DNA अंगुलि-छाप (फिंगरप्रिंटिंग) तकनीक का उपयोग किसके संसूचन के लिए किया जाता है ?
- (a)अलज़ाइमर (Alzheimer's) रोग
- (b)विवादित जनकता
- (c)AIDS
- (d)पीत ज्वर (येलो फ़ीवर)
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) विवादित जनकता — DNA अंगुलि-छाप तकनीक यह बताती है कि दो नमूने किस हद तक एक ही व्यक्ति के हैं या दो व्यक्ति आपस में कितने निकट से सम्बन्धित हैं। इसी कारण उसका सबसे परिचित उपयोग माता-पिता और संतान के सम्बन्ध पर उठे विवाद सुलझाना है।
तकनीक का आधार यह है कि मनुष्य के DNA का बहुत बड़ा भाग सब मनुष्यों में एक जैसा होता है, पर कुछ स्थानों पर छोटे-छोटे अनुक्रम बार-बार दोहराए जाते हैं और यह दोहराव कितनी बार हुआ है, यह हर व्यक्ति में भिन्न होता है। इन्हीं परिवर्तनशील स्थानों का प्रारूप पढ़कर एक ‘छाप’ बनाई जाती है, जो समरूप जुड़वाँ को छोड़कर हर व्यक्ति में अलग होती है।
जनकता के प्रश्न में यह तकनीक इसलिए निर्णायक है कि संतान को अपने ये अनुक्रम माता और पिता से आधे-आधे मिलते हैं। बच्चे की छाप में जो अंश माता से मेल नहीं खाते, उन्हें जैविक पिता की छाप से मेल खाना चाहिए। यदि नहीं खाते, तो सम्बन्ध नकार दिया जाता है।
इसी सिद्धांत से इसके शेष उपयोग निकलते हैं : अपराध-स्थल से मिले रक्त, बाल या ऊतक के नमूनों का किसी व्यक्ति से मिलान, आपदाओं में मृतकों की शिनाख़्त, प्रवास-सम्बन्धी विवादों में पारिवारिक सम्बन्ध की जाँच, और वन्यजीव अपराधों में बरामद अंगों की प्रजाति-पहचान।
शेष तीनों विकल्प रोगों के नाम हैं, और यही इस प्रश्न का ढाँचा है। रोग की पहचान के अपने तरीक़े होते हैं — लक्षण, प्रतिरक्षा-परीक्षण, प्रतिजैविकी जाँच या प्रतिबिंबन। DNA अंगुलि-छाप रोग नहीं पहचानती, वह व्यक्ति पहचानती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)अलज़ाइमर (Alzheimer's) रोग — अलज़ाइमर रोग की पहचान मुख्यतः नैदानिक आकलन, स्मृति और संज्ञान की जाँच तथा मस्तिष्क के प्रतिबिंबन से होती है; कुछ जैव-चिह्नक भी इसमें सहायक होते हैं। कुछ आनुवंशिक परीक्षण रोग की आशंका बढ़ने-घटने का संकेत अवश्य देते हैं, पर वह जोखिम आँकने का काम है और उसका तरीक़ा DNA अंगुलि-छाप से अलग है। अंगुलि-छाप का काम पहचान और सम्बन्ध स्थापित करना है, किसी रोग का निदान करना नहीं — यही भेद इस विकल्प को काट देता है।
- (c)AIDS — AIDS की जाँच शरीर में ह्यूमन इम्यूनोडेफ़िशिएंसी वायरस या उसके विरुद्ध बनी प्रतिरक्षियों की उपस्थिति देखकर की जाती है — प्रतिरक्षा-आधारित परीक्षण और विषाणु के आनुवंशिक पदार्थ को बढ़ाकर देखने वाली जाँचें इसके लिए प्रयुक्त होती हैं। यहाँ जो पढ़ा जा रहा है वह विषाणु का पदार्थ है, रोगी की अपनी पहचान-छाप नहीं। दोनों में ‘आनुवंशिक जाँच’ शब्द साझा है, पर उद्देश्य बिलकुल अलग हैं, और यही समानता इस विकल्प को लुभावना बनाती है।
- (d)पीत ज्वर (येलो फ़ीवर) — पीत ज्वर एक विषाणुजनित रोग है, जो एडीज़ मच्छर से फैलता है और जिसकी पहचान लक्षणों तथा रक्त के विषाणु-सम्बन्धी परीक्षणों से होती है; इसका प्रभावी टीका भी उपलब्ध है और कुछ देशों की यात्रा के लिए टीकाकरण-प्रमाणपत्र अनिवार्य रहा है। इस रोग की पहचान में व्यक्ति की आनुवंशिक छाप की कोई भूमिका नहीं है। यह विकल्प केवल इसलिए है कि तीनों ग़लत विकल्प रोगों के नाम रखकर प्रश्न को ‘चिकित्सा’ की दिशा में मोड़ सकें।
अवधारणा
DNA अंगुलि-छाप का विचार 1980 के दशक के मध्य में सामने आया और उसका श्रेय ब्रिटेन के आनुवंशिकीविद् एलेक जेफ़्रीज़ को दिया जाता है। मूल विधि उन स्थानों पर टिकी थी जहाँ छोटे अनुक्रम बार-बार दोहराए जाते हैं और दोहराव की संख्या व्यक्ति-दर-व्यक्ति बदलती है। आज की प्रयोगशालाएँ प्रायः लघु अनुक्रम-दोहराव वाले अनेक स्थानों को एक साथ पढ़ती हैं, जिससे पहचान की सांख्यिकीय विश्वसनीयता बहुत बढ़ जाती है।
व्यावहारिक रूप से इसके चार बड़े उपयोग हैं। पहला, जनकता और सगोत्रता के विवाद। दूसरा, न्यायालयिक विज्ञान — अपराध-स्थल से मिले जैविक नमूनों का संदिग्ध से मिलान। तीसरा, आपदा या दुर्घटना में मृतकों की शिनाख़्त, जहाँ शव पहचान योग्य न बचे हों। चौथा, वन्यजीव अपराध और जैव-विविधता से जुड़े मामले।
भारत में इस क्षेत्र की एक समर्पित संस्था हैदराबाद में स्थित DNA अंगुलि-छाप और निदान केंद्र है, और भारत में इस तकनीक के विकास से जुड़े वैज्ञानिकों में लालजी सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। न्यायालयों में इस साक्ष्य की स्वीकार्यता, नमूना-संग्रह की शुद्धता और निजता — ये तीनों इस विषय के स्थायी विवाद-बिंदु हैं।
जैव प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रश्न सामान्य विज्ञान के उस हिस्से में आते हैं जहाँ तकनीक और उसके उपयोग की जोड़ी पूछी जाती है। DNA अंगुलि-छाप के साथ प्रायः पॉलिमरेज़ शृंखला अभिक्रिया, पुनर्योगज DNA तकनीक और जीन-संपादन जैसे पद एक ही समूह में पढ़ाए जाते हैं, और परीक्षा में इन्हें आपस में बदलकर पूछा जाता है।
इस प्रश्न की बनावट में एक बात ध्यान देने योग्य है : चार में से तीन विकल्प रोग हैं और केवल एक सम्बन्ध-सम्बन्धी है। जब विकल्पों में इस तरह की असमानता दिखे तो प्रायः वही अकेला विकल्प सही होता है जो शेष तीन के वर्ग से बाहर है — पर यह केवल एक संकेत है, निर्णय तकनीक के काम से ही होना चाहिए।
इस प्रश्नपत्र में सामान्य विज्ञान के लगभग पाँच प्रश्न हैं और वे भौतिकी, जीव विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी में बँटे हुए हैं; विषय क्रमांक से नहीं, प्रश्न की शब्दावली से पहचानने पड़ते हैं।
मुख्य तथ्य
- DNA अंगुलि-छाप व्यक्ति की पहचान और जैविक सम्बन्ध स्थापित करने की तकनीक है, किसी रोग के निदान की नहीं।
- यह DNA के उन स्थानों पर आधारित है जहाँ छोटे अनुक्रम बार-बार दोहराए जाते हैं और दोहराव की संख्या हर व्यक्ति में भिन्न होती है।
- संतान को ये अनुक्रम माता और पिता से आधे-आधे मिलते हैं, इसी आधार पर जनकता के विवाद सुलझाए जाते हैं।
- इस तकनीक का विकास 1980 के दशक के मध्य में हुआ और इसका श्रेय आनुवंशिकीविद् एलेक जेफ़्रीज़ को दिया जाता है।
- अन्य उपयोग : न्यायालयिक जाँच, आपदा में मृतकों की शिनाख़्त, प्रवास-सम्बन्धी पारिवारिक सत्यापन और वन्यजीव अपराध।
- भारत में हैदराबाद स्थित DNA अंगुलि-छाप और निदान केंद्र इस क्षेत्र की प्रमुख संस्था है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- तकनीक और रोग-निदान को गड्डमड्ड करना — विकल्पों में तीन रोगों के नाम रखकर यही जाल बनाया गया है।
- विषाणु के आनुवंशिक पदार्थ की जाँच को व्यक्ति की DNA छाप समझ लेना; दोनों का उद्देश्य अलग है।
- यह मान लेना कि DNA छाप हर व्यक्ति में बिना किसी अपवाद के अद्वितीय होती है — समरूप जुड़वाँ इसका अपवाद हैं।
प्रौद्योगिकी-आधारित प्रश्नों में सबसे भरोसेमंद रास्ता यह है कि पहले तकनीक का एक-पंक्ति उद्देश्य मन में तय कर लिया जाए और फिर विकल्पों को उसी कसौटी पर तौला जाए। यहाँ उद्देश्य है — पहचान और सम्बन्ध, इसलिए रोगों के नाम अपने आप छँट जाते हैं। परीक्षाओं में यही तकनीक कभी अपने आविष्कारक के नाम से, कभी उपयोग के क्षेत्र से और कभी उस संस्था के नाम से पूछी जाती है जो भारत में इस काम की केंद्र है; तीनों कोण एक साथ तैयार करने पर एक ही सामग्री तीन प्रश्नों में काम आ जाती है।
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उत्तर(a) Sclera → Choroid → Retina
APFC 2023 का मानव नेत्र की परतों वाला प्रश्न — सामान्य विज्ञान के जीव-विज्ञान वाले उसी खंड से।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
DNA अंगुलि-छाप तकनीक का विकास मुख्यतः किस वैज्ञानिक से जोड़ा जाता है ?
- (a)एलेक जेफ़्रीज़
- (b)जेम्स वाटसन
- (c)फ़्रेडरिक सैंगर
- (d)बारबरा मैक्क्लिंटॉक
उत्तर(a) एलेक जेफ़्रीज़
- practice — not a real PYQ
निम्नलिखित में से कौन-सा DNA अंगुलि-छाप का उपयुक्त उपयोग नहीं है ?
- (a)अपराध-स्थल के जैविक नमूनों का मिलान
- (b)आपदा में मृतकों की शिनाख़्त
- (c)विवादित जनकता का निर्धारण
- (d)किसी विषाणुजनित ज्वर का निदान
उत्तर(d) किसी विषाणुजनित ज्वर का निदान