भारत के उप-राष्ट्रपति बनने के पहले डॉ. एस. राधाकृष्णन द्वारा धारित पद क्या था ?
- (a)U.S.A. में राजदूत
- (b)U.G.C. का अध्यक्ष
- (c)योजना आयोग का अध्यक्ष
- (d)सोवियत संघ में राजदूत
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — D, (d) सोवियत संघ में राजदूत — डॉ. एस. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति बनने से ठीक पहले मास्को में भारत के राजदूत थे।
क्रम इस प्रकार है। स्वतंत्रता के कुछ वर्ष बाद उन्हें सोवियत संघ में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया और वे 1949 से 1952 तक इस पद पर रहे। इसके बाद 1952 में वे भारत के पहले उपराष्ट्रपति चुने गए और दो कार्यकाल, यानी 1962 तक, इस पद पर रहे; 1962 में वे राष्ट्रपति बने और 1967 तक रहे।
यह नियुक्ति स्वयं में उल्लेखनीय थी। राधाकृष्णन दर्शन के अध्यापक थे, कूटनीतिक सेवा के व्यक्ति नहीं, और शीत युद्ध के आरम्भिक वर्षों में मास्को जैसे संवेदनशील पद पर एक विद्वान को भेजना असामान्य निर्णय था। भारत उस समय गुटनिरपेक्षता की नीति गढ़ रहा था और दोनों महाशक्तियों से सम्बन्ध साधने का प्रयास कर रहा था; इसी पृष्ठभूमि में यह नियुक्ति देखी जाती है।
शेष तीन विकल्प उनके जीवन के दूसरे प्रसंगों से खींचे गए हैं और यही उन्हें विश्वसनीय बनाता है। शिक्षा से उनका गहरा नाता था — वे विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष रहे और यूनेस्को से भी जुड़े — इसलिए किसी शैक्षिक निकाय का नाम देखते ही मन उधर खिंचता है। पर प्रश्न बहुत सटीक है : उपराष्ट्रपति बनने से ठीक पहले वे कौन-सा पद धारण किए हुए थे। उस कसौटी पर केवल मास्को की राजदूती खरी उतरती है, और उत्तर (d) है।
उनके जन्मदिन 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है — यह वह सूत्र है जिससे उनके शैक्षिक व्यक्तित्व और राजनीतिक पदों, दोनों की स्मृति एक साथ बँधी रहती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)U.S.A. में राजदूत — संयुक्त राज्य अमेरिका में राजदूत का पद राधाकृष्णन ने कभी नहीं सँभाला। यह विकल्प इसलिए रखा गया है कि सही उत्तर भी एक राजदूती ही है, और जिसे केवल इतना याद है कि वे कहीं राजदूत थे, वह दोनों में से कोई भी चुन सकता है। भेद याद रखने का सूत्र यह है कि उनकी राजदूती शीत युद्ध के आरम्भिक वर्षों में मास्को में थी, और वहीं से लौटकर वे 1952 में उपराष्ट्रपति बने।
- (b)U.G.C. का अध्यक्ष — विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की अध्यक्षता उनके पास नहीं थी, और कालक्रम भी इसकी अनुमति नहीं देता : यह आयोग 1953 में स्थापित हुआ और 1956 में उसे सांविधिक दर्जा मिला, जबकि राधाकृष्णन 1952 में ही उपराष्ट्रपति बन चुके थे। भ्रम का कारण असली है — वे विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष अवश्य रहे, जिसने स्वतंत्रता के तुरन्त बाद उच्च शिक्षा की समीक्षा की और जिसकी सिफ़ारिशों की परंपरा में आगे चलकर अनुदान आयोग बना। एक ही क्षेत्र के दो अलग निकाय हैं, और प्रश्न ठीक इसी अंतर पर टिका है।
- (c)योजना आयोग का अध्यक्ष — योजना आयोग की अध्यक्षता का पद परंपरा से प्रधानमंत्री के पास रहा, किसी अन्य के पास नहीं; इसलिए यह विकल्प संस्थागत रूप से ही असंभव है। यह जानकारी अपने आप में परीक्षा-उपयोगी है : योजना आयोग कार्यपालिका के प्रस्ताव से बना निकाय था, उसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता था और उसके दैनंदिन कार्य के लिए एक उपाध्यक्ष होता था। किसी प्रश्न में यह पद किसी और के नाम दिखे तो वही सबसे पहले काटा जाना चाहिए।
अवधारणा
सर्वपल्ली राधाकृष्णन बीसवीं सदी के प्रमुख भारतीय दार्शनिकों में थे और उन्होंने भारतीय दर्शन को पश्चिमी अकादमिक जगत् के सामने रखने का काम किया। वे मैसूर, कलकत्ता और ऑक्सफ़ोर्ड में अध्यापन कर चुके थे और आंध्र तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे।
सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका तीन चरणों में देखी जा सकती है। पहला चरण शिक्षा का है : स्वतंत्रता के तुरन्त बाद बने विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की अध्यक्षता, और यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व। दूसरा चरण कूटनीति का है : सोवियत संघ में राजदूत के रूप में 1949 से 1952 तक। तीसरा चरण संवैधानिक पदों का है : 1952 से 1962 तक भारत के पहले उपराष्ट्रपति और 1962 से 1967 तक राष्ट्रपति।
उपराष्ट्रपति का पद स्वयं में भी याद रखने योग्य है। अनुच्छेद 63 इस पद का सृजन करता है और अनुच्छेद 64 उसे राज्य सभा का पदेन सभापति बनाता है, यद्यपि वह उस सदन का सदस्य नहीं होता। निर्वाचक मंडल में संसद् के दोनों सदनों के निर्वाचित और नामनिर्देशित, दोनों प्रकार के सदस्य होते हैं।
यह प्रश्न आधुनिक भारत के उस दौर से आता है जब नई राज्य-व्यवस्था के संवैधानिक पद पहली बार भरे जा रहे थे और विदेश नीति की दिशा तय हो रही थी। मास्को की राजदूती और उसके तुरन्त बाद उपराष्ट्रपति का पद — यह क्रम उस समय की उस प्रवृत्ति का उदाहरण है जिसमें विद्वानों और सार्वजनिक व्यक्तित्वों को कूटनीतिक तथा संवैधानिक भूमिकाओं में लाया गया।
परीक्षा की दृष्टि से राधाकृष्णन से जुड़े तथ्यों का एक छोटा समूह बार-बार लौटता है : शिक्षक दिवस और उनका जन्मदिन, विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की अध्यक्षता, पहले उपराष्ट्रपति होना, और उसके बाद राष्ट्रपति बनना। इनके साथ मास्को की राजदूती जोड़ लेने पर उनका पूरा सार्वजनिक जीवन एक रेखा में आ जाता है।
इस प्रश्नपत्र में आधुनिक भारत और राजव्यवस्था के प्रश्न अलग-अलग खंडों में नहीं, पूरे पत्र में बिखरे हैं, और यह प्रश्न दोनों की सीमा पर खड़ा है — व्यक्ति इतिहास का है, पद संविधान का।
मुख्य तथ्य
- डॉ. एस. राधाकृष्णन 1949 से 1952 तक सोवियत संघ में भारत के राजदूत रहे और वहीं से लौटकर उपराष्ट्रपति बने।
- वे 1952 में भारत के पहले उपराष्ट्रपति चुने गए और दो कार्यकाल, यानी 1962 तक, इस पद पर रहे।
- 1962 से 1967 तक वे भारत के राष्ट्रपति रहे।
- स्वतंत्रता के तुरन्त बाद बने विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष वे थे; विश्वविद्यालय अनुदान आयोग इससे भिन्न निकाय है, जो 1953 में बना और 1956 में सांविधिक हुआ।
- योजना आयोग का अध्यक्ष परंपरा से प्रधानमंत्री होता था और उसके दैनंदिन कार्य के लिए एक उपाध्यक्ष होता था।
- उनके जन्मदिन 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को एक मान लेना — दोनों अलग निकाय हैं और उनकी तिथियाँ भी अलग हैं।
- ‘राजदूत’ शब्द देखकर देश की पहचान किए बिना विकल्प चुन लेना, जबकि यहाँ दो अलग-अलग देशों की राजदूती विकल्पों में है।
- योजना आयोग की अध्यक्षता किसी गैर-प्रधानमंत्री को दे देना, जबकि वह पद परंपरा से प्रधानमंत्री के पास रहा।
व्यक्ति-आधारित प्रश्नों में सबसे अधिक अंक इस बात से मिलते हैं कि व्यक्ति के पदों का कालक्रम याद हो, केवल पदों की सूची नहीं। यह प्रश्न ठीक यही जाँचता है — पद कौन-सा था, यह नहीं, बल्कि उपराष्ट्रपति बनने से ठीक पहले कौन-सा था। तैयारी का व्यावहारिक तरीक़ा यह है कि ऐसे व्यक्तित्वों के लिए मन में एक छोटी समय-रेखा बना ली जाए, जिसमें दो-तीन प्रमुख पद और उनके वर्ष हों। इस प्रश्नपत्र में आधुनिक भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के लगभग आठ प्रश्न हैं, और उनमें कई इसी तरह व्यक्ति और पद के मेल पर आधारित हैं।
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- (a) With the consent of all the States
- (b) With the consent of majority of the States
- (c) With the consent of the States concerned
- (d) Without the consent of any State
उत्तर(d) Without the consent of any State
इसी प्रश्नपत्र का अनुच्छेद 253 वाला प्रश्न — संवैधानिक पदों और शक्तियों की उसी कड़ी से, जिसमें उपराष्ट्रपति का पद भी आता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
भारत के पहले उपराष्ट्रपति कौन थे ?
- (a)डॉ. ज़ाकिर हुसैन
- (b)डॉ. एस. राधाकृष्णन
- (c)वी. वी. गिरि
- (d)गोपाल स्वरूप पाठक
उत्तर(b) डॉ. एस. राधाकृष्णन
- practice — not a real PYQ
संविधान के अनुसार उपराष्ट्रपति किस सदन का पदेन सभापति होता है ?
- (a)लोक सभा
- (b)राज्य सभा
- (c)संसद् की संयुक्त बैठक
- (d)अंतर्राज्यीय परिषद्
उत्तर(b) राज्य सभा