निम्नलिखित कार्यक्रमों पर विचार कीजिए : 1. ऋण सम्बद्ध पूँजी उपदान योजना (क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी स्कीम) 2. सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम (माइक्रो फाइनैंस प्रोग्राम) 3. राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता कार्यक्रम (नेशनल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्पिटिटिवनेस प्रोग्राम) 4. समूह विकास कार्यक्रम (क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम) उपर्युक्त कार्यक्रमों में कौन-सी सर्व-सामान्य विशेषता है ?
- (a)वे कृषि के सुधार से सम्बन्धित हैं
- (b)वे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से सम्बन्धित कार्यक्रम हैं
- (c)वे बड़े पैमाने के उद्योगों के सुधार के लिए कार्यक्रम हैं
- (d)वे पारंपरिक कुटीर उद्योगों के सुधार के लिए कार्यक्रम हैं
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) वे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों से सम्बन्धित कार्यक्रम हैं — चारों नाम एक ही मंत्रालय के कार्यक्रमों की सूची से आते हैं, और यही उनकी साझी विशेषता है।
एक-एक को देखिए।
ऋण सम्बद्ध पूँजी उपदान योजना का उद्देश्य सूक्ष्म और लघु उद्यमों में प्रौद्योगिकी उन्नयन है : उद्यम बैंक या वित्तीय संस्था से मशीन ख़रीदने के लिए ऋण ले, तो उस संस्थागत वित्त के एक हिस्से पर सरकार पूँजी उपदान देती है। ‘ऋण सम्बद्ध’ का अर्थ ही यह है कि उपदान ऋण के साथ जुड़ा है, अलग से नक़द नहीं मिलता।
सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम इसी मंत्रालय की वह पहल है जो सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के माध्यम से बहुत छोटे उद्यमियों तक ऋण पहुँचाने में सहायता करती है, और इसमें भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की भागीदारी रही है।
राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता कार्यक्रम एक छत्र-कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत कई घटक चलते हैं — दुबला विनिर्माण, अभिकल्प में सहायता, गुणवत्ता प्रबंध, बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता, ऊष्मायन और विपणन सहायता — और सबका लक्ष्य छोटे उद्यमों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना है।
समूह विकास कार्यक्रम सूक्ष्म और लघु उद्यमों के समूहों के लिए है : एक ही जगह जमा छोटे उद्योगों के लिए साझा सुविधा केंद्र, परीक्षण-प्रयोगशालाएँ और आधारिक संरचना बनाना, क्योंकि अकेले किसी छोटे उद्यम की सामर्थ्य इतनी नहीं होती।
चारों में साझा यही है कि उनका लक्ष्य-समूह छोटे उद्यम हैं — कहीं ऋण के मोर्चे पर, कहीं प्रौद्योगिकी के, कहीं साझा आधारिक संरचना के। इसलिए उत्तर (b) है। ध्यान दीजिए कि यहाँ सूची के बाद सीधे प्रश्न-वाक्य आता है और कोई कूट-पंक्ति नहीं है; विकल्प गद्य-कथन हैं, अंक-कूट नहीं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)वे कृषि के सुधार से सम्बन्धित हैं — कृषि के सुधार से इन चारों कार्यक्रमों का सीधा सम्बन्ध नहीं है। कृषि के लिए अलग मंत्रालय है और उसके कार्यक्रमों की शब्दावली भी अलग होती है — सिंचाई, बीज, मृदा-स्वास्थ्य, फ़सल बीमा, बाज़ार। यहाँ जिन शब्दों का प्रयोग हुआ है — पूँजी उपदान, प्रौद्योगिकी उन्नयन, विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता, समूह — वे उद्योग-नीति की शब्दावली हैं। यही सूची का सबसे तेज़ संकेत है : कार्यक्रम के नाम में प्रयुक्त शब्द ही उसका क्षेत्र बता देते हैं।
- (c)वे बड़े पैमाने के उद्योगों के सुधार के लिए कार्यक्रम हैं — बड़े पैमाने के उद्योगों के लिए ये कार्यक्रम नहीं हैं, और तर्क भी यही कहता है। बड़े उद्योग स्वयं पूँजी जुटाने, प्रौद्योगिकी ख़रीदने और साझा सुविधाएँ खड़ी करने में समर्थ होते हैं; सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता वहाँ होती है जहाँ पैमाने की कमी के कारण उद्यम अकेले यह नहीं कर सकता। साझा सुविधा केंद्र और समूह-विकास की पूरी अवधारणा ही इस बात पर टिकी है कि लाभार्थी छोटे हैं। इसलिए यह विकल्प कार्यक्रमों के औचित्य के विरुद्ध जाता है।
- (d)वे पारंपरिक कुटीर उद्योगों के सुधार के लिए कार्यक्रम हैं — यह विकल्प निकटतम है और इसीलिए सावधानी माँगता है। परंपरागत उद्योगों के लिए सरकार की अलग योजनाएँ रही हैं, जिनका ढाँचा भी समूह-आधारित है और जो खादी, ग्रामोद्योग तथा कुटीर शिल्प पर केंद्रित हैं। पर सूची में जिन चार कार्यक्रमों के नाम हैं, उनका दायरा परंपरागत कुटीर उद्योगों तक सीमित नहीं — वे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के पूरे वर्ग के लिए हैं, जिसमें आधुनिक विनिर्माण इकाइयाँ भी आती हैं। ‘प्रौद्योगिकी उन्नयन’ और ‘विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता’ जैसे शब्द इसी व्यापक दायरे की ओर संकेत करते हैं।
अवधारणा
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारत की अर्थव्यवस्था में रोज़गार और निर्यात दोनों की दृष्टि से बड़ी भूमिका निभाते हैं, और इसी कारण उनके लिए एक अलग मंत्रालय तथा एक विशेष विधिक ढाँचा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 ने इन उद्यमों की परिभाषा दी, उनके संवर्धन के लिए बोर्ड बनाया और विलंबित भुगतान के विरुद्ध उपाय दिए। 2020 में वर्गीकरण की कसौटी बदली गई और अब निवेश तथा कारोबार — दोनों को मिलाकर मिश्रित मानदंड लागू होता है, तथा विनिर्माण और सेवा उद्यमों के लिए एक ही सीमा है।
इन उद्यमों की समस्याएँ प्रायः चार हैं : पूँजी की कमी, पुरानी प्रौद्योगिकी, बाज़ार तक पहुँच का अभाव, और साझा आधारिक संरचना का न होना। सरकारी कार्यक्रम इसी वर्गीकरण के अनुसार बनते हैं — कोई ऋण की उपलब्धता पर काम करता है, कोई मशीनों के आधुनिकीकरण पर, कोई गुणवत्ता और अभिकल्प पर, और कोई समूहों के लिए साझा सुविधा केंद्र बनाने पर।
समूह-आधारित उपागम इस नीति की मुख्य विशेषता है। एक ही स्थान पर एक जैसा काम करने वाली सैकड़ों छोटी इकाइयों के लिए साझा परीक्षण-प्रयोगशाला, ऊष्मा-उपचार संयंत्र या अपशिष्ट-शोधन इकाई बनाना अकेले किसी इकाई की सामर्थ्य से बाहर होता है, पर समूह के स्तर पर वह व्यवहार्य हो जाता है।
इस प्रश्न का ढाँचा परीक्षा में बहुत काम आने वाला है : चार योजनाओं के नाम देकर पूछा गया है कि उनमें साझा क्या है। ऐसे प्रश्नों में हर योजना का पूरा विवरण याद रखने की आवश्यकता नहीं होती; प्रायः नाम में प्रयुक्त शब्द ही मंत्रालय और क्षेत्र बता देते हैं। यहाँ ‘पूँजी उपदान’, ‘सूक्ष्म वित्त’, ‘विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता’ और ‘समूह विकास’ — चारों उद्योग-संवर्धन की शब्दावली हैं और तीन में तो लक्ष्य-समूह के छोटे होने का संकेत भी है।
हिन्दी स्तंभ में चारों नाम अनूदित रूप में हैं और उनके बाद कोष्ठक में पूरा अंग्रेज़ी नाम देवनागरी लिप्यन्तरण के साथ दोहराया गया है, जिससे दोनों रूप एक साथ पहचान में आ जाते हैं — यह सुविधा अंग्रेज़ी स्तंभ में नहीं है।
श्रम और सामाजिक सुरक्षा तथा उद्योग-नीति, दोनों EPFO के प्रश्नपत्रों के स्थायी विषय हैं, क्योंकि संगठन का सरोकार सीधे उन प्रतिष्ठानों से है जहाँ कर्मचारी काम करते हैं — और उनमें बड़ी संख्या छोटे उद्यमों की है।
मुख्य तथ्य
- ऋण सम्बद्ध पूँजी उपदान योजना सूक्ष्म और लघु उद्यमों में प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए संस्थागत वित्त पर पूँजी उपदान देती है।
- सूक्ष्म वित्त कार्यक्रम सूक्ष्म वित्त संस्थाओं के माध्यम से बहुत छोटे उद्यमियों तक ऋण पहुँचाने में सहायता करता है, और इसमें भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक की भागीदारी रही है।
- राष्ट्रीय विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता कार्यक्रम एक छत्र-कार्यक्रम है, जिसके घटकों में दुबला विनिर्माण, अभिकल्प, गुणवत्ता प्रबंध, बौद्धिक संपदा और विपणन सहायता आते हैं।
- समूह विकास कार्यक्रम सूक्ष्म और लघु उद्यमों के समूहों के लिए साझा सुविधा केंद्र, परीक्षण-प्रयोगशालाएँ और आधारिक संरचना उपलब्ध कराता है।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 इन उद्यमों की परिभाषा और संवर्धन का विधिक आधार है।
- 2020 से वर्गीकरण निवेश और कारोबार के मिश्रित मानदंड पर किया जाता है, और विनिर्माण तथा सेवा उद्यमों के लिए एक ही सीमा लागू होती है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- परंपरागत कुटीर उद्योगों की योजनाओं और समग्र सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम कार्यक्रमों को एक मान लेना; दोनों के लक्ष्य-समूह अलग हैं।
- ‘समूह विकास’ पढ़कर उसे कृषि-समूह या स्वयं सहायता समूह से जोड़ लेना, जबकि यहाँ वह औद्योगिक समूहों की बात है।
- यह मान लेना कि पूँजी उपदान अलग से नक़द दिया जाता है, जबकि वह संस्थागत ऋण के साथ जुड़ा होता है।
‘इन सबमें साझा क्या है’ वाले प्रश्न में सबसे तेज़ रास्ता यह है कि योजनाओं के नामों को उनकी शब्दावली से पढ़ा जाए और यह देखा जाए कि लाभार्थी कौन है। यहाँ चार में से तीन नाम स्वयं बता देते हैं कि लाभार्थी छोटा है — पूँजी उपदान, सूक्ष्म वित्त, समूह विकास — और चौथा प्रतिस्पर्धात्मकता की बात करता है, जो छोटे उद्यमों की सबसे बड़ी कमी मानी जाती है। दूसरा उपाय है सबसे संकीर्ण और सबसे व्यापक विकल्प की तुलना : परंपरागत कुटीर उद्योग बहुत संकीर्ण है और बड़े उद्योग विपरीत दिशा में; बीच का सही उत्तर वही रहता है जो चारों नामों को समेट ले।
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EPFO_APFC_2016_Q53खोलें व हल करें →The Rangarajan Committee on disinvestment of shares in Public Sector Enterprises suggested that 1. The percentage of equity to be divested should be no more than 49% for industries explicitly reserved for the public sector and it should be either 74% or 100% for others. 2. Year-wise targets of disinvestment should be maintained. Which of the above statements is/are correct ?
- (a) 1 only
- (b) 2 only
- (c) Both 1 and 2
- (d) Neither 1 nor 2
उत्तर(a) 1 only
इसी प्रश्नपत्र का विनिवेश-सम्बन्धी कथन-प्रश्न — उद्योग-नीति की उसी कड़ी से, जहाँ सार्वजनिक क्षेत्रक का पक्ष सामने आता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
ऋण सम्बद्ध पूँजी उपदान योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
- (a)सूक्ष्म और लघु उद्यमों में प्रौद्योगिकी उन्नयन
- (b)किसानों को अल्पकालिक फ़सल ऋण
- (c)बड़े उद्योगों के लिए निर्यात प्रोत्साहन
- (d)शहरी आवास के लिए ब्याज छूट
उत्तर(a) सूक्ष्म और लघु उद्यमों में प्रौद्योगिकी उन्नयन
- practice — not a real PYQ
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों का वर्गीकरण 2020 से किस मानदंड पर किया जाता है ?
- (a)केवल संयंत्र और मशीनरी में निवेश
- (b)केवल कर्मचारियों की संख्या
- (c)निवेश और कारोबार का मिश्रित मानदंड
- (d)केवल निर्यात का मूल्य
उत्तर(c) निवेश और कारोबार का मिश्रित मानदंड