अम्लीय वर्षा किसके कारण होती है ?
- (a)सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषण
- (b)कार्बन मोनोक्साइड प्रदूषण
- (c)पीड़कनाशक प्रदूषण
- (d)वातावरण में धूल के कण
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — A, (a) सल्फर डाइऑक्साइड प्रदूषण — अम्लीय वर्षा तब बनती है जब वायुमंडल में ऐसी गैसें पहुँचें जो जल के साथ मिलकर अम्ल बनाती हैं, और उनमें प्रमुख है सल्फर डाइऑक्साइड।
क्रिया की कड़ी इस प्रकार है। कोयला और अन्य जीवाश्म ईंधन में सल्फर की मात्रा होती है; जलने पर वह सल्फर डाइऑक्साइड के रूप में निकलती है। वायुमंडल में यह गैस ऑक्सीकृत होकर सल्फर ट्राइऑक्साइड बनती है और जलवाष्प के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक अम्ल। यही अम्ल वर्षा-जल के साथ धरती पर उतरता है। नाइट्रोजन के ऑक्साइड भी इसी तरह नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं और अम्लीय वर्षा में योगदान देते हैं, पर इस प्रश्न के विकल्पों में उनका नाम नहीं है — यहाँ केवल एक ही अम्ल-जनक गैस दी गई है।
एक मानक तथ्य साथ रखिए : सामान्य वर्षा-जल भी हल्का अम्लीय होता है, क्योंकि उसमें वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड घुलकर दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बनाती है, और उसका pH लगभग 5·6 रहता है। इससे नीचे pH वाली वर्षा को ही अम्लीय वर्षा कहा जाता है।
इसके प्रभाव भी उतने ही पहचाने हुए हैं। झीलों और नदियों का जल अम्लीय होकर मछलियों तथा जलीय जीवन के लिए प्रतिकूल हो जाता है; मिट्टी से पोषक तत्त्व घुलकर बह जाते हैं और वन प्रभावित होते हैं; और संगमरमर तथा चूना-पत्थर से बने स्मारक क्षरित होते हैं, क्योंकि कैल्सियम कार्बोनेट अम्ल से क्रिया करता है। ताजमहल के संगमरमर पर पड़ने वाले इसी प्रभाव की चर्चा प्रायः इसी प्रसंग में होती है।
शेष तीनों विकल्प वास्तविक प्रदूषण-समस्याएँ हैं, पर उनमें से कोई वर्षा-जल को अम्लीय नहीं बनाता — इसी भेद पर यह प्रश्न टिका है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (b)कार्बन मोनोक्साइड प्रदूषण — कार्बन मोनोक्साइड सचमुच एक ख़तरनाक प्रदूषक है, पर उसका ख़तरा दूसरी तरह का है। यह अपूर्ण दहन से बनती है, रंगहीन और गंधहीन है, और रक्त के हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन की तुलना में कहीं अधिक दृढ़ता से जुड़कर ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुँचना रोक देती है — इसीलिए बंद जगह में अँगीठी जलाना घातक होता है। पर यह जल के साथ मिलकर अम्ल नहीं बनाती। अम्लीय वर्षा के लिए ऐसी गैस चाहिए जो अम्ल-जनक ऑक्साइड हो, जैसे सल्फर या नाइट्रोजन के ऑक्साइड।
- (c)पीड़कनाशक प्रदूषण — पीड़कनाशक प्रदूषण की समस्या जैव-संचयन और खाद्य-शृंखला की है, वर्षा की अम्लता की नहीं। छिड़के गए रसायन मिट्टी और जल में पहुँचते हैं, जीवों के ऊतकों में जमा होते जाते हैं और खाद्य-शृंखला में ऊपर की कड़ियों में उनकी सांद्रता बढ़ती जाती है — यही जैव-आवर्धन है। यह गंभीर पर्यावरणीय प्रश्न है, पर इसका वर्षा-जल के pH से कोई सीधा सम्बन्ध नहीं। विकल्प इसीलिए रखा गया है कि ‘प्रदूषण’ शब्द सुनते ही मन किसी भी परिचित प्रदूषक की ओर चला जाता है।
- (d)वातावरण में धूल के कण — वातावरण में धूल के कण कणिकीय प्रदूषण की श्रेणी में आते हैं और वे दृश्यता घटाते हैं, श्वास-तंत्र को हानि पहुँचाते हैं तथा सतहों पर जम जाते हैं। पर धूल स्वयं अम्ल नहीं बनाती। ध्यान देने योग्य बात यह है कि कणिकीय पदार्थ और अम्लीय वर्षा एक ही स्रोत से जुड़ सकते हैं — कोयला जलाने से दोनों निकलते हैं, और सल्फर डाइऑक्साइड आगे चलकर सल्फेट के कण भी बनाती है — पर वर्षा को अम्लीय बनाने का काम गैस करती है, धूल नहीं।
अवधारणा
अम्लीय वर्षा वायु प्रदूषण का वह रूप है जिसमें प्रदूषक हवा से निकलकर वर्षा, हिम या कोहरे के साथ धरती पर उतरता है। इसे आर्द्र निक्षेपण कहते हैं; जब वही अम्लीय कण सूखी अवस्था में जमते हैं तो उसे शुष्क निक्षेपण कहा जाता है।
रसायन सीधा है। सल्फर डाइऑक्साइड वायुमंडल में ऑक्सीकृत होकर सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती है और नाइट्रोजन के ऑक्साइड नाइट्रिक अम्ल। इनके प्रमुख स्रोत कोयले से चलने वाले ताप-विद्युत संयंत्र, धातु-प्रगलन और वाहन हैं। चूँकि ये गैसें हवा के साथ सैकड़ों किलोमीटर तक जा सकती हैं, अम्लीय वर्षा एक सीमा-पार समस्या है — प्रदूषण एक देश में निकलता है और वर्षा दूसरे देश में गिरती है। यही कारण है कि इस पर अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ हुईं, जिनकी शुरुआत यूरोप में दूरगामी सीमा-पार वायु प्रदूषण पर हुए अभिसमय से मानी जाती है।
प्रभाव तीन स्तरों पर दिखते हैं : जलीय — झीलों का अम्लीकरण और मत्स्य-जीवन पर असर; स्थलीय — मिट्टी से पोषक तत्त्वों का निक्षालन और वनों की क्षति; और भौतिक — संगमरमर तथा चूना-पत्थर के स्मारकों का क्षरण, जिसे स्मारकों के संदर्भ में ‘संगमरमर का क्षय’ कहा जाता है।
अम्लीय वर्षा का प्रश्न पर्यावरण के पाठ्यक्रम में उस समूह का हिस्सा है जिसमें वायु प्रदूषण के अलग-अलग परिणाम अलग-अलग गैसों से जोड़े जाते हैं। परीक्षा में यही जोड़ी-मिलान बार-बार लौटता है : सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड से अम्लीय वर्षा; क्लोरोफ्लोरो कार्बन से ओज़ोन-क्षय; कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड से हरितगृह प्रभाव; कार्बन मोनोक्साइड से हीमोग्लोबिन-सम्बन्धी विषाक्तता; और कणिकीय पदार्थ से श्वसन-रोग।
भारत के संदर्भ में इसकी चर्चा प्रायः ताप-विद्युत संयंत्रों से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड और ताजमहल के आसपास के औद्योगिक क्षेत्र के प्रसंग में होती है। इसी कारण उस क्षेत्र में उद्योगों पर नियंत्रण और ईंधन-परिवर्तन के आदेश समय-समय पर चर्चा में रहे हैं।
इस प्रश्नपत्र में भूगोल और पर्यावरण के लगभग आठ प्रश्न हैं, और इसी पत्र में निलंबित कणिकीय पदार्थ पर भी एक प्रश्न है — यानी वायु प्रदूषण के गैसीय और कणिकीय, दोनों पक्ष यहाँ आए हैं।
मुख्य तथ्य
- अम्लीय वर्षा मुख्यतः सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों से बनती है, जो वायुमंडल में सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल में बदल जाते हैं।
- सामान्य वर्षा-जल का pH लगभग 5·6 होता है, क्योंकि उसमें कार्बन डाइऑक्साइड घुलकर दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बनाती है; इससे कम pH वाली वर्षा अम्लीय कहलाती है।
- प्रमुख स्रोत कोयले से चलने वाले ताप-विद्युत संयंत्र, धातु-प्रगलन और वाहन हैं।
- प्रभाव : झीलों का अम्लीकरण, मिट्टी से पोषक तत्त्वों का निक्षालन, वनों की क्षति और संगमरमर तथा चूना-पत्थर के स्मारकों का क्षरण।
- गैसें हवा के साथ सैकड़ों किलोमीटर तक जाती हैं, इसलिए यह सीमा-पार प्रदूषण की समस्या है और इसी कारण इस पर अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय हुए।
- कार्बन मोनोक्साइड अम्ल नहीं बनाती; उसका ख़तरा हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुँचना रोकने का है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- कार्बन मोनोक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड के प्रभाव आपस में बदल देना — पहला हीमोग्लोबिन से जुड़ता है, दूसरा हरितगृह गैस है।
- अम्लीय वर्षा को ओज़ोन-क्षय या हरितगृह प्रभाव से जोड़ लेना, जबकि तीनों अलग परिघटनाएँ और अलग कारक गैसें हैं।
- यह मान लेना कि सामान्य वर्षा उदासीन होती है; उसका pH भी सात से कम, लगभग 5·6 रहता है।
पर्यावरण के प्रश्नों में सबसे अधिक अंक ‘कारण और परिणाम’ की जोड़ियाँ याद रखने से मिलते हैं। इसलिए तैयारी करते समय एक छोटी तालिका बना लीजिए जिसमें प्रत्येक प्रमुख प्रदूषक के सामने उसका मुख्य परिणाम लिखा हो। इस प्रश्न में चारों विकल्प वास्तविक प्रदूषण-समस्याएँ हैं, इसलिए निर्णय ‘कौन-सा प्रदूषक अम्ल बनाता है’ की कसौटी से ही होता है, न कि इस बात से कि कौन अधिक हानिकारक है। यही कसौटी अगली बार तब भी काम आएगी जब प्रश्न ओज़ोन-क्षय या हरितगृह गैसों पर पूछा जाए।
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EPFO_APFC_2016_Q55खोलें व हल करें →In the study of pollution, SPM refers to
- (a) Sulphur Phosphorus Matter
- (b) Sulphur Particulate Matter
- (c) Solid Particulate Matter
- (d) Suspended Particulate Matter
उत्तर(d) Suspended Particulate Matter
इसी प्रश्नपत्र का निलंबित कणिकीय पदार्थ वाला प्रश्न — वायु प्रदूषण के कणिकीय पक्ष से, जबकि यह प्रश्न गैसीय पक्ष का है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
सामान्य वर्षा-जल का pH लगभग कितना होता है ?
- (a)7·0
- (b)6·5
- (c)5·6
- (d)4·2
उत्तर(c) 5·6
- practice — not a real PYQ
अम्लीय वर्षा से संगमरमर के स्मारकों को हानि किस कारण होती है ?
- (a)कैल्सियम कार्बोनेट की अम्ल से क्रिया
- (b)संगमरमर पर धूल का जमाव
- (c)संगमरमर का तापीय प्रसार
- (d)कवकों की वृद्धि
उत्तर(a) कैल्सियम कार्बोनेट की अम्ल से क्रिया