10 cm ऊँचाई के एक घनीय बॉक्स के अंदर रखी जा सकने वाली ऐसी गोलाकार गेंदों की अधिकतम संख्या क्या होगी, जहाँ प्रत्येक गेंद की त्रिज्या 1 cm है?
- (a)25
- (b)125
- (c)250
- (d)1000
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) 125। इस प्रश्न का निर्णायक चरण एक ही है — गेंद जितनी जगह घेरती है वह उसकी त्रिज्या से नहीं, व्यास से नापी जाती है। यही एक बात ध्यान में रहे तो पूरा हल तीन पंक्तियों का है।
गेंद की त्रिज्या 1 cm है, इसलिए उसका व्यास 2 cm है। बॉक्स घनीय है और उसकी ऊँचाई 10 cm है, अर्थात तीनों भुजाएँ 10 cm की हैं।
एक भुजा के साथ-साथ कितनी गेंदें एक पंक्ति में रखी जा सकती हैं? 10 ÷ 2 = 5।
यही गिनती तीनों दिशाओं में लागू होती है — लंबाई में 5, चौड़ाई में 5 और ऊँचाई में 5 परतें।
कुल गेंदें = 5 × 5 × 5 = 125, अर्थात विकल्प (b)।
देखने का सबसे स्पष्ट तरीक़ा यह है कि हर गेंद को 2 cm भुजा वाले एक छोटे घन के भीतर बैठी हुई मान लीजिए। तब प्रश्न बदलकर यह हो जाता है कि 10 cm भुजा वाले घन में 2 cm भुजा वाले कितने छोटे घन आएँगे — और वह गिनती सीधी है: (10 ÷ 2)³ = 5³ = 125। ध्यान दीजिए कि भुजा ठीक पाँच व्यासों के बराबर है, इसलिए किसी दिशा में कोई अधूरी जगह नहीं बचती और पंक्ति-स्तंभ-परत वाली सीधी व्यवस्था ही पूरे बॉक्स का उपयोग कर लेती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)25 — 25 वहाँ से आता है जहाँ परीक्षार्थी दो ही दिशाओं में गिनती करता है — 5 × 5 — और तीसरी दिशा, यानी परतों की संख्या, जोड़ना भूल जाता है। यह उत्तर तब सही होता जब बॉक्स के तल पर केवल एक परत बिछानी होती। घनीय बॉक्स त्रिविमीय है, इसलिए गिनती भी तीन दिशाओं में करनी पड़ेगी। ऐसे प्रश्नों में यह भूल सबसे आम है, क्योंकि आरेख मन में प्रायः तल का ही बनता है।
- (c)250 — 250 उस विधि से आता है जिसमें बॉक्स का आयतन गेंद के आयतन से भाग दे दिया जाता है। बॉक्स का आयतन 10³ = 1000 घन सेंटीमीटर है और एक गेंद का आयतन (4/3)π ≈ 4·19 घन सेंटीमीटर, जिससे भागफल लगभग 238 आता है और उसे मोटे तौर पर 250 मान लिया जाता है। यह विधि मूल रूप से ग़लत है, क्योंकि गोलों को आपस में बिना रिक्ति के भरा नहीं जा सकता — पास-पास रखी गेंदों के बीच सदैव ख़ाली जगह बचती है। इसलिए आयतन-भाग से मिलने वाली संख्या वास्तविक क्षमता से अधिक आती है।
- (d)1000 — 1000 इस प्रश्न की मूल भूल का सीधा परिणाम है — त्रिज्या को ही गेंद की जगह मान लेना। 10 ÷ 1 = 10 करके 10³ = 1000 निकाल लिया जाता है। पर 1 cm त्रिज्या वाली गेंद एक सेंटीमीटर जगह नहीं घेरती, दो सेंटीमीटर घेरती है, क्योंकि वह केंद्र के दोनों ओर एक-एक सेंटीमीटर फैली होती है। यही 1000 आयतन-भाग की एक और मोटी विधि से भी आता है, जब गेंद का आयतन 1 घन सेंटीमीटर मान लिया जाए।
अवधारणा
ठोसों की पैकिंग के प्रश्नों में तीन सूत्र काम आते हैं। पहला, गोले का व्यास = 2 × त्रिज्या — यही उसकी वास्तविक जगह है। दूसरा, किसी भुजा में समाने वाली वस्तुओं की संख्या = भुजा ÷ वस्तु की चौड़ाई, और भागफल पूर्णांक न हो तो नीचे का पूर्णांक लिया जाता है, क्योंकि अधूरी गेंद नहीं रखी जा सकती। तीसरा, तीनों दिशाओं की गिनतियों का गुणनफल कुल संख्या देता है। आयतन को आयतन से भाग देने की विधि केवल तब ठीक होती है जब वस्तुएँ आपस में बिना रिक्ति के जुड़ सकें — जैसे छोटे घन बड़े घन में — गोलों में नहीं।
क्षेत्रमिति के इस प्रकार के प्रश्न परीक्षा में इसलिए रखे जाते हैं कि वे सूत्र से अधिक कल्पना जाँचते हैं। यहाँ न गोले के आयतन का सूत्र चाहिए, न घन के आयतन का — केवल यह समझ चाहिए कि गेंद अपने व्यास जितनी जगह घेरती है और गिनती तीन दिशाओं में होती है। इसी प्रश्नपत्र में गोले पर एक और प्रश्न है, जिसमें त्रिज्या दोगुनी करने पर आयतन का अनुपात पूछा गया है; दोनों मिलकर यह जाँचते हैं कि त्रिज्या से जुड़ी राशियाँ किस-किस दर से बदलती हैं।
मुख्य तथ्य
- गेंद अपने व्यास जितनी जगह घेरती है, त्रिज्या जितनी नहीं।
- 1 cm त्रिज्या का अर्थ है 2 cm व्यास।
- 10 cm की भुजा में 10 ÷ 2 = 5 गेंदें एक पंक्ति में आती हैं।
- घनीय बॉक्स में तीनों दिशाओं की गिनती गुणा होती है — 5 × 5 × 5 = 125।
- हर गेंद को 2 cm भुजा वाले छोटे घन में बैठी मानकर प्रश्न (10 ÷ 2)³ बन जाता है।
- गोलों को आपस में बिना रिक्ति के नहीं भरा जा सकता, इसलिए आयतन-भाग की विधि यहाँ लागू नहीं होती।
- बॉक्स का आयतन 1000 घन सेंटीमीटर है और एक गेंद का आयतन लगभग 4·19 घन सेंटीमीटर।
- भागफल पूर्णांक न हो तो नीचे का पूर्णांक लिया जाता है, क्योंकि अधूरी गेंद नहीं रखी जा सकती।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- त्रिज्या को ही गेंद की चौड़ाई मान लेना।
- केवल तल की गिनती करके परतें जोड़ना भूल जाना।
- बॉक्स के आयतन को गेंद के आयतन से भाग देकर संख्या निकाल लेना।
- भागफल के दशमलव भाग को ऊपर के पूर्णांक तक बढ़ा देना।
- 'घनीय बॉक्स' पढ़कर भी उसकी शेष दो भुजाएँ अज्ञात मान लेना; घन की तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं।
पैकिंग के प्रश्न दो रूपों में आते हैं। पहला यही — किसी बड़े ठोस में छोटे ठोसों की अधिकतम संख्या, जहाँ उत्तर भुजाओं के भागफल से निकलता है और आयतन का सूत्र लगाना भूल होती है। दूसरा रूप पिघलाकर ढालने का होता है — कोई ठोस पिघलाकर छोटे ठोस बनाए जाते हैं; वहाँ आयतन अपरिवर्तित रहता है, इसलिए वहीं आयतन से भाग देना सही विधि है। इन दोनों रूपों को अलग-अलग पहचानना ही इस अध्याय की असली परीक्षा है: जहाँ वस्तुएँ रखी जा रही हों वहाँ भुजा से भाग दीजिए, और जहाँ पदार्थ ढाला जा रहा हो वहाँ आयतन से।
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- (a) Total volume will increase and total surface area will decrease.
- (b) Total volume will decrease and total surface area will increase.
- (c) Total volume will remain the same and total surface area will increase.
- (d) Total volume will increase and total surface area will remain the same.
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- (a) 2 : 1
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उत्तर(c) 8 : 1
इसी प्रश्नपत्र का प्रश्न — त्रिज्या दोगुनी करने पर गोलाकार डिब्बों के आयतन का अनुपात; त्रिज्या से जुड़ी राशियों की वही परख।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
12 cm भुजा वाले घनीय डिब्बे में 2 cm त्रिज्या वाली अधिकतम कितनी गोलाकार गेंदें रखी जा सकती हैं?
- (a)9
- (b)27
- (c)54
- (d)216
उत्तर(b) 27
- practice — not a real PYQ
घनाकार डिब्बे का आयतन गेंद के आयतन से भाग देकर गेंदों की संख्या निकालना क्यों उपयुक्त नहीं है?
- (a)क्योंकि पास-पास रखी गेंदों के बीच सदैव रिक्त स्थान बचता है
- (b)क्योंकि गोले का आयतन निकाला ही नहीं जा सकता
- (c)क्योंकि डिब्बे का आयतन सदैव कम आँका जाता है
- (d)क्योंकि गेंदें डिब्बे में रखने पर सिकुड़ जाती हैं
उत्तर(a) क्योंकि पास-पास रखी गेंदों के बीच सदैव रिक्त स्थान बचता है