अटल पेंशन योजना के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. लाभार्थी 18 से 40 वर्ष के आयु-वर्ग में ही होना चाहिए । 2. लाभार्थी को उसके 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरान्त ही पेंशन प्राप्त होगी । 3. किसी लाभार्थी की मृत्यु हो जाने के उपरान्त उसके पति/उसकी पत्नी को पेंशन मिलती रहेगी । 4. लाभार्थी को किसी नामिती की अनुज्ञा नहीं है । उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं ?
- (a)केवल 3 और 4
- (b)केवल 1, 3 और 4
- (c)केवल 1, 2 और 3
- (d)1, 2, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) केवल 1, 2 और 3 — यहाँ निर्णय पूरी सूची पर नहीं, केवल कथन 4 पर टिका है, क्योंकि चार में से तीन विकल्प उसी को साथ लेकर चलते हैं। अटल पेंशन योजना में नामिती (nominee) की अनुज्ञा न होना तो दूर, खाता खोलते समय नामांकन इस योजना का अनिवार्य अंग है: अभिदाता की मृत्यु पर वही पेंशन उसके पति या उसकी पत्नी को मिलती रहती है, और दोनों के न रहने पर साठ वर्ष की आयु तक जमा हुई पेंशन-निधि नामिती को लौटा दी जाती है। इसलिए कथन 4 असत्य है और उसे रखने वाला कोई भी विकल्प नहीं बच सकता। शेष तीन कथन योजना के मूल नियम हैं — प्रवेश की आयु 18 से 40 वर्ष, पेंशन साठ वर्ष की आयु पूरी होने के बाद, और अभिदाता के बाद पति या पत्नी को पेंशन का जारी रहना — इसलिए 1, 2 और 3 सही हैं और उत्तर (c) है। योजना की भीतरी तर्क-संगति भी इसी उत्तर की पुष्टि करती है। प्रवेश की आयु चालीस वर्ष पर बंद होने और पेंशन साठ वर्ष से आरम्भ होने के बीच कम-से-कम बीस वर्ष का अंशदान-काल पड़ता है, और उसी संचय पर निश्चित पेंशन का वादा टिकता है। पेंशन की राशि अभिदाता स्वयं चुनता है — एक हज़ार से पाँच हज़ार रुपये मासिक तक — और उसी चुनाव तथा प्रवेश की आयु से उसका मासिक अंशदान तय होता है, यानी जो जितनी देर से जुड़ेगा उसे उतना अधिक देना पड़ेगा। उत्तरजीवी-लाभ इसी ढाँचे का अंतिम हिस्सा है: पहले पति या पत्नी को वही पेंशन, और दोनों के बाद संचित निधि नामिती को — इसलिए नामांकन के बिना यह योजना पूरी ही नहीं होती।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 3 और 4 — इसमें असत्य कथन 4 तो है ही, इसके साथ दो सही कथन — आयु-वर्ग और साठ वर्ष के बाद पेंशन — छूट भी गए हैं। यह विकल्प तभी बनता जब योजना में नामांकन वर्जित होता और प्रवेश की आयु-सीमा न होती; दोनों बातें योजना के नियमों के विपरीत हैं। ध्यान रखिए कि आयु-सीमा इस योजना का आकस्मिक नियम नहीं, उसकी गणना का आधार है — पेंशन की राशि इसी पर टिकी है कि अभिदाता कितने वर्ष अंशदान करेगा, इसलिए बिना आयु-सीमा के निश्चित पेंशन का वादा संभव ही नहीं होता।
- (b)केवल 1, 3 और 4 — 1 और 3 सही हैं, पर इसमें कथन 4 फिर भी शामिल है और कथन 2 छूट गया है। कथन 2 योजना की सबसे बुनियादी शर्त है — पेंशन का भुगतान साठ वर्ष की आयु पूरी होने पर ही आरम्भ होता है, उससे पहले नहीं। योजना की प्रवेश-आयु 40 वर्ष पर बंद होने का कारण भी यही है, क्योंकि इससे हर अभिदाता को कम-से-कम बीस वर्ष अंशदान करना पड़ता है। कथन 2 को असत्य मानने का एक ही रास्ता होता — यह सोचना कि पेंशन साठ वर्ष से पहले भी मिल सकती है। योजना में साठ वर्ष से पहले खाता बंद करने की व्यवस्था कुछ विशेष परिस्थितियों में अवश्य है, पर वह पेंशन नहीं, जमा राशि की वापसी होती है।
- (d)1, 2, 3 और 4 — यह 'सभी कथन सही' वाला जाल है, जो तब चुना जाता है जब हर कथन अलग से न परखा जाए। सूची के पहले तीन कथन सही हैं, इसलिए यह विकल्प देखने में ठीक लगता है — पर कथन 4 का 'नामिती की अनुज्ञा नहीं है' पूरी योजना के उत्तरजीवी-लाभ वाले ढाँचे को ही उलट देता है, और उसी एक कथन से यह विकल्प गिर जाता है। ऐसे प्रश्नों में 'सभी सही' वाला विकल्प तभी लेना चाहिए जब चारों कथन अलग-अलग परखे जा चुके हों। यहाँ केवल एक कथन असत्य है, और वह भी योजना की सबसे बुनियादी व्यवस्था के विरुद्ध — नामांकन के बिना अभिदाता के बाद पेंशन और निधि किसे मिलेगी, यह तय ही नहीं हो सकता।
अवधारणा
अटल पेंशन योजना असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बनी अंशदायी पेंशन योजना है, जिसका प्रबंध पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण के अधीन होता है। इसका ढाँचा चार खंभों पर खड़ा है। पहला, पात्रता — बचत बैंक खाता और अठारह से चालीस वर्ष की आयु। दूसरा, अंशदान — हर महीने खाते से कटने वाली निश्चित राशि, जो चुनी हुई पेंशन और प्रवेश की आयु से तय होती है। तीसरा, हितलाभ — साठ वर्ष की आयु के बाद एक हज़ार से पाँच हज़ार रुपये मासिक तक की निश्चित पेंशन, जिसकी न्यूनतम गारंटी सरकार देती है। और चौथा, उत्तरजीवी-व्यवस्था — अभिदाता के बाद उसके पति या पत्नी को वही पेंशन, और दोनों के बाद संचित पेंशन-निधि नामिती को। योजना के आरम्भिक वर्षों में एक सीमित अवधि के लिए सरकार का सह-अंशदान भी दिया गया था, जो केवल कुछ शर्तें पूरी करने वालों को मिला।
यह योजना 9 मई 2015 को आरम्भ की गई थी, उन्हीं दिनों जब जन सुरक्षा की दो बीमा योजनाएँ भी शुरू हुईं — प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना। यही कारण है कि इस प्रश्नपत्र में तीनों अलग-अलग प्रश्नों के रूप में आई हैं, और तीनों के प्रश्न लगभग एक ही ढाँचे के हैं: चार कथन, जिनमें एक या दो योजना के किसी नियम को उलटकर बनाए गए हैं। ऐसे प्रश्नों में सबसे उपयोगी तैयारी यह है कि तीनों योजनाओं की आयु-सीमाएँ, हितलाभ और मृत्यु के बाद की व्यवस्था एक साथ, आमने-सामने रखकर याद की जाएँ — क्योंकि परीक्षा प्रायः एक योजना का अंक दूसरी योजना के प्रश्न में रखकर जाँचती है।
मुख्य तथ्य
- प्रवेश की आयु अठारह से चालीस वर्ष और बचत बैंक खाता आवश्यक; इससे हर अभिदाता को कम-से-कम बीस वर्ष का अंशदान-काल मिलता है।
- साठ वर्ष की आयु के बाद एक हज़ार, दो हज़ार, तीन हज़ार, चार हज़ार या पाँच हज़ार रुपये मासिक की निश्चित पेंशन, जिसकी न्यूनतम गारंटी सरकार देती है।
- मासिक अंशदान चुनी हुई पेंशन और प्रवेश की आयु पर निर्भर करता है — देर से जुड़ने वाले को अधिक देना पड़ता है।
- अभिदाता की मृत्यु पर वही पेंशन उसके पति या पत्नी को मिलती रहती है, और दोनों के बाद संचित पेंशन-निधि नामिती को लौटा दी जाती है।
- योजना 9 मई 2015 को आरम्भ हुई और उसका विनियमन पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) करता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- तीनों जन सुरक्षा योजनाओं की आयु-सीमाएँ आपस में बदल देना — अटल पेंशन योजना में प्रवेश अठारह से चालीस वर्ष तक ही है।
- 'सभी कथन सही' वाले विकल्प को सुरक्षित मान लेना, जबकि एक ही असत्य कथन उसे गिरा देता है।
- नामांकन को वैकल्पिक या वर्जित समझ लेना, जबकि उत्तरजीवी-लाभ की पूरी व्यवस्था उसी पर टिकी है।
सरकारी योजनाओं पर कथन-आधारित प्रश्न प्रायः चार बिंदुओं पर बनते हैं — पात्रता की आयु, हितलाभ की राशि, अंशदान की व्यवस्था, और मृत्यु के बाद किसे क्या मिलता है। इनमें से किसी एक को थोड़ा-सा बदलकर असत्य कथन गढ़ा जाता है, इसलिए हर कथन अलग से परखना पड़ता है। मिलान वाले प्रश्नों में तीनों जन सुरक्षा योजनाओं को एक साथ रखकर पूछा जाता है, और तब आयु-सीमाओं का भेद ही निर्णायक होता है।
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- (a) 1 and 2 only
- (b) 3 and 4 only
- (c) 2 and 3 only
- (d) 1 and 4 only
उत्तर(b) 3 and 4 only
इसी पेपर का प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना वाला कथन-प्रश्न — उन्हीं दिनों आरम्भ हुई दूसरी जन सुरक्षा योजना, जिसमें आयु-सीमा और सुरक्षा का प्रकार दोनों अलग हैं।
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- (a) 1 and 3 only
- (b) 1 and 4 only
- (c) 2 and 4 only
- (d) 2 and 3 only
उत्तर(c) 2 and 4 only
इसी पेपर का प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना वाला कथन-प्रश्न — तीसरी जन सुरक्षा योजना, जहाँ प्रीमियम स्वतः नामे से कटता है।
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- (a) 1, 2, 3 and 4
- (b) 2, 3, 4 and 5
- (c) 2, 4, 5 and 6
- (d) 3, 4, 5 and 6
उत्तर(c) 2, 4, 5 and 6
इसी पेपर का प्रश्न कि भारत में सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के साधन कौन-से हैं — इस योजना को उसी बड़े ढाँचे में रखकर देखने के लिए।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
अटल पेंशन योजना के अंतर्गत साठ वर्ष की आयु के बाद मिलने वाली निश्चित मासिक पेंशन की न्यूनतम और अधिकतम राशि क्या है ?
- (a)₹ 500 से ₹ 2,000
- (b)₹ 1,000 से ₹ 5,000
- (c)₹ 2,000 से ₹ 10,000
- (d)₹ 3,000 से ₹ 8,000
उत्तर(b) ₹ 1,000 से ₹ 5,000 — अभिदाता एक हज़ार, दो हज़ार, तीन हज़ार, चार हज़ार या पाँच हज़ार रुपये मासिक में से कोई एक स्तर चुनता है और उसी के अनुसार अंशदान देता है।