चार राशियाँ ऐसी हैं जिनका समान्तर माध्य (A.M.) वही है जो प्रथम तीन राशियों का समान्तर माध्य (A.M.) है । चौथी राशि क्या है ?
- (a)प्रथम तीन राशियों का योगफल
- (b)प्रथम तीन राशियों का समान्तर माध्य (A.M.)
- (c)(प्रथम तीन राशियों का योगफल)/4
- (d)(प्रथम तीन राशियों का योगफल)/2
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) प्रथम तीन राशियों का समान्तर माध्य (A.M.) — प्रथम तीन राशियों का योगफल S मान लीजिए और चौथी राशि x। शर्त यह है कि चारों का माध्य पहली तीन के माध्य के बराबर हो, अर्थात् (S + x)/4 = S/3। तिर्यक गुणा करने पर 3S + 3x = 4S, इसलिए 3x = S और x = S/3 — और S/3 ही प्रथम तीन राशियों का समान्तर माध्य है। इसे बिना समीकरण के भी देखा जा सकता है, और यही वह एक कदम है जो प्रश्न को खोल देता है: किसी समूह में ऐसी संख्या जोड़ी जाए जो उस समूह के माध्य के बराबर हो, तो माध्य नहीं बदलता, क्योंकि योग और गणना दोनों उसी अनुपात में बढ़ते हैं। प्रश्न कहता ही यह है कि माध्य नहीं बदला, इसलिए जोड़ी गई राशि माध्य के बराबर होनी चाहिए। संख्याओं से जाँच लीजिए तो बात और पक्की हो जाती है: पहली तीन राशियाँ 2, 4 और 6 लीजिए, जिनका योग 12 और माध्य 4 है। चौथी राशि 4 रखने पर चारों का योग 16 और माध्य 16 ÷ 4 = 4 — वही, अपरिवर्तित। अब वही जाँच शेष विकल्पों पर कीजिए: चौथी राशि 12 (योगफल) रखने पर माध्य 6 हो जाता है, 3 (योगफल का चौथाई) रखने पर 3·75, और 6 (योगफल का आधा) रखने पर 4·5 — तीनों में माध्य बदल गया। इस तरह एक छोटा-सा संख्यात्मक उदाहरण चारों विकल्पों को एक साथ परख लेता है, और यह रीति माध्य वाले हर प्रश्न में काम आती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)प्रथम तीन राशियों का योगफल — यदि चौथी राशि पूरा योगफल S होती, तो चारों का माध्य (S + S)/4 = S/2 बनता, जबकि पहली तीन का माध्य S/3 है। ये दोनों केवल तभी बराबर होंगे जब S शून्य हो, जो कोई सामान्य दशा नहीं है। योगफल जोड़ने का अर्थ है समूह के कुल को दुगुना कर देना, और इतनी बड़ी राशि माध्य को ऊपर खींच देगी।
- (c)(प्रथम तीन राशियों का योगफल)/4 — योगफल का चौथाई, यानी x = S/4 लेने पर चारों का माध्य (S + S/4)/4 = 5S/16 आता है, जो S/3 के बराबर नहीं है। यह विकल्प इसलिए आकर्षक लगता है कि प्रश्न में 'चार राशियाँ' हैं और चार से भाग देने की आदत बन जाती है — पर भाग योगफल में नहीं, माध्य निकालते समय गणना में लगता है।
- (d)(प्रथम तीन राशियों का योगफल)/2 — योगफल का आधा लेने पर चारों का माध्य (S + S/2)/4 = 3S/8 होता है, जो फिर S/3 से भिन्न है। न तो यह किसी परिचित सूत्र से निकलता है और न ही प्रश्न की शर्त से; यह केवल भिन्न वाले विकल्पों की जोड़ी पूरी करने के लिए रखा गया है।
अवधारणा
समान्तर माध्य का मूल गुण यह है कि वह प्रेक्षणों का संतुलन-बिंदु है — उससे लिए गए विचलनों का बीजगणितीय योग सदैव शून्य होता है। इससे तीन काम की बातें निकलती हैं। पहली, माध्य के बराबर प्रेक्षण जोड़ने से माध्य नहीं बदलता, क्योंकि योग और गणना दोनों उसी अनुपात में बढ़ते हैं। दूसरी, माध्य से बड़ा प्रेक्षण जोड़ने पर माध्य बढ़ता है और छोटा जोड़ने पर घटता है, और कितना बदलेगा यह इस पर निर्भर है कि वह प्रेक्षण माध्य से कितनी दूर है तथा कुल प्रेक्षण कितने हैं। तीसरी, हर प्रेक्षण में समान राशि जोड़ने पर माध्य भी उतना ही बढ़ जाता है और हर प्रेक्षण को किसी संख्या से गुणा करने पर माध्य भी उतने ही गुना हो जाता है। इन तीन गुणों से माध्य के अधिकांश प्रश्न बिना लंबी गणना के हल हो जाते हैं।
इस पेपर में सांख्यिकी के प्रश्न पूरे भाग B में बिखरे हुए हैं — माध्य, मानक विचलन, परिक्षेपण की मापें और आँकड़ों का निर्वचन। इनमें गणना प्रायः छोटी रखी गई है और परीक्षा गुणधर्म की समझ की होती है, इसलिए सूत्र लगाने से पहले यह सोचना उपयोगी है कि उस परिवर्तन का माध्य पर क्या असर पड़ेगा। यहाँ विकल्पों की बनावट भी इसी ओर संकेत करती है: तीन विकल्प योगफल के किसी न किसी रूप में हैं और केवल एक माध्य की बात करता है, जिससे यह भ्रम बनता है कि उत्तर योगफल से ही निकलेगा। हिन्दी स्तंभ में संक्षेप '(A.M.)' रोमन में और बिन्दुओं सहित छपा है, तथा भिन्न वाले विकल्प एक ही पंक्ति में तिर्यक रेखा से दिए गए हैं।
मुख्य तथ्य
- समान्तर माध्य = प्रेक्षणों का योग ÷ प्रेक्षणों की संख्या; यही उसका एकमात्र सूत्र है और शेष सारे गुण इसी से निकलते हैं।
- समूह में उसके माध्य के बराबर प्रेक्षण जोड़ने पर माध्य अपरिवर्तित रहता है, क्योंकि योग और संख्या एक ही अनुपात में बढ़ते हैं।
- माध्य से लिए गए विचलनों का बीजगणितीय योग सदैव शून्य होता है — यही उसे संतुलन-बिंदु बनाता है।
- हर प्रेक्षण में समान राशि जोड़ने पर माध्य उतना ही बढ़ता है, और हर प्रेक्षण को किसी संख्या से गुणा करने पर माध्य भी उतने ही गुना हो जाता है।
- इस प्रश्न की शर्त (S + x)/4 = S/3 से सीधे x = S/3 निकलता है, अर्थात् चौथी राशि पहली तीन का माध्य है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- 'चार राशियाँ' पढ़कर चार से भाग देने वाला विकल्प चुन लेना, जबकि भाग योगफल पर नहीं, माध्य निकालते समय गणना पर लगता है।
- प्रश्न को लंबी गणना का मानकर बैठ जाना, जबकि यह माध्य के एक गुणधर्म का सीधा प्रयोग है।
- योगफल और माध्य को आपस में बदल देना — यही भ्रम तीनों ग़लत विकल्पों का आधार है।
यही गुणधर्म कई रूपों में आता है — कोई प्रेक्षण जोड़ने या हटाने पर नया माध्य, ग़लत लिखे गए प्रेक्षण को सुधारने पर माध्य में परिवर्तन, दो समूहों को मिलाने पर संयुक्त माध्य, और किसी अज्ञात प्रेक्षण का मान निकालना। हर बार आधार यही है कि माध्य योग और संख्या का अनुपात है, इसलिए पहले योग निकालिए, फिर बदलाव लागू कीजिए। बीजगणितीय विकल्पों वाले प्रश्नों में छोटा-सा संख्यात्मक उदाहरण लेकर चारों विकल्प परख लेना सबसे तेज़ रीति है।
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अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी समूह की n संख्याओं का समान्तर माध्य m है । यदि एक और संख्या जोड़ने पर भी माध्य m ही रहता है, तो जोड़ी गई संख्या क्या है ?
- (a)n × m
- (b)m
- (c)m ÷ n
- (d)m ÷ (n + 1)
उत्तर(b) m — माध्य के बराबर प्रेक्षण जोड़ने पर योग और संख्या उसी अनुपात में बढ़ते हैं, इसलिए माध्य अपरिवर्तित रहता है।