निम्नलिखित में से कौन-सी, भारत में वित्त आयोग की भूमिकाएँ हैं ? 1. करों द्वारा उगाही गई धनराशि का बंटन 2. केन्द्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं का मूल्यांकन 3. उन सिद्धांतों को विकसित करना जिनके आधार पर राज्यों के बीच निधियों का आबंटन होता है 4. पंचवर्षीय योजनाओं को विकसित करना नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1 और 4
- (b)केवल 1 और 3
- (c)केवल 2 और 4
- (d)केवल 2 और 3
उत्तर
क्यों
सही उत्तर — B, (b) केवल 1 और 3 — चारों कथनों को एक-एक करके देखिए; यहाँ असली परख यह है कि कौन-सा काम वित्त आयोग का है और कौन-सा योजना बनाने वाली संस्था का।
कथन 1 — करों द्वारा उगाही गई धनराशि का बंटन। सही। संविधान का अनुच्छेद 280 वित्त आयोग को यही पहला काम सौंपता है : करों की शुद्ध आगमों का संघ और राज्यों के बीच वितरण किस अनुपात में हो, इसकी सिफ़ारिश करना।
कथन 2 — केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं का मूल्यांकन। ग़लत। यह काम योजना बनाने और उनकी प्रगति देखने वाली संस्था का रहा है, वित्त आयोग का नहीं। वित्त आयोग किसी योजना की उपयोगिता नहीं आँकता; वह संसाधनों के बँटवारे के सिद्धांत सुझाता है।
कथन 3 — राज्यों के बीच निधियों के आबंटन के सिद्धांत विकसित करना। सही। यह उसी अनुच्छेद का दूसरा पक्ष है। पहले तय होता है कि करों में से राज्यों को कुल कितना हिस्सा मिले, और फिर यह कि वह हिस्सा राज्यों के बीच किन कसौटियों पर बँटे — जनसंख्या, क्षेत्रफल, आय-दूरी, वन एवं पारिस्थितिकी और जनसांख्यिकीय निष्पादन जैसे मानदंड इसी काम के लिए बनाए जाते हैं। साथ ही आयोग राज्यों को दिए जाने वाले सहायता-अनुदानों के सिद्धांत भी सुझाता है।
कथन 4 — पंचवर्षीय योजनाएँ विकसित करना। ग़लत। पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना योजना आयोग का काम था, वित्त आयोग का कभी नहीं।
इसलिए कथन 1 और 3 टिकते हैं, यानी विकल्प (b)।
एक बात और ध्यान देने योग्य है : कथन 1 और 3 वस्तुतः एक ही प्रक्रिया के दो चरण हैं — ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण और क्षैतिज बँटवारा। जो विकल्प इनमें से केवल एक को रखता है, वह आयोग के काम का आधा हिस्सा काट देता है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं
- (a)केवल 1 और 4 — यह विकल्प कथन 1 को तो ठीक पहचानता है, पर उसके साथ पंचवर्षीय योजनाएँ बनाने वाला कथन 4 जोड़ देता है। योजना-निर्माण वित्त आयोग का काम कभी नहीं रहा; वह योजना आयोग का काम था, और 2015 में उसकी जगह जो संस्था बनी वह भी नीति-सलाह देती है, संसाधनों का संवैधानिक बँटवारा नहीं करती। दोनों संस्थाओं के अलग-अलग होने का पूरा कारण यही है : एक ने संसाधन बाँटने के सिद्धांत तय करने थे, दूसरी ने खर्च की प्राथमिकताएँ।
- (c)केवल 2 और 4 — यहाँ दोनों कथन ग़लत हैं और दोनों एक ही स्रोत से आते हैं — योजना बनाने वाली संस्था के कामों की सूची से। केंद्र द्वारा प्रायोजित योजनाओं का मूल्यांकन और पंचवर्षीय योजनाओं का निर्माण, दोनों उसी दायरे में आते हैं। वित्त आयोग की सिफ़ारिशें इनसे अलग प्रकृति की हैं : वे संवैधानिक हैं, प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले गठित आयोग द्वारा दी जाती हैं, और उनका विषय राजस्व का बँटवारा है, कार्यक्रमों की समीक्षा नहीं।
- (d)केवल 2 और 3 — यह विकल्प एक सही कथन (3) को एक ग़लत कथन (2) के साथ बाँध देता है, और यही इसे लुभावना बनाता है। राज्यों के बीच आबंटन के सिद्धांत बनाना वित्त आयोग का मूल कार्य है, पर केंद्र-प्रायोजित योजनाओं का मूल्यांकन उसका काम नहीं। कथन-सूची वाले प्रश्नों में यही सबसे आम जाल है : एक पक्का सही कथन साथ रखकर पूरे युग्म को विश्वसनीय बना देना। इसीलिए हर कथन का निर्णय अलग-अलग करना पड़ता है।
अवधारणा
वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसका उपबंध अनुच्छेद 280 में है। राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले इसका गठन करते हैं; इसमें एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं।
इसके कार्य चार शीर्षकों में बँटे हैं। पहला, करों की शुद्ध आगमों का संघ और राज्यों के बीच वितरण तथा राज्यों के हिस्से का उनके बीच आबंटन। दूसरा, भारत की संचित निधि से राज्यों को दिए जाने वाले सहायता-अनुदानों को शासित करने वाले सिद्धांत। तीसरा, राज्य की संचित निधि को बढ़ाने के उपाय सुझाना, ताकि राज्य वित्त आयोग की सिफ़ारिशों के आधार पर पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन पूरे किए जा सकें — यह कार्य तिहत्तरवें और चौहत्तरवें संविधान संशोधनों के बाद जुड़ा। चौथा, कोई भी अन्य विषय जो राष्ट्रपति सुदृढ़ वित्त के हित में उसे निर्दिष्ट करें।
दो शब्द अलग से समझने योग्य हैं। ऊर्ध्वाधर हस्तांतरण का अर्थ है केंद्र के विभाज्य कर-पूल में से राज्यों को कुल कितना प्रतिशत मिले; क्षैतिज बँटवारा का अर्थ है वह राशि राज्यों के बीच किस सूत्र से बँटे। आयोग की सिफ़ारिशें सलाहकारी होती हैं, पर परंपरा से सरकार उन्हें प्रायः स्वीकार करती रही है, और सिफ़ारिशें कार्रवाई रिपोर्ट सहित संसद् के समक्ष रखी जाती हैं।
वित्त आयोग और योजना आयोग का भेद स्वतंत्र भारत की राजकोषीय व्यवस्था की सबसे परीक्षा-उपयोगी जोड़ियों में है। वित्त आयोग संविधान से जन्मा और उसका विषय राजस्व का संवैधानिक बँटवारा रहा; योजना आयोग कार्यपालिका के प्रस्ताव से बना था और उसका विषय योजनागत व्यय तथा पंचवर्षीय योजनाएँ थीं। 2015 में योजना आयोग के स्थान पर जो संस्था बनी, वह भी सलाहकारी है और संसाधनों का बँटवारा नहीं करती — इसलिए आज हस्तांतरण का पूरा भार वित्त आयोग की सिफ़ारिशों पर है।
क्षैतिज बँटवारे का सूत्र हर आयोग अपने ढंग से बनाता है, और उसके मानदंड सार्वजनिक बहस का विषय रहते हैं, क्योंकि जनसंख्या को अधिक भार देने पर एक वर्ग के राज्यों को लाभ होता है और आय-दूरी को अधिक भार देने पर दूसरे वर्ग को।
इस प्रश्नपत्र में राजव्यवस्था और लोक वित्त के प्रश्न आपस में गुँथे हुए हैं, और वित्त आयोग जैसे विषय दोनों ओर से पूछे जा सकते हैं — कभी संवैधानिक निकाय के रूप में, कभी संघीय वित्त के औज़ार के रूप में।
मुख्य तथ्य
- वित्त आयोग का उपबंध अनुच्छेद 280 में है; राष्ट्रपति इसका गठन प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले करते हैं और इसमें एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं।
- इसका पहला कार्य करों की शुद्ध आगमों का संघ और राज्यों के बीच वितरण तथा राज्यों के हिस्से का उनके बीच आबंटन है।
- यह भारत की संचित निधि से राज्यों को दिए जाने वाले सहायता-अनुदानों को शासित करने वाले सिद्धांत भी सुझाता है।
- तिहत्तरवें और चौहत्तरवें संशोधनों के बाद इसे राज्य की संचित निधि बढ़ाने के उपाय सुझाने का कार्य भी मिला, ताकि पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन पूरे किए जा सकें।
- पंचवर्षीय योजनाएँ बनाना और केंद्र-प्रायोजित योजनाओं का मूल्यांकन करना योजना आयोग के कार्य थे, वित्त आयोग के नहीं।
- आयोग की सिफ़ारिशें सलाहकारी होती हैं, यद्यपि परंपरा से सरकार उन्हें प्रायः स्वीकार करती रही है।
आगे की तैयारी
सामान्य भ्रम
- वित्त आयोग और योजना आयोग के कार्य आपस में मिला देना — योजना-निर्माण और कार्यक्रमों का मूल्यांकन वित्त आयोग का काम कभी नहीं रहा।
- सूची में एक पक्का सही कथन देखकर पूरे युग्म को स्वीकार कर लेना; हर कथन का निर्णय अलग से करना पड़ता है।
- यह मान लेना कि आयोग की सिफ़ारिशें सरकार पर बाध्यकारी हैं — वे सलाहकारी होती हैं और कार्रवाई रिपोर्ट सहित संसद् के समक्ष रखी जाती हैं।
वित्त आयोग पर प्रश्न प्रायः तीन में से किसी एक रूप में आते हैं : कार्यों की पहचान (जैसे यहाँ), गठन और संरचना से जुड़ा तथ्य, या किसी विशेष आयोग की सिफ़ारिशों से जुड़ा आँकड़ा। कथन-सूची वाले रूप में सबसे कारगर तरीक़ा यह है कि हर कथन के आगे मन में एक ही प्रश्न रखा जाए — यह काम संविधान ने किसे सौंपा है ? योजना, कार्यक्रम, मूल्यांकन जैसे शब्द दिखते ही सतर्क हो जाइए, क्योंकि वे प्रायः दूसरी संस्था के दायरे से उठाए जाते हैं। इस प्रश्नपत्र में राजव्यवस्था और अर्थव्यवस्था के प्रश्न बिखरे हुए हैं, इसलिए क्रमांक से विषय का अनुमान न लगाकर हर प्रश्न को उसकी अपनी शब्दावली से पहचानना ही ठीक रहता है।
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- (a) 1 only
- (b) 2 and 3 only
- (c) 1 and 3 only
- (d) 1, 2 and 3
उत्तर(d) 1, 2 and 3
पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों पर आधारित कथन-प्रश्न — वही संस्था, पर सिफ़ारिशों के स्तर पर।
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- (a) 1 only
- (b) 2 only
- (c) Both 1 and 2
- (d) Neither 1 nor 2
उत्तर(c) Both 1 and 2
राज्य वित्त आयोग के कार्यों वाला प्रश्न, जो केंद्र-राज्य के बाद राज्य-स्थानीय निकाय की कड़ी दिखाता है।
अभ्यास
- practice — not a real PYQ
वित्त आयोग का गठन संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया जाता है ?
- (a)अनुच्छेद 263
- (b)अनुच्छेद 275
- (c)अनुच्छेद 280
- (d)अनुच्छेद 293
उत्तर(c) अनुच्छेद 280
- practice — not a real PYQ
पंचायतों और नगरपालिकाओं के संसाधन बढ़ाने हेतु राज्य की संचित निधि को संवर्धित करने के उपाय सुझाने का कार्य वित्त आयोग को किन संशोधनों के बाद मिला ?
- (a)बयालीसवें और चवालीसवें
- (b)तिहत्तरवें और चौहत्तरवें
- (c)इक्यानवेवें और सौवें
- (d)इकसठवें और बासठवें
उत्तर(b) तिहत्तरवें और चौहत्तरवें