उन युक्तियों (डिवाइसेज़) को, जो किसी कम्प्यूटर-तंत्र में जैसे ही संलग्न की जाएँ, कार्य करने लगती हैं, किस रूप में वर्णित किया जाता है ?
- (a)आपात गमागमन (हॉट स्वैपिंग)
- (b)बे स्वैप
- (c)प्लग-एन-प्ले
- (d)USB गमागमन (स्वैपिंग)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) प्लग-एन-प्ले — यह पद ठीक उसी व्यवहार का नाम है जो स्टेम में वर्णित है : युक्ति को जोड़ते ही तंत्र उसे स्वयं पहचान ले, आवश्यक चालक सॉफ़्टवेयर लगा ले, और वह बिना किसी अलग विन्यास के काम करने लगे।
इस विचार का महत्त्व समझने के लिए उससे पहले की स्थिति देखिए। आरम्भिक कंप्यूटरों में कोई नई युक्ति जोड़ने पर उपयोगकर्ता को स्वयं संसाधन तय करने पड़ते थे — कौन-सा व्यवधान-संकेत, कौन-सा पता-परास, कौन-सा चालक — और प्रायः पट्टिका पर छोटे जंपर तक बदलने पड़ते थे। दो युक्तियाँ एक ही संसाधन माँग बैठें तो टकराव हो जाता था। प्लग-एन-प्ले का उद्देश्य यही झंझट समाप्त करना था : युक्ति स्वयं अपनी पहचान बताती है, प्रचालन तंत्र उसके लिए संसाधन नियत करता है और उपयुक्त चालक ढूँढ़ लेता है।
आज यह व्यवहार इतना सामान्य हो गया है कि उसका अलग नाम याद नहीं रहता — कुंजी-पटल, चूहा, पेन-ड्राइव, मुद्रक, कैमरा; अधिकांश युक्तियाँ जोड़ते ही चल पड़ती हैं। यही सार्वभौमिक सीरियल बस जैसे मानकों की सफलता का बड़ा कारण भी है, जिनमें पहचान और विन्यास की यह प्रक्रिया मानक का ही अंग है।
शेष तीन विकल्पों में दो वास्तविक तकनीकी पद हैं और एक गढ़ा हुआ लगता है, पर उनमें से कोई भी इस परिभाषा को नहीं छूता। ध्यान देने योग्य भेद यह है कि ‘तंत्र चालू रहते हुए युक्ति जोड़ना या हटाना’ और ‘जोड़ते ही युक्ति का बिना विन्यास के काम करने लगना’ दो अलग-अलग गुण हैं। आधुनिक युक्तियों में प्रायः दोनों साथ मिलते हैं, इसलिए वे एक जैसे लगते हैं — पर प्रश्न जिस गुण का वर्णन कर रहा है, उसका नाम प्लग-एन-प्ले है, और इसलिए उत्तर (c) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)आपात गमागमन (हॉट स्वैपिंग) — हॉट स्वैपिंग वास्तविक और उपयोगी तकनीक है, पर उसका अर्थ अलग है : तंत्र को बंद किए बिना, चलती अवस्था में ही किसी युक्ति को जोड़ना या हटाना। इसका महत्त्व वहाँ है जहाँ सेवा रुकनी नहीं चाहिए — जैसे सर्वर की चकतियाँ या बिजली-आपूर्ति इकाइयाँ, जिन्हें चलते तंत्र में बदला जा सकता है। यह ‘कब’ का प्रश्न हल करती है, ‘कैसे पहचानी जाए’ का नहीं। स्टेम में जो बात कही गई है — जुड़ते ही काम करने लगना — वह पहचान और स्वतः विन्यास की बात है, इसलिए यहाँ यह विकल्प निकट होकर भी सही नहीं है।
- (b)बे स्वैप — बे स्वैप उस व्यवस्था को कहते हैं जिसमें कंप्यूटर के किसी नियत खाँचे में लगी युक्ति को दूसरी युक्ति से बदला जाता है — पुराने संवहनीय कंप्यूटरों में एक ही खाँचे में कभी चकती और कभी अतिरिक्त बैटरी लगाने की सुविधा इसी का उदाहरण है। यह भौतिक रचना से जुड़ा पद है, स्वतः पहचान और विन्यास से नहीं। परीक्षा की दृष्टि से इसे याद रखने का कारण यही है कि यह सुनने में तकनीकी लगता है और उसी भरोसे चुन लिया जाता है।
- (d)USB गमागमन (स्वैपिंग) — USB गमागमन कोई प्रचलित तकनीकी पद नहीं है; यह दो परिचित शब्दों को जोड़कर बनाया गया विकल्प है। सार्वभौमिक सीरियल बस स्वयं एक मानक है, जिसमें युक्ति की पहचान, संसाधनों का नियतन और चालक का चयन — सब मानक के अनुसार होते हैं, इसीलिए USB युक्तियाँ जोड़ते ही चल पड़ती हैं। पर उस व्यवहार का नाम प्लग-एन-प्ले है, ‘USB स्वैपिंग’ नहीं। ऐसे गढ़े हुए विकल्प उस पाठक को पकड़ते हैं जो परिचित संक्षेप देखकर आश्वस्त हो जाता है।
अवधारणा
प्लग-एन-प्ले किसी एक कल-पुर्ज़े का नाम नहीं, बल्कि कई परतों के सहयोग से बनी एक व्यवस्था है। युक्ति में अपनी पहचान बताने वाली सूचना होती है; बस या द्वार उस सूचना को पढ़ने का तरीक़ा देते हैं; प्रचालन तंत्र उस पहचान से मेल खाता चालक ढूँढ़ता या माँगता है; और अंत में उसके लिए आवश्यक संसाधन नियत कर देता है ताकि दूसरी युक्तियों से टकराव न हो।
इसे तीन निकट के पदों से अलग रखना चाहिए। पहला, हॉट स्वैपिंग — चलते तंत्र में युक्ति जोड़ना या हटाना। दूसरा, चालक सॉफ़्टवेयर — वह प्रोग्राम जो प्रचालन तंत्र और युक्ति के बीच अनुवादक का काम करता है; प्लग-एन-प्ले उसे स्वयं खोजता है, उसकी आवश्यकता समाप्त नहीं करता। तीसरा, बस-मानक — जैसे सार्वभौमिक सीरियल बस, जो भौतिक और तार्किक नियम तय करता है।
इसका व्यावहारिक महत्त्व केवल सुविधा नहीं है। स्वतः विन्यास से संसाधन-टकराव की वह पूरी श्रेणी समाप्त हो जाती है जो कभी नए उपकरण लगाने की सबसे बड़ी बाधा थी, और इससे बाह्य युक्तियों का बाज़ार भी खुला, क्योंकि उपयोगकर्ता से तकनीकी विन्यास की अपेक्षा नहीं रह गई।
कंप्यूटर और जालक्रम से जुड़े प्रश्न इस प्रश्नपत्र में लगभग ग्यारह हैं, और उनमें से कई परिभाषा-प्रश्न हैं जहाँ ग़लत विकल्प भी वास्तविक तकनीकी वस्तुएँ होती हैं। यह उसी वर्ग का प्रश्न है : चार में से दो विकल्प असली पद हैं, एक गढ़ा हुआ है, और सही उत्तर वह है जो स्टेम की परिभाषा से ठीक-ठीक मेल खाता है।
ऐसे प्रश्नों की तैयारी में सबसे उपयोगी अभ्यास यह है कि हर पद के साथ एक पंक्ति का अंतर याद रखा जाए — यह क्या करता है, और उससे मिलता-जुलता पद क्या करता है। हॉट स्वैपिंग और प्लग-एन-प्ले की जोड़ी इसका अच्छा उदाहरण है : एक समय का प्रश्न हल करता है, दूसरा पहचान का।
हिन्दी स्तंभ में तीन विकल्पों में हिन्दी पद के बाद कोष्ठक में अंग्रेज़ी का देवनागरी लिप्यन्तरण जोड़ा गया है, जबकि दो विकल्प केवल लिप्यन्तरण हैं — ये कोष्ठक अंग्रेज़ी स्तंभ में नहीं हैं।
मुख्य तथ्य
- प्लग-एन-प्ले का अर्थ है युक्ति जोड़ते ही तंत्र द्वारा उसकी स्वतः पहचान, संसाधनों का नियतन और उपयुक्त चालक का चयन।
- इससे पहले उपयोगकर्ता को स्वयं व्यवधान-संकेत, पता-परास और चालक तय करने पड़ते थे, जिससे संसाधन-टकराव आम थे।
- हॉट स्वैपिंग का अर्थ है तंत्र बंद किए बिना, चलती अवस्था में युक्ति जोड़ना या हटाना — जैसे सर्वर की चकतियाँ बदलना।
- बे स्वैप का सम्बन्ध कंप्यूटर के किसी नियत खाँचे में एक युक्ति के स्थान पर दूसरी लगाने से है।
- सार्वभौमिक सीरियल बस जैसे मानकों में पहचान और विन्यास की प्रक्रिया मानक का ही अंग है, इसलिए ऐसी युक्तियाँ जोड़ते ही चल पड़ती हैं।
- प्लग-एन-प्ले चालक सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता समाप्त नहीं करता, केवल उसे खोजने और लगाने का काम स्वयं कर लेता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- हॉट स्वैपिंग और प्लग-एन-प्ले को एक मान लेना — पहला ‘कब’ का प्रश्न हल करता है, दूसरा ‘पहचान और विन्यास’ का।
- परिचित संक्षेप देखकर गढ़े हुए विकल्प को चुन लेना, जैसे किसी मानक के नाम के साथ कोई क्रिया जोड़ देना।
- यह मान लेना कि प्लग-एन-प्ले में चालक सॉफ़्टवेयर की आवश्यकता ही नहीं रहती; वह उसे स्वयं ढूँढ़ता है।
परिभाषा वाले तकनीकी प्रश्नों में सबसे तेज़ तरीक़ा यह है कि स्टेम में दिए गए व्यवहार का सबसे विशिष्ट शब्द पकड़ा जाए। यहाँ वह शब्द है ‘जैसे ही संलग्न की जाएँ’ — यानी जोड़ने के तुरन्त बाद, बिना किसी अतिरिक्त काम के। इसके बाद हर विकल्प से पूछिए कि क्या वह ठीक इसी बात का नाम है। ऐसे प्रश्नों में विकल्प वास्तविक पदों से भरे होते हैं, इसलिए ‘यह असली नहीं है’ जैसी कसौटी काम नहीं आती; काम आती है ‘यह ठीक इसी व्यवहार का नाम है या किसी और का’ वाली कसौटी। इसी पत्र में क्लाउड कंप्यूटिंग और स्पैम जैसे प्रश्न भी इसी प्रकार के हैं।
संबंधित PYQ
EPFO_APFC_2016_Q67खोलें व हल करें →SPAM in a system (e-mail) is
- (a) A message distributed indiscriminately
- (b) A search engine
- (c) An activity of the user
- (d) A command initiated by the sender
उत्तर(a) A message distributed indiscriminately
इसी प्रश्नपत्र का स्पैम वाला परिभाषा-प्रश्न, जहाँ भी चारों विकल्प वास्तविक तकनीकी वस्तुएँ हैं।
EPFO_APFC_2016_Q78खोलें व हल करें →Which one of the following software applications would be the most appropriate for performing numerical and statistical calculations ?
- (a) Database
- (b) Spreadsheet
- (c) Graphics package
- (d) Document processor
उत्तर(b) Spreadsheet
इसी प्रश्नपत्र का वह प्रश्न जो सांख्यिकीय परिकलनों के लिए उपयुक्त सॉफ़्टवेयर अनुप्रयोग पूछता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
तंत्र को बंद किए बिना, चलती अवस्था में किसी युक्ति को जोड़ने या हटाने की सुविधा को क्या कहते हैं ?
- (a)प्लग-एन-प्ले
- (b)हॉट स्वैपिंग
- (c)बूटिंग
- (d)कैशिंग
उत्तर(b) हॉट स्वैपिंग
- practice — not a real PYQ
प्रचालन तंत्र और किसी युक्ति के बीच अनुवादक का काम करने वाला प्रोग्राम क्या कहलाता है ?
- (a)संकलक
- (b)चालक
- (c)दुभाषिया
- (d)कर्नेल
उत्तर(b) चालक