आकाशवाणी (आल इंडिया रेडियो) के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यह प्रसार भारती बोर्ड द्वारा नियंत्रित है । 2. इसे यह नाम 1936 में दिया गया । 3. यह DTH सेवाएँ प्रदान नहीं करती । 4. FM रेनबो और FM गोल्ड इसके सहायक चैनल हैं । उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं ?
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 3 और 4
- (c)केवल 1, 2 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — C, (c) केवल 1, 2 और 4 — चारों कथनों को अलग-अलग परखिए; तीन खरे उतरते हैं और एक निषेधात्मक कथन के कारण गिर जाता है।
कथन 1 — यह प्रसार भारती बोर्ड द्वारा नियंत्रित है। सही। प्रसार भारती अधिनियम के अंतर्गत बना यह निगम 1997 में अस्तित्व में आया और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन उसके दो घटक बनाए गए। इससे पहले दोनों सीधे सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन थे; निगम बनाने का उद्देश्य लोक प्रसारक को दैनंदिन सरकारी नियंत्रण से कुछ दूरी देना था।
कथन 2 — इसे यह नाम 1936 में दिया गया। सही। इससे पहले यह सेवा भारतीय राज्य प्रसारण सेवा कहलाती थी; 1936 में उसका नाम ऑल इंडिया रेडियो हुआ। हिन्दी नाम ‘आकाशवाणी’ आगे चलकर, स्वतंत्रता के बाद अपनाया गया।
कथन 3 — यह DTH सेवाएँ प्रदान नहीं करती। ग़लत, और यही निर्णायक कथन है। आकाशवाणी के चैनल लोक प्रसारक के उपग्रह-आधारित प्रत्यक्ष-गृह मंच पर उपलब्ध रहते हैं, यानी श्रोता छोटी डिश और सेट-टॉप बॉक्स से इन्हें सुन सकते हैं। इसलिए यह निषेधात्मक कथन तथ्य के विरुद्ध जाता है।
कथन 4 — FM रेनबो और FM गोल्ड इसके सहायक चैनल हैं। सही। ये दोनों आकाशवाणी के ही FM चैनल हैं — एक मनोरंजन-प्रधान और दूसरा समाचार तथा सामयिकी की ओर झुका हुआ।
अतः कथन 1, 2 और 4 सही हैं, यानी विकल्प (c)।
व्यावहारिक सुझाव : ऐसी सूचियों में सबसे पहले निषेधात्मक कथन को पकड़िए। ‘नहीं करती’ जैसे कथन को सही मानने के लिए यह सिद्ध करना पड़ता है कि वह सेवा कहीं भी नहीं दी जाती — और किसी बड़े लोक प्रसारक के बारे में ऐसी पूर्ण अस्वीकृति प्रायः टिकती नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1, 2 और 3 — यह समुच्चय कथन 3 को स्वीकार करके FM चैनलों वाले कथन 4 को छोड़ देता है, और दोनों निर्णय उलटे हैं। FM रेनबो और FM गोल्ड आकाशवाणी के ही चैनल हैं, यह जानकारी सामान्य श्रवण-अनुभव से भी पुष्ट हो जाती है। दूसरी ओर, प्रत्यक्ष-गृह मंच पर आकाशवाणी के चैनल उपलब्ध हैं, इसलिए ‘DTH सेवाएँ प्रदान नहीं करती’ वाला कथन नहीं टिकता। इस विकल्प को चुनने वाला प्रायः निषेधात्मक कथन की जाँच किए बिना उसे मान लेता है।
- (b)केवल 3 और 4 — यह विकल्प उन दो कथनों को छोड़ देता है जो सबसे पक्के हैं — प्रसार भारती का नियंत्रण और 1936 में नामकरण — और उस कथन को रख लेता है जो ग़लत है। प्रसार भारती की स्थापना और आकाशवाणी का उसके अधीन आना लोक प्रसारण के इतिहास का आधारभूत तथ्य है, और नाम-परिवर्तन की तिथि भी मानक जानकारी है। जब दो कथनों के बारे में निश्चितता हो, तब उन्हें बाहर करने वाला कोई भी समुच्चय पहले ही कट जाना चाहिए।
- (d)1, 2, 3 और 4 — चारों कथनों को सही मानने का अर्थ है निषेधात्मक कथन 3 को भी स्वीकार करना, जो तथ्य के विरुद्ध है। कथन-सूची वाले प्रश्नों में ‘सब सही’ का विकल्प तभी चुनना चाहिए जब हर कथन अलग-अलग परखा जा चुका हो; एक भी निषेधात्मक कथन अपरखा रह जाए तो यह विकल्प सबसे बड़ा जोखिम बन जाता है। यहाँ शेष तीन कथन सही हैं, इसलिए यह विकल्प ठीक एक कथन की दूरी पर खड़ा है — और वही दूरी उत्तर तय करती है।
अवधारणा
आकाशवाणी भारत का लोक रेडियो प्रसारक है और उसका इतिहास तीन पड़ावों में देखा जा सकता है। पहला पड़ाव औपनिवेशिक काल का है, जब प्रसारण भारतीय राज्य प्रसारण सेवा के नाम से चलता था और 1936 में उसका नाम ऑल इंडिया रेडियो हुआ। दूसरा पड़ाव स्वतंत्रता के बाद का है, जब हिन्दी नाम आकाशवाणी अपनाया गया, विविध भारती जैसी सेवाएँ शुरू हुईं और जालक्रम देश भर में फैला। तीसरा पड़ाव 1997 का है, जब प्रसार भारती अधिनियम प्रभावी हुआ और आकाशवाणी तथा दूरदर्शन एक स्वायत्त निगम के घटक बने।
संरचना की दृष्टि से आकाशवाणी के कई प्रकार के चैनल हैं : प्राथमिक चैनल, विविध भारती, समाचार सेवा प्रभाग, बाह्य सेवा प्रभाग जो विदेशों के लिए प्रसारण करता है, और FM चैनल, जिनमें FM रेनबो तथा FM गोल्ड आते हैं। प्रसारण के माध्यम भी एक से अधिक हैं — मध्यम तरंग, लघु तरंग, FM, उपग्रह-आधारित प्रत्यक्ष-गृह मंच और इंटरनेट पर धारा-प्रसारण।
लोक प्रसारक होने के नाते इसका दायित्व केवल मनोरंजन नहीं है; शिक्षा, कृषि-सूचना, मौसम, आपदा-चेतावनी और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच इसके घोषित उद्देश्यों में हैं। यही बात इसे व्यावसायिक रेडियो से अलग करती है।
प्रसार भारती की स्थापना भारतीय प्रसारण के इतिहास का महत्त्वपूर्ण मोड़ है। इससे पहले सरकारी विभाग के रूप में चलने वाले प्रसारक की स्वायत्तता पर लंबी बहस चली थी, और निगम बनाने की सिफ़ारिशें कई समितियों ने की थीं। अधिनियम बनने और उसके प्रभावी होने के बीच कुछ वर्षों का अंतर रहा, इसलिए तिथियों के प्रश्न में सावधानी चाहिए — अधिनियम पहले बना और निगम बाद में अस्तित्व में आया।
निजी FM रेडियो के विस्तार के बाद आकाशवाणी की भूमिका पर नए प्रश्न उठे, क्योंकि निजी चैनलों को लंबे समय तक स्वयं समाचार प्रसारित करने की अनुमति नहीं थी और समाचार के क्षेत्र में लोक प्रसारक की स्थिति विशिष्ट बनी रही।
परीक्षा की दृष्टि से इस विषय पर प्रश्न तीन कोनों से आते हैं : संस्थागत ढाँचा, नाम और तिथियाँ, और चैनल तथा सेवाएँ। इस प्रश्न में तीनों एक साथ आ गए हैं। ध्यान दीजिए कि यहाँ सूची के बाद सीधे प्रश्न-वाक्य है और कोई कूट-पंक्ति नहीं छपी।
मुख्य तथ्य
- आकाशवाणी और दूरदर्शन प्रसार भारती के घटक हैं; यह निगम प्रसार भारती अधिनियम के अंतर्गत 1997 में अस्तित्व में आया।
- भारतीय राज्य प्रसारण सेवा का नाम 1936 में ऑल इंडिया रेडियो किया गया, जबकि हिन्दी नाम आकाशवाणी स्वतंत्रता के बाद अपनाया गया।
- FM रेनबो और FM गोल्ड आकाशवाणी के ही FM चैनल हैं — एक मनोरंजन-प्रधान और दूसरा समाचार तथा सामयिकी की ओर झुका हुआ।
- आकाशवाणी के चैनल लोक प्रसारक के उपग्रह-आधारित प्रत्यक्ष-गृह मंच पर भी उपलब्ध रहते हैं, इसलिए ‘DTH सेवाएँ नहीं देती’ वाला कथन नहीं टिकता।
- इसकी सेवाओं में विविध भारती, समाचार सेवा प्रभाग और विदेशों के लिए बाह्य सेवा प्रभाग सम्मिलित हैं।
- प्रसार भारती के गठन का उद्देश्य लोक प्रसारक को दैनंदिन सरकारी नियंत्रण से कुछ स्वायत्तता देना था।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- निषेधात्मक कथन को बिना जाँचे स्वीकार कर लेना; उसे सही ठहराने के लिए पूर्ण अस्वीकृति सिद्ध करनी पड़ती है।
- प्रसार भारती अधिनियम बनने और निगम के अस्तित्व में आने की तिथियाँ आपस में बदल देना।
- ‘आकाशवाणी’ नाम अपनाने की तिथि को 1936 के अंग्रेज़ी नामकरण के साथ मिला देना।
संस्थाओं पर आधारित कथन-सूची में एक क्रम बहुत काम आता है : पहले निषेधात्मक कथन, फिर तिथि वाला कथन, फिर संरचना वाले कथन। निषेधात्मक कथन इसलिए पहले, कि उसे सही सिद्ध करने के लिए पूर्ण अस्वीकृति चाहिए होती है और वह प्रायः टूट जाता है; तिथि वाला कथन इसलिए कि वही सबसे अधिक बदला जाता है। यहाँ इसी क्रम से चलने पर तीन-कथन वाला समुच्चय सीधे निकल आता है। ऐसे प्रश्नों की तैयारी में संस्था के नाम-परिवर्तन, स्थापना-वर्ष और प्रमुख सेवाओं की छोटी सूची बना लेना पर्याप्त रहता है।
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उत्तर(c) Local, Wide and Metropolitan
इसी प्रश्नपत्र का LAN, WAN और MAN वाला प्रश्न — संचार और प्रौद्योगिकी की उसी कड़ी से।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
आकाशवाणी और दूरदर्शन किस निगम के घटक हैं ?
- (a)भारतीय जनसंचार संस्थान
- (b)प्रसार भारती
- (c)राष्ट्रीय फ़िल्म विकास निगम
- (d)भारतीय प्रेस परिषद्
उत्तर(b) प्रसार भारती
- practice — not a real PYQ
‘ऑल इंडिया रेडियो’ नाम अपनाए जाने से पहले यह सेवा किस नाम से चलती थी ?
- (a)आकाशवाणी
- (b)विविध भारती
- (c)भारतीय राज्य प्रसारण सेवा
- (d)समाचार सेवा प्रभाग
उत्तर(c) भारतीय राज्य प्रसारण सेवा