27 से 93 तक, इन दोनों पूर्णांकों को अनुक्रम में शामिल रखते हुए, अनुक्रमिक पूर्णांकों पर विचार कीजिए । इन संख्याओं का समान्तर माध्य क्या होगा ?
- (a)61·5
- (b)61
- (c)60·5
- (d)60
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) 60 — अनुक्रमिक पूर्णांक समान्तर श्रेढ़ी बनाते हैं, और समान्तर श्रेढ़ी का माध्य उसके पहले और अन्तिम पद के औसत के बराबर होता है। इसलिए सीधे (27 + 93)/2 = 120/2 = 60। दूसरा रास्ता भी यही देता है: पदों की संख्या 93 − 27 + 1 = 67 है, जो विषम है, इसलिए माध्य ठीक बीच वाला पद होगा — 27 से चौंतीसवाँ पद, यानी 27 + 33 = 60। चाहें तो जोड़ से भी जाँच लीजिए: योग = 67 × 60 = 4020 और 4020 ÷ 67 = 60। एक और बात यहाँ निर्णायक है — पदों की संख्या विषम होने का अर्थ है कि माध्य पूर्णांक ही होगा, इसलिए आधे वाले दोनों विकल्प बिना गणना के ही बाहर हो जाते हैं। विकल्पों में दशमलव उठे हुए मध्य-बिन्दु से छपा है, अर्थात् 61·5 का अर्थ इकसठ दशमलव पाँच है। समान्तर श्रेढ़ी का यह गुण इसी एक प्रश्न तक सीमित नहीं है: चूँकि ऐसी श्रेढ़ी सममित होती है, उसका माध्य, माध्यिका और मध्य-बिंदु तीनों एक ही स्थान पर आ जाते हैं। इसीलिए जोड़ने की आवश्यकता कभी नहीं पड़ती — पहला और अन्तिम पद जोड़कर आधा कर देना पर्याप्त है, चाहे पदों की संख्या कितनी भी बड़ी हो। यदि प्रश्न योग पूछे तो वही माध्य पदों की संख्या से गुणा कर दीजिए, और यदि पदों की संख्या पूछे तो अन्तिम में से पहला घटाकर एक जोड़ दीजिए। तीनों काम एक ही सूत्र-परिवार से निकलते हैं, और यही इस विषय की पूरी तैयारी है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)61·5 — 61·5 आधा-पूर्णांक है, और अनुक्रमिक पूर्णांकों का माध्य आधा-पूर्णांक तभी हो सकता है जब पदों की संख्या सम हो। यहाँ पद 67 हैं, इसलिए यह मान संभव ही नहीं। अंकों की दृष्टि से यह वहाँ से आता है जहाँ कोई एक सिरा खिसक जाए — जैसे 30 से 93 तक का माध्य ठीक 61·5 होता है।
- (b)61 — 61 पूर्णांक तो है, पर बीच वाला पद नहीं। यह प्रायः तब आता है जब 'दोनों पूर्णांकों को शामिल रखते हुए' वाली शर्त सँभालते समय दोनों सिरे एक-एक बढ़ा दिए जाएँ — 28 से 94 तक का माध्य ठीक 61 है। श्रेढ़ी 27 से आरम्भ होकर 93 पर समाप्त होती है, इसलिए सिरे वही रहते हैं जो छपे हैं।
- (c)60·5 — 60·5 भी आधा-पूर्णांक है और उसी पैरिटी के कारण बाहर हो जाता है। यह उस दशा में बनता है जब पदों की संख्या सम मान ली जाए — जैसे कोई 93 − 27 = 66 को ही पदों की संख्या समझ ले, जबकि दोनों सिरों को शामिल करने पर एक पद और जुड़ता है।
अवधारणा
अनुक्रमिक पूर्णांक समान्तर श्रेढ़ी का सरलतम रूप हैं, जिसमें सार्व अन्तर एक होता है। ऐसी श्रेढ़ी में माध्य पहले और अन्तिम पद के औसत के बराबर होता है, क्योंकि दोनों सिरों से बराबर दूरी पर बैठे पद आपस में संतुलित हो जाते हैं। पदों की संख्या निकालने का सूत्र अन्तिम पद में से पहला पद घटाकर एक जोड़ना है, और वही 'दोनों सीमाएँ शामिल' वाली शर्त का गणितीय रूप है। इससे एक उपयोगी पैरिटी-नियम भी निकलता है: यदि पदों की संख्या विषम हो तो माध्य ठीक बीच वाला पद होगा और इसलिए पूर्णांक ही रहेगा; यदि सम हो तो माध्य बीच के दो पदों के बीच पड़ेगा और आधा-पूर्णांक बनेगा। इस एक नियम से ऐसे प्रश्नों के आधे विकल्प प्रायः बिना गणना के ही कट जाते हैं।
इस पेपर में सांख्यिकी और श्रेढ़ी दोनों के प्रश्न हैं, और उनमें गणना जान-बूझकर छोटी रखी गई है, क्योंकि परीक्षा गुणधर्म की समझ की है। यहाँ विकल्पों की बनावट भी इसी ओर संकेत करती है — दो पूर्णांक और दो आधे-पूर्णांक, जिससे पैरिटी देखने वाले अभ्यर्थी का आधा काम पहले ही हो जाता है। हिन्दी स्तंभ में दशमलव उठे हुए मध्य-बिन्दु से छपा है, अर्थात् 61·5 का अर्थ इकसठ दशमलव पाँच है और वह चिह्न गुणा या पूर्ण विराम नहीं है; यही शैली इस पेपर के दूसरे संख्यात्मक प्रश्नों में भी दिखती है। ऐसे चिह्नों को पहचानना उतना ही आवश्यक है जितना गणना करना, क्योंकि उन्हें ग़लत पढ़ने पर विकल्प ही बदल जाता है।
मुख्य तथ्य
- समान्तर श्रेढ़ी का माध्य = (पहला पद + अन्तिम पद) ÷ 2, क्योंकि दोनों सिरों से बराबर दूरी पर बैठे पद संतुलित हो जाते हैं।
- 27 से 93 तक पदों की संख्या = 93 − 27 + 1 = 67, और यही 'दोनों सीमाएँ शामिल' वाली शर्त का गणितीय रूप है।
- पदों की संख्या विषम हो तो माध्य ठीक बीच वाला पद होता है — यहाँ 27 से चौंतीसवाँ पद, अर्थात् 60।
- इन पूर्णांकों का योग = पदों की संख्या × माध्य = 67 × 60 = 4020।
- पैरिटी-नियम — विषम पदों वाली ऐसी श्रेढ़ी का माध्य पूर्णांक ही होगा और सम पदों वाली का आधा-पूर्णांक।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- पदों की संख्या 93 − 27 = 66 मान लेना और दोनों सिरों वाले अतिरिक्त पद को छोड़ देना।
- उठे हुए मध्य-बिन्दु वाले दशमलव को पूर्ण विराम या गुणा-चिह्न समझ लेना, जिससे विकल्प ही ग़लत पढ़ा जाए।
- माध्य निकालने के लिए पूरी श्रेढ़ी जोड़ने बैठ जाना, जबकि पहले और अन्तिम पद का औसत ही उत्तर है।
इस ढाँचे में प्रश्न तीन तरह से आते हैं — माध्य पूछना, योग पूछना, या पदों की संख्या पूछना; और कभी-कभी चारों में से कोई एक सूचना छिपाकर शेष से उसे निकलवाया जाता है। सभी में पहला काम एक ही है: पहला पद, अन्तिम पद और पदों की संख्या ठीक-ठीक तय कर लेना। विकल्पों में पूर्णांक और आधे-पूर्णांक दोनों दिखें तो पहले पैरिटी जाँचिए, इससे प्रायः आधे विकल्प तुरंत कट जाते हैं।
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- (b) A.M. of the first three quantities
- (c) (Sum of the first three quantities)/4
- (d) (Sum of the first three quantities)/2
उत्तर(b) A.M. of the first three quantities
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
17 से 63 तक, दोनों पूर्णांकों को सम्मिलित रखते हुए, अनुक्रमिक पूर्णांकों का समान्तर माध्य क्या है ?
- (a)39
- (b)40
- (c)40·5
- (d)41
उत्तर(b) 40 — (17 + 63) ÷ 2 = 40; पदों की संख्या 63 − 17 + 1 = 47 विषम है, इसलिए माध्य पूर्णांक ही होगा।