निम्नलिखित अभिलक्षणों वाले किसी उद्योग पर विचार कीजिए : • बजट की हुई मासिक नियत लागत = ₹ 2,20,000 • सामान्य मासिक उत्पाद = 12000 प्रति मानक श्रम घंटा • मानक परिवर्ती उपरिव्यय दर = ₹ 25 प्रति श्रम घंटा फैक्टरी की कुल उपरिव्यय दर क्या होगी ?
- (a)₹ 40·33 प्रति श्रम घंटा
- (b)₹ 41·67 प्रति श्रम घंटा
- (c)₹ 42·67 प्रति श्रम घंटा
- (d)₹ 43·33 प्रति श्रम घंटा
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) ₹ 43·33 प्रति श्रम घंटा — कुल उपरिव्यय दर दो हिस्सों का जोड़ है : नियत उपरिव्यय दर और परिवर्ती उपरिव्यय दर।
परिवर्ती हिस्सा तो सीधे दे दिया गया है — ₹ 25 प्रति श्रम घंटा। काम केवल नियत हिस्से का है। नियत लागत महीने भर के लिए एकमुश्त ₹ 2,20,000 है और उसे सामान्य मासिक क्रियाकलाप, यानी 12000 मानक श्रम घंटों पर बाँटना है :
नियत उपरिव्यय दर = 2,20,000 ÷ 12000 = ₹ 18·33 प्रति श्रम घंटा (लगभग)
कुल उपरिव्यय दर = 18·33 + 25 = ₹ 43·33 प्रति श्रम घंटा
यही विकल्प (d) है।
दो बातें ध्यान देने योग्य हैं। पहली, नियत और परिवर्ती लागत का व्यवहार अलग है : नियत लागत कुल मिलाकर स्थिर रहती है पर प्रति इकाई घटती-बढ़ती है, जबकि परिवर्ती लागत प्रति इकाई स्थिर रहती है और कुल मिलाकर बदलती है। इसीलिए ₹ 2,20,000 को घंटों में बाँटना पड़ता है और ₹ 25 को वैसे ही रहने दिया जाता है — दोनों को जोड़ने से पहले दोनों का एक ही मात्रक होना आवश्यक है, यहाँ ‘प्रति श्रम घंटा’।
दूसरी, गणना की जाँच का एक सरल उपाय है। उत्तर 25 से बड़ा होना ही चाहिए, क्योंकि उसमें परिवर्ती दर के ऊपर नियत हिस्सा जुड़ रहा है; और नियत हिस्सा लगभग 18 है, इसलिए उत्तर 43 के आसपास बैठना चाहिए। चारों विकल्प इसी परास में हैं, इसलिए भाग को ठीक-ठीक करना ही पड़ता है : 12000 × 18 = 2,16,000 और शेष 4,000 को 12000 से भाग देने पर 0·33 आता है।
छपाई की एक बात : इसी प्रश्न में एक ओर ‘2,20,000’ भारतीय अंक-समूहन के साथ छपा है और दूसरी ओर ‘12000’ बिना किसी विभाजक के — यह असंगति दोनों स्तंभों में समान रूप से है और गणना पर इसका कोई असर नहीं पड़ता। विकल्पों के दशमलव उठे हुए मध्य-बिंदु से छपे हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)₹ 40·33 प्रति श्रम घंटा — ₹ 40·33 का अर्थ होगा कि नियत उपरिव्यय दर 15·33 है, यानी नियत लागत लगभग ₹ 1,84,000 रही होती। दिए गए आँकड़ों से यह नहीं बनता : ₹ 2,20,000 को 12000 घंटों में बाँटने पर 18·33 ही आता है। यह विकल्प चारों में सबसे छोटा है और उस पाठक को खींचता है जो भाग पूरा किए बिना अनुमान लगा लेता है। बचाव सरल है — पहले 12000 × 18 = 2,16,000 निकालिए और फिर बचे हुए 4,000 को बाँटिए; इससे 18·33 पक्का हो जाता है।
- (b)₹ 41·67 प्रति श्रम घंटा — ₹ 41·67 के पीछे नियत दर 16·67 बैठती है, और यही इस विकल्प को समझने की कुंजी है : 2,00,000 ÷ 12000 = 16·67। यानी यह वह उत्तर है जो नियत लागत में से बीस हज़ार छूट जाने पर आता है। बड़े अंकों वाली राशियों में यही सबसे आम चूक है, विशेषकर तब जब अंक-समूहन एक जगह हो और दूसरी जगह न हो। इसलिए राशि को एक बार शब्दों में पढ़ लेना — दो लाख बीस हज़ार — गणना शुरू करने से पहले का सबसे सस्ता बचाव है।
- (c)₹ 42·67 प्रति श्रम घंटा — ₹ 42·67 के लिए नियत दर 17·67 चाहिए, यानी नियत लागत लगभग ₹ 2,12,000। ऐसा कोई आँकड़ा प्रश्न में नहीं है। यह विकल्प सही उत्तर के सबसे निकट है और इसीलिए सबसे ख़तरनाक भी — दशमलव के स्तर पर चूक करने वाला यहीं आकर रुकता है। ध्यान रखिए कि 2,20,000 ÷ 12000 को 22 ÷ 1·2 के रूप में भी देखा जा सकता है, जो सीधे 18·33 देता है; इस सरलीकरण से भाग की चूक की संभावना घट जाती है।
अवधारणा
लागत लेखांकन में उपरिव्यय वे लागतें हैं जिन्हें किसी एक इकाई पर सीधे नहीं लादा जा सकता — कारखाने का किराया, पर्यवेक्षकों का वेतन, बिजली, मरम्मत। इन्हें उत्पादन पर लादने के लिए एक अवशोषण दर निकाली जाती है, और आधार प्रायः श्रम घंटा, मशीन घंटा या इकाइयाँ होती हैं।
उपरिव्यय दो प्रकार के होते हैं। नियत उपरिव्यय क्रियाकलाप के स्तर से नहीं बदलते — किराया उतना ही रहेगा चाहे उत्पादन आधा हो; इसीलिए उनकी प्रति घंटा दर निकालने के लिए किसी सामान्य या बजट किए गए क्रियाकलाप-स्तर की आवश्यकता पड़ती है। परिवर्ती उपरिव्यय क्रियाकलाप के साथ बढ़ते-घटते हैं और उनकी प्रति घंटा दर स्वयं में स्थिर होती है। कुल उपरिव्यय दर इन दोनों का जोड़ है।
यहीं से एक महत्त्वपूर्ण अवधारणा निकलती है — न्यून या अधि-अवशोषण। यदि वास्तविक क्रियाकलाप सामान्य स्तर से कम रहा, तो पूर्वनिर्धारित दर से लादी गई नियत लागत वास्तविक नियत लागत से कम पड़ जाएगी और शेष लागत बिना अवशोषित रह जाएगी। इसी कारण यह प्रश्न ‘सामान्य मासिक उत्पाद’ की बात करता है : दर हमेशा किसी मान लिए गए स्तर पर बनती है, वास्तविक स्तर पर नहीं।
EPFO के प्रश्नपत्रों में लागत और प्रबंध लेखांकन के प्रश्न नियमित रूप से आते हैं, क्योंकि पद की प्रकृति में लेखा-परीक्षा और वित्तीय विवरणों की समझ अपेक्षित है। उपरिव्यय अवशोषण, माल-सूची का मूल्यांकन, सम-विच्छेद बिंदु और अंशदान — ये उस पाठ्यक्रम के स्थायी शीर्षक हैं।
इस प्रश्न की बनावट भी उसी परिवार की है : आँकड़े बुलेट-चिह्नों वाली छोटी सूची में दिए गए हैं और प्रश्न-वाक्य उसके बाद आता है। पूरे प्रश्नपत्र में बुलेट-सूची केवल यहीं दिखती है; शेष सब जगह क्रमांकित कथन हैं।
एक पठन-सम्बन्धी बात : दूसरी बुलेट दोनों स्तंभों में एक ही रूप में छपी है और उसे 12000 मानक श्रम घंटों के अर्थ में पढ़ा जाता है, क्योंकि नियत लागत को घंटों में ही बाँटा जाता है और परिवर्ती दर भी प्रति श्रम घंटा दी गई है। इसी पाठ पर विकल्पों का मात्रक — ‘प्रति श्रम घंटा’ — भी टिका है।
मुख्य तथ्य
- कुल उपरिव्यय दर = नियत उपरिव्यय दर + परिवर्ती उपरिव्यय दर, और दोनों का मात्रक एक ही होना चाहिए।
- नियत उपरिव्यय दर = बजट की हुई नियत लागत ÷ सामान्य क्रियाकलाप स्तर = 2,20,000 ÷ 12000 = ₹ 18·33 प्रति श्रम घंटा।
- परिवर्ती उपरिव्यय दर यहाँ सीधे दी गई है — ₹ 25 प्रति श्रम घंटा — इसलिए कुल दर ₹ 43·33 प्रति श्रम घंटा बनती है।
- नियत लागत कुल मिलाकर स्थिर रहती है पर प्रति इकाई बदलती है; परिवर्ती लागत प्रति इकाई स्थिर रहती है पर कुल मिलाकर बदलती है।
- अवशोषण दर सदा किसी सामान्य या बजट किए गए क्रियाकलाप-स्तर पर बनती है, वास्तविक स्तर पर नहीं — इसी से न्यून या अधि-अवशोषण पैदा होता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- नियत लागत को घंटों में बाँटे बिना उसे सीधे परिवर्ती दर में जोड़ देना; दोनों का मात्रक एक करना आवश्यक है।
- बड़ी राशि के अंक छोड़ देना — 2,20,000 के बदले 2,00,000 पढ़ लेने पर उत्तर 41·67 आ जाता है।
- सामान्य क्रियाकलाप-स्तर के बदले वास्तविक उत्पादन को अवशोषण का आधार मान लेना।
लागत लेखांकन के संख्यात्मक प्रश्नों में लगभग हमेशा पहला काम यह होता है कि दिए गए आँकड़ों को उनके स्वभाव के अनुसार छाँट लिया जाए — कौन-सा नियत है, कौन-सा परिवर्ती, और आधार क्या है। यहाँ तीन बुलेट हैं और तीनों अलग-अलग काम करते हैं : पहला नियत लागत, दूसरा आधार, तीसरा परिवर्ती दर। इसके बाद सूत्र स्वयं दिख जाता है। दूसरा सुझाव यह है कि विकल्पों के मात्रक पढ़ लिए जाएँ; यहाँ चारों ‘प्रति श्रम घंटा’ में हैं, जो पुष्ट करता है कि नियत लागत को घंटों में बाँटना ही है। इसी पत्र में माल-सूची मूल्यांकन और उधार-निबंधन जैसे प्रश्न भी हैं, जो इसी वर्ग के हैं।
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- (a) ₹ 1,00,000
- (b) ₹ 1,02,500
- (c) ₹ 1,05,000
- (d) ₹ 1,07,500
उत्तर(c) ₹ 1,05,000
इसी प्रश्नपत्र का माल-सूची मूल्यांकन वाला प्रश्न — लागत लेखांकन के उसी खंड से।
EPFO_EOAO_2023_Q76Which of the following is included in the ‘Cost of Inventory’ according to Accounting Standard-2 (Inventory Valuation) :
- (a) Administrative overheads that do not contribute to bringing the inventories to their present location and condition
- (b) Storage costs which are necessary in the production process prior to a further production stage
- (c) Selling and distribution costs
- (d) Duties and taxes paid on purchases, subsequently recoverable by the enterprise from the Tax Authorities
उत्तर(b) Storage costs which are necessary in the production process prior to a further production stage
EO/AO 2023 का वह प्रश्न जो लेखा मानक के अनुसार माल-सूची की लागत में क्या-क्या सम्मिलित है, यह पूछता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
बजट की हुई मासिक नियत उपरिव्यय लागत ₹ 1,80,000 है और सामान्य मासिक क्रियाकलाप 9000 श्रम घंटे है । नियत उपरिव्यय अवशोषण दर क्या होगी ?
- (a)₹ 15 प्रति श्रम घंटा
- (b)₹ 18 प्रति श्रम घंटा
- (c)₹ 20 प्रति श्रम घंटा
- (d)₹ 25 प्रति श्रम घंटा
उत्तर(c) ₹ 20 प्रति श्रम घंटा
- practice — not a real PYQ
यदि वास्तविक क्रियाकलाप सामान्य स्तर से कम रह जाए, तो पूर्वनिर्धारित दर से नियत उपरिव्यय की क्या स्थिति बनती है ?
- (a)अधि-अवशोषण
- (b)न्यून अवशोषण
- (c)पूर्ण अवशोषण
- (d)नियत लागत घट जाती है
उत्तर(b) न्यून अवशोषण