अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं ? 1. भारत IMF का संस्थापक सदस्य है । 2. IMF में भारत का कोटा 4 प्रतिशत से अधिक है । 3. IMF में वित्त मंत्री पदेन प्रतिनिधित्व करता है । 4. IMF, अनुच्छेद IV के अधीन, भारत की आर्थिक स्थिति का नियमित पुनरीक्षण करता है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1, 2 और 3
- (b)केवल 1, 3 और 4
- (c)केवल 2 और 4
- (d)1, 2, 3 और 4
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) केवल 1, 3 और 4 — चार कथनों में से तीन तथ्यतः ठीक हैं और एक आँकड़े पर फिसलता है।
कथन 1 — भारत IMF का संस्थापक सदस्य है। सही। ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भारत भी सम्मिलित था और कोष के मूल सदस्यों में गिना जाता है; भारत की सदस्यता 1945 से है।
कथन 2 — भारत का कोटा 4 प्रतिशत से अधिक है। ग़लत, और यही पूरे प्रश्न का निर्णायक बिंदु है। भारत का कोटा तीन प्रतिशत से भी कम रहा है। 2010 के कोटा सुधारों के लागू होने के बाद वह बढ़कर लगभग पौने तीन प्रतिशत हुआ, और मत-शक्ति उससे भी कुछ कम है। इससे भारत कोटा के हिसाब से कोष के बड़े सदस्यों में तो आता है, पर चार प्रतिशत की रेखा से नीचे ही रहता है।
कथन 3 — वित्त मंत्री IMF में पदेन प्रतिनिधित्व करते हैं। सही। कोष के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में हर सदस्य देश का एक गवर्नर होता है; भारत की ओर से वह पद वित्त मंत्री का है और रिज़र्व बैंक के गवर्नर वैकल्पिक गवर्नर होते हैं।
कथन 4 — IMF अनुच्छेद IV के अधीन भारत की आर्थिक स्थिति का नियमित पुनरीक्षण करता है। सही। कोष के अनुच्छेद IV के अंतर्गत हर सदस्य देश के साथ नियमित परामर्श होता है, जिसमें कोष का दल देश की समष्टि-आर्थिक नीतियों की समीक्षा करता है और उसकी रिपोर्ट प्रकाशित होती है। इसे ही द्विपक्षीय निगरानी कहा जाता है।
तीनों सही कथनों का समुच्चय विकल्प (b) है। सूची पढ़ते ही सबसे पहले उस कथन को खोजिए जिसमें कोई संख्या है — इस प्रश्न में वही एकमात्र कथन ग़लत निकलता है और उसे पकड़ते ही शेष तीन विकल्प अपने आप छँट जाते हैं।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1, 2 और 3 — यह समुच्चय कथन 2 को स्वीकार कर लेता है और कथन 4 को छोड़ देता है — दोनों ही निर्णय उलटे हैं। भारत का कोटा चार प्रतिशत से कम है, इसलिए कथन 2 किसी भी सही समुच्चय में नहीं आ सकता। दूसरी ओर अनुच्छेद IV के अंतर्गत परामर्श कोष की नियमित और सुविदित प्रक्रिया है, जिसकी रिपोर्ट हर वर्ष समाचारों में आती है। जिस पाठक को कोटा का ठीक आँकड़ा याद न हो, वह प्रायः यहीं अटकता है; ऐसे में कथन 4 की पक्की जानकारी ही रास्ता दिखाती है।
- (c)केवल 2 और 4 — यह विकल्प दो में से एक सही कथन तो रखता है, पर साथ में वही आँकड़े वाला कथन ले आता है जो ग़लत है, और संस्थापक सदस्यता तथा पदेन प्रतिनिधित्व — दोनों सही कथनों को बाहर कर देता है। भारत का कोष में सदस्य होना 1945 से है और वित्त मंत्री का गवर्नर होना स्थापित व्यवस्था है; इन दोनों को छोड़ देने का कोई आधार नहीं बनता। यहाँ भी निर्णय उसी एक संख्या पर लौटता है।
- (d)1, 2, 3 और 4 — चारों कथनों को सही मानने का अर्थ है कोटा वाले कथन को भी मान लेना। भारत का कोटा चार प्रतिशत से नीचे है, इसलिए ‘सब सही’ वाला विकल्प यहाँ नहीं बनता। कथन-सूची वाले प्रश्नों में ‘सब सही’ का विकल्प तभी चुनना चाहिए जब हर कथन अलग-अलग जाँचा जा चुका हो; एक भी संख्या-आधारित कथन संदिग्ध हो तो यह विकल्प सबसे पहले हटता है।
अवधारणा
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन से निकली दो संस्थाओं में से एक है; दूसरी विश्व बैंक है। कोष का काम अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक सहयोग, विनिमय-दरों की स्थिरता और भुगतान-संतुलन की कठिनाई में पड़े देशों को अस्थायी वित्तीय सहायता देना है।
कोटा इसकी पूरी व्यवस्था की धुरी है। हर सदस्य देश का कोटा उसकी सापेक्ष आर्थिक स्थिति के आधार पर तय होता है और वही तीन बातें निर्धारित करता है : देश कोष को कितनी अभिदान-राशि देगा, वह कितना उधार ले सकता है, और उसकी मत-शक्ति कितनी होगी। कोटा विशेष आहरण अधिकार में व्यक्त किया जाता है, जो कोष की अपनी लेखा-इकाई है और कई प्रमुख मुद्राओं की टोकरी पर आधारित है।
शासन के दो स्तर हैं। बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स सर्वोच्च निकाय है, जिसमें हर सदस्य देश का एक गवर्नर और एक वैकल्पिक गवर्नर होता है; भारत की ओर से ये पद क्रमशः वित्त मंत्री और रिज़र्व बैंक के गवर्नर के पास हैं। दैनंदिन काम कार्यपालक बोर्ड देखता है। निगरानी के मोर्चे पर कोष अनुच्छेद IV के अंतर्गत हर सदस्य देश से नियमित परामर्श करता है और उसकी नीतियों पर रिपोर्ट देता है।
कोष की सदस्यता भारत के लिए केवल औपचारिकता नहीं रही। 1991 के भुगतान-संतुलन संकट में भारत ने कोष से सहायता ली थी और उसके साथ जुड़ी शर्तें उस दौर के आर्थिक सुधारों की पृष्ठभूमि बनीं। उसके बाद से भारत उधार लेने वाले से हटकर कोष के संसाधनों में योगदान देने वाले देशों की श्रेणी में आ गया है।
कोटा-सुधार की बहस भी परीक्षा-उपयोगी है। 2010 में तय हुए सुधार, जो कुछ वर्षों बाद प्रभावी हुए, उभरती अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा बढ़ाने के लिए थे; उनसे भारत का कोटा और मत-शक्ति दोनों कुछ बढ़े और भारत कोटा के हिसाब से कोष के बड़े सदस्यों में गिना जाने लगा। फिर भी उसका हिस्सा चार प्रतिशत की रेखा से नीचे है — यही तथ्य इस प्रश्न को हल करता है।
अनुच्छेद IV की रिपोर्ट हर वर्ष भारत की वृद्धि, राजकोषीय स्थिति और सुधारों पर टिप्पणी करती है और समाचारों में रहती है, इसलिए वह कथन पहचानना कठिन नहीं होना चाहिए।
मुख्य तथ्य
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ब्रेटन वुड्स सम्मेलन (1944) की उपज है; भारत उसका संस्थापक सदस्य है और सदस्यता 1945 से है।
- भारत का कोटा तीन प्रतिशत से कम रहा है — 2010 के कोटा सुधारों के बाद लगभग पौने तीन प्रतिशत — और मत-शक्ति उससे कुछ कम।
- कोटा ही तय करता है कि देश कितनी अभिदान-राशि देगा, कितना आहरण कर सकता है और उसकी मत-शक्ति कितनी होगी।
- बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में भारत के गवर्नर वित्त मंत्री और वैकल्पिक गवर्नर रिज़र्व बैंक के गवर्नर होते हैं।
- अनुच्छेद IV परामर्श कोष की द्विपक्षीय निगरानी की प्रक्रिया है, जिसमें सदस्य देश की समष्टि-आर्थिक नीतियों की नियमित समीक्षा होती है और रिपोर्ट प्रकाशित होती है।
- कोटा विशेष आहरण अधिकार में व्यक्त होता है, जो कोष की अपनी लेखा-इकाई है और प्रमुख मुद्राओं की टोकरी पर आधारित है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- भारत के कोटा को उसकी जनसंख्या या अर्थव्यवस्था के आकार के अनुपात में मान लेना — वह चार प्रतिशत की रेखा से नीचे रहा है।
- बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में भारत का प्रतिनिधित्व रिज़र्व बैंक के गवर्नर को मान लेना, जो वस्तुतः वैकल्पिक गवर्नर होते हैं।
- अनुच्छेद IV की निगरानी को किसी ऋण की शर्त समझ लेना, जबकि वह हर सदस्य देश पर लागू नियमित परामर्श है।
अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं पर कथन-सूची वाले प्रश्नों में एक व्यावहारिक क्रम काम आता है : पहले उस कथन को देखिए जिसमें कोई संख्या या प्रतिशत है, क्योंकि प्रश्न-रचयिता प्रायः वहीं आँकड़ा बदलकर जाल बनाते हैं; फिर संस्थागत कथनों को देखिए, जो सामान्यतः स्थिर तथ्य होते हैं। इस प्रश्न में यही क्रम सीधे उत्तर तक ले जाता है। EPFO और अन्य परीक्षाओं में कोष से जुड़े प्रश्न कोटा, विशेष आहरण अधिकार, निगरानी और सदस्यता — इन्हीं चार खिड़कियों से आते हैं, इसलिए तैयारी इन्हीं शीर्षकों में बाँटकर करनी चाहिए।
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- (a) 1 and 3 only
- (b) 1, 2 and 3
- (c) 2 and 3 only
- (d) 1 and 2 only
उत्तर(b) 1, 2 and 3
इसी प्रश्नपत्र का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की प्रवृत्तियों वाला कथन-प्रश्न — अंतर्राष्ट्रीय पूँजी-प्रवाह की उसी कड़ी से।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करता है ?
- (a)रिज़र्व बैंक का गवर्नर
- (b)वित्त मंत्री
- (c)वित्त सचिव
- (d)मुख्य आर्थिक सलाहकार
उत्तर(b) वित्त मंत्री
- practice — not a real PYQ
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष में किसी सदस्य देश की मत-शक्ति मुख्यतः किससे तय होती है ?
- (a)उसकी जनसंख्या से
- (b)उसके निर्यात के आकार से
- (c)उसके कोटा से
- (d)उसकी विदेशी मुद्रा भंडार की मात्रा से
उत्तर(c) उसके कोटा से