किसी वस्तु को ऊर्ध्वाधर उठाने की तुलना में, उसी वस्तु को किसी आनत तल का प्रयोग कर एक दी गई ऊँचाई तक उठाने में, किस एक चीज़ में कमी होती है ?
- (a)लगाए जाने वाले बल में
- (b)अपेक्षित कार्य में
- (c)तय की गई दूरी में
- (d)घर्षण बल में
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) लगाए जाने वाले बल में — आनत तल एक सरल मशीन है, और हर सरल मशीन की तरह वह काम को कम नहीं करती; वह उसी काम को कम बल से, पर अधिक दूरी पर, करा देती है।
वस्तु को सीधे ऊपर उठाने में लगाया गया बल कम से कम उसके भार के बराबर होना चाहिए। ढलान पर चढ़ाने में केवल भार का वह घटक विरोध करता है जो ढलान के अनुदिश है, और वह घटक पूरे भार से छोटा होता है — ढलान जितनी कम तीव्र होगी, यह घटक उतना ही छोटा होगा। इसीलिए भारी पीपे ट्रक में चढ़ाने के लिए तख़्ता लगाया जाता है और पहाड़ी सड़कें सीधी चढ़ने के बजाय घुमावदार बनाई जाती हैं।
इसकी क़ीमत दूरी में चुकानी पड़ती है। ऊँचाई वही रहती है, पर तय की गई दूरी बढ़ जाती है, क्योंकि ढलान की लंबाई ऊर्ध्वाधर ऊँचाई से अधिक होती है। यही सरल मशीनों का मूल सौदा है : बल घटा, दूरी बढ़ी।
कार्य के हिसाब से देखिए तो यह और स्पष्ट हो जाता है। किसी वस्तु को h ऊँचाई तक उठाने में उसकी स्थितिज ऊर्जा में जो वृद्धि होती है वह केवल ऊँचाई पर निर्भर करती है, रास्ते पर नहीं। इसलिए घर्षण की उपेक्षा करने पर आनत तल से किया गया कार्य उतना ही रहता है जितना सीधे उठाने में; और यदि घर्षण हो, जैसा वास्तविक ढलानों पर होता है, तो कुल किया गया कार्य बढ़ जाता है, क्योंकि कुछ ऊर्जा घर्षण के विरुद्ध व्यय होती है।
घर्षण की स्थिति भी उलटी है। वस्तु को सीधे ऊपर उठाने में वह किसी सतह पर सरकती नहीं, इसलिए सर्पी घर्षण का प्रश्न ही नहीं उठता; ढलान पर सरकाने में सतह के साथ स्पर्श रहता है और घर्षण आता है।
इसलिए चार में से केवल एक राशि घटती है — लगाया जाने वाला बल — और उत्तर (a) है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)अपेक्षित कार्य में — अपेक्षित कार्य घटता नहीं। किसी वस्तु को किसी ऊँचाई तक ले जाने में उसकी स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि केवल ऊँचाई से तय होती है, मार्ग से नहीं — यही गुरुत्व-बल के संरक्षी होने का अर्थ है। इसलिए आदर्श स्थिति में, जहाँ घर्षण न हो, कार्य दोनों रास्तों में समान रहता है : ढलान पर बल कम लगता है पर दूरी उतनी ही अधिक तय होती है, और दोनों का गुणनफल वही बना रहता है। वास्तविक ढलान पर घर्षण के कारण कुल कार्य उलटे बढ़ ही जाता है। सरल मशीनें कार्य बचाने के लिए नहीं, बल बाँटने के लिए होती हैं।
- (c)तय की गई दूरी में — तय की गई दूरी घटती नहीं, बढ़ती है, और यही आनत तल की क़ीमत है। ढलान की लंबाई सदा उस ऊर्ध्वाधर ऊँचाई से अधिक होती है जिस तक वस्तु उठानी है — जितनी कम तीव्र ढलान, उतनी लंबी चढ़ाई और उतना ही कम आवश्यक बल। इसी सम्बन्ध को यांत्रिक लाभ कहा जाता है : ढलान की लंबाई और ऊँचाई का अनुपात ही बताता है कि बल कितने गुना कम लगेगा। इसलिए यह विकल्प उसी राशि को घटता बता रहा है जो वास्तव में बढ़ती है।
- (d)घर्षण बल में — घर्षण बल भी घटता नहीं। सीधे ऊपर उठाने में वस्तु किसी सतह पर सरकती नहीं, इसलिए वहाँ सर्पी घर्षण होता ही नहीं; ढलान पर सरकाने में वस्तु और सतह के बीच स्पर्श बना रहता है और अभिलंब प्रतिक्रिया के अनुपात में घर्षण बल कार्य करता है, जो गति का विरोध करता है और अतिरिक्त बल तथा अतिरिक्त ऊर्जा माँगता है। यही कारण है कि व्यवहार में ढलान की सतह चिकनी रखी जाती है या पहिए और रोलर लगाए जाते हैं — ताकि आनत तल से मिला लाभ घर्षण में खप न जाए।
अवधारणा
आनत तल छह चिरप्रतिष्ठित सरल मशीनों में से एक है, और सभी सरल मशीनों का सिद्धांत एक ही है : वे कार्य कम नहीं करतीं, बल और दूरी का सौदा कराती हैं। कार्य = बल × दूरी; यदि उसी कार्य को कम बल से करना है तो दूरी बढ़ानी पड़ेगी।
आनत तल पर वस्तु के भार को दो घटकों में बाँटकर देखा जाता है : एक ढलान के अनुदिश, जो वस्तु को नीचे खींचता है और जिसके विरुद्ध बल लगाना पड़ता है; दूसरा ढलान के लंबवत, जो अभिलंब प्रतिक्रिया से संतुलित होता है और घर्षण का निर्धारक बनता है। ढलान जितनी कम तीव्र, पहला घटक उतना छोटा और आवश्यक बल उतना कम।
यांत्रिक लाभ इसी को संख्या में कहता है : आदर्श स्थिति में वह ढलान की लंबाई और ऊँचाई का अनुपात है। एक मीटर ऊँचाई तक चार मीटर लंबी ढलान से चढ़ाने पर बल लगभग चौथाई रह जाता है और दूरी चौगुनी हो जाती है।
व्यावहारिक उदाहरण चारों ओर हैं : पहाड़ी सड़कों के मोड़, दिव्यांगजनों के लिए बनी रैंप, ट्रक में सामान चढ़ाने का तख़्ता, और पेच — जो वस्तुतः एक बेलन पर लिपटा हुआ आनत तल ही है।
भौतिकी के इस भाग से प्रश्न प्रायः दो रूपों में आते हैं : या तो सरल मशीन का यांत्रिक लाभ पूछा जाता है, या यह पूछा जाता है कि किसी व्यवस्था में कौन-सी राशि बदलती है और कौन-सी नहीं। यह प्रश्न दूसरे रूप का है, और उसका उत्तर ऊर्जा-संरक्षण के सामान्य नियम से निकलता है, किसी सूत्र की गणना से नहीं।
ऐसे प्रश्नों में एक व्यावहारिक कसौटी काम आती है : जो राशि केवल आरम्भिक और अंतिम स्थिति पर निर्भर हो, वह मार्ग बदलने से नहीं बदलती। गुरुत्व के विरुद्ध किया गया कार्य ऐसी ही राशि है, इसलिए उसे विकल्पों में देखते ही सावधान हो जाना चाहिए।
हिन्दी स्तंभ में इस प्रश्न की वाक्य-रचना अंग्रेज़ी से भिन्न है : हिन्दी में पहले तुलना आती है और फिर आनत तल, तथा वाक्य पूर्ण प्रश्न के रूप में समाप्त होता है, जबकि अंग्रेज़ी स्तंभ का वाक्य अधूरा छूटकर विकल्पों में पूरा होता है। अर्थ दोनों में एक ही है।
इस प्रश्नपत्र में सामान्य विज्ञान के लगभग पाँच प्रश्न हैं और उनमें भौतिकी के दो — यह और तरंग-गति वाला।
मुख्य तथ्य
- आनत तल एक सरल मशीन है; वह आवश्यक बल घटाती है, किया गया कार्य नहीं।
- ढलान पर वस्तु के भार का केवल ढलान-अनुदिश घटक विरोध करता है, जो पूरे भार से छोटा होता है।
- बल घटने की क़ीमत दूरी में चुकानी पड़ती है, क्योंकि ढलान की लंबाई ऊर्ध्वाधर ऊँचाई से अधिक होती है।
- गुरुत्व के विरुद्ध किया गया कार्य केवल ऊँचाई पर निर्भर करता है, मार्ग पर नहीं; घर्षण होने पर कुल कार्य बढ़ जाता है।
- आदर्श यांत्रिक लाभ = ढलान की लंबाई ÷ ऊँचाई, इसलिए ढलान जितनी कम तीव्र, बल उतना कम।
- सीधे ऊपर उठाने में वस्तु किसी सतह पर सरकती नहीं, इसलिए वहाँ सर्पी घर्षण का प्रश्न ही नहीं उठता।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- यह मान लेना कि सरल मशीन से कार्य भी बच जाता है, जबकि वह केवल बल और दूरी का सौदा कराती है।
- यह भूल जाना कि ढलान पर तय की गई दूरी बढ़ती है — यही बल घटने की क़ीमत है।
- घर्षण को आनत तल का लाभ मान लेना, जबकि वह अतिरिक्त बाधा है और ऊर्जा का व्यय बढ़ाता है।
‘किसमें कमी होती है’ जैसे प्रश्नों में सबसे भरोसेमंद तरीक़ा यह है कि हर विकल्प के आगे एक शब्द में लिखा जाए — बढ़ती है, घटती है, या अपरिवर्तित रहती है। यहाँ चार में से एक घटती है, एक बढ़ती है, एक अपरिवर्तित रहती है और एक नई ही उत्पन्न होती है; यह वर्गीकरण करते ही उत्तर सामने आ जाता है। दूसरा सुझाव यह है कि ऐसे प्रश्नों में सदा ऊर्जा की दृष्टि से जाँच कीजिए, क्योंकि सरल मशीनों के प्रश्न प्रायः इसी भ्रम पर बनते हैं कि वे ऊर्जा बचाती हैं। भौतिकी के प्रश्न इस पत्र में गिने-चुने हैं, पर वे मौलिक अवधारणाओं से ही आते हैं।
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- (a) SHM with the same angular frequency as that of the wave
- (b) SHM with a different frequency than that of the wave
- (c) Uniform circular motion with the same angular speed as that of the wave
- (d) Uniform circular motion with a different angular speed than that of the wave
उत्तर(a) SHM with the same angular frequency as that of the wave
इसी प्रश्नपत्र का तरंग-गति वाला प्रश्न — भौतिकी के उसी खंड से, जहाँ भी उत्तर अवधारणा से निकलता है, गणना से नहीं।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
किसी आनत तल का आदर्श यांत्रिक लाभ किससे मिलता है ?
- (a)ढलान की लंबाई और ऊँचाई का अनुपात
- (b)ऊँचाई और ढलान की लंबाई का अनुपात
- (c)वस्तु के भार और ऊँचाई का गुणनफल
- (d)घर्षण गुणांक
उत्तर(a) ढलान की लंबाई और ऊँचाई का अनुपात
- practice — not a real PYQ
घर्षण की उपेक्षा करने पर किसी वस्तु को दी गई ऊँचाई तक ले जाने में किया गया कार्य किस पर निर्भर करता है ?
- (a)चुने गए मार्ग पर
- (b)केवल ऊँचाई पर
- (c)ढलान के कोण पर
- (d)लगाए गए बल पर
उत्तर(b) केवल ऊँचाई पर