही संख्या होती है जिसके पास आंशिक योग पहुँचते जाते हैं, न कि वह संख्या जिस पर वे रुक जाते हैं। इसी अंतर पर इस प्रश्न के तीनों ग़लत विकल्प खड़े हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)डिब्बा 3 दिन में सारी हाइड्रोजन गैस खो देगा — तीन दिन में सारी गैस निकल जाने की बात दो कारणों से नहीं बनती। सीधी गणना कीजिए — पहले तीन दिनों की हानि 100 + 100/3 + 100/9 = 1300/9, यानी लगभग 144·44 लिटर। यह 300 के आसपास भी नहीं है, बल्कि 150 तक भी नहीं पहुँचता। गहरा कारण यह है कि हानि कभी 150 लिटर पार कर ही नहीं सकती, इसलिए 300 लिटर का पूरा निकल जाना किसी भी संख्या में दिनों में असंभव है। यह विकल्प उस भूल से आकर्षक लगता है जिसमें 'एक-तिहाई की हानि' को 'एक-तिहाई शेष रह जाना' पढ़ लिया जाता है — यदि हर दिन डिब्बे की बची हुई गैस का एक-तिहाई निकलता, तो कहानी दूसरी होती। यहाँ एक-तिहाई पिछले दिन की हानि का है, बची हुई गैस का नहीं।
- (b)डिब्बा 10 दिन में सारी हाइड्रोजन गैस खो देगा — दस दिन में सारी गैस निकल जाने वाला विकल्प भी उसी दोष का शिकार है, केवल दिनों की संख्या बड़ी है। दस दिनों की कुल हानि = 150 × (1 − (1/3)¹⁰) = 150 − 150/59049, यानी लगभग 149·997 लिटर। यह 300 लिटर का आधा भी नहीं। दिन बढ़ाने से लाभ नहीं होता, क्योंकि हानियाँ बहुत तेज़ी से छोटी होती जाती हैं — दसवें दिन की हानि 100/3⁹ लिटर है, यानी एक लिटर के हज़ारवें हिस्से के बराबर। गुणोत्तर श्रेढ़ी में जब सार्व अनुपात 1 से छोटा हो, तो पदों का जुड़ते जाना किसी परिमित संख्या से आगे नहीं जाता; यहाँ वह संख्या 150 है। इसलिए 'सारी गैस' का निकल जाना दस दिन में भी असंभव है और दस हज़ार दिन में भी।
- (c)डिब्बा 10 दिन में 150 लिटर हाइड्रोजन गैस खो देगा — यह विकल्प सही उत्तर के सबसे निकट है और इसीलिए सबसे भ्रामक — इसमें संख्या 150 ठीक है, केवल दावा ग़लत है। दस दिनों की कुल हानि 150 × (1 − (1/3)¹⁰) है, यानी 150 − 150/59049, लगभग 149·99746 लिटर। यह 150 के बहुत पास है, पर उसके बराबर नहीं। 150 इस श्रेढ़ी की सीमा है, कोई ऐसा मान नहीं जो किसी निश्चित दिन प्राप्त हो जाए, और यही अनंत श्रेढ़ी के योग का अर्थ है — आंशिक योग उसके पास पहुँचते जाते हैं, उस तक पहुँचते नहीं। परीक्षा में इसी अंतर की जाँच होती है, इसलिए 'ठीक 150 खो देगा' और 'कम-से-कम 150 बचेगी' को अलग-अलग पढ़िए। दूसरा कथन सदा सत्य है, पहला किसी भी दिन के लिए सत्य नहीं।
अवधारणा
अनंत गुणोत्तर श्रेढ़ी का योग इस प्रश्न का पूरा आधार है, और उसका नियम एक पंक्ति का है — यदि पदों का सार्व अनुपात r ऐसा हो कि |r| < 1, तो S = a/(1 − r), जहाँ a प्रथम पद है। यहाँ a = 100 और r = 1/3, इसलिए S = 150। n पदों तक का योग भी याद रखने योग्य है, क्योंकि उसी से 'दस दिन में कितना' जैसे विकल्प जाँचे जाते हैं — Sₙ = a(1 − rⁿ)/(1 − r), जो n बढ़ने पर a/(1 − r) की ओर बढ़ता जाता है और उसे कभी छूता नहीं। इस भेद को शब्दों में यों कहिए: अनंत योग एक सीमा है, प्राप्ति नहीं। इसी प्रकार के प्रश्नों में एक दूसरा प्रश्न-रूप भी आता है जिसमें हानि शेष मात्रा के अनुपात में होती है, न कि पिछली हानि के अनुपात में; उस दशा में शेष मात्रा स्वयं गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाती है और वह शून्य की ओर जाती है। दोनों रूप देखने में एक जैसे लगते हैं और उनके उत्तर उलटे होते हैं, इसलिए प्रश्न में यह अवश्य देखिए कि एक-तिहाई किसका है।
यह प्रश्न संख्यात्मक अभियोग्यता खंड में है, जो इस प्रश्नपत्र में प्रश्न 106 से 120 तक चलता है और जिसमें क्षेत्रमिति, अनुपात, श्रेढ़ी तथा दो चित्र-प्रश्न आते हैं। श्रेढ़ी वाले प्रश्न इस खंड में इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं कि उनका उत्तर गणना से नहीं, ढाँचे की पहचान से निकलता है — यहाँ सूत्र लगाते ही उत्तर एक पंक्ति में आ जाता है, जबकि दिन-प्रतिदिन जोड़ते रहने पर समय भी जाता है और उत्तर फिर भी नहीं मिलता, क्योंकि प्रश्न 100वें दिन की बात करता है। इस प्रकार के प्रश्न शब्दों में छिपाकर पूछे जाते हैं — गैस का रिसाव, गेंद का उछलना, रस्सी का बार-बार आधा काटा जाना, पेंडुलम के घटते झूले — पर गणित तीनों में वही रहता है। इसलिए अभ्यास करते समय कहानी नहीं, सार्व अनुपात ढूँढ़िए और यह देखिए कि वह किस राशि पर लग रहा है।
मुख्य तथ्य
- प्रतिदिन की हानियाँ 100, 100/3, 100/9 … हैं, जो प्रथम पद 100 और सार्व अनुपात 1/3 वाली गुणोत्तर श्रेढ़ी बनाती हैं।
- अनंत गुणोत्तर श्रेढ़ी का योग S = a/(1 − r) होता है, जब |r| < 1; यहाँ 100/(1 − 1/3) = 150।
- कुल हानि कभी 150 लिटर तक नहीं पहुँचती, इसलिए बची हुई गैस सदा 150 लिटर से अधिक रहती है।
- n पदों तक का योग Sₙ = a(1 − rⁿ)/(1 − r) होता है, जो n बढ़ने पर सीमा के पास जाता है, उस तक पहुँचता नहीं।
- पहले तीन दिनों की हानि 1300/9 लिटर है, यानी लगभग 144·44 लिटर।
- पहले दस दिनों की हानि 150 − 150/59049 लिटर है, यानी लगभग 149·997 लिटर।
- 100वें दिन बची हुई गैस 150 + 150 × (1/3)¹⁰⁰ लिटर है, जो 150 से कुछ अधिक है।
- एक-तिहाई यहाँ पिछले दिन की हानि का है, बची हुई गैस का नहीं — यही इस प्रश्न का मूल है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'पिछले दिन की हानि का एक-तिहाई' को 'बची हुई गैस का एक-तिहाई' पढ़ लेना, जिससे पूरा प्रश्न बदल जाता है।
- सीमा 150 को किसी दिन वास्तव में प्राप्त हो जाने वाला मान मान लेना।
- सार्व अनुपात 1/3 होने पर भी यह मान लेना कि पर्याप्त दिनों में सारी गैस निकल जाएगी।
- n पदों के योग और अनंत योग के सूत्रों को आपस में बदल देना।
- 100वें दिन तक की गणना हाथ से जोड़ने का प्रयास करना, जबकि सूत्र एक पंक्ति में उत्तर देता है।
अनंत गुणोत्तर श्रेढ़ी वाले प्रश्न तीन कहानियों में लौट-लौटकर आते हैं। पहली कहानी घटती हानि की है, जैसी यहाँ है — कोई मात्रा हर बार पिछली बार की एक निश्चित भिन्न के बराबर घटती है, और पूछा जाता है कि कुल कितना गया अथवा कितना बचा। दूसरी कहानी उछलती गेंद की है, जिसमें गेंद हर बार पिछली ऊँचाई का कोई अंश उछलती है और कुल तय की गई दूरी पूछी जाती है; वहाँ आने-जाने के कारण योग को दुगुना करने की अतिरिक्त सावधानी रखनी पड़ती है। तीसरी कहानी आकृतियों की है — वर्ग के भीतर वर्ग, त्रिभुज के भीतर त्रिभुज — जहाँ क्षेत्रफलों का योग पूछा जाता है। तीनों में हल की विधि एक ही है: प्रथम पद पहचानिए, सार्व अनुपात पहचानिए, और यह जाँचिए कि अनुपात किस राशि पर लग रहा है। इसके बाद सूत्र लगाना केवल एक पंक्ति का काम रह जाता है, और विकल्प प्राय: उसी एक संख्या से कट जाते हैं।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
एक गेंद 8 मीटर की ऊँचाई से गिराई जाती है और हर बार गिरने की ऊँचाई का आधा उछलती है। रुकने तक वह कुल कितनी दूरी तय करेगी?
- (a)16 मीटर
- (b)24 मीटर
- (c)32 मीटर
- (d)अनंत
उत्तर(b) 24 मीटर — पहली बार का गिरना 8 मीटर, और उसके बाद उछलने तथा गिरने के युग्म 2 × (4 + 2 + 1 + …) = 2 × 8 = 16 मीटर देते हैं।
- practice — not a real PYQ
अनंत गुणोत्तर श्रेढ़ी 9, 3, 1, 1/3, … का योग निम्नलिखित में से कौन-सा है?
- (a)12
- (b)13
- (c)13·5
- (d)27
उत्तर(c) 13·5 — यहाँ प्रथम पद 9 और सार्व अनुपात 1/3 है, इसलिए योग 9/(1 − 1/3) = 27/2 = 13·5 होता है।