कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल की कीमत ₹ 10 है। 10 खाली बोतलों को लौटाकर भी कोल्ड ड्रिंक की एक बोतल खरीदी जा सकती है। एक व्यक्ति के पास ₹ 1,000 और 19 खाली बोतलें हैं। मान लीजिए कि वह व्यक्ति किसी भी संख्या में उन बोतलों का उपभोग कर सकता है जिन्हें उसने खरीदा हो, तो शेष रह जाने वाली खाली बोतलों की वह संख्या क्या होगी जो उस व्यक्ति द्वारा अधिक से अधिक बोतलें खरीदने और उन सबका उपभोग करने के बाद उसके पास बची रहें?
- (a)0
- (b)1
- (c)2
- (d)3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) 2। इस पहेली में गणना कठिन नहीं है, केवल हिसाब क्रम से रखना पड़ता है। ध्यान यह रखना है कि जो बोतल विनिमय में मिलती है, वह पीने के बाद फिर एक खाली बोतल बन जाती है और अगली बार के हिसाब में जुड़ जाती है। पहला चरण — ₹ 1,000 में ₹ 10 प्रति बोतल की दर से 100 बोतलें ख़रीदी गईं। सब पी लेने पर 100 खाली बोतलें बनीं, और उसके पास पहले से 19 थीं, इसलिए कुल 119 खाली बोतलें। दूसरा चरण — 110 बोतलें लौटाकर 11 नई बोतलें मिलीं; 9 खाली बोतलें बच गईं। 11 पी लेने पर वे भी खाली हुईं, तो अब 9 + 11 = 20 खाली बोतलें। तीसरा चरण — 20 लौटाकर 2 नई बोतलें मिलीं, कोई खाली नहीं बची। वे 2 पी लेने पर 2 खाली बोतलें बनीं। अब 2 बोतलें बची हैं और विनिमय के लिए 10 चाहिए, इसलिए यहीं रुकना पड़ेगा। अंत में शेष खाली बोतलें = 2, अर्थात विकल्प (c)। एक छोटा रास्ता भी है, जो ऐसी हर पहेली में काम आता है। हर अतिरिक्त बोतल के लिए 10 खाली बोतलें जाती हैं, पर उसे पीने के बाद 1 खाली बोतल वापस मिल जाती है — इसलिए शुद्ध ख़र्च 9 खाली बोतलें प्रति अतिरिक्त बोतल है। कुल 119 खाली बोतलों से 119 ÷ 9 = 13 अतिरिक्त बोतलें मिलेंगी और शेष बचेंगी 119 − 9 × 13 = 2। यही दोनों विधियों का मिलान है, और अतिरिक्त बोतलों की संख्या भी वही निकलती है जो ऊपर चरणों में मिली — 11 + 2 = 13।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)0 — 0 का अर्थ होगा कि अंत में एक भी खाली बोतल शेष नहीं बची, अर्थात हर बोतल ठीक-ठीक विनिमय में चली गई। ऐसा तभी होता जब कुल खाली बोतलों की संख्या इस प्रक्रिया में पूरी तरह खप जाती। पर 119 खाली बोतलों में से 9 के गुणकों में 117 ही खप सकती हैं और 2 बच जाती हैं। पहेली का पूरा उद्देश्य यही शेष निकलवाना है, इसलिए 0 पर पहुँचना संकेत है कि किसी चरण में लौटी हुई बोतलों को दोबारा गिनना छूट गया।
- (b)1 — 1 उस परीक्षार्थी का उत्तर है जो आरंभ में उसके पास पहले से मौजूद 19 खाली बोतलों को हिसाब में लेना भूल जाता है। केवल ख़रीदी हुई 100 बोतलों से चलिए — 100 लौटाकर 10 मिलेंगी, फिर उन 10 को लौटाकर 1 मिलेगी, और वह 1 पीने पर अंत में 1 खाली बोतल बचेगी। यही 1 है। पर प्रश्न स्पष्ट कहता है कि उसके पास 19 खाली बोतलें पहले से हैं, और वे भी विनिमय में चलती हैं।
- (d)3 — 3 किसी सुसंगत गणना से नहीं निकलता। यह प्रायः अंतिम चरण में किसी बोतल की दोहरी गिनती से आता है — जैसे 20 बोतलें लौटाकर 2 पाना और फिर उन्हीं 20 में से कुछ को भी बचा हुआ मान लेना, जबकि लौटाई गई बोतलें हाथ से निकल चुकी होती हैं। शुद्ध-ख़र्च वाली विधि से जाँचिए: 119 में 9 का भाग देने पर शेषफल 2 आता है, 3 नहीं।
अवधारणा
इस प्रकार की पहेलियों का ढाँचा यही है — विनिमय से मिलने वाली वस्तु स्वयं भी अगले विनिमय की सामग्री बन जाती है, इसलिए प्रक्रिया एक बार में समाप्त नहीं होती और उसे तब तक दोहराना पड़ता है जब तक शेष वस्तुएँ विनिमय की न्यूनतम संख्या से कम न रह जाएँ। इसे दो तरह से सँभाला जा सकता है: चरणबद्ध हिसाब, जो सुरक्षित है और भूल कम कराता है; अथवा शुद्ध-ख़र्च वाली विधि, जो तेज़ है — यदि n खाली बोतलों पर 1 नई मिलती है, तो हर अतिरिक्त बोतल का शुद्ध ख़र्च (n − 1) खाली बोतलें होता है, और अंत में शेष वही रहती हैं जो (n − 1) से भाग देने पर बचती हैं।
विनिमय पर आधारित यह पहेली संख्यात्मक अभियोग्यता खंड का लोकप्रिय प्रकार है, क्योंकि इसमें सूत्र नहीं, क्रम और सावधानी जाँची जाती है। इस प्रश्नपत्र में यह इस खंड का सबसे लंबा प्रश्न है और उसकी लंबाई ही उसका बचाव है — जल्दबाज़ी में पढ़ने वाला परीक्षार्थी या तो 19 खाली बोतलें छोड़ देता है, या यह भूल जाता है कि विनिमय में मिली बोतल भी पीने के बाद खाली होती है। प्रश्न में यह भी स्पष्ट कहा गया है कि वह जितनी चाहे बोतलें पी सकता है, ताकि उपभोग की कोई सीमा उत्तर को न बदले।
मुख्य तथ्य
- ₹ 1,000 में ₹ 10 प्रति बोतल की दर से 100 बोतलें आती हैं।
- पीने के बाद वे 100 खाली बोतलें बनती हैं, और पहले से रखी 19 मिलाकर कुल 119।
- 110 लौटाकर 11 नई बोतलें मिलती हैं और 9 खाली शेष रहती हैं।
- 11 पीने के बाद कुल 20 खाली बोतलें बनती हैं, जिनसे 2 नई मिलती हैं।
- अंत में 2 खाली बोतलें बचती हैं, जो विनिमय की न्यूनतम संख्या 10 से कम हैं।
- विनिमय में मिली बोतल पीने के बाद फिर खाली बोतल बन जाती है।
- प्रत्येक अतिरिक्त बोतल का शुद्ध ख़र्च 9 खाली बोतलें है।
- 119 ÷ 9 से 13 अतिरिक्त बोतलें और शेष 2 खाली बोतलें निकलती हैं।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पहले से रखी 19 खाली बोतलों को हिसाब में लेना भूल जाना।
- यह भूल जाना कि विनिमय में मिली बोतल भी पीने के बाद खाली बोतल बनती है।
- एक ही बार विनिमय करके रुक जाना, जबकि प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है।
- लौटाई जा चुकी बोतलों को शेष में गिन लेना।
- प्रश्न 'कितनी बोतलें पीं' पूछ रहा है या 'कितनी खाली बचीं' — यह पढ़े बिना उत्तर चुन लेना।
इस पहेली के तीन प्रचलित रूप हैं — अंत में कितनी खाली बोतलें बचेंगी (जैसा यहाँ), कुल कितनी बोतलें पी जा सकेंगी, और कम से कम कितने रुपये चाहिए कि इतनी बोतलें पी ली जाएँ। तीनों में वही ढाँचा है, केवल पूछा गया अंश बदलता है, इसलिए हल करते समय तीनों संख्याएँ अलग-अलग लिखते चलिए: ख़रीदी गई बोतलें, विनिमय से मिली बोतलें और शेष खाली बोतलें। विनिमय की दर बदलकर भी प्रश्न कठिन बनाया जाता है — जैसे 3 खाली बोतलों पर 1 नई; तब शुद्ध ख़र्च 2 हो जाता है और शेष 2 से भाग देने पर निकलता है।
संबंधित PYQ
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
एक बोतल का दाम ₹ 10 है और 5 खाली बोतलें लौटाकर भी एक नई बोतल मिल जाती है। किसी व्यक्ति के पास ₹ 100 हैं और एक भी खाली बोतल नहीं है। वह अधिक से अधिक कितनी बोतलें पी सकेगा?
- (a)10
- (b)11
- (c)12
- (d)14
उत्तर(c) 12
- practice — not a real PYQ
यदि 10 खाली बोतलें लौटाकर एक नई बोतल मिलती है, तो प्रत्येक अतिरिक्त बोतल के लिए शुद्ध रूप से कितनी खाली बोतलें ख़र्च होती हैं?
- (a)8
- (b)9
- (c)10
- (d)11
उत्तर(b) 9